. घर पहुंचकर मैंने उसको चाबी दी और दरवाजा उसने ही खोला.
वो बाहर ही खड़ा था.
फिर मैं अन्दर गयी और उसको अन्दर आने का इशारा किया.
दोपहर का समय था, इस वक्त ज्यादातर गली के लोग वोटिंग करने गए थे और जो रहे होंगे, वो धूप के वजह से अपने अपने घर में थे.
हमारे घर में पहले हॉल, फिर किचन, फिर मेरा बेडरूम है.
बाजू में देवर का बेडरूम, फिर ऊपर छत पे जाने के लिए बाथरूम के पास से सीढ़ियां हैं.
फिर ऊपर छत पे 2 रूम हैं, जो पहले किराये पे दिये थे, पर अभी खाली हैं.
ऊपर के रूम के लिए किराएदार अच्छे मिलें, तो ही रखते हैं.
मैं सीधा किचन में गयी, जाते ही पानी की बोटल फ्रीज़ से निकली और पानी पीने लगी.
विकी भी पीछे पीछे किचन में आया.
मैंने उसको पानी दिया, तो उसने बोटल हटा दी और मुझे अपनी बांहों में भरके किस करने लगा.
दरवाजा खुला ही था, पर हम हॉल में नहीं किचन में थे.
एक मिनट किस करने के बाद मैंने उससे कहा- बस … अब कोई आ जाएगा, तुम जाओ.
विकी बोला- कुछ देर करने दो.
फिर उसने मेरे पीछे हाथ लगाया और बुरके के ऊपर से मेरी 36 नाप की गांड दबाने लगा.
सामने से अपना लंड बिना बाहर निकाले, मेरे बुरके के ऊपर से ही मेरी चुत के पॉइंट पे रगड़ने लगा.
मैं दरवाजे पर ध्यान दे रही थी.
दरवाजे पे हल्का हरे रंग का पारदर्शी पर्दा था इसलिए बाहर का दिखाई देता था.
वो मेरी गांड दबाने में लगा था और मैं बाहर ध्यान रख रही थी.
फिर उसने बुरके को ऊपर किया और मेरी लेगीस थोड़ा नीचे सरका के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरी मुलायम गांड को दबाने लगा.
गर्मी की वजह से मैंने पेंटी नहीं पहनी थी.
मुझे उसका खुरदुरा हाथ मेरी गांड पर बहुत अच्छा लग रहा था.
फिर एक मिनट के बाद पोजीशन बदल कर वो मेरे पीछे आया और मेरे 34 के बूब्स को बुरके के ऊपर से ही दबाने लगा.
पीछे से मेरी गांड पे लंड रगड़ने लगा.
मैं बार बार बाहर की तरफ ध्यान दे रही थी और वो मुझे दबाने में मस्त था.
उसको पता था कि मैं कितनी चालाक हूँ, बाहर ध्यान दे सकती हूँ, इसलिए वो मेरे जिस्म के उभार के मजे ले रहा था.
फिर बाहर कुछ हलचल दिखी, तो मैंने उसको बस बस कह दिया.
वो भी साइड में हो गया और बाहर हॉल में चला गया.
मैंने लेगीस ऊपर की और बुरका नीचे किया.
उसको पानी की बोतल दी और दरवाजे का पर्दा बाजू में किया, जिससे बाहर वाले किसी को गलतफहमी न हो … क्योंकि अगर घर का दरवाजा खुला हो, तो गली के लोग शक नहीं करते.
उसने पानी पिया और प्यार से मेरी गांड पे चुमटी काट के कार लेके मेरे घर वालों को लाने चला गया.
विकी ने बहुत कम वक़्त साथ में गुजारा, पर दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी.
मुझमें बहुत हिम्मत आ चुकी थी.
मैंने दरवाजा बंद किया.
बेडरूम में जाके बुरका निकाल कर मैं पलंग पे लेट गयी और उसकी हरकतों को याद करके स्माइल करने लगी.
फिर याद आया कि नींबू पानी बनाकर रखना है.
मंद मंद हंसती हुई मैंने वापस किचन में आकर नींबू पानी बनाया.
कुछ देर के बाद घर वाले भी आ गए, उनके साथ में विकी भी था.
घर वालों ने उसको नीम्बू पानी पीने के लिए रोक लिया और फिर घर में वोटिंग किसने किसको की, नींबू पानी पीते हुए इस पर चर्चा शुरू हुई.
विकी खामोश बैठा रहा, मेरे हाथ का नींबू पानी था, इसलिए वो बड़े प्यार से पी रहा था.
पीने के बाद ‘नींबू पानी बहुत अच्छा था शाजिया दीदी..’ कहते हुए ग्लास मुझे दे दिया.
इस बार मैंने भी उसको ‘शुक्रिया विकी भैया..’ ऐसा कह दिया, उसका चेहरा देखने लायक बन गया था.
कुछ दिन विकी के साथ ऐसे ही हैंगआउट पे चैटिंग करते करते गुजर गए … क्योंकि कोई मौका नहीं मिल रहा था.
शरद के चॉकलेट और चिप्स के पैकेट छत से मिल रहे थे.
शरद ने मेरी खूबसूरत जिस्म का जबर्दस्त इस्तेमाल किया था, इसलिए अब मैं दिमाग से उसके पैसे का इस्तेमाल कर रही थी.
एक दिन मौका मिला, रमज़ान शुरू होने वाले थे और हर साल की तरह मैं मायके जाने वाली थी.
मैं हर साल जाती हूँ और फिर ईद करके ही वापस आती हूँ.
अब्बू भी काफी दिन से बुला रहे थे कि तुम आई नहीं.
मैंने शौहर से कहा कि मुझे जाना है.
वो बोले- ठीक है, तुम चली जाओ, पर मैं नहीं आ सकता.
तुम मेरी अम्मी के साथ चली जाना.
मैंने ये बात विकी को बताई, तो उसके खुराफाती दिमाग में एक प्लान आया.
वो प्लान सुनकर मैंने भी हां कह दिया.
फिर हमने डिटेल्स में जाके स्टडी की और कैसे अंजाम देना है, इसका होमवर्क कर लिया.
अगले सुबह प्लान के मुताबिक जब विकी पानी लेने आया, तब बातों बातों में उसने मेरी सास से कहा कि वो एक काम से बाहर जा रहा है.
उसने उसी शहर का नाम लिया, जहां मेरा मायका है.
मेरे ससुर और शौहर घर में ही थे … उन्होंने भी सुन लिया.
मेरे ससुर ने पूछा- बेटा तुम कैसे जा रहे हो? साथ में इनको भी ले जाओ.
उनका मतलब मुझे और मेरी सास को ले जाने से था.
क्योंकि शौहर और ससुर को काम था, इसलिए मेरे साथ मेरी सास आने वाली थीं.
देवर तो घर में किसी की सुनता ही नहीं है, तो उसको बोलने का तो सवाल ही नहीं था.
विकी ने कहा- ठीक है मैं आंटी और दीदी के टिकेट भी बनवा लेता हूँ.
वो सोफ़े पे बैठ गया और पेटीएम से उसने मेरी और मेरे सास की दूसरे दिन रात की बस ट्रावेल्स की स्लीपर क्लास टिकट बना लीं.
वो जब टिकेट बना रहा था, तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि सब प्लान के हिसाब से हो रहा था.
मेरे शौहर ने टिकट देखे और फिर पैसे देने लगे, पर विकी ने लेने से मना किया.
फिर भी जबर्दस्ती से मेरे शौहर ने दे दिए, तो फिर उसने वो पैसे मेरी सास को दे दिए और कहा कि बेटा कभी माँ से पैसे नहीं लेता.
मेरी सास फुल फॉर्म में आ गईं और खुश हो गईं.
उसकी इसी प्यारी प्यारी चिकनी बातों से उसने मेरे घरवालों का दिल और भरोसा जीत लिया.
अब मुझे विकी का लंड लेने की जल्दी पड़ी हुई थी.
आप सभी को मेरी चूत में लंड घुसने और मेरी चुदाई की कहानी का मजा लेने का इन्तजार होगा.
पर जरा दिल और उसे थाम कर रखिए, कल इसका अगला भाग आपसे शेयर करूंगी.
अच्छे मेल के इन्तजार में मैं आपकी शाजिया शेख.
कहानी जारी है.
[email protected] कहानी का अगला भाग: ज़िम वाले लड़के के साथ दोबारा सेक्स का मजा लिया-2.
स्रोत:इंटरनेट