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सलहज की कसी चूत को दिया सन्तान सुख 1

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सलहज की कसी चूत को दिया सन्तान सुख 1 1

. उनका हमारे घर में भी खूब आना जाना था इसलिए मेरी पत्नी उसके घर चली गई.
फिर उसको अस्पताल ले जाया गया.
रात भर मेरी पत्नी को वहीं पर रुकना था.
उसने अस्पताल से ही फोन कर दिया कि अनीता खाना बना देगी और मैं सुबह ही घर आऊंगी.
मुझे जब इस बात का अहसास हुआ कि अनीता मेरे साथ में अकेली रहने वाली है तो मेरे मन में हवस जाग उठी.
बीवी की गैरमौजूदगी मुझे अपनी सलहज की चुदाई के लिए मजबूर करने लगी.
सोचने लगा कि आज रात को किसी तरह इसकी चूत को चखने का मौका लग जाये तो बस मजा ही आ जाये.
किचन में जब वो खाना बना रही थी तो मैं पीछे से खड़ा होकर उसकी उठी हुई गांड को देख रहा था.
उसको देख देख कर लंड बार-बार उछल रहा था.
मैं वहीं पर खड़ा होकर लंड को मसल रहा था.
एक बार तो मन किया कि जाकर अभी इसकी गांड पर लंड को लगा दूं.
मगर कुछ सोच कर वहीं खड़ा रहा.
उसे पता नहीं कैसे आभास हो गया कि मैं उसके पीछे ही खड़ा हुआ हूं.
उसने अचानक से पीछे मुड़ कर देख लिया.
मेरा हाथ उस वक्त हौले हौले मेरे तने हुए लंड पर चल रहा था.
अनीता के पलटते ही मैंने घबराहट में हाथ हटा लिया.
मैं ऐसे देखने लगा जैसे किसी चोर को चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया हो.
वो बोली- क्या बात है जीजा जी, कुछ चाहिए क्या आपको? मैंने मन ही मन कहा- तुम्हारी चूत! फिर उसके सवाल का जवाब देते हुए बोला- बस खाने का इंतजार कर रहा था.
अभी कितनी देर और लगेगी खाना तैयार होने में? मुझे तो जोर से भूख लगी हुई है.
अनीता ने मेरी लोअर में तने हुए मेरे लौड़े की तरफ सरसरी निगाह से देखा और फिर मेरे चेहरे से टपक रही हवस को पढ़ने की कोशिश करते हुए कहने लगी- हां, बस खाना तैयार होने ही वाला है जीजा जी.
आप बाहर जाकर बैठिये मैं अभी पांच मिनट में खाना लेकर आती हूं.
उसने मुंह फेर लिया और दोबारा से रोटी बेलने में लग गई.
मैं जाकर बच्चों के साथ हॉल में टीवी देखने लगा.
फिर अनीता खाना लेकर आ गई.
टीवी देखते हुए ही सबने साथ में खाना खाया.
मेरी नजर टीवी पर कम और अनीता के चूचों की क्लिवेज पर ज्यादा जा रही थी.
वो भी मेरे मन को पढ़ने की कोशिश कर रही थी शायद लेकिन दोनों में से ही कोई भी जाहिर नहीं होने देना चाह रहा था.
खाने के बाद वो किचन में चली गई.
बच्चे अभी टीवी देखने में मग्न थे.
अनीता को किचन में गये हुए पांच मिनट हो गये थे.
मैं अपने जूठे बर्तन लेकर किचन की तरफ बढ़ने लगा तो मेरा लौड़ा बगैर मेरी इजाजत के ही तना जा रहा था.
लोअर में तंबू बना दिया हरामी ने.
मैंने किसी तरह शर्ट के नीचे उसको ढका और किचन में बर्तन रखने के लिए चला गया.
अंदर जाकर देखा तो अनीता बर्तन साफ कर रही थी.
मैंने बर्तन रखने के बहाने से उसकी गांड पर अपने लौड़े से सहला दिया.
वो थोड़ी सी हिचक कर एक तरफ सरक गई तो मेरी भी हवा टाइट हो गई.
मैं चुपचाप बाहर आ गया.
कुछ देर तक मैंने बच्चों के साथ टीवी देखा और फिर उनको अपने साथ ही अपने बेडरूम में सुलाने के लिए ले गया.
हमारे बेडरूम में से ही अन्दर वाले कमरे का दरवाजा बना हुआ था जिसमें अनीता सोती थी.
कुछ देर के बाद वो अपने हाथ पौंछती हुई कमरे में आई और सामने से गुजरी.
उसकी मटकती हुई गांड को देख कर मेरे मन में टीस सी उठने लगी.
वो अन्दर चली गई और मैंने लाइट बन्द कर ली.
कमरे में अन्धेरा हो गया लेकिन अनीता के कमरे की हल्की रोशनी अभी भी इधर आ रही थी.
मेरा हाथ मेरे तने हुए लंड पर चला गया.
सोचने लगा कि चुदाई का मौका मिलना तो मुश्किल है लेकिन मुठ मारे बिना ये लौड़ा मुझे सोने नहीं देगा.
मैं अपनी लोअर के अन्दर से ही अन्डवियर में हाथ डाल कर अपने लंड को सहलाने और मसलने लगा.
सलहज की चूत और गांड के बारे में सोच कर लंड काफी देर पहले से ही तना हुआ था इसलिए उसने अंडरवियर में ही टोपे को चिकना कर रखा था.
जब मैंने लंड के टोपे को अपने हाथ से ऊपर नीचे करना शुरू किया तो मेरी आंखें स्वत: ही बंद होने लगीं.
उस समय हाथ मेरे लंड पर चल रहे थे लेकिन मन ख्यालों ही ख्यालों में अनीता की मैक्सी को उठाकर उसके बदन के दर्शन करने की कामुक कल्पनाओं में गोते लगाने लगा था.
हाय … इसकी गांड … इसके स्तन … कितने रसीले होंगे अनीता के स्तन … चूस-चूस कर पी लूंगा उनको.
कुछ ऐसी ही कल्पनाओं में डूबा हुआ मैं अपने लंड पर तेजी से हाथ को चला रहा था.
मेरी आंखें बंद थीं और बच्चे बगल में ही सो रहे थे.
अंधरे में मुठ मारने के पूरे मजे ले रहा था.
मन तो कर रहा था कि लोअर को निकाल दूं लेकिन सोचा कि कहीं अगर बच्चे जाग गये तो उन पर गलत असर जायेगा.
इसलिए अंडरवियर के अंदर ही लंड को दबोचे रहा.
तेजी से हाथ लंड को रगड़ रहा था कि अचानक ही कमरे की लाइट जल गई.
मैंने हड़बड़ाहट में एकदम से हाथ को लोअर के अंदर से बाहर खींच लिया.
सामने दूसरे कमरे के दरवाजे पर अनीता खड़ी हुई थी.
मैंने सोचा कि आज तो इसने मुझे शायद मुठ मारते हुए देख ही लिया होगा.
मगर उसके चेहरे पर ऐसे कोई भाव नहीं थे.
मैंने अपने लंड की तरफ देखा तो वो एक तरफ तन कर डंडे जैसा दिख रहा था.
मैंने बनियान से उसको ढकने की नाकाम सी कोशिश की क्योंकि बनियान ढकने के बाद भी लौड़े का उठाव साफ दिखाई दे रहा था.
अब मैंने अनीता का ध्यान दूसरी तरफ हटाने के लिए पूछा- क्या बात है? तुम सोई नहीं अभी तक? वो बोली- मुझे नींद नहीं आ रही है जीजा जी क्योंकि मेरी कमर में बहुत तेज दर्द हो रहा है.
मैं बोला- कोई बात नहीं, मैं बाम दे देता हूं, उसकी मालिश कर लो.
आराम हो जायेगा.
मैंने बेड की दराज से बाम निकाल कर अनीता को ले जाने के लिए कहा.
वो मेरे करीब आई और मेरे हाथ से बाम की शीशी लेकर अपनी उठी हुई गांड को मटकाती हुई वापस जाने लगी तो मेरे मन में उसकी गोल-गोल गांड की ठुमकती शेप को देख कर एक हवस भरी टीस सी कचोट गई.
मन मार कर बोला- अनीता, लाइट बंद कर दो.
नहीं तो बच्चे जाग जायेंगे.
वो लाइट बंद करके अपने कमरे में चली गई और मैंने उसके जाते ही दोबारा से अपने कच्छे में हाथ डाल लिया.
फिर से लंड को मसलने लगा.
लेकिन पांच मिनट के बाद ही दोबारा से कमरे की लाइट जल उठी.
मेरा हाथ मेरी लोअर में ही था.
देखा तो अनीता बाम की शीशी लेकर खड़ी हुई थी.
उसे देखते ही मैंने हाथ को फिर से बाहर खींच लिया.
वो बोली- मैंने बाम लगा ली है.
ये लीजिए.
वो वापस आकर मेरे हाथ में बाम की शीशी देकर चली गई.
अब तो मेरा मन करने लगा था कि उसको जाकर चोद ही दूं.
मगर उसकी तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण मेरी भी हिम्मत नहीं पड़ रही थी.
मैं चुपचाप लेटा रहा.
बच्चे गहरी नींद में थे लेकिन मैं बेड पर पड़ा हुआ करवट बदल रहा था.
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट