. उसके जाने के बाद सर ने कहा- तो कहिये सोनल जी, क्या सोचा है आपने? आपका तबादला आपको अपने घर के बगल वाले स्कूल में चाहिए या फिर इस स्कूल से भी 10 किलोमीटर आगे किसी और स्कूल में चाहिए है? मैंने कहा- सर अगर किसी को पता चल गया तो? वो बोले- उसकी चिंता आप क्यों करती हैं, मैं विश्वास दिलाता हूं कि किसी को हमारे बीच की बात का पता नहीं चलेगा.
संकोचवश मैंने कहा- जी ठीक है, आप जैसा कहेंगे मैं वैसा करने के लिए तैयार हूं.
मेरे हां करते ही वो झट से उठ कर रूम के दरवाजे की ओर चले.
उन्होंने फटाक से दरवाजा अंदर से बंद कर दिया.
मैं उठ गयी और हाथ बांध कर खड़ी हो गयी.
वो मेरे पास आये और मुझे घूरने लगे.
मुझे सिर से पैर तक घूरते हुए उसने कहा- वाह! क्या चीज हो यार तुम सोनल.
जिस दिन तुमको मैंने पहली बार स्कूल में देखा था उसी दिन से तुम मेरी नजर में चढ़ गयी थी.
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और प्यार से सहलाने लगे.
मैं चुपचाप खड़ी थी.
मुझे अजीब सा लगने लगा.
मैं डर रही थी.
मेरी आंखों में आंसू आने लगे थे.
वो बोले- अरे पगली, रो क्यूं रही हो? अगर ट्रान्सफर करवाना है तो पजामी तो तुमको मेरे सामने ढीली करनी ही होगी.
उस दिन मैं एक सूट सलवार पहन कर गयी हुई थी.
वो बोले- चल अपना पजामा नीचे कर.
उस दिन मैंने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी.
मैं अपनी नजरें झुकाये हुए पत्थर बन कर खड़ी हुई थी.
वो बोले- अरे यार … तुम तो ऐसे नाटक कर रही हो जैसे आज तक तुमने अभी तक ऐसा कुछ किया ही नहीं, तुम्हारे पति के साथ भी तो तुम ये सब कर ही चुकी हो, तो फिर मेरे सामने एक बार कर लोगी तो क्या फर्क हो जायेगा, चलो इतना मत सोचो, जल्दी से अपनी पजामी को खोलो मेरी जान। रोते रोते मैंने अपनी पजामी को खोलना शुरू कर दिया.
वो ललचाई जुबान से बोले- हां शाबाश खोलो खोलो.
घबराओ नहीं.
मैं तुम्हें कुछ नहीं करूंगा.
बस एक बार तुम्हें बिना कपड़ों के देख लूं बस.
तुम बिल्कुल चिंता न करो.
मैंने पजामा खोल दिया और मेरी चूत नीचे से नंगी हो गयी.
सर ने मुझे पीछे सोफे पर धक्का दे दिया और मेरी टांगें फैल कर मेरी चूत सर को सामने साफ दिखाई देने लगी.
मेरी बालों वाली चूत और मेरी गोरी जांघें देख कर सर ने सिसकारते हुए कहा- आह्ह … क्या चूत है यार। मेरे पास कोई चारा नहीं था.
मेरी इज्जत जो मेरी चूत के साथ ही नंगी हो गयी थी अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी क्योंकि मेरी चूत को तो उस ठरकी प्रिंसीपल ने देख ही लिया था.
मगर मेरे पास दूसरा कोई रास्ता भी तो नहीं था.
और बड़ी बात तो यह थी कि मुझे भी चूत चुदाई की जरूरत थी तो कहीं ना कहीं मैं भी प्रिंसिपल के लंड का मजा लेना चाह रही थी.
लेकिन मैं यह नहीं दिखा सकती थी कि मैं अपने मजे के लिए ये सब कर रही हूँ.
इतने में ही प्रिंसिपल नीचे मेरी टांगों के पास आकर बैठ गया.
घुटनों पर बैठ कर वो मेरी दोनों टांगों को चौड़ी करके मेरी बालों वाली चूत को ध्यान से देखने लगा.
उसने मेरी चूत पर उंगली से सहला कर देखा.
मुझे भी मजा सा आया.
उसके बाद उन्होंने मेरी चूत के दाने पर उंगली से घिसना शुरू किया.
अब मेरा ध्यान मेरी परेशानी से हटने लगा.
सर की उंगली से चूत को घिसवाने में मुझे मजा सा आने लगा.
उन्होंने मेरी चूत के छेद में उंगली फंसाने की कोशिश की तो मैंने उनके हाथ को पकड़ लिया.
सर ने मेरी ओर गुस्से देखा और मुझे आंखें दिखाने लगे.
मैंने उनके हाथ को छोड़ दिया.
उन्होंने मेरे दोनों हाथों को पीछे ले जाकर अपने हाथ से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से फिर मेरी चूत को छेड़ना शुरू कर दिया.
कुछ देर तक वो मेरी चूत की फांकों को छेड़ते रहे.
उसके बाद उन्होंने मेरी चूत में उंगली दे दी और उसे अंदर बाहर करने लगे.
मेरी चूत को मजा आने लगा.
मैं अब चूत में उंगली का मजा ले रही थी.
उसके बाद सर ने मेरी चूत पर मुंह रख दिया और मेरी चूत को चूसने लगे.
कभी मेरी चूत को होंठों से चूमने लगे और कभी जीभ अंदर देकर उसको चूसने चाटने लगते.
मेरे मुंह से भी अब सिसकारियां निकल रही थीं.
आह्ह … उफ्फ करते हुए मैं प्रिंसीपल से अपनी चूत चटवाने लगी.
मेरी सिसकारियां सुन कर प्रिंसीपल सर को और ज्यादा जोश आ गया और वो मेरी चूत के बालों को नोचते हुए मेरी चूत के छेद में अपनी जीभ से लपलपाने लगे.
मैं एकदम से चिहुंक उठी.
सर की इस हरकत ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया.
वो जोर जोर से मेरी चूत को चूसने लगे.
अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैंने कहा- आह्ह सर .. ये आप क्या कर रहे हैं.
मगर वो मेरी बात को नहीं सुन रहे थे.
बस लगातार वो मेरी चूत को चूसते ही जा रहे थे.
मेरी हालत खराब हो रही थी.
उत्तेजना में आकर मैंने उनके सिर को अपनी चूत पर दबाना शुरू कर दिया.
मैं अपनी चूत को उनके मुंह की ओर धकेलने लगी और वो अभी भी उतनी ही तेजी से मेरी चूत में जीभ से चूसते रहे.
उनको पता लग गया था कि मैं बहुत ज्यादा गर्म हो गयी हूं और जल्दी ही झड़ने वाली हूं.
मैं सच में काफी गर्म हो गयी थी और ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायेगी.
मैं सिसकारियां लेते हुए सर के बालों को सहलाते हुए उनका मुंह अपनी चूत में दबाती रही.
मेरे मुंह से जोर जोर की कामुक आवाजें निकलने लगीं- आह्ह … मर गयी … ओह्ह सर … आह्ह … मैं तो गयी.
वो बोले- अभी नहीं साली रंडी, अभी तो मुझे तेरी चूत में लंड भी डालना है.
इतना कह कर वो उठ गये.
मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैं सर के सामने ही अपनी चूत में उंगली करने लगी.
मैंने तेजी से उंगली चलाते हुए अपनी चूत को रगड़ डाला और मेरी चूत से पानी निकल गया.
मैं थोड़ी शांत हुई और हांफने लगी.
सर मेरे पास आकर मेरे होंठों पर अंगूठे से फिराते हुए बोले- वाह रे रांड, तू तो बहुत ही चुदक्कड़ चीज है.
इतना गजब माल मेरे स्कूल में इतने दिनों से घूम रहा था.
मुझे तो तेरी गर्मी का अंदाजा भी नहीं था साली.
तुझे तो आज ही चोदना पड़ेगा.
ये बता इस वक्त तेरे घर में कौन कौन है? पजामे का नाड़ा बांधते हुए मैंने कहा- कोई नहीं है.
सास-ससुर अपने पैतृक घर में रहते हैं और मेरे पति शहर से बाहर गये हुए हैं.
घर में मैं अकेली ही रहती हूं.
वो बोले- तब तो और अच्छी बात है.
तू आज रात में ही चुद ले मेरे लंड से.
मैं तेरी चूत मारने के लिए बहुत बेचैन हूं.
अगर तूने आज मेरी प्यास को बुझा दिया तो तेरा तबादला टीचर के तौर पर नहीं बल्कि प्रिंसिपल के तौर पर होगा.
मैं वादा करता हूं.
मैं उनकी बात सुनकर हैरानी से उनकी ओर देखने लगी और सोचने लगी कि कहां मैं दूसरे स्कूल में धक्के खाने की सोच रही थी, यहां तो मुझे चूत के बदले में प्रमोशन भी फ्री मिल रहा है.
हम दोनों उनके केबिन से बाहर आ गये.
उन्होंने अपनी गाड़ी निकाली और स्कूल के गेट के बाहर ले जाकर रोक दी.
कार से नीचे उतर कर उन्होंने स्कूल के मेन गेट को बंद किया और वापस से गाड़ी में आकर बैठ गये.
अपने प्रिंसिपल सर के साथ मैं उन्हीं की गाड़ी में अपने घर की ओर चल दी.
उन्होंने अपने फोन पर किसी को कुछ मैसेज लिखा और फिर गाड़ी की स्पीड तेज कर दी.
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
कहानी में आपको मजा आ रहा होगा.
मुझे इस कहानी के बारे में अपना फीडबैक जरूर भेजें.
मुझे आप लोगों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार है.
आप नीचे दी गई ई-मेल आईडी पर अपना संदेश छोड़ सकते हैं.
इसके अलावा नीचे दिये गये कमेंट बॉक्स में भी अपने विचार रख सकते हैं.
[email protected] कहानी का अगला भाग: स्कूल टीचर का तबादला-2
स्रोत:इंटरनेट