. मैं समझ गया कि अब उसकी चुत में लंड चला गया है.
मैंने जब उसकी चुत को देखा तो पाया कि मेरा लंड का सुपारा पूरी तरह से बहन की चुत में चला गया है.
मैंने उसकी चूचियों को मसलने के लिए अपना हाथ बढ़ा दिया.
तभी मैं कुछ सोचने लगा.
मैंने तेल की शीशी से तेल निकाल कर उसके दोनों मम्मों के ऊपर थोड़ा थोड़ा करके तेल लगा दिया.
उसकी चूचियां मस्त चमक उठीं.
फिर तेल को उसकी चूचियों पर फैलाया, तो उसकी चूचियों के निप्पल तन गए.
अब मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया.
वो मस्त होने लगी और उसने अपने हाथ फैला दिए और अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया.
मैंने भी लंड पेलते हुए अपनी कमर को झटके के साथ हिलाना शुरू कर दिया.
मेरी बहन ने भी कमर उठा कर मेरे लंड को अपनी चिकनी चूत में खाना शुरू कर दिया.
मेरे हर एक झटके के साथ उसके मुँह से ‘आह आआह … औऊ ऊऊ आह्हह्ह..’ की दर्द भरी आवाज निकल रही थी.
मैंने पूछा- क्यों ज्यादा दर्द हो रहा है? आतिशा बोली- हां, थोड़ा धीरे धीरे चोदिए.
मैंने लंड पेलते हुए पूछा- अच्छा, ये बताओ कि मेरा लंड बड़ा है कि उन दोनों का बड़ा था.
वो थोड़ी शर्मा कर थोड़ा मुस्कुरा कर बोली- आपका! उसकी इस बात से मुझे जोश आ गया और मैंने एक जोर का झटका दे मारा.
इस झटके से वो बुरी तरह से सिहर उठी.
मैंने उसकी चूचियों को जोर से मसलना शुरू कर दिया.
आतिशा बोली- भाईजान, अभी आपका और कितना बाहर है.
मैंने बोला कि अभी तो आधा बाहर है.
वो बोली- भाईजान प्लीज़ जल्दी कीजिए ना … बहुत दर्द हो रहा है.
मैं बोला कि देखो … अब मैं एक जोर का झटका देने जा रहा हूँ.
अगर तुम थोड़े देर के लिए बर्दाश्त कर लोगी, तो बाद में बहुत मज़ा आएगा.
वो बोली- ठीक है.
आप जोर का झटका धक्का लगाइए … एक ही बार तो दर्द होगा, मैं सह लूंगी.
मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ लिया और एक जोर का झटका दे मारा.
वो बुरी तरह से चिल्ला उठी- आआह … अम्मी रे … मर गई … आआह आआअ ऊऊऊह … भाईजान … आप निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- थोड़ा सहन करो यार … अभी सब सैट हो जाएगा.
मैंने देखा कि अब मेरा पूरा लंड उसकी चुत में चला गया था.
मैंने जोर जोर से अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया.
वो जोर जोर से आआह … आआह … आऊ ऊऊऊ … करके सिसकारी लेने लगी.
मैं बोला- बस और दो मिनट रुक जाओ … फिर तुमको भी मजा आएगा.
वो कुछ देर के बाद शांत हो गई.
मैं उसकी चूचियों को मसलना जारी रखा.
इस तरह से मैंने उसको लगभग आधे घंटे तक चोदा.
इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी.
जैसे ही मेरा वीर्य उसकी चुत में गिरा, मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
मैंने पांच मिनट तक उसे खूब चूसा.
कुछ देर के बाद मैंने अपने लंड को निकाल दिया और वहां से दूसरे रूम में चला गया.
मेरे वहां से जाने के कुछ देर के बाद वो भी उठ कर अपने कपड़े पहन कर बाथरूम में चली गई.
वहां पेशाब करने के बाद जब बाहर आई तो मैंने पूछा- कैसा लगा अपने भाईजान से चुदवा कर? वो मुस्कुरा कर बोली- चुदाई मस्त थी.
मैं बोला- अब जब भी तुमको जरूरत हो, तुम मुझे बता देना.
वो खुश हो गई थी.
मैं भी अपने कमरे में सो गया.
इसके बाद हम दोनों भाई बहन ने पन्द्रह दिन तक खूब पेलमपाली की.
वो अब पढ़ने के लिए बाहर चली गई है.
अगले महीने उसको आना है, तो अब उसकी गांड का उदघाटन करना है.
उससे मेरी बातें फोन पर होती रहती हैं, मैंने उसको कमोड पर बैठते समय अपनी गांड में उंगली करने की सलाह दी है.
उसने मुझे बताया है कि अब उसकी एक साथ तीन उंगलियां गांड में जाने लगी हैं.
मुझे पूरा भरोसा है कि जब वो आएगी तो मेरा लंड अपनी गांड में बड़ी आसानी से ले लेगी.
मुझे लगता है कि आपको ये कहानी बहुत पसंद आई होगी.
मुझे मेल कीजिएगा.
स्रोत:इंटरनेट