. भाभी की गांड का नजारा कुछ ही देर में भाभी कॉफ़ी और कुछ नमकीन ले कर आईं.
हम दोनों बैठ कर नाश्ता करने लगे.
जब मैं कॉफ़ी पी रहा था तो मेरी नजर भाभी गांड की तरफ गयी, जो कि काफी उठी हुई है.
ऐसा लग रहा था जैसे भाभी की गांड मेरे लंड को निमंत्रण दे रही हो कि आओ मुझ में घुस जाओ.
मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैंने भाभी की गांड को हल्के से दबा दी.
भाभी- यह क्या कर रहे हो? मैं- भाभी मुझे आपकी गांड मारनी है.
भाभी- नहीं, मैंने सुना है गांड में बहुत ज्यादा दर्द होता है … इसलिए मैं गांड नहीं मरवा सकती.
मैं- प्लीज प्लीज भाभी गांड मारने दो ना.
आपकी गांड में मैं धीरे धीरे लंड डालूंगा … अगर दर्द हुआ तो मुझे बता देना, मैं नहीं करूँगा.
पर भाभी नहीं मान रही थीं इसलिए मैंने थोड़ा और जोर दिया और थोड़ा उदास हो गया, जिससे भाभी मान गईं.
उन्होंने कहा कि तेरी खुशी के लिए मान रही हूँ … लेकिन वादा कर कि अगर दर्द हुआ तो तू जबरदस्ती नहीं करेगा.
मुझे तो बस उनकी गांड चाहिए थी, इसलिए मैंने उन्हें वादा कर दिया.
इसके बाद मैं उन्हें किस करने लगा, जिससे वो जल्दी गर्म हो जाए.
किस करते करते मैं उनकी चूत की तरफ आ गया और उनकी चूत में अपनी जीभ डालकर उनकी चूत से खेलने लग गया.
अब तक वो भी गर्म हो गयी थीं, क्योंकि वो मुझसे कह रही थीं कि वो मेरा लंड चूसना चाहती हैं.
मैं झट से 69 की पोजीशन में आ गया.
अब हम दोनों आराम से एक दूसरे को चाट रहे थे.
उनके मुँह में मेरा हथियार और भी गर्म हो गया इसलिए मैंने देर न करते हुए उन्हें एक बार फिर से कुतिया बनाया और उनके पीछे आ गया.
मैंने पास ही रखी वैसलीन की डिब्बी उठाई और वैसलीन निकाल कर अपने लंड में अच्छे से लगा ली और भाभी की गांड में भी मैंने वैसलीन लगा दी, जिससे लंड घुसने में आसानी हो.
भाभी की गांड कुंवारी थी और उसका छेद भी छोटा था.
अब मैं अपने लंड को उनकी गांड की लकीर पर टिका कर पेलने की तैयारी कर ही रहा था कि भाभी ने फिर से मुझे कहा- प्लीज धीरे डालना, मुझे डर लग रहा है.
मैं- टेंशन मत लो भाभी … आपको कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा.
इतना कह कर मैं अपना लंड उनकी गांड में डालने की कोशिश करने लगा, पर हर बार मेरा लंड फिसल जाता रहा.
इसलिए इस बार मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी गांड को थोड़ा चौड़ा किया और एक जोरदार झटका दे मारा, जिससे मेरा लंड आधे से ज्यादा उनकी गांड में घुस गया.
भाभी दर्द के मारे चिल्ला उठीं और उनकी आंखों में आंसू आ गए.
साथ ही वो छटपटाने लगीं और अपनी गांड में से मेरे लंड को निकालने की कोशिश करने लगीं- मार डाला … प्लीज निकालो इसे … मुझे नहीं मरवानी अपनी गांड … फाड़ दिया मादरचोद ने मेरी गांड को.
पर मुझे तो जैसे भी भाभी की गांड को चोदना ही था, इसलिए मैंने कहा- बस एक बार दर्द होता है भाभी … अब नहीं होगा.
भाभी- बहन के लौड़े .. तूने कहा था कि जबरदस्ती नहीं करेगा … लेकिन तू मादरचोद निकला.
उनके इतना कहते ही मैंने उनसे बिना कुछ कहे एक और जानदार झटका मारा, जिससे मेरा लंड उनकी गांड में पूरा घुस गया.
साथ ही मैंने उनको कस के पकड़ लिया और एक हाथ से उनके मुँह को दबा दिया, जिससे कारण वो छूट न सकें और चिल्ला न सकें.
थोड़ी देर यूं ही उनकी गांड में लंड डाले पड़े रहा.
थोड़ी देर बाद जब मुझे लगा कि सब नार्मल है, तो मैंने धीरे से अपना हाथ उनके मुँह से हटाया और उन्हें सॉरी बोला.
लेकिन अब वो खुद धीरे धीरे अपनी गांड को आगे पीछे करने लगीं, जिससे मैं समझ गया कि यह अब पूरी तरह तैयार हैं.
अब मैं भी धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगा और उनकी गांड को चोदने लगा.
उनकी गांड इतनी टाइट थी कि मेरे लंड में हल्का सा दर्द हो रहा था.
भाभी- बहनचोद, तूने मुझसे झूठा वादा करके मेरी गांड फाड़ दी.
मैं- क्या करूँ तू है ही इतनी मस्त माल रंडी.
अब तक मैं पूरे जोश में आ गया था और पूरी स्पीड में उन्हें चोद रहा था.
भाभी जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं, जो कि इस चुदाई के कार्यक्रम को और भी मधुर बना रही थीं.
आखिरकार 15-20 झटके मारने के बाद मैंने अपना रस उनकी गांड में भर दिया और उनके ऊपर गिर गया.
भाभी की आंख में आंसू थे, लेकिन खुशी भी थी.
वो मेरे बालों को सहलाने लगीं, जिससे कुछ ही देर में मेरी आंख लग गयी.
जब आंख खुली तो अंधेरा हो चुका था इसलिए मैं उठा और अपने कपड़े पहन कर उनको एक प्यार भरा किस दे कर अपने घर आ गया.
इसके बाद आगे हमें जब भी मौका मिलता है, हम चुदाई जरूर कर लेते हैं.
अब तो भाभी ने मुझे प्रॉमिस किया है कि वो अपनी सहलियों की चूत भी मुझे दिलाएंगी.
तो दोस्तो, यह थी मेरी जीवन की पहली सेक्स स्टोरी.
आशा करता हूँ कि आप सभी को यह सेक्स स्टोरी अच्छी लगी होगी.
भाभी की गांड चुदाई की इस कहानी पर आपके विचार जानने के लिए मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा.
आपका राहुल [email protected].
स्रोत:इंटरनेट