. करीब एक घंटे बाद ही मुझे कल्पना का कॉल आया- हैलो आर्यन.
मैं- हां बोलिये.
कल्पना- आप निकलो अब … और मेरी बिल्डिंग के गेट पर आकर मुझे कॉल करो.
मैं- ओके.
कल्पना- कितना टाइम लगेगा आपको पहुंचने में? मैं- यही कोई 30 मिनट.
कल्पना- ओके.
कल्पना ने जो एड्रेस दिया था, वो मेरे घर से कुछ 4 किलोमीटर की दूरी पर ही था, तो मैं भी फटाफट निकल गया और गूगल की हेल्प लेकर 20-25 मिनट में ही पहुंच गया.
फिर मैंने कल्पना को कॉल किया और बताया कि मैं गेट पर हूँ.
कल्पना- बस 5 मिनट वहीं रुको, अभी थोड़ी देर में तुम्हारे पास एक ब्लैक कलर की होंडा सेडान आकर रुकेगी, उसमें बैठ जाना.
मैं- ठीक है.
मैं गेट के पास इंतजार करने लगा.
सोसाइटी देखकर ही लग रहा था कि यहां काफी रईस लोग रहते हैं और तो और सोसाइटी थी भी एकदम अँधेरी के पॉश एरिया में.
मुझे कल्पना ने जिस बिल्डिंग का नाम बताया था, वो 21 मंजिल की एकदम शानदार बिल्डिंग थी.
सच कह रहा हूँ दोस्तो, मन में खुशी भी हो रही थी कि आज चोदने को एकदम मॉडर्न मॉल मिलेगी … और डर भी लग रहा था कि कहीं मेरी सोच गलत न साबित हो जाए.
करीब 4-5 मिनट बाद मुझे एक ब्लैक कलर की सेडान गेट से बाहर आती दिखी.
जब वो मेरे पास से गुजरी, तो जैसे ही अन्दर से इशारा हुआ कि रुको वापस आती हूँ.
मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि वास्तव में हो क्या रहा है.
फिर भी मैं वहीं इंतजार करने लगा.
उसके करीब 10 मिनट बाद मुझे वही गाड़ी फिर से आती दिखी, लेकिन इस बार गाड़ी सोसाइटी के बाहर नहीं, अन्दर की तरफ जाने वाली थी.
गाड़ी मेरे पास आकर रुकी और किसी ने इशारे से मुझे अन्दर बैठने को बोला.
मैं भी चुपचाप पिछला दरवाजा खोल कर बैठ गया.
गाड़ी कोई महिला चला रही थी, जिसने अपना मुँह स्कार्फ़ से ढका था.
अब मुझे ये तो नहीं मालूम था कि ये कल्पना ही है या कोई और? इसलिए मेरी कुछ भी बोलने या पूछने की हिम्मत नहीं हुई और मैं बस चुपचाप बैठा रहा.
थोड़ी ही देर में हम पार्किंग में पहुंच गए, तब उस महिला ने मुझे लिफ्ट के पास जाकर इंतजार करने को बोला.
मैंने भी अपना बैग लिया और लिफ्ट के पास जाकर वेट करने लगा.
थोड़ी ही देर में वो महिला भी लिफ्ट के पास आकर लिफ्ट के नीचे आने का वेट करने लगी.
अभी भी मेरी उनसे कोई बातचीत नहीं हो रही थी और मेरे दिमाग में सवालों का बवंडर चल रहा था.
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि इस महिला से बात करूँ या नहीं? अगर उस वक़्त उस महिला के बारे में कुछ भी पता होता, तो शायद बात करने की हिम्मत दिखा पाता.
पर यहां तो मुझे खुद को कुछ मालूम नहीं था, तो क्या बात करता.
इतने में लिफ्ट भी नीचे आ गई.
महिला लिफ्ट का दरवाजा खोलते हुए बोली- चलो.
मैं भी ह्म्म्म करके लिफ्ट में आ गया.
लिफ्ट में पहुंचने के बाद महिला ने 18 नंबर का बटन दबाया, इसका मतलब हम 18 वीं मंजिल पर जा रहे थे.
जैसे ही लिफ्ट ऊपर की तरफ चलने लगी, तब पहली बार उस महिला ने मेरी तरफ देखकर मुझसे ‘हैलो…’ बोला.
मैंने भी सामने से ‘हैलो..’ बोल कर जवाब दिया.
थोड़ी देर चुप रहने के बाद.
मैं- आप? महिला- मैं ही कल्पना हूँ.
सच कह रहा हूँ, तब जाकर मुझमें थोड़ी हिम्मत आई और मैंने राहत महसूस की.
वो लिफ्ट में मेरे से आगे खड़ी थी, तो मैं पीछे से ही अपनी आँखों से उनकी बॉडी का मेज़रमेंट लेने लगा.
अभी तक कल्पना ने स्कार्फ़ निकाला नहीं था और उन्हें देखने के लिए मेरी उत्सुकता वैसे ही बनी हुई थी.
अभी तक मैंने कल्पना का चेहरा देखा नहीं था, तो मैं इस समय उनकी उम्र बताने की अवस्था में नहीं था.
पर पीछे से उनका शरीर देखकर लग रहा था कि उनकी यही कोई 26-27 साल उम्र होगी.
परफेक्ट फिगर, कूल्हे थोड़े उठे हुए, लंबाई 5 फुट 6 इंच, एकदम स्लिम तो नहीं, पर भरी बदन की मल्लिका थी कल्पना.
ना मोटी ना पतली, एकदम परफेक्ट.
कुछ देर में ही हम अपनी मंजिल पर पहुंच गए.
लिफ्ट से निकलते ही उसने सबसे पहले अपना स्कार्फ़ हटाया और मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई … और दरवाजे के लॉक खोलने लगी.
उस वक़्त पहली बार मैंने कल्पना को देखा और बस देखते ही रह गया.
कसम खा कर कहता हूं दोस्तो, उस वक़्त मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था.
आप लोग मेरे द्वारा उसकी खूबसूरती के वर्णन का सिर्फ अंदाज़ा लगाने की कोशिश करो.
जैसा कि मैंने पहले ही उसकी उम्र का अंदाज़ा लगाया था, यही कोई 26 साल, रंग बर्फ के जैसे एकदम सफेद, छाती 32-33 इंच, कमर 30 इंच के आसपास, कूल्हे 33-34 इंच के, मांग में हल्की सी सिंदूर की लकीर, माथे पर डायमंड जड़ित स्टाइलिश बिंदी, होंठों पर गहरे लाल रंग की लिपस्टिक, नाक एकदम पतली सी, होंठ जैसे गुलाब की पंखुड़ी, गाल ऐसे कि जैसे मखमल, कान में भी स्टाइलिश डायमंड के रिंग, महरून कलर का शार्ट टॉप, जो कंधे से खुला रहता है और ब्लू कलर के जीन्स में एकदम काम की देवी कह लो या अप्सरा, सब कम ही होगा.
जब वो दरवाजे की लॉक खोल रही थीं, तब उनके कान की बाले बार बार उनके गालों को चूम रहे थे और मुझे चिड़ा रहे थे.
दोस्तो, और क्या कहूं? जानता हूं आप लोग की हालत सिर्फ कल्पना करके ही खराब हो गयी होगी, तो सोचो उस समय मेरी क्या हालत हुई होगी? सच में हर मर्द के ख्वाबों वाली कल्पना थी कल्पना जी.
उस समय मेरे दिमाग में सिर्फ एक सवाल आया और वो ये था कि काम की देवी को मेरे जैसे बंदे की क्यों जरूरत पड़ गयी? ये तो जहां खड़ी हो जाए, वहीं 10-15 मर्द या लड़के लाइन लगा कर सिर्फ इन्हें देखने के लिए खड़े हो जाएंगे.
इन्हें तो सिर्फ एक इशारा करने की जरूरत है, बस बाकी सब खुद ब खुद इनके मन का करने को तैयार खड़े रहेंगे.
ये कहानी जरा लम्बी है तो ताप मेरे साथ थोड़ा सब्र रखिए, मुझे उम्मीद है कि आपको मजा आएगा.
इस कहानी को लेकर आपका कोई सुझाव, विचार या शिकायत हो, तो कृपया मुझे मेल करके अवगत कराएं.
[email protected] कहानी जारी है.
स्रोत:इंटरनेट