. मैंने उसकी पेंटी, खोल कर साइड में फेंक दी और लंड उसकी चुत पर रगड़ा, पर मुझे महसूस हुआ कि उसकी चुत बिल्कुल बन्द है और छोटी सी बहुत प्यारी है.
ये महसूस करते ही मैं उठ गया और पास रखा खोपरे का तेल उठा कर मैंने अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया.
लंड को तेल से चिकना करने के बाद मैंने उसकी चुत पर भी तेल टपकाने को हुआ, फिर रुक गया.
कुछ सोच कर मेरे होंठों पर मुस्कराहट आ गई और आंखों में वासना के डोरे तैरने लगे.
मैं उसकी सीलबंद चुत को देखने लगा.
फिर मैंने उसकी टांगें चौड़ी कर दीं और न जाने क्या सोच कर पहले चुत पर लंड सैट करने लगा.
तभी मेरी उसी चाहत ने मुझे फिर से झंझोड़ दिया और मेरा मन चुत पर किस करने का हो गया.
इसी सोच के चलते मैंने नेहा की चुत पर तेल नहीं टपकाया था.
अब मैंने उसकी दोनों टांगें चौड़ी करके चुत को देखा.
उसकी चुत हल्की सी गुलाबी कलर की खुली सी दिखी, जिस पर एक भी बाल नहीं था.
मैंने अपना मुँह उसकी चुत पर लगा दिया और उसकी गीली चुत को जुबान से चाट लिया.
वो तड़फ कर बोली- आह … अमित क्या कर रहा है.
ये कह कर उसने अपनी दोनों टांगें मेरी गर्दन पर भींच लीं.
मैं भी रुका नहीं और चुत को हल्के हल्के से चाटते हुए उसके दोनों पैरों को दूर कर दिया.
फिर एक हाथ ऊपर ले जाकर उसका उरोज मसल दिया.
‘उईईईईई आह अमित …’ मैंने दोनों हाथों से उसकी टांगें चौड़ी की और चुत को अपने होंठों में भर भर के चूसने लगा.
नेहा अपना आपा खो बैठी और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी.
मैं बीच-बीच में हाथ ऊपर ले जाकर उसके उरोजों को भी मसल देता रहा.
उसकी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं- आह माँ, अमित हां … ऐसे ही … बस करो … उन्हह … उईईईई येई ईईईईई ऊऊउईई.
नेहा की चुत को मैंने चूसते हुए ही उसकी गांड के नीचे हाथ डाल कर एक उंगली उसकी गांड के अन्दर कर दी और एक उंगली चुत में घुसेड़ दी.
वो एकदम से बिलबिला कर हाथ पैर फेंकने लगी- आह … अमित अब कुछ कर … रहा नहीं जाता … आह तूने ये क्या कर दिया … उई माँ.
मैंने भी ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा.
उसे उल्टी करके एक बार उसकी गांड और कमर को चाट लिया.
फिर उसे झट से सीधी करके दो हल्के से चपत, उसके मम्मों पर लगा दिए.
उसके मम्मों को मसलते हुए ही अपने लंड को चुत के सही छेद पर सैट किया.
नेहा जब तक कुछ समझती, मैं झपटते हुए लंड पेल दिया.
फच्छ … एक पल की शांति के बाद नेहा की आंखें फ़टी की फटी रह गईं.
उसने चादर को कस कर पकड़ लिया और हल्का सा कमर उठा कर मुझसे छूटना चाहा.
इस पर मैंने उसे कसके अपनी गिरफ्त में ले लिया.
इसी बीच थोड़ा सा लंड और अन्दर को खिसक गया.
मेरे मोटे लंड की रगड़ से उसके आंसू निकल आए- आआआह … अमित छोड़ दे उईईईईई माँ मर गई … आईई बहुत दर्द हो रहा रे! मैंने उसे अच्छे से पकड़ लिया.
उसे पकड़ कर प्यार से उसके आंसू पौंछने लगा और बालों में हाथ फेरने लगा.
मैं उसे होंठों पर किस करने लगा और हल्के हाथ से उसके दूध भी मसलने लगा.
मेरे लंड को नेहा की सीलपैक चुत ने अच्छे से जकड़ रखा था.
नेहा की चुत बहुत ही टाइट थी.
मेरा लंड एक तरह से किसी नागिन के जबड़ों में फंसा चूहा सा महसूस हो रहा था.
मैं लंड को दबाता हुआ बोला- नेहा बेटू … बस कुछ ही धक्कों का दर्द है … इसी में तुझे हल्का सा दर्द होगा, फिर नहीं होगा.
नेहा- अमित, अब और कुछ मत कर ऐसे ही रह … मुझे किस करता रह.
धक्का मत दे.
मैंने ओके कहा, मगर उसे किस करते करते ही हल्का-हल्का लंड हिलाने लगा.
इस पर वो बोली- हम्म … चल अब जल्दी से मार दे झटके … मैं सहन कर लूँगी.
सिर्फ तेरे लिए मैं फटने को राजी हूँ.
ये सुनकर मैंने लंड को हल्का सा बाहर खींच कर फिर से अन्दर कर दिया और गिनना शुरू कर दिया.
मैं बोला- एक … वो ‘आह उईईईईई …’ करती रही.
ऐसे ही दूसरा धक्का भी खींच कर दे दिया.
दोस्तो, नेहा की चुत इतनी टाइट थी कि मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रहा था.
उत्तेजना के वशीभूत होकर उसकी कमर को पकड़ कर मैं जोरदार धक्के पर धक्के मारने लगा.
नेहा रोते हुए कलप रही थी- आह … उई … आई माँ मर गई उईईई अमित … मार ही डालेगा क्या? उसकी चुत से खून का रिसाव भी हो रहा था और वो बुरी तरह रोने लगी थी.
मैंने फिर भी दया नहीं की और लंड को ठोकता ही रहा.
कुछ देर के बाद लंड ने चुत में अपनी जगह बना ली और लगातार मम्मों, होंठों चूसने से वो भी थोड़ी नॉर्मल हो गई.
नेहा- आह अमित … अब अच्छा लग रहा है … हां ऐसे ही उईईई … आह एई उह आह माई मर गई.. मैं भी लपक कर पेल रहा था.
‘फच फच फच आह उईईईईई ऊऊउईईई आऊऊ..’ फिर कुछ ही झटकों में उसका पानी निकल गया.
उसने मुझे इतनी जोर से जकड़ा कि मेरा भी लावा फूट कर निकल गया.
मैंने उसे कस कर दबोच लिया और हम दो जिस्म एक जान हो गए.
रात 3 बजे तक पहला राउंड खत्म हुआ.
फिर 4 बजे तक नेहा की चुत को साफ करके मैंने उसकी गर्म पानी से सिकाई की.
फिर 4 बजे बाद एक और राउंड लेकर उसे जबरदस्त चोद दिया.
इस बार उसने भी साथ दिया.
अगले दिन उसके चेहरे की रौनक और चाल दोनों बदल चुकी थी.
मैंने अपना बीज डाल दिया था.
इसका परिणाम क्या होता है, ये मुझे नहीं पता था.
दोस्तो, ये थी मेरी सच्ची सुहागरात की सेक्स कहानी थी.
अब आप मेल करके बताएं कि आपको यह सेक्स स्टोरी कैसी लगी.
आपका अमित [email protected]
स्रोत:इंटरनेट