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होली पर दादा जी के बाद मैंने भी चुदाई करी विधवा माँ की

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होली पर दादा जी के बाद मैंने भी चुदाई करी विधवा माँ की 1

. होली पर दादा जी के बाद मैंने भी चुदाई करी विधवा माँ की मेरी विधवा माँ के कामुक जिस्म में उनकी गांड सबसे ज्यादा उभरी हुई थी इस वजह से मेरा दिल उन्हें घोड़ी बनाकर उनकी गांड मारने. का करता था मगर वो मेरी सगी माँ थी उन्होंने मुझे जन्म दिया और पाल पोस कर बड़ा करा था इस लिए माँ बेटे के पवित्र रिश्ते की मर्यादा की वजह से भला मैं उनसे सेक्स करने के लिए कैसे बोल सकता था इस लिए बस उनके. नाम की मुठ मार कर अपनी हवस शांत कर लिया करता था मेरे पापा का कई साल पहले ही देहांत हो चुका था.
घर में हमारे साथ केवल मेरे बुजुर्ग दादा जी रहते थे.
वो ज्यादातर अपने रूम में ही रहते थे और धार्मिक किताबें पढ़ते रहते थे.
मेरी माँ मेरे ठरकी दादा जी से भी नहीं शरमाती थी.
वो सुबह सुबह एक जालीदार कुर्ते और एक दम चुस्त सलवार में घूमती रहती थी जिसके अंदर से उनकी ब्रा व पेंटी बिलकुल साफ़ साफ दिखती रहती थी.
मेरी सुन्दर और सेक्सी माँ के कुर्ते के अंदर से मेरी बदचलन माँ की गांड नंगी तो नहीं दिखती थी लेकिन फिर भी गांड की गोलाई उसके कुर्ते को अपनी दरार में फंसा लेती थी जिससे मेरी बदचलन माँ की कुर्ती गांड में घुस जाती थी और उसके मोटे मोटे कुल्हे किसी फुटबॉल के जैसे मोटे मोटे एकदम फुले हुए दिखने लगते थे.
विधवा माँ को दादा जी से चुदते हुए देखने के बाद उनकी चुदाई करने और घोड़ी बनाकर उनकी गांड मारने की यहाँ घटना पिछले साल की है जब होली का त्योहार था.
इस होली पर मेरे ठरकी दादा जी भी घर पर ही थे.
उस दिन मैं सुबह के 9-10 बजे अपने घर के पहले माले पर चला गया.
मेरी माँ ने सोचा कि मैं अपने दोस्तों के साथ में घर से बाहर होली खेलने के लिए चला गया हूं और घर में वो ससुर और बहु बिलकुल अकेले हैं.
फिर थोड़ी देर के बाद ठरकी दादा जी बाहर आ गये.
होली का त्योहार था और मैं ऊपर बालकनी में खड़ा होकर निचे काम कर रही मेरी माँ के मदमस्त हुस्न को गन्दी नजरों से घुर घुर कर देख रहा था.
ठरकी दादा जी ने माँ को हैप्पी होली विश किया और फिर माँ को रंग लगाने लगे.
मैंने देखा कि मेरे बुजुर्ग दादा जी होली खेलने के बहाने मेरी सुन्दर और सेक्सी माँ के गालों को प्यार से सहलाते हुए रंग लगा रहे थे जैसे कि माँ उनकी बीवी हो.
फिर रंग लगाने के बहाने से ठरकी दादा जी ने मेरी माँ के स्तनों को भी दबा दिया.
मगर ज्यादा जोर से नहीं दबाया बस हल्का ही दबाया था.
फिर माँ थोड़ा मुंह बना कर अंदर आने लगी.
मैं भी मेरे माँ और उनके ससुर जी की जासूसी करने के लिए अंदर की तरफ आया और सीढ़ियों से नीचे देखने लगा.
मैंने देखा कि ठरकी दादा जी भी मेरी माँ के पीछे पीछे अंदर आ गये और मेरी न से बोले की अरे बहु मैं तुम्हारे पिता के जैसा हूँ आज के दिन नाराज नहीं होते हैं.
इतना बोल कर उन्होंने माँ को पकड़ लिया और उनकी मारने के लिए अपना लंड उनकी गांड पर सटा दिया.
मेरी माँ ने अपनी पिता की उम्र के ससुर जी के इन सभी गन्दी हरकतों का जार भी विरोध नहीं करा जिससे ये साफ साफ समझ आ रहा था की मेरे दादा जी मेरी माँ के साथ किसी तरह की जोर जबरजस्ती नहीं कर रहे हैं बल्कि इन सब में उनकी भी सहमती है.
मेरे ठरकी दादा जी ने मेरी माँ के दूध से भरे बड़े बड़े स्तनों को आगे उनके कपड़ों के अंदर हाथ डालकर भींचने लगे और पीछे से माँ की गांड पर लंड को रगड़कर उन्हें सेक्स करने के लिए कामवासना से भरने लगे.
मेरी बदचलन माँ भी अब अपने पिता की उम्र के वृद्ध ससुर जी के लंड से अपनी विधवा चूत की चुदाई करवाने के लिए गर्म होने लगी थी.
वो ठरकी दादा जी के द्वारा अपने स्तनों का दबवाने का मजा ले रही थी.
दो मिनट बाद ही माँ ने हाथ पीछे ले जाकर ठरकी दादा जी के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी.
ठरकी दादा जी बहुत कामुक हो गये और उन्होंने मेरी माँ को चोदने के लिए अपनी पैंट खोल दी.
अपनी पेंट खोने के बाद मेरे बुजुर्ग दादा जी ने मेरी विधवा माँ की सलवार भी निकलवा दी और उनके कुर्ते को ऊपर उठा दिया.
दोस्तों जैसे ही मेरे ठरकी दादा जी ने मेरी कामुकता से भरी माँ की सलवार उतारी तो मुझे मेरी विधवा माँ माँ गांड बिलकुल साफ साफ दिखाई देने लगी थी और अब मेरा भी दिल करने लगा था होली खेलने के बहाने मेरी माँ की इज्जत पर हाथ डालने का.
उनकी गांड इतनी बड़ी थी कि मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी.
माँ ने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी.
ठरकी दादा जी ने मेरी नंगी माँ की को दबाना शुरू कर दिया.
वो उसके मोटे मोटे कूल्हों को दोनों हाथों से जोर जोर से भींचने लगे थे.
मेरी विधवा माँ दादा जी के लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उनकी जोर जोर से मुठ मारने लगी थी.
मेरे दादा जी की मुठ मारते मरते मेरी माँ मेरे दादा जी से बोली की ससुर जी आज तो होली का त्योहार है, आज तो होली खेलने के बहाने मेरी चुदाई करने में देर मत करो…इतना सुनते ही ठरकी दादा जी ने माँ की गांड के उप्पर अपने खड़े लंड को रगड़ना शुरू कर दिया.
माँ अपनी गांड को ठरकी दादा जी के लंड पर घिसने लगी थी.
होली खेलने के बहाने वो दोनों एक दूसरे को घिस रहे थे.
उसके बाद ठरकी दादा जी ने दोनों हाथों से माँ की गांड को खोल कर उसका छेद देखा और गांड मारने के लिए अपना खड़ा लंड मेरी बदचलन माँ की गांड के छेद पर लगा कर उसको अपनी बांहों में भींच लिया.
ठरकी दादा जी ने थोड़ा नीचे होकर अपनी गांड को नीचे किया और माँ की गांड के छेद में लंड का प्रवेश करा दिया.
ठरकी दादा जी किसी कुत्ते की तरह मेरी नंगी माँ की गांड से चिपके हुए थे और अपना लंड मेरी बदचलन माँ की गांड में ठोकने की कोशिश कर रहे थे.
धीरे धीरे करके ठरकी दादा जी ने खड़े खड़े ही मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ की टाइट गांड के छेद में लंड घुसा दिया और उनकी गांड की चुदाई करने लगे.
दो मिनट की चुदाई के बाद मेरी नंगी माँ चुदवाते चुदवाते वहीं फर्श पर लेट गयी और मेरे दादा जी मेरी माँ के ऊपर लेट कर उनकी गांड मारने लगे.
करीब आधे घंटे तक मेरी माँ ने अपनी गांड की चुदवाई करवाई अपने ससुर जी के लंबे मोटे लंड से और फिर उठ कर मेरे दादा जी से बोली की अब एक बार मेरी चूत पर भी नजर डाल लो ससुर जी.
फिर नंगी माँ अपनी चूत की चुदाई करवाने के लिए सीधी हो गयी.
उस दिन पहली बार मैंने मेरी माँ को नंगी बिना सलवार और कुर्ते के देखा था सच में मेरी माँ नंगी बहुत ही ज्यादा नशीली दिखाई दे रही थी.
मेरी बदचलन माँ की चूत पर काफी घने काले झांट के बाल थे.
ठरकी दादा जी ने अपने लंड को माँ की चूत में घुसा दिया और उसको किसी रंडी की तरह जोर जोर से धक्के लगाकर चोदने लगे और अपनी कामवासना शांत करने लगे.
चुदते चुदते मेरी विधवा माँ के मुंह से बहुत ही ज्यादा मादक सिसकारियां निकलने लगीं थी वो चुदवाते चुदवाते बोल रही थी की हां … चोदो … आह्ह … जोर से … हां और तेज … आह्ह … चोदते रहो मुझे अपनी रंडी बनाकर ससुर जी … आह आह आह … यस… ओह आह्ह याह … चोदो … और चोदो.
ठरकी दादा जी ने अब माँ की चूत चुदाई की स्पीड तेज कर दी.
करीब आधे घंटे तक मेरी नंगी माँ की चूत में तेज तेज धक्के लगाने के बाद वो मेरी बदचलन माँ की चूत में ही माल गिराकर माँ के ऊपर लेट गये.
दो मिनट तक दोनों पड़े रहे और फिर दोनों अलग हो गये.
फिर वो उठे और सूट के ऊपर से माँ की चूचियों को दबाने लगे.
फिर उन्होंने माँ के कुरते को निकलवा दिया और अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए उस विधवा रांड को पूरी नंगी कर दिया.
फिर वो मेरी नंगी माँ के बड़े बड़े स्तनों को जोर जोर से दबाने लगे.
माँ के बड़े बड़े स्तनों से खेलते हुए मेरे हवस से भरे दादा जी बोले की फिर कब चुदेगी जान मेरे लंबे मोटे लंड से? मेरी कामुक माँ बोली की अगले किसी त्यौहार पर। ठरकी दादा जी बोले- नहीं, तू कल ही चुदेगी.
फिर ठरकी दादा जी ने अपनी पैंट पहनी और फिर बाहर चले गये.
दादा जी के साथ सेक्स करने के बाद मेरी विधवा माँ नंगी ही किचन में चली गयी.
मेरा लंड भी पूरा तना हुआ था और माँ मेरे सामने नंगी थी.
मैं इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था.
मैं धीरे से नीचे आया और चुपचाप बिना आवाज किये अपनी पैंट उतार ली.
फिर मैं धीरे से किचन की ओर बढ़ा.
माँ दूसरी ओर मुंह करके खड़ी थी.
मेरी नंगी माँ की फुटबॉल जैसी गांड देखकर मेरी हवस अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी और अब मैं मेरी माँ के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए पागल हुए जा रहा था अब मैंने निर्णय कर लिया था की जब मेरे दादा जी होली खेलने के बहाने अपनी. बहु के साथ अवैध सेक्स संबंध बना सकते है तो फिर मैं क्यों नहीं.
होली पर होली खेलने के बहाने दादा जी के बाद मैंने भी चुदाई करी मेरी विधवा माँ की और घोड़ी बनाकर उनकी गांड भी मारी हिंदी सेक्स स्टोरी :- अब मैंने आज होली के त्योहार पर होली खेलने के बहाने मेरी विधवा माँ की इज्जत लुटने का पूरा मन बना लिया था.
अब मैं अपने खड़े लंड को हाथों में लिए हस्तमैथुन करते हुए मेरी कामुक विधवा माँ की ओर बढ़ रहा था.
माँ के करीब पहुँचते ही मैंने पीछे से माँ को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और होली खेलने के बहाने उनके बूब्स पर बहुत सारा रंग लगा दिया.
मेरी कामुक माँ बोली की ससुर जी फिर आ गये आप होली खेलने के बहाने अपनी हवस शांत करने के लिए मैंने कितनी बार आप को समझाया है की मैं आप की बहु हूँ कोई रंडी नहीं जो आप मुझे इतना ज्यादा चोदते हो अभी मेरा बेटा आ गया ना तो उसे हम दोनों के अवैध सेक्स संबंधों के बारे में पता चल. जायगा और फिर आज होली के दिन घर में माहोल खराब हो जायगा.
दोस्तों मेरे सामने मेरी माँ नंगी खड़ी थी और मेरी आँखों के सामने उनकी थी तो मैंने पहले उनकी गांड पर भी बहुत सारा रंग लगाया और फिर रंग लगाने के बाद मैं मेरी माँ की गांड में लंड घुसाने की कोशिश करने लगा.
जैसे गांड मारने के लिए मैंने मेरी माँ की गांड पर मैंने मेरे लंड को लगाया तो उन्हें पता चल गया कि वो उनके ससुर जी का लंड नहीं बल्कि किसी और मर्द का लंड है आखिर पता भी क्यों नहीं चलता ना जाने कितने वर्षो से मेरे दादा जी का लंड ले रही थी साली रंडी छिनाल की मौत के बाद से.
वो पीछे मुड़ी तो मुझे पाकर चौंक गयी.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की बेटा तू यहाँ और ये क्या कर रहा है मेरे साथ मैं तेरी माँ हूँ तू भला मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध कैसे बना सकता है यह गलत है ये तो बहुत बड़ा पाप है?मैंने घुस्से से बोला की नहीं तू मेरी माँ नहीं हो सकती तू. तो एक बदचलन रंडी है अभी कुछ देर पहले ही मैंने तुझ बदचलन रंडी को ठरकी दादा जी के लंड से चुदवाते देखा है.
इतना बोलकर मैंने मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ के दूध से भरे मोटे मोटे स्तनों को जोर से भींच दिया और उसको किस करने लगा.
मेरी माँ मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहती थी इस लिए वो मुझे पीछे हटाने लगी लेकिन मैंने जोर जोर से उनके बड़े बड़े स्तनों को रगड़ दिया.
फिर मैंने मेरी बदचलन रंडी माँ की घने झांट के बालों वाली चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
अब मेरी माँ भी धीरे धीरे मेरे साथ सेक्स करने के लिए गर्म होने लगी थी और उनका विरोध भी अब धीरे धीरे कम होने लगा.
थोड़ी देर के बाद ही मेरी माँ ने अपने कामुकता से भरे जिस्म को मुझे सौंप दिया और अब उस विधवा रांड ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया.
मैं मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ के नशीले होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और वो भी मेरे होंठों को चूसने लगी.
मैं बहुत जल्दी ही सब कुछ कर लेना चाहता था.
मुझसे रुका नहीं जा रहा था.
मैंने मेरी बदचलन माँ की चूत पर लंड लगाया और ख़ड़े खड़े ही मेरी बदचलन माँ की चूत में अंदर घुसा दिया.
मेरा लंड सट्ट से अंदर चला गया.
मैंने उसको वहीं किचन स्लैब पर टिका लिया और मेरी बदचलन माँ की चूत को चोदते हुए उसको लिप किस करने लगा.
माँ भी चुदने का मजा लेने लगी.
कुछ देर किचन में चोदने के बाद मैं मेरी विधवा माँ को हॉल में लगे पलंग की ओर खींच ले गया.
उसको धक्का देकर पलंग पर गिराया और सेक्स करने के लिए उस छिनाल रांड के ऊपर चढ़ गया.
मैंने उसको जोर से लिप किस किया.
उसने भी मेरा पूरा साथ दिया.
फिर मैंने मेरी बदचलन माँ की भारी भारी जांघों को थोड़ी फैलाया और मेरी बदचलन माँ की चूत में लंड को पेल दिया.
मैं उसके ऊपर लेट कर मेरी बदचलन माँ की चूत को चोदने लगा.
वो अब जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी- आह्ह बेटा … आह्ह मेरे बच्चे … तू तो अपने ठरकी दादा जी से भी मस्त चोद रहा है … आह्ह … आई … स्स्स … आह्ह … करते हुए वो मेरे बदन को नोंचने लगी.
माँ को चोदते चोदते अब मेरा वीर्य निकलने को हो गया लेकिन मैं चुदाई का ये मजा इतनी जल्दी खत्म नहीं होने देना चाहता था.
मैंने मेरे लंबे मोटे लंड को बाहर निकाल लिया और अपने होंठों से माँ की चूत पर हमला बोल दिया.
मैं मेरी बदचलन माँ की चूत को जोर जोर से चाटने लगा.
वो तड़पने लगी और लंड को फिर से डालने की मिन्नतें करने लगी.
मैं पांच मिनट तक मेरी बदचलन माँ की चूत को चूसता रहा.
अब तक मेरे लंड का जोश भी नियंत्रण में आ गया था.
फिर मैंने माँ के मुंह में लंड दे दिया और उसके मुंह को चोदने लगा.
माँ मेरे लंड को अंदर तक मुंह में लेने लगी.
लंड चुसवाते हुए मैं गाली देकर बोला- साली कुतिया, मजा आ रहा है ना तुझे? वो गूं-गूं करके हामी भरने लगी और लंड को चूसती रही.
नीचे हाथ ले जाकर मैंने मेरी बदचलन माँ की चूत में उंगली दे दी और मेरी बदचलन माँ की चूत को उंगली से चोदने लगा.
मेरी विधवा माँ ने मेरे लंबे मोटे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और बोली की बेटा अब मुझे चोद दाल ज्यादा मत तड़पा और इस होली के त्योहार को यादकर बना दे.
फिर मुझसे मेरी माँ बोली की बेटा जब तूने हम माँ बेटे का पवित्र रिश्ता ही खत्म कर ही दिया है तो अब अच्छे से चोद कुत्ते मुझे अपनी रंडी बनाकर और शांत कर ले अपनी हवस.
ये सुनने के बाद मुझे जोश आ गया और मैंने एक बार फिर से मेरी बदचलन माँ की टांगों को फैला दिया और मेरी बदचलन माँ की चूत में लंड लगा कर धक्का दे दिया.
मेरा खड़ा लंड गच्च से अंदर बुर में चला गया और मैंने मेरी विधवा माँ की शानदार चुदाई करनी शुरू कर दी.
मेरी माँ रानी एक बार फिर से चुदाई के मजे लेते हुए आनंद में गोते लगाने लगी.
मैं भी पूरे जोश में मेरी बदचलन माँ की चूत की जड़ तक मेरा खड़ा लंड पेल रहा था.
होली का त्योहार था बाहर सभी रंग और पिचकारी से खेल रहे थे और यहाँ अंदर मेरी माँ मेरी लंड रूपी पिचकारी से चुदवा रही थी.
मैंने 10 मिनट तक फिर मेरी बदचलन माँ की चूत मारी और फिर जब मेरे लौड़े रूपी पिचकारी से वीर्य रूपी रांड निकलने को हुआ तो मैंने एकदम से अपना लंड माँ की चूत से बाहर निकलकर उनके मुंह में दे दिया और अपने लंड रूपी पिचकारी से रंग रूपी वीर्य माँ के मुंह में ही गिरा दिया.
माँ ने मेरे सरे के सरे वीर्य को एक ही घूंट में अंदर गटक लिया.
माँ के मुंह में वीर्य की पिचकारी चलने के बाद मैं कुछ देर शांत होकर पड़ा रहा और मेरी माँ भी मेरी बगल में नंगी पड़ी रही.
फिर कुछ देर बाद मेरी नंगी माँ उठकर जाने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और फिर से अपनी हवस शांत करने के लिए उस विधवा रंडी को पलंग पर गिरा दिया.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की अब तो जाने दे हरामी, मुझे खाना बनाना है, तेरे ठरकी दादा जी आते होंगे.
मैंने बोला की साली रंडी, अभी भी तुझे ठरकी दादा जी की पड़ी है? इधर आकर घोड़ी बन जा साली बदचलन रांड आज मैं तेरी इस फुटबॉल जैसी विधवा गांड की भी प्यास भुजा देता हूं.
मैंने माँ को डॉगी सेक्स पोजीशन में चोदने के लिए घोड़ी बना लिया और मेरी बदचलन माँ की मोटी गांड को अपनी जीभ से चाटने लगा.
जब मैं मेरी माँ की गांड चाट रहा था तब उस बदचलन विधवा को भी बड़ा मजा आने लगा था लेकिन वो माँ बेटे के पवित्र रिश्तों की मर्यादा का नाटक करने लगी और मेरे आगे गिडगिडाने लगी की अब मुझे जाने दे बेटा मेरी गांड मत मार ये सब ठीक नहीं है.
मेरी घोड़ी बनी हुई विधवा माँ की गांड पर थप्पड़ मारते हुए मैंने बोला की जब तू अपने ससुर जी से अपनी गांड मरवा रही थी तब तो तू इतना नाटक नहीं कर रही थी अब साली घोड़ी बनी रहे मैं भी दादा जी की तरह तेरी गांड मारूंगा आज, तब पता चलेगा कि क्या सही है और क्या गलत जब तू अपने ससुर से अपनी चुदाई करवाती है तब तुझे ससुर और बहु के बाप बेटी जैसे पवित्र रिश्ते की मर्यादा का ख्याल नहीं आता आज जब मैं तेरी गांड की चुदाई करके अपनी कामवासना शांत करना चाहता हूँ तो तुझे माँ बेटे के पवित्र रिश्तों की मर्यादा का. ख्याल आ रहा है साली छिनाल चुप कर के घोड़ी बनी रहे और मुझे तेरी गांड मारने दे?इतना बोलकर मैंने मेरी घोड़ी बनी हुई नंगी माँ की फुटबॉल जैसी गांड के छेद में बहुत सारा थूक दिया और अपनी उँगली मेरी बदचलन माँ. की गांड के छेद में पेल दी.
अब मैंने मेरी घोड़ी बनी हुई माँ की गांड में उंगली अंदर बाहर करनी शुरू करी और अपनी ऊँगली से ही उनकी गांड को चोदना शुरू किया.
मेरी ऊँगली माँ की टाइट गांड के छेद में घुसते ही वो पहले उचकी लेकिन फिर आराम से अपनी दोनों आँखे बंद करके मेरी उंगली को अपनी गांड के छेद में लेने लगी.
दो मिनट तक मेरी विधवा माँ की गांड को अपनी उंगली से चोदने के बाद मैंने अपने लंड को उसके मुंह में दे दिया और उसे चूसकर खड़ा करने को बोला.
मेरी घोड़ी बनी हुई नंगी माँ ने मेरे लंड को चूस चूस कर खड़ा कर दिया.
करवाने के बाद मैंने मेरी नंगी माँ को गांड चोदने के लिए झुका कर घोड़ी बनाया और पीछे से मेरी बदचलन माँ की गांड में लौड़ा पेल दिया.
मेरी बदचलन माँ की कमर को पकड़ कर मैं मेरी बदचलन माँ की गांड मारने लगा.
माँ मस्ती में सिसकारी लेते हुए अपनी गांड चुदवाने लगी.
गांड मारने का भी मेरा ये पहला ही अनुभव था.
मैंने अपनी रानी माँ की गांड करीबन 20 मिनट तक पेली और फिर मेरी बदचलन माँ की गांड से लंड निकाल कर अपना माल उसके चूतड़ों पर छोड़ दिया.
फिर वो उठ कर जाने लगी.
मैंने एक कपड़े से उसके चूतड़ों को साफ कर दिया.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की मैं जाती हूं अब, किचन में बहुत सारा काम फैला पड़ा है.
मैंने मेरी माँ से बोला की बिना कपड़ों के ही रसोई में काम लारोगी क्या आप? मेरी नंगी माँ बोली की अब कपड़े डालने के लिये बचा ही क्या है, सब तो कर लिया तूने और ससुर जी ने मुझ बेचारी विधवा औरत के साथ.
फिर मैंने बोला की कुछ तो पहन लो.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की ठीक है, कोई भी कपड़ा दे दे.
मैंने उसको ब्रा और पैंटी लाकर दी और कहा कि अब तू मेरे और ठरकी दादा जी के सामने ऐसे ही रहा करेगी.
ब्रा और पैंटी में ही घर में घूमेगी.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की नहीं, ऐसे नहीं रहा जायेगा.
फिर मैंने उसको एक पैंट दे दी और बोला कि इससे ज्यादा अब कुछ नहीं पहनना है.
अब मैंने बोला की अब अगली बार कब चुदना है? मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की अब अगले साल चोद लेना.
मैं अंदर ही अंदर मुस्कराने लगा.
मैं तो आज ही फिर से मेरी बदचलन माँ की चुदाई करने वाला था और रोज ही उसको चोदने वाला था.
फिर ऐसे ही दिन में मैं दोस्तों के साथ होली खेलने चला गया.
देर शाम लौटा और नहाया.
मैं काफी थक गया था इसलिए रात का खाना होने के बाद बेड पर जाते ही नींद आ गयी.
अगले दिन मैं उठा और बाथरूम में जाने लगा.
हमारा कॉमन बाथरूम था जिसका एक दरवाजा मेरे रूम में था.
धीरे से मैंने दरवाजा खोल कर देखा तो माँ अपनी गांड को मसल मसल कर नहा रही थी.
मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं नंगा होकर अंदर घुस गया.
माँ के चेहरे पर साबुन लगा था.
उसने सोचा कि मैं ठरकी दादा जी हूं.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की क्या बात है, आज तो आप बड़ी जल्दी आ गये? मैंने बिना कुछ बोले उसको वॉश बेसिन पर झुकाया और मेरी बदचलन माँ की गीली गांड में लंड पेल दिया और उसे चोदने लगा.
फिर शावर के नीचे उसका साबुन धुल गया और उसने आँखें खोल लीं.
वो मुझे देख कर चौंक गयी.
मैंने उसको नीचे दबाया और उसे फर्श पर लिटा कर चोदने लगा.
मेरी कामुकता से भरी विधवा माँ बोली की क्या कर रहा है सुबह सुबह ये? छोड़ मुझे.
मैंने मेरी बदचलन माँ की चूचियों पर एक थप्पड़ा मारा और कस कर भींच दिया.
मेरी बदचलन माँ की चीख निकल गयी.
मैंने बोला की चुप साली रंडी.
कल तो किचन में नंगी घूम रही थी.
आज तू नखरे कर रही है चुदवाने में?  मैंने फिर से मेरी बदचलन माँ की चूत में लंड पेला और उसे एक बार भी अपनी चोदने लगा.
15 मिनट तक मेरी बदचलन माँ की चुदाई की और फिर मेरी बदचलन माँ की चूत के अंदर ही अपने लंड से पिचकारी चला दी और उनकी बुर के अंडार ही झड़ गया.
उसके बाद मैं बाथरूम से बाहर चला गया.
जब वो तौलिया लेपट कर बाहर आयी तो मैंने एक बार फिर से मेरी बदचलन माँ की चूत मारी.
चुदवाने के बाद मेरी विधवा माँ नंगी ही किचन में काम करने के लिए चली गयी.
मैं मेरे खादले लंड से माँ की टाइट छुट के साथ होली खेलने के लिए वहां पर भी उनके पीछे पीछे चला गया और फिर रसोई में भी मैंने मेरी बदचलन माँ की खूब जमकर चुदाई करी.
इस तरह से मेरे दादा जी और मैंने मेरी विधवा माँ को चोद चोद कर हमारे घर की रंडी बना दिया था जब दादा जी और मेरा सेक्स करने का मन होता था तो माँ को अपने बैडरूम में चोदने के लिए ले जाया करते थे.
अब मेरी माँ मेरे और अपने ससुर जी के सामने ब्रा में ही रहती थी.
तब से लेकर अब तक माँ मेरे से चुदवाती रहती है और कभी इन अवैध सेक्स संबंधो का विरोध नहीं करती.
मेरी विधवा माँ कभी मेरे बुजुर्ग दादा जी के लंड से तो कभी मेरे लंड से अपनी चुदाई करवाकर अपनी कामवासना शांत करवाती रहती है.
ऐसा लगता है कि ठरकी दादा जी और मैं अब दोनों ही माँ के पति हैं क्योकि अब हम दोनों ही मेरी माँ की हर जरुरत का ख्याल रकते हैं.
तो दोस्तों उम्मीद करता हूँ की होली के त्योहार पर होली खेलने के बहाने अपनी सगी विधवा माँ की चुदाई करने की मेरी यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी “होली खेलने के बहाने दादा जी के बाद मैंने भी चुदाई करी मेरी विधवा माँ की और घोड़ी बनाकर उनकी गांड भी मारी” आप सभी को बहुत पसंद आई होगी और आप इसे ज्यादा से. ज्यादा शेयर भी करेंगे….
स्रोत:इंटरनेट