. उसके बाद मैं उनकी बातों में रूचि लेने लगा.
मैंने उनसे बात की और उनके परिवार के बारे में पूछा.
भाभी ने सब कुछ वही बताया जो मेरी पड़ोसन के भाभी के बारे में मैं जानता था.
मैं हैरान था कि ऐसा कैसे हो सकता है.
मेरी धड़कन बढ़ने लगी थी.
उसके बाद भाभी मुझसे मेरी फोटो मांगने लगी.
मैंने फोटो तो उनको नहीं दी लेकिन अपना व्हाट्सएप नम्बर उनको जरूर दे दिया.
कुछ देर के बाद मुझे मेरे फोन पर व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आनी शुरू हो गयी.
मैंने सोचा कि यही वो भाभी है जिससे मैं मेल पर बात कर रहा था.
मैंने अपने फोन के कैमरे पर उंगली रख दी और उनकी कॉल रिसीव की.
देखा तो मैं हैरान रह गया.
ये तो मेरी पड़ोसन भाभी थी.
फिर वो पूछने लगी- आप कितनी फीस लेते हो? मैंने सोचा- अगर अभी इनको सच बता दिया तो शायद भाभी मुझे देखते ही मना कर दे.
इसलिए मैंने उनको मना कर दिया कि अभी मेरे पास समय नहीं है.
एक दो महीने के बाद ही मिल पाऊंगा.
वो बोली- अरे देवर जी, मुझे आपके बारे में सब पता है.
मैंने हैरान होते हुए पूछा- क्या पता है आपको मेरे बारे में? वो बोली- मैं दो साल से अन्तर्वासना पर कहानियां पढ़ रही हूं.
मुझे पता है कि आप मेरे पड़ोस में ही रहते हो.
मैंने आपकी मेल आईडी देखी थी.
मुझे तभी पता लग गया था.
अब ये नाटक बंद करो और बताओ कि कब मिल रहे हो.
मेरी गांड गीली हो रही थी.
भाभी मेरे बारे में सब जानती थी.
मगर साथ ही खुशी भी हो रही थी कि ये तो पास में ही काम बन गया.
मैं तो खुश हो गया कि दीपक तले अंधेरा हो रखा था.
मैंने कहा- भाभी आप कहो तो अभी आ जाता हूं.
वो बोली- नहीं, होटल में चलेंगे.
वहां पर बिना किसी डर के मिला जा सकता है.
मैंने कहा- आप इसकी चिंता न करें.
मैं आपसे सीधे तौर पर कभी बात नहीं करूंगा.
जब भी आपसे बात होगी, अब होटल के अंदर ही होगी.
वो भी आश्वस्त हो गयी.
वो बोली- ठीक है तो फिर बुधवार को मिलते हैं.
मुझे होटल का नाम और पता बता देना.
इतनी बात करके भाभी ऑफलाइन हो गयी.
मैंने सोमवार के दिन ही भाभी को होटल का नाम और पता मेल कर दिया.
वो बोली- ये भी बता दो कि पैसे कितने लोगे? मैंने कहा- मुझे पैसों की कोई जरूरत नहीं है.
भाभी ने कहा- नहीं, ऐसे नहीं.
अगर पैसे नहीं ले रहे तो फिर रहने देते हैं.
मुझे नहीं मिलना.
मैंने कहा- ठीक है.
जो आपका मन करे वो दे देना.
फिर वो ओके बोलकर दोबारा से ऑफलाइन हो गयी.
एक दूसरे के पड़ोस में रहते हुए भी हम कभी आपस में आमने सामने बात नहीं करते थे क्योंकि मैं नहीं चाह रहा था कि किसी को मेरे बारे में या भाभी के बारे में शक हो जाये.
फिर बुधवार का दिन भी आ गया.
मैंने भाभी को दस बजे से एक बजे के बीच का टाइम दिया था मिलने के लिए.
उसके बाद उनके बच्चे स्कूल से आ जाते थे.
मैं तैयार होकर घर से नौ बजे ही निकल गया.
दस बजे मैं होटल के अंदर पहुंच चुका था.
उसके बाद भाभी भी आ गयी.
होटल के रजिस्टर में एंट्री की और हम कमरे में पहुंच गये.
कमरे में जाते ही हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये.
मैं भाभी को चूमने के लिए आगे बढ़ता इससे पहले ही वो अलग हो गयी और बाथरूम में चली गयी.
मेरा लंड खड़ा हो चुका था.
कुछ देर के बाद भाभी बाहर आई तो केवल ब्रा और पैंटी में ही थी.
उसने उस दिन वही ब्रा पहनी हुई थी जिसमें मैंने अपने लंड का माल निकाला था.
वो मेरे पास तेजी से चलकर आई और मेरे बदन से लिपट गयी.
अगले ही पल मैंने उसको बांहों में भर लिया.
हम दोनों के होंठ अगले ही पल एक दूसरे से मिल चुके थे.
जोर से एक दूसरे के होंठों को पीते हुए हम बेड की ओर सरकने लगे.
भाभी ने मुझे बेड पर गिरा लिया.
उसने मेरे होंठों को छोड़ कर मेरी आंखों में देखते हुए कहा- राज, तुम इतनी सेक्सी कहानियां लिखते हो, मुझे तो यकीन नहीं हो रहा! उस दिन जब तुमने मेरी ब्रा में अपना माल छोड़ा तभी से मेरी चूत तुम्हारे लंड के नाम से गीली होने लगी थी.
अब तक तुमने मेरी ब्रा में मुठ मारी थी.
आज मेरी चूत भी मार लो.
मेरी जवानी को निचोड़ लो.
मैंने उठ कर अपने सारे कपड़े उतार दिये.
मैं खड़ा हुआ ही था कि भाभी नीचे बैठ कर मेरे लंड को चूसने लगी.
मैं भी उसके खुले बालों में हाथ फिराने लगा और लंड चुसवाने के मजे लेने लगा.
वो काफी प्यासी लग रही थी.
फिर मैंने भाभी को रोका और उनको खड़ा कर दिया.
उनकी पैंटी उतार दी.
उनकी चूत पर बड़े बड़े बाल थे.
मैं भाभी की चूत के बालों को चूसने लगा.
भाभी ने अपनी टांगें चौड़ी कर लीं और अपनी चूत को चुसवाने लगी.
उसके बाद मैंने उससे लेटने के लिए कहा.
उसने अपनी टांगें बेड से नीचे लटकी हुई छोड़ दीं और उनकी कमर और पीठ बेड पर थी.
इस पोजीशन में उसकी चूत ऊपर आ गयी थी.
मैंने भाभी की चूत पर मुंह लगा दिया और उसकी चूत को चाटने-चूसने लगा.
वो मदहोश होने लगी.
मस्ती में अपनी चूत को चटवाने का मजा लेने लगी.
भाभी की चूत का रस पीते हुए मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि उनकी चूत से शहद निकल रहा हो.
उसके बाद भाभी झड़ गयी.
उसकी चूत बिल्कुल गीली हो गयी थी.
उसने दोबारा से उठ कर मेरे लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी.
मेरा लौड़ा एकदम से सख्त हो चुका था और मेरे लंड ने कामरस छोड़ना शुरू कर दिया.
भाभी ने मेरे लंड को चूस चूस कर गीला कर दिया था.
फिर मैंने भाभी से कहा कि अब वो बेड पर झुक जाये.
भाभी ने अपनी गांड को मेरी तरफ करते हुए अपनी पीठ को बेड पर झुका लिया.
वो डॉगी पोजीशन में आ गयी थी.
मैंने पीछे से भाभी की चूत को सहलाया और उसकी गीली चूत को एक दो बार रगड़ा.
उसके मुंह से सिसकारी निकल गई- आह्ह … बस करो देवर जी … अब डाल दो.
मैंने भाभी की चूत पर लंड लगाया और उसकी चूत में लंड से धक्का दे लिया.
मेरा लंड गच्च से भाभी की चूत में उतर गया.
मैं डॉगी स्टाइल में भाभी की चूत मारने लगा.
कुछ देर के बाद मेरा वीर्य निकलने को हुआ तो मैंने अपनी गति धीमी कर दी.
फिर कंट्रोल होने के बाद फिर से उसकी चूत को चोदने लगा.
इस तरह से मैं बार बार झड़ने के करीब पहुंच कर धक्के लगाना बंद कर देता था.
मैं पहली ही बार में भाभी को पूरी संतुष्टि देना चाह रहा था.
वो भी मेरे लंड से चुद कर मजे ले रही थी.
मैं पूरा लंड अंदर घुसा रहा था और फिर धीरे धीरे बाहर कर रहा था.
एक झटके में ही फिर से अंदर और फिर दोबारा से धीरे धीरे बाहर.
जब मैं झटका देता तो भाभी की दर्द भरी उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल जाती थी.
उसकी ये कामुक आहें मेरे जोश को और ज्यादा बढ़ा रही थीं.
उसके बाद मैंने भाभी की चूचियों को हाथों में दबोच लिया और तेजी से उसकी पीठ पर झुक कर उसकी चूत को चोदने लगा.
तभी भाभी ने अपनी चूत में अंदर ही मेरे लंड को कस लिया.
पच-पच … फच-फच की आवाज के साथ मैं उसकी चूत को चोद रहा था.
अब मैं भी झड़ने ही वाला था.
अब और ज्यादा कंट्रोल नहीं कर पा रहा था मैं.
मैंने पूरा लंड एक झटके में ही भाभी की चूत में घुसा दिया और मैं एकदम से उसकी चूत में झड़ने लगा.
मैंने पूरा लंड घुसा कर अपना वीर्य भाभी की चूत में उड़ेल दिया.
उसके बाद हम दोनों बेड पर ही गिर पड़े.
कुछ देर लेटे और फिर बातें करने लगे.
थोड़ी ही देर के अंदर मेरा मन फिर से चुदाई को करने लगा.
भाभी की चूचियों को छेड़ते हुए मैं उसकी चूत को सहलाने लगा.
भाभी भी चुदाई के लिए दोबारा से तैयार हो गयी.
हमने दोबारा से चुदाई शुरू की.
लगभग बीस मिनट तक दूसरा राउंड चला और हम दोनों इस बार एक साथ में ही झड़ गये.
उसके बाद भाभी ने समय देखा.
हमारे जाने का समय हो रहा था.
चलते हुए भाभी ने मुझे दो हजार रूपये दिये.
उसने कहा कि मेरे लिये समय निकालते रहा करो.
मैंने भी उनको समय देने का वादा किया.
अब हम घर पर भी बात कर लेते थे लेकिन कभी मां के सामने इस तरह की बातें करने से बचते थे.
जब भी मिलना होता है भाभी व्हाट्सएप पर ही बात करती है.
तो दोस्तो, इस तरह से मेरी पड़ोसन भाभी ने मेरी चोरी पकड़ ली थी.
उसने अपनी चूत भी चुदवा ली.
मुझे काफी मजा आया.
मगर मैं अपने हरियाणा के मित्रों से अनुरोध करता हूं कि मेरी महिला मित्रों के बारे में जानकारी न मांगें.
मेरी सेक्स कहानी अगर आपको पसंद आई होगी.
मेरा उत्साह वर्धन करें.
मुझे आप लोगों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा.
जल्दी ही मैं आप लोगों के लिए नई कहानी लेकर आऊंगा.
तब तक के लिए अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज पढ़ते रहें और मजा लेते रहें जिन्दगी का और सेक्स का। [email protected]
स्रोत:इंटरनेट