. मेरी मुलाक़ात सबसे करवा कर वो चले गए। जिस लड़की की शादी थी, चन्दा वो तो मेरे साथ ही चिपक गई। भाभी भाभी करती बस मुझे अपने साथ ही रखा उसने। चाय नाश्ता, खाना पीना, सब चलता रहा। ताई जी ने मुझे बिल्कुल अपनी बहू की तरह रखा, मुझे सारा दहेज का समान और बाकी सब रस्मों में शामिल किया। रात को करीब 12 बजे हम सोये। अब जनानखाने में ही सोना था, तो मैंने एक पतली सी टी शर्ट और एक कैप्री पहन ली। ब्रा पेंटी की क्या ज़रूरत थी। चंदा भी मेरे साथ ही लेटी। शादी के बाद सुहागरात को लेकर उसके मन में बहुत सी शंकाएँ थी; उसने मुझसे पूछा- भाभी, मुझे न शादी के बाद वो सुहागरात से बहुत डर लगता है, सुनते हैं बहुत दर्द होता है। मैंने पूछा- क्यों, तुमने पहले कभी कुछ नहीं किया? वो बोली- भाभी यहाँ गाँव में … यहाँ तो सब से डर डर के चलना पड़ता है, हम तो किसी लड़के से बात भी नहीं करती। मैंने कहा- तो तुझे क्या लगता है, सुहागरात को क्या होता है? वो पहले तो शर्मा गई, फिर हंसी, और मुस्कुरा कर बोली- भाभी, आपकी तो शादी हो चुकी है, आपको तो सब पता है, आप तो रोज़ करती भी होंगी भैया से। अब मुझे क्या पता कि क्या होता है सुहाग रात को! मैंने पूछा- फिर भी बता तो, तेरी सहेलियों की जिनकी शादी हो चुकी है, वो भी बताती होंगी कुछ? वो बोली- भाभी, उनकी बताई बातों की वजह से ही तो मैं डरी हुई हूँ। वो तो सब बताती हैं कि सुहागरात को पति आता है और अपना वो बड़ा सा, पूरा ज़ोर लगा कर यहाँ अंदर डाल देता हैं। बहुत दर्द होता है, मगर पति कुछ नहीं सुनता और उसी दर्द में अंदर बाहर करता रहता है। मेरी एक सहेली तो डर और दर्द के मारे बेहोश ही हो गई थी। क्या सच में इतना दर्द होता है? मुझे उस बेचारी भोली भाली कन्या के सेक्स ज्ञान पर बहुत तरस आया कि क्यों हमारे स्कूलों में बच्चियों को सेक्स का ज्ञान नहीं दिया जाता। क्यों नहीं उन्हें समझाया जाता कि यह एक. सामान्य प्रक्रिया है। क्यों आज भी बच्चियाँ कम ज्ञान की वजह से इन सब चीजों से डरती हैं। मैंने उसे समझाया- देख चंदा, डरने की कोई वजह नहीं है। कोई भी काम जब पहली बार होता है, तो उसमें मुश्किल आती है, थोड़ी सी। मगर उस मुश्किल से घबराना नहीं चाहिए। अब तुमने आज तक अपनी उस में (कहते हुये मैंने उसकी चूत पर तो नहीं, पर जांघ पर हाथ लगाया) कोई चीज़ नहीं डाली। उसका सुराख छोटा है। और जो तेरा पति होगा, उसका वो जो होता है, वो इस सुराख से थोड़ा सा मोटा होता है.
कह कर मैंने अपनी उंगली और अंगूठे से एक गोल आकार बनाया, फिर मैंने कहा- अब अपनी उंगली इस में डालो! जब चंदा ने शर्माते हुये अपनी उंगली उस में डाली, तो पहले तो थोड़ी से उंगली टाइट गई, मगर बाद में मैंने अपनी उंगली और अंगूठे को ढील छोड़ दिया और उसकी उंगली बड़े आराम से मेरी उंगली और अंगूठे के गोल आकार से अंदर बाहर होने लगी। मैंने कहा- देखा, पहले थोड़ा सा टाईट जाता है, मगर बाद में बड़े आराम से जाता है। मुझे भी पहली बार दर्द हुआ था, मगर अब शादी के 3 साल बाद मैं चाहती हूँ, मुझे फिर से वो दर्द हो। मुझे और मोटा और लंबा मिले। मेरी बात सुन कर उसने अपने हाथों से अपना मुँह छुपा लिया, और हम दोनों हंसने लगी। पता नहीं कितनी रात तक मैं उसे सेक्स के किस्से सुनाती रही, क्या क्या बताती रही। इतना ज़रूर है कि मेरी बातें सुन कर उसकी चूत ज़रूर गीली हो गई होगी। अगली सुबह मैं नहा धोकर तैयार हो गई, चंदा भी मेरे साथ ही चिपकी रही। शादी के जो भी रस्म रिवाज थे, वो चल रहे थे। मेरे पति एक बेटे के पूरे फर्ज़ निभा रहे थे और सब काम को अपनी निगरानी में करवा रहे थे; मुझसे तो मिलने का टाइम ही नहीं था उनके पास। दोपहर के खाने के समय ताऊ जी ने मुझे बुलाया और मेरे साथ बहुत सी बातें करी। थोड़ी देर बाद वो आदमी भी वहाँ आया जिससे कल मेरा नैन मटक्का हुआ था। ताऊ जी ने बताया- अरे लो बहू, इनसे मिलो; ये हैं शेर सिंह। मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त, यूं कहो मेरा छोटा भाई। मैंने उन्हें नमस्ते कही, उन्होंने भी हाथ जोड़ कर “खम्मा घनी” कहा और हमारे पास ही बैठ गए। शेर सिंह करीब 6 फुट कद, चौड़े कंधे, कसरती जिस्म … देखने से कोई पुराना फौजी टाइप लगता था। जोरदार चुदाई कहानी जारी रहेगी.
[email protected] कहानी का अगला भाग: शादी में चूत चुदवा कर आई मैं-2
स्रोत:इंटरनेट