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सुहागरात में बीवी की गांड और भाभी की चुत 1

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सुहागरात में बीवी की गांड और भाभी की चुत 1 1

. मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी चुचियों को सहलाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा.
मैंने देखा कि उसकी चुत पर अभी बहुत हल्के हल्के बाल ही उगे थे और उसकी चुत एकदम गुलाबी सी दिख रही थी.
उसकी चुचियों को मैंने मसलना शुरू कर दिया तो वो बोली- मुझे गुदगुदी हो रही है.
मैंने पूछा- क्या अच्छा नहीं लग रहा है? वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है.
मैंने उसके निप्पलों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
वो गर्म सिसकारियां भरने लगी.
उसके बाद मैंने उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया.
उसे और भी ज्यादा गुदगुदी होने लगी.
उसने मेरा हाथ हटा दिया, तो मैंने पूछा- क्या हुआ? वो बोली- मुझे बहुत जोर की गुदगुदी हो रही है.
मैंने कहा- अच्छा नहीं लग रहा है क्या? वो बोली- अच्छा तो लग रहा है.
मैंने कहा- तो तुमने मेरा हाथ क्यों हटाया.
अगर तुम ऐसा ही करोगी, तो मैं बाहर चला जाऊंगा.
वो बोली- ठीक है, मैं अब तुम्हें कुछ भी करने से मना नहीं करूंगी.
मैंने कहा- फिर ठीक है.
मैंने उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया.
थोड़ी ही देर में उसकी चुत गीली होने लगी.
वो जोर जोर से कामुक सिसकरियां भरने लगी.
मैंने एक उंगली उसकी चुत के अन्दर डाल दी, तो उसने जोर की सिसकारी ली.
मेरा लंड अब तक बहुत ज्यादा सख्त हो चुका था.
थोड़ी देर तक मैं उसकी चुत में अपनी उंगली अन्दर बाहर करता रहा.
कुछ ही देर में वो अकड़ने के साथ झड़ने लगी.
झड़ते समय उसने मुझे जोर से पकड़ लिया.
वो सिसयाते हुए बोली- तुम्हारे उंगली करने से मुझे तो पेशाब सी आ रही है.
मैंने कहा, ये पेशाब नहीं है … जोश में आने के बाद चुत से पानी निकलता है.
वो कुछ नहीं बोली.
मेरी उंगली उसकी चुत के पानी से एकदम गीली हो चुकी थी.
मैंने उसके झड़ने के बाद भी उंगली चलाना जारी रखी.
थोड़ी ही देर में वो फिर से पूरे जोश में आ गई.
मैंने कहा- अब मैं अपना औजार तुम्हारे छेद में घुसाऊंगा.
तुम पेट के बल लेट जाओ.
वो पेट के बल लेट गई.
मैंने देखा कि उसकी गांड भी एकदम गोरी थी.
उसकी गांड का छेद बहुत ही मस्त और हल्के भूरे रंग का था.
मैं अपनी उंगली उसकी गांड के छेद पर फिराने लगा.
उसके बाद मैंने एक झटके से अपनी एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी.
वो जोर से चीख उठी.
मैंने कहा- अगर तुम ऐसे चीखोगी तो भाभी आ जाएंगी.
वो कराहट हुए बोली- मुझे दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- दर्द तो होगा ही.
अभी तो उंगली डाली है, इसके बाद मैं अपना लंड तुम्हारी गांड में घुसाऊंगा.
थोड़ी देर तक मैं अपनी उंगली उसकी गांड में अन्दर बाहर करता रहा.
वो बोली- मेरा छेद तो बहुत ही छोटा है और तुम्हारा औजार बहुत बड़ा है.
ये अन्दर कैसे घुसेगा? मैंने कहा- जैसे दूसरी औरतों के अन्दर घुसता है.
वो बोली- तब तो मुझे बहुत दर्द होगा.
मैंने कहा- इसी लिए तो तुम्हारी भाभी ने तुमसे कहा था कि दर्द को बर्दाश्त करना, ज्यादा चीखना चिल्लाना मत.
वो बोली- मैं समझ गई.
मैं उसके ऊपर चढ़ गया, तो वो बोली- तेल नहीं लगाओगे क्या.
मैंने कहा- लगाऊंगा.
मैंने अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगा लिया.
उसके बाद मैंने उसकी गांड के छेद पर अपने लंड का सुपारा रखा और उससे कहा- अब तुम अपना मुँह जोर से दबा लो, जिससे तुम्हारे मुँह से चीख ना निकले.
उसने कहा- ठीक है, मैं दबा लेती हूँ.
लेकिन तुम बहुत धीरे धीरे घुसाना.
मैंने कहा- हां, मैं बहुत धीरे ही घुसाऊंगा.
उसने अपने हाथों से अपने मुँह को दबा लिया.
मैंने थोड़ा सा ही जोर लगाया था कि वो जोर से चीख पड़ी.
मेरे लंड का सुपारा भी अभी ठीक से उसकी गांड में नहीं घुस पाया था कि वो रोने लगी.
वो बोली- मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- दर्द तो होगा ही.
तुम अपना मुँह जोर से दबा लो.
उसने अपना मुँह फिर से दबा लिया, तो मैंने इस बार कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया.
वो दर्द से तड़पते हुए जोर जोर से चीखने लगी- उई माँ दीदी, बचा लो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी.
इस बार मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुस गया था.
उसकी गांड से खून निकल आया था.
वो इतने जोर जोर से चीख रही थी कि मैं थोड़ा सा डर गया.
मैंने एक झटके से अपना लंड बाहर खींच लिया.
पुक्क़ की आवाज के साथ मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड से बाहर आ गया.
मैंने उसे चुप कराते हुए कहा- अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी, तो काम कैसे बनेगा? वो बोली- मैं क्या करूं, मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
मैंने कहा- थोड़ा सब्र से काम लो.
फिर सब ठीक हो जायेगा.
अब तुम अपना मुँह दबा लो, मैं फिर से कोशिश करता हूँ.
उसने अपना मुँह दबा लिया, तो मैंने फिर से अपने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रख दिया.
उसके बाद मैंने उसकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उसे जोर से पकड़ लिया.
फिर मैंने पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का दे मारा.
वो बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी.
वो मेरे नीचे से निकलना चाहती थी, लेकिन मैंने उसे बुरी तरह से जकड़ रखा था.
मेरा लंड इस धक्के के साथ उसकी गांड में 3″ तक घुस गया.
वो जोर जोर से चिल्लाते हुए भाभी को पुकार रही थी- दीदी, बचा लो मुझे … नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे … बहुत दर्द हो रहा है.
तभी कमरे के बाहर से भाभी की आवाज आई- राज, क्या हुआ.
शालू इतना क्यों चिल्ला रही है.
मैंने कहा- मैं अपना औजार अन्दर घुसा रहा था, लेकिन ये मुझे घुसाने ही नहीं दे रही है … बहुत चिल्ला रही है.
भाभी ने कहा- तुम दोनों बाहर आ जाओ.
मैं शालू को समझा देती हूँ.
मैंने लुंगी पहन ली और शालू से कहा- बाहर चलो, भाभी बुला रही हैं.
वो उठना चाहती थी, लेकिन उठ नहीं पा रही थी.
मैंने उसे सहारा दे कर खड़ा किया.
उसने केवल अपनी साड़ी बदन पर लपेट ली.
मैं उसे सहारा देकर बाहर ले आया.
वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.
भाभी ने शालू से पूछा- इतना क्यों चिल्ला रही थी? वो रोते हुए भाभी से कहने लगी- ये अपना औजार मेरे छेद में घुसा रहे थे … इसलिए मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
भाभी ने कहा- पहली पहली बार दर्द तो होगा ही.
सभी औरतों को होता है.
ये कोई नई बात थोड़े ही है.
मुझसे भाभी ने कहा- मैंने तुझसे कहा था ना कि तेल लगा कर धीरे धीरे घुसाना.
मैंने कहा- मैं तेल लगा कर धीरे धीरे ही घुसाने की कोशिश कर रहा था.
जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया और मेरे औजार का टोपा ही इसके छेद में घुसा कि ये जोर जोर से चिल्लाने लगी.
इसके चिल्लाने से मैं डर गया और मैंने अपना औजार बाहर निकाल लिया.
उसके बाद मैंने इसे समझाया, तो ये राजी हो गई.
मैंने फिर से कोशिश की, तो शालू फिर जोर जोर से चिल्लाने लगी.
जबकि अभी मेरा औजार केवल जरा सा ही अन्दर घुस पाया था.
तभी आपने हम दोनों को बुला लिया और हम बाहर आ गए.
भाभी ने कहा- इसका मतलब तुमने अभी तक कुछ भी नहीं किया? मैंने कहा- बिल्कुल नहीं … आप चाहो तो शालू से पूछ लो.
भाभी ने शालू से पूछा- क्या ये सही कह रहा है? उसने अपना सिर हां में हिला दिया.
भाभी ने शालू से कहा- तुम कमरे में जाओ.
मैं इसे समझा बुझा कर भेजती हूँ.
शालू कमरे में चली गई.
कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट