. मम्मी आंटी से बोलीं- दीदी घर आते रहिएगा.
बच्चों का ख्याल रखिएगा.
आंटी- अरे कोई बात नहीं है … आप लोग घबराइए नहीं, आराम से जाइए और ठीक से दिखला कर आइए.
मम्मी- ठीक है दीदी.
पापा दीदी से बोले- तुम लोगों के एग्जाम कब तक हैं? दीदी- दो दिन बाद हैं.
पापा- एग्जाम खत्म हो जाएं, तो घर पर ही रहना.
जब हम लोग आ जाएंगे, तब फिर कॉलेज जाना.
दीदी- ठीक है पापा.
पापा- अर्णव का ख्याल रखना.
दीदी- ठीक है पापा.
पापा- अर्णव घर पर ही रहना … बाहर मत जाना ठीक है ना! मैं- हां पापा … ठीक है.
मम्मी- बेटा बदमाशी मत करना और दीदी को परेशान मत करना.
मैं- जी नहीं परेशान करूंगा.
मम्मी- आते वक़्त तुम्हारे लिए क्या लेकर आऊं? मैं- मेरे लिए बैट लेकर आना.
फिर सब लोग हंसने लगे.
शाम हो गई थी.
सब लोग जाने के लिए तैयार थे.
मामा जी ऑटो लाने के लिए गए.
कुछ देर बाद ऑटो लेकर वापस आ गए.
मामा जी ने सारा सामान ऑटो में रखवाया, फिर मम्मी ने आंटी के पैर छुए.
हम दोनों ने मम्मी पापा के पैर छुए, फिर सारे लोग ऑटो में बैठ गए और वे लोग चले गए.
अब धीरे धीरे अंधेरा भी होता जा रहा था.
तभी आंटी बोलीं- ठीक है प्रिया … मैं जाती हूं … घर में बहुत सारा काम पड़ा है.
साकेत भी आ गया होगा.
तुम्हारी मम्मी जब तक नहीं आती हैं, तब तक श्वेता रात में यहीं रहेगी.
तुम्हारा मन भी लगा रहेगा और अगर कोई दिक्कत हो तो बताना.
दीदी- ठीक है आंटी.
आंटी चली गईं.
रात में दीदी और श्वेता दीदी दोनों ने मिलकर खाना बनाया और हम लोग खाना खाकर सो गए.
जब सुबह हुई, तो दीदी मुझे जगाने आई.
मैं उठा, तो दीदी बोली- जल्दी से तैयार हो जाओ … वरना कॉलेज के लिए लेट हो जाओगे.
मैं- श्वेता दीदी कहां है? दीदी- वो घर गई है … तैयार होने के लिए … तुम भी जल्दी तैयार हो जाओ.
मैंने जल्दी जल्दी में नाश्ता किया और अपने कमरे मैं ड्रेस चेंज करने लगा.
तभी दीदी के रूम का दरवाजा बंद होने की आवाज सुनाई दी.
मैं झट से होल से अन्दर झांकने लगा.
मुझे लगा कि वो कुछ लैटर वगैरह लिख रही होगी … इसलिए मैं देख रहा था.
लेकिन मैंने देखा कि दीदी कपड़े चेंज करने में लगी थी.
मैंने कुछ सोच कर इग्नोर कर दिया.
फिर मैंने सोचा कि हो सकता है कपड़े चेंज करने के बाद वो लैटर लिखे, तो मैं फिर से अन्दर झांकने लगा.
उसके बाद मैंने अन्दर का जो नजारा देखा, मेरे तो होश उड़ गए.
मैंने देखा कि दीदी ने अपना सूट उतार दिया था.
मेरे सामने वो सिर्फ ब्रा में थी.
मुझे उनका सफेद दूधिया पिछवाड़ा दिखाई दे रहा था.
मैंने अहसास किया कि मेरा लंड पैंट में ही खड़ा हो गया.
मुझे उस वक़्त वही फीलिंग हो रही थी, जो मुझे उस दिन होटल में हुई थी.
मैं अभी सोच ही रहा था कि तभी दीदी ने अपनी सलवार भी उतार दी.
अब तो मेरी आंख खुली की खुली रह गई.
उनकी बड़ी सी गांड देखकर जो लग रहा था कि दीदी की जांघियां फाड़ कर पूरा का पूरा पिछवाड़ा बाहर आ जाएगा.
उनके गोरी और मोटी जांघों को देख कर मेरा लंड पूरा टाईट हो गया.
ऐसे तो मेरा मेरे लंड उस वक़्त छोटा था, पर खड़ा था.
मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड पर चला गया और मैं अपने लंड को सहलाने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं सोचने लगा कि दीदी की जांघिया के अन्दर क्या होगा.
मुझे ये देखने की बहुत उत्सुकता हो रही थी.
यही सब सोच कर मैं अपना लंड धीरे धीरे हिला रहा था.
मेरी आंखें बंद हो गईं.
तभी दीदी ने आवाज लगाई- अर्णव हुआ क्या? मैं लड़खड़ाते हुई आवाज में बोला- हां दीदी हो गया.
दीदी- चलो जल्दी बाहर आओ.
मैं अपने आपको संभालते हुए जल्दी से बाहर आ गया.
दीदी बिल्कुल तैयार थी.
दीदी कॉलेज ड्रेस मिनी स्कर्ट और व्हाईट शर्ट पहनी थी.
उनकी स्कर्ट उनके घुटने से थोड़ी ऊपर थी, जिससे उनकी मोटी मोटी जांघें साफ़ दिखाई दे रही थीं.
अगर कोई नीचे झुक कर देखता, तो अन्दर का सब कुछ दिखाई दे जाता.
मेरा लंड अभी भी बिल्कुल टाईट था, लेकिन मैं जल्दी जल्दी में अपनी पैंट की ज़िप लगाना भूल गया था.
तभी दीदी बोली- तुम ड्रेस चेंज करने में कितना समय लगाते हो … इतना समय तो मुझे भी नहीं लगता.
देखो तुमने अपनी ज़िप भी नहीं लगाई है.
तभी वो मेरे पास आकर मेरे पेंट की ज़िप को लगाने लगी.
जैसे ही उनका हाथ मेरे लंड पर लगा, मुझे अजीब सी फीलिंग हुई, मुझे ऐसा लगा कि जैसे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया हो.
लेकिन उस वक़्त मैं बहुत घबराया हुआ था.
मैं दीदी से आंख नहीं मिला पा रहा था.
तभी दीदी बोली- आज क्या हो गया है तुम्हें … ऐसा क्यों कर रहे हो? तबीयत तो ठीक है तुम्हारी.
मैं घबराते हुए बोला- हां मैं ठीक हूं.
इतने में बाहर से आवाज आई- प्रिया हो गया क्या … चलो जल्दी लेट हो रहे हैं.
दीदी- हां श्वेता हो गया, बस आ रही हूं.
उसके बाद हम लोग बाहर निकले.
दीदी ने दरवाजे में ताला लगाया.
हम लोग जल्दी जल्दी कॉलेज के लिए चल दिए.
मेरा एग्जाम खत्म हो गया.
मैं जल्दी जल्दी अपने कॉलेज से दीदी के कॉलेज के पास पहुंच कर उनका इंतज़ार करने लगा.
थोड़ी देर बाद दोनों बाहर आ गईं.
तभी दीदी ने मुझसे पूछा- तुम कब आए? मैं- अभी ही आया.
दीदी- क्यों आज तुम्हारा एग्जाम बड़ा जल्दी हो गया.
मैं- हां, बहुत हल्के हल्के सवाल थे, तो बहुत जल्दी बन गया.
दीदी- अच्छा सवाल दिखाओ तो? मैंने दीदी को अपना क्वेश्चन पेपर दे दिया और दीदी उस पढ़ने लगी.
तभी दीदी की कुछ और सहेलियां दीदी के पास आईं और उनसे पूछने लगीं.
एक सहेली- अरे प्रिया … ये कौन है? दीदी- मेरा छोटा भाई.
सहेली- अरे तेरा भाई तो तुम्हारे जैसा ही बड़ा क्यूट है.
दीदी- अच्छा … दीदी की सहेली ने मुझसे पूछा- क्या नाम है तुम्हारा? मैं- अर्णव.
सहेली- किस क्लास में पढ़ते हो? मैंने बताया.
तभी श्वेता दीदी बोली.
श्वेता दीदी- तुम इससे इतना सवाल क्यों पूछ रही हो? सहेली- अरे मेरा भी इसी के उम्र का छोटा भाई है … वो मुझे बहुत परेशान करता है.
वह मुझसे हमेशा लड़ता रहता है.
एक ये है … अपनी बहन का कितना ख्याल रखता है … प्रिया को साथ ले जाने के लिए इसका इंतजार कर रहा है.
तभी श्वेता दीदी बोली- चलो ठीक है … कल मिलते हैं.
फिर सब लोग अपने अपने घर की ओर चल दिए.
हम लोग भी चलने लगे.
मैं दीदी के पीछे पीछे चल कर उनकी जांघों को देखते हुए चल रहा था.
तभी दीदी बोली- अरे अर्णव पीछे पीछे क्यों चल रहे हो … साथ में चलो.
इधर बहुत गाड़ी चलती हैं.
मैं दीदी के साथ साथ चलने लगा.
दोनों आपस में बात करते हुए चल रही थीं.
मैं भी उनकी बात सुनने लगा.
श्वेता दीदी बोली- प्रिया मैं तुमसे एक बात बोलना चाह रही थी.
दीदी- हां बोलो न? श्वेता दीदी- साकेत भैया तुमसे मिलना चाहते हैं.
दीदी- क्यों? मेरी दीदी की चुत की सील साकेत भैया ने कैसे खोली.
इस सबको मैं पूरे विस्तार से लिखता रहूँगा.
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मेरी इस सेक्स कहानी के लिए आपके मेल की प्रतीक्षा रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट