. मैंने उसका नकाब हटा दिया और उसे चुम्बन करने लगा.
पहले बुर्के के ऊपर से ही मैं उसकी गांड जी भर के दबाने लगा, फिर उसके बुर्के को ऊपर करके अन्दर हाथ डाल दिया.
कुछ देर बाद मैंने उसका बुर्का निकाल दिया.
बुर्के के अन्दर उसने सिर्फ गाउन पहन रखा था.
गाउन के ऊपर से मैं उसके बड़े बड़े चुचे दबाने लगा.
चुदास बढ़ गई तो मैंने उसका गाउन निकाल दिया और पहली बार शाजिया मेरे सामने नंगी थी.
उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था.
उसको नंगी देखकर तो जैसे मैं पागल हो गया.
उसका दूध जैसा गोरा अंग और लाजवाब गुलाबी होंठ.
पहली बार उसकी खूबसूरत गुलाबी चूत मेरे सामने थी.
चूत और उसके होंठ इतने गुलाबी थे कि समझ नहीं आ रहा था कि मेरा लंड पहले चूत में डालूं या मुँह में.
वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी.
फिर बिना किसी देरी के मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.
मैं जब अपने कपड़े निकाल रहा था, तब वो मेरे जिस्म को देखने में लगी थी.
शायद उसे भी मजबूत लंड देखने की उम्मीद थी.
मेरे पूरे नंगे होते ही बिना किसी देरी के मैंने उसको नीचे बिठाया और सीधे लंड उसके मुँह में पेल दिया.
शाजिया के कुछ कहने से पहले ही मैंने उसका मुँह चोदना शुरू कर दिया.
दो मिनट तक लंड को उसके मुँह में अन्दर बाहर करने के बाद मैंने लंड बाहर निकाला, तब जाकर उसने राहत की सांस ली.
अगले पल मैंने शाजिया को बिस्तर पर लेटा दिया.
हमारा बिस्तर जमीन पर ही लगा था या यूं कहें बिस्तर के नाम पर हमने एक गद्दी डाली हुई थी.
उस पर शाजिया चित लेट गई थी.
मैंने उसकी टांगें खोल दीं और एक ही शॉट में पूरा लंड उसकी कोमल गोरी गुलाबी चूत में डाल दिया.
उसकी चीख निकलती, इससे पहले ही मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
लंड ने अन्दर गोता लगाना शुरू कर दिया.
शाजिया की चूत ने भी लंड की मेजबानी शुरू कर दी.
शाजिया अपनी गांड उठा कर लंड को चूत की जड़ तक ले रही थी.
बड़ी प्यासी चूत थी.
मुझे शाजिया को चोदने में मजा आने लगा.
मैंने चुदाई करते हुए उसके दोनों मम्मे दोनों हाथों में पकड़ लिए और चूसने लगा.
मैं शाजिया के रसीले चूचों को बारी बारी से चूसने के साथ ही नीचे से उसकी मखमली चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारे जा रहा था.
शाजिया काफी दिनों की प्यासी थी.
उसकी चूत काफी गीली हो चुकी थी.
उसकी वासना बता रही थी कि उसको लंड का मजा न जाने कितने दिनों बाद मिला था.
शाजिया जबरदस्त तरीके से अपनी गांड उठा कर चुदवाने में लगी थी.
करीब दस मिनट की दमदार चुदाई के बाद मैंने शाजिया को उल्टा कर दिया और उसकी गांड पर ज़ोर से चांटे जड़ दिए.
वो आह आह करते हुए मजे लेने लगी.
मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और एक हाथ से उसके बाल पकड़ लिए.
अब मैं अपने दूसरे हाथ से उसकी गांड पर ज़ोर ज़ोर से चांटे मारने लगा.
मेरा लंड तो चूत में खलबली मचा ही रहा था.
उसको भी काफी मजा आ रहा था.
उसको चोदते समय मेरी नज़र शरद पर पड़ी, वो हमें छुप कर सब देख रहा था.
ये देख कर मुझे और ज़ोश आ गया और मैंने जमके चोदना चालू कर दिया अपनी स्पीड बढ़ा दी.
मैं ज़ोर ज़ोर से शाजिया की चूत में लंड अन्दर बाहर करने लगा.
वो भी ‘उम्म्ह … अहह … हय … याह..’ की सीत्कारें ले रही थी.
कुछ देर की दमदार चुदाई के बाद मैंने शाजिया के अन्दर ही अपना सारा पानी छोड़ दिया.
उसकी चूत मेरे वीर्य से भर गयी थी.
फिर कुछ देर यूं ही लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए लेटने के बाद मैंने शरद को आवाज़ लगाई- शरद … कहां हो? आ जाओ.
शरद के बाहर आते ही शाजिया समझ गयी कि यहां मैं अकेला नहीं हूँ, शरद भी है.
शाजिया रोने लगी और कहने लगी- ऐसा मत करो प्लीज.
फिर मैंने शाजिया का चेहरा अपने हाथ में प्यार से लिया और कहा कि मैं कसम देता हूँ कि ये बात बाहर नहीं जाएगी … हम तीनों के बीच ही रहेगी.
शाजिया के हां बोलने से पहले ही शरद शाजिया के ऊपर चढ़ गया.
उसने भी पहले शाजिया के मुँह में लंड दे दिया.
फिर उसी तरह चुदाई की.
मैं एक कुर्सी पर नंगा बैठकर शाजिया और शरद की चुदाई देखने लगा.
शरद उसको बेदर्दी से चोद रहा था.
वो शायद मुझे दिखाना चाहता था कि वो मुझसे भी ज्यादा सख्त मर्द है.
कुछ देर आराम करने के बाद सुबह के 3 या 3.
30 बज रहे होंगे.
शाजिया को फिर हम दोनों जिम के कसरत करने की मशीन के पास ले गए और पोजीशन बना कर बारी बारी फिर से शाजिया की चुदाई की.
इस बार जब मैं पीछे से शाजिया की चूत में लंड पेल रहा था, तब शरद सामने से उसके होंठ को चूम रहा था.
वो उसके चेहरे पर चांटे भी हल्के हल्के मार रहा था.
ये शरद का थोड़ा सा अजीब व्यवहार था, पर इससे मुझे उत्तेजना ज्यादा मिल रही थी.
इस बार मैंने अपना वीर्य शाजिया की गांड के ऊपर पीठ पर छोड़ दिया.
करीब 4 बजे शाजिया ने अपने कपड़े पहने और बुर्का पहन के अपने घर के चली गयी.
मैं और शरद एक दूसरे की तरफ देखकर हंस रहे थे कि हमने किला फ़तेह कर लिया.
कुछ देर शरद और मैं नंगे ही लेट गए.
फिर पांच बजे वो हुआ, जिसकी उम्मीद हमने नहीं की थी.
मेरे जिम के मालिक आए और हमें नंगी हालत में देखकर चिल्लाने लगे.
वे कहने लगे- ये सब जिम में मत करो … शर्म नहीं आती गे बनने में! उनकी बात सुनकर हम दोनों की तो हंसी ही नहीं रुक रही थी … क्योंकि वो शरद और मुझे गे समझ रहे थे.
हम उन्हें शाजिया वाली बात बता नहीं सकते थे, इसलिए चुप रहके सॉरी कह दिया.
यदि आपका प्यार मिला, तो मेरी ये वासना से भरी सेक्स कहानी अभी जारी रहेगी.
आपके मेल का इन्तजार रहेगा.
शाजिया ने हमारी इस चुदाई को हिन्दी सेक्स स्टोरी साईट अन्तर्वासना पर लिख दिया.
इसलिए मैंने भी उस चुदाई को अपने साइड से लिख दिया.
बताना किस की साइड से आपको चुदाई अच्छी लगी.
ये कहानी सत्य घटना पर आधारित है.
[email protected]
स्रोत:इंटरनेट