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होली पर देसी भाभी की रंगीन चुदाई 2

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होली पर देसी भाभी की रंगीन चुदाई 2 1

. भाभी अपने नाईट गाउन में आईं.
उनके चूचे वैसे ही 32 साइज़ के हैं और उन्होंने अन्दर ब्रा भी नहीं पहन रखी थी.. जिससे उनके तने हुए मम्मे उछले जा रहे थे.
भाभी मेरे पास आ कर बैठ गईं और बोलीं- देवर जी पहले मेरे लिए भी एक पैग बनाओ.
मुझे नहीं लगता आज रात तुम मुझे सोने दोगे, तो आज मैं भी थोड़ी पी लेती हूँ.
मैंने उन्हें एक पैग बना कर पिलाया और उन्हें अपनी बांहों में खींचने लगा.
वो बोलीं- अरे देवर जी, इतनी जल्दी क्या है, मैं आपको बताती हूँ कि क्या करना है और कैसे करना है.
मैंने उनकी तरफ सवालिया निगाह से देखा.
तो भाभी ड्रामाई अंदाज में कहने लगीं- आप ऐसा मान लो कि हमारी कोई सैटिंग नहीं हुई है और तुमने मुझ पर गलत नजर रख कर अपने भैया को नींद की गोली देकर सुला दिया है.
अब तुम्हें मेरे साथ जबरदस्ती सेक्स करना है.
मैं भी लंड सहलाता हुआ बोला- ठीक है मेरी जाने बहार … आपका हुकुम मेरे सर माथे.
भाभी ने एक्टिंग शुरू कर दी- देवर जी, आज इन्होंने ज्यादा पी ली है क्या? चलो, इन्हें अन्दर रूम तक ले जाने में जरा मेरी मदद करो.
अब भैया को हमने दोनों तरफ से पकड़ कर उठाया और चलने लगे.
पर मैंने भाभी को थोड़ी दूर जाकर ही पकड़ लिया और भैया को वहीं पड़े दीवान पर लिटा दिया.
भाभी- अमित ये क्या कर रहे हो तुम? छोड़ो मुझे.. वरना मैं चिल्लाऊंगी.. तुम अपने भैया को दारू पिला कर मेरे साथ ये सब करोगे? अब तक मैं अपना आपा खो चुका था.
मुझसे इंतजार नहीं हो रहा था, एक तो दारू का नशा.. ऊपर से भाभी को चोदने का जुनून.
मैंने भाभी के मम्मों को उनकी मैक्सी के ऊपर से ही मसल दिया और उन्हें कसके पकड़ने लगा.
पर वो मुझे धक्का देकर रूम की ओर भागीं.
मैं उनके पीछे पीछे … वो आगे आगे … भागते भागते कभी रूम में, कभी हॉल में … फाइनली भाभी अपने रूम का दरवाजा बन्द ही कर रही थीं कि मैंने उन्हें धकेल कर पकड़ लिया.
अब मैं अपनी औकात पर आ गया था.
मैंने उनके बाल कस कर पकड़ लिए और उन्हें अपने से सीने चिपका कर दूसरे हाथ से उनकी मैक्सी फाड़ दी.
फिर उन्हें नीचे गिरा जोर जोर से उनके मम्मों को चूसने लगा.
ऐसा लग रहा था कि सही में मैं उनका बलात्कार कर रहा हूँ.
अब भाभी भी उत्तेजित होकर ‘शीईईईई उईईई.. आह ओऊऊ..’ करने लगीं.
मैंने जोश में उसके एक बूब को काट भी लिया.
मुझसे ज्यादा कंट्रोल नहीं हो रहा था, तो आनन फानन में मैंने भाभी की चड्डी भी निकाल दी.
बस फिर आव देखा न ताव.. और एक झटके में भाभी की नंगी चूत में लंड पेल दिया.
लंड चूत के अन्दर जाते ही भाभी भी नीचे से झटके मारने लगीं और मैं भी तबियत से उन्हें ठोक और मसल रहा था.
चुदाई करवाते करवाते उन्हें भी ना जाने क्या सूझी कि मुझे धक्का देकर फिर से भागने लगीं.
मैंने फिर से उन्हें पकड़ लिया और दुगने जोश से फिर से लंड चुत में पेल दिया.
अब मैं जानवरों की तरह उन्हें चोदने लगा.
पूरे कमरे में ‘फच फच..’ और ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… उईईई उह आह.. हां देवर जी.. ऐसे ही हां और जोर से..’ की आवाजें गूंजने लगीं.
फिर मेरे लंड के झटकों की रफ्तार बढ़ती गई.
उनके नाखून भी मेरी पीठ पर गढ़ गए और हम दोनों का लावा बाहर हो गया.
अब फिर हम बैठ कर बियर पीने लगे.
चुदाई का दूसरा दौर चला, तो अबकी से भाभी ने मोर्चा संभाला और मेरे लंड के ऊपर जम कर कूदीं.
इस औरत में इतना सेक्स भरा था कि रात भर में 4 बार चुदने के बाद भी भाभी सुबह सुबह अपने पति का लंड चूसने लगीं.
पर जब भैया नहीं उठे तो मेरा लंड चूसने लगीं.
मैं भी थक चुका था, तब भी मैंने दारू की बोटल मुँह से लगा कर नीट खींची और भाभी की चूत पर पिल पड़ा.
कुछ ही देर में भाभी भी पस्त हो चुकी थीं.
वे मेरे लंड की सर्विस से पूरी तरह से खुश थीं.
उसके बाद तो जब भी भाभी मुझे किसी भी प्रोग्राम, त्यौहार पर मिलीं, हम दोनों में हमेशा चुदाई तो हुई ही.. और लंड चुसाई का मजा भी मिला.
दोस्तो, ये थी मेरी सेक्स कहानी.
आप अपने विचार मुझे ईमेल पर दे सकते हैं.
आपका अमित दुबे [email protected]
स्रोत:इंटरनेट