. फिर जीजा ने दोबारा से लंड नजमा के मुंह की ओर किया.
नज़मा ने अबकी बार मुंह खोल दिया और जीजा के लंड को हिचकते हुए धीरे धीरे मुंह में भर लिया.
जीजा के मुंह से सिसकारी निकल गयी- आह्हह … करके.
जीजा ने अपने हाथ से नज़मा की गर्दन को आगे धकेल दिया और अपना पूरा लंड उसके मुंह में दे दिया.
फिर जीजा धक्के लगाने लगे.
नजमा अब जीजा के लंड को चूसने लगी.
कुछ ही देर में वो मस्ती में जीजा के लंड चूस रही थी.
जीजा के मुंह आह्ह … ओह्ह … वाह … हाय … करके कामुक आवाजें आ रही थीं.
मैं भी दरवाजे पर खड़ी हुई अपनी चूत को मसल रही थी.
मेरी चूत लंड की प्यासी हो चली थी.
दो मिनट तक नज़मा को लंड चुसवाने के बाद जीजा ने जब लंड उसके मुंह से बाहर निकाला तो उनका लंड पूरा का पूरा थूक में लिपटा हुआ था.
जीजा ने मेरी सहेली की टांगों को चौड़ी कर दिया.
उसकी चूत को सामने करके अपने लंड का सुपारा उसकी चूत पर लगा दिया और लंड को चूत के मुंह पर लगा कर मिशनरी पोजीशन में उसके ऊपर लेटते चले गये.
नजमा की चूत पर लंड लगा हुआ था और जीजा जी उसकी चूचियों को पीने लगे.
मेरी सहेली सिसकारने लगी.
तभी जीजा ने एक धक्का मार दिया.
उनका लंड दो इंच तक उसकी चूत में जा घुसा.
नजमा की सिसकारियां दर्द में बदल गयीं.
जीजा ने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
वो जीजा को पीछे धकेलने लगी और गूं-गूं की आवाज़ करने लगी.
मगर जीजा भारी शरीर के थे.
वो उसके हिलाये नहीं हिल रहे थे.
जीजा का लंड मेरी सहेली की चूत में घुस चुका था.
तभी जीजा ने एक और धक्का मारा और नज़मा उचकते हुए ऊपर सी उठी.
उसकी चूत में लंड आधा घुस गया था.
वो छटपटाने लगी.
उसकी चूत की सील शायद टूट गयी थी.
उसको बहुत दर्द हो रहा था.
जीजा भी जान गये थे कि नज़मा की कुंवारी चूत का उद्घाटन हो चुका है.
इसलिए उन्होंने लंड को वापस नहीं खींचा बल्कि नज़मा के बालों को सहलाते हुए उसके होंठों को पीते रहे.
तीन-चार मिनट में नजमा की छटपटाहट बंद हो गयी.
वो थीड़ी सहज हो गयी थी.
जीजा ने धीरे धीरे लंड को उसकी चूत में चलाना शुरू किया.
नजमा की आंखों में पानी आ रहा था.
मैं भी दरवाजे पर खड़ी हुई उसकी कुंवारी चूत का दर्द महसूस कर सकती थी.
जीजा आहिस्ता आहिस्ता से उसकी चूत को जैसे मरहम दे रहे थे.
धीरे धीरे करके जीजा ने अपना मूसल लंड उसकी चूत में पूरा उतार दिया.
फिर वो दोनों एक दूसरे से चिपक गये.
नजमा के हाथ अब जीजा की पीठ पर आ गये थे और उसने जीजा को अपनी बांहों में जकड़ लिया था.
जीजा की गांड मेरी सहेली की जांघों के बीच में ऊपर नीचे हो रही थी.
ये देख कर मैंने भी अपनी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया.
मेरे मुंह से आह्ह करके सिसकारी निकल गयी.
तभी जीजा ने पीछे मुड़कर मुझे देख लिया.
वो बोले- तू बाहर क्यों खड़ी है जानेमन? तेरी सहेली की चूत अब खुल चुकी है.
तू अंदर आ जा.
नज़मा भी मेरी ओर मुस्करा कर देख रही थी.
मैं नंगी थी और इसी हालत में अंदर चली गयी.
फिर जीजा ने नजमा की टांगों को उठा कर अपने कंधे पर रख लिया.
मैंने देखा कि बेड की चादर पर नीचे खून का धब्बा हो गया था.
नजमा की चूत की सील टूट गयी थी.
जीजा ने उसकी चूत को तेजी के साथ चोदना शुरू कर दिया.
मैं भी बेड पर चढ़ गयी.
मैंने नजमा की चूचियों को मसलना शुरू कर दिया.
नजमा की चूचियां जीजा जी के लंड के धक्कों से उछलने लगीं.
मैं उसकी चूचियों को दबाने लगी और फिर उसके निप्पलों को मैंने चूसना शुरू कर दिया.
एक तरफ जीजा जी नज़मा की चूत चोद रहे थे और ऊपर से मैं उसकी चूचियों के साथ खेल रही थी.
फिर मैंने दो मिनट तक अपनी सहेली के दूधों को पीया और फिर उसके होंठों को चूसने लगी.
नज़मा अब बहुत ही ज्यादा आनंद में हो गयी और दो मिनट के पश्चात् एक बार फिर से उसका बदन अकड़ गया.
नजमा ने लम्बी सी आह्ह भरी और उसकी चूत के रस ने जीजा के लंड को भिगो दिया.
जीजा का लंड अब जब मेरी सहेली की चूत की गहराई में जाता तो पच-पच की आवाज हो रही थी.
उसके बाद जीजा ने उसकी चूत को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया.
हर मिनट में जीजा की रफ्तार बढ़ रही थी.
पांच मिनट तक ऐसे ही जीजा उसकी चूत को रगड़ते रहे.
फिर अचानक जीजा के मुंह से निकला- आह्हह्ह… आआआ… हाह्हह… होह्हह… करके जीजा ने मेरी सेहली की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया.
जीजा उसकी चूचियों पर गिर पड़े.
मैं जीजा के बालों को सहलाने लगी और नजमा ने जीजा की पीठ को सहलाते हुए उनको अपनी बांहों में जकड़ लिया.
फिर जीजा उठे और मैंने जीजा के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
पांच मिनट तक मैंने जोर से जीजा के लंड को चूसा.
मेरी चूत में भी चुदने की आग लगी हुई थी.
मैंने जीजा के लंड को चूस चूस कर फिर से खड़ा कर दिया.
जीजा को बेड पर पटक कर मैंने उनके लंड पर चूत को सेट किया और खुद ही जीजा के लंड को अंदर लेने लगी.
नजमा पीछे से आकर मेरी चूचियों को हाथों में भर कर मसलने लगी.
मैं भी मस्त हो गयी.
उसके बाद नजमा ने आगे आकर जीजा के मुंह पर गांड को रख दिया और अपनी गांड को चटवाने लगी.
इस पोजीशन में उसका मुंह मेरी ओर था.
नजमा मेरे होंठों को चूस रही थी और मैं नजमा के मुंह से लार को खींच रही थी.
नजमा भी मेरे साथ ही ऊपर नीचे होकर अपनी चूत को जीजा के होंठों पर रगड़ रही थी.
मैं भी जोर जोर से जीजा के लंड पर उछल रही थी.
दस मिनट तक हम दोनों सहेलियों ने जीजा को निचोड़ा और फिर मैं भी झड़ गयी.
उस रात मेरी सहेली ने तीन बार अपनी चूत चुदवाई और दो बार मैंने भी चुदवाई.
पहले सेक्स में मेरी सहेली को दर्द के साथ साथ मजा भी बहुत मिला.
वो मेरे जीजा के लंड की दीवानी हो गयी.
अभी भी वो मेरे जीजा और उनके लंड की तारीफ करते हुए नहीं थकती है.
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स्रोत:इंटरनेट