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2 Atript Padosan Bhabhi Aur Main Padosan Sex Story 2

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“इसे अपनी दोनों बहुवो को खिला दोगे तू तुमसे खुश हो जाएँगी.
सोचेंगी की बाबूजी की वजह से ऐसा लंड मिला है.
जाओ आवाज़ दे लेना.
” वह चला गया.
मैं खुश था की एक साथ दो गद्रायी जवान चूत मिल रही हैं.
जब बुढे के साथ मज़ा लेती थी तू मेरे साथ तू दोनों मस्त हो जाएँगी.
पेशाब कर केवल लुंगी बाँधा.
तभी बुढे की आवाज़ आई की आ जाओ बेटा तू मैं फौरन दीवार फंड उसकी तरफ़ गया.
दोनों उसके अगल बगल खड़ी थी और दोनों का चेहरा लाल था और बी दर्र नही रही थी.
मैं पास पहुँचा तू वह बोला, “बेटा कीसी से कहना नही जाओ दोनों को ले जाओ.
” मैं दोनों को देखते बोला, “अभी आपने तू मज़ा लीया नही.
” “कोई बात नही बेटा जाओ अन्दर रुम मैं जाओ.
” “आप जैसे रोज़ मज़ा लेते थे वैसे ही लीजिये.
एक को मेरे साथ भेजिए और दूसरी को आप चूसिये चटिये.
” और लंड को लुंगी से बाहर कर दोनों को दिखाया तू दोनों मेरे पास आ बोली, “अब क्या हुवा बाबूजी.
” मेरे लंड को देख दोनों मस्त हो गई.
अब वह ख़ुद तैयार थी मेरे साथ चल्नो को.
मैंने कहा, “ऐसा है आज पहला दीन है इसलिए म्हणत करनी पड़ेगी, आज एके क को भेजिए, कल दोनों को साथ ही मज़ा दूंगा.
” “ठीक है बेटा.
””जाओ बाबूजी को खुश करो.
” और छोटी की गांड पर हाथ लगाया तू वह चुपचाप मेरी उर देखने लगी.
गांड मैं ऊँगली करते कहा, “आज तुम दोनों को मज़ा आएगा.
बाबूजी जीस बहु को भेजियेगा उसे एकदम नंगा कर दीजियेगा और पेशाब ज़रुर करवा दीजियेगा.
एक बार एक लड़की को पेला तू वह मूतने लगी.
” “ऐसा हो जाता है बेटा.
” मेरी चुदाई की रसीली बातें सुन दोनों लाल हो गयीं.
पेशाब की बात से दोनों शरमाई तू मैं छोटी वाली का हाथ पकड़ अपनी उर करता बोला, “बड़ी को अपने पास रखिये, इसको ले जाते हैं.
इसके साथ ज़्यादा म्हणत करनी पड़ेगी.
इसको चोदकर बाहर भेजूं तब बड़ी को अन्दर भेजियेगा.
अभी तू यह ठीक से जवान भी नही है.
” फीर छोटी को अपने बदन से लगा उसकी गद्रायी गांड को दबाया तू लगा की जन्नत मैं हूँ.
छोटी को चिपकाकर उसकी चियो को पकड़ा तू वह मुझे देखती इशारे से बोली की जल्दी चलो.
उसके इशारे से मैं खुश हो गया.
जान गया की पूरी तरह से चुदासी है.
पहले छोटी को ले जाने की बात से बड़ी वाली का चेहरा फक्क हो गया.
इससे उसकी बेकरारी भी पता चली.
उसका ससुर तू कुछ कहने की पोसिशन मैं नही था.
छोटी की चूचियों को दबाते ही लंड मैं करंट दौड़.
अनार सी कड़ी कड़ी थी, एकदम लड़की ही कुंवारी सी.
पती और ससुर से मज़ा लेने के बाद भी कलि से फूल नही बनी थी.
मैं कामयाबी की शुरुआत छोटी बहु के साथ करने जर आहा था.
कई दिनों तक दोनों को छोड़ सकता था.
मज़ा देने वाली थी दोनों.
दोनों फंसी थी और खूब जवान थी.
मैं छोटी वाली के साथ पहली चुदाई के लिए कमरे की तरफ़ चला.
रास्ते मैं उसकी एक चूची को पकरकर दबाते उसे मस्त करने के लिए कहा, “हाय अभी तू तुम लार्की हो.
बरी वाली तू औरत लगती है.
मेरे साथ बहुत मज़ा आएगा.
” मुझे चुदासी औरतों से मज़ा लेना आता था.
वह चूची दबवाते ही गरम हो गई, ऐसी शानदार चूचियों को पा लंड बेकरार हो गया और पानी भर गया.
माल तगर था इसलिए झरने का दर्र था.
चूचियों को पकारते ही समझ गया की इसकी चूत भी कासी होगी.
कमरे मैं फौरन कुर्सी पर बैठा और उसकी कमर मैं हाथ दाल उसके चुतर को अपने लंड पर खींचकर गोद मैं ले लीया और दोनों चूचियों को जैसे ही शर्ट के ऊपर से पकरकर गाल को चूमा, वह मेज़ से भर गदराये चुतर को लंड पर रागारती बोली, “छोरिये न बटन खोल दे.
” “ऐसे ही दब्वाओ.
बाद मैं खोलना.
घबराओ नही पूरा मज़ा मिलेगा.
तुम छोटी हो इसीलिए पहले लाया हूँ.
बताओ बुढा ससुर तुम्हारे साथ क्या-क्या करता है.
” नई जवानी को फंफनाये लंड पर बिठा पूछा तू वह बोली, “जी केवल चूमते और चाटते हैं हम्दोनो को.
” “इसको पीते भी हैं?”. “जी.
” “चुस्वाने मैं मज़ा आता होगा?” मैंने अनार सी चूचियों को कसकर दबाते हुवे लंड को गांड की दरार मैं रागारते कहा तू बोली, “जी आता है.
” “चूत भी चाटती हो?” “जी.
” वह मदहोश हो बोली.
“यह सब कराती हो तू चूत नही गरमाती क्या? चुदवाने का मॅन नही करता क्या? चोद्ता है या नही?”. “नही बाबूजी का तू खरा ही नही होता.
” “तुम्हारा आदमी तू चोद्ता होगा?”. “कभी कभी.
बहुत पतला सा है ज़रा भी मज़ा नही आता हाय आप करिये न आपका तू तैयार है.
” वह मेरे लंड पर अपना चुतर रागारती बेताबी के साथ खुलकर चोदने को बोली.
मैं उसको गोद मैं बिठाकर जन्नत मैं पहुँच गया था.
उसका गद्राया चुतर लंड को गज़ब का मज़ा दे रहा था और गरम पानी उसमे उतर रहा था.
जब खुलकर अपने आदमी(हुस्बंद) के मरियल लंड के बरे मैं बताया तू मैं लंड को उभारता मस्ती के साथ दोनों चूचियों को दबाता प्यार से उसको गोद मैं सम्हालता बोला, “तुम्हारे आदमी का लंड बहुत छोटा है क्या?” “जी बच्चे सा.
मज़ा नही आता हाय करिये न.
आपका तू खरा हो गया है.
प्य्जामा आगे से फटा है.
” वह मेरी जवान गोद मैं हैवी लंड पर अपनी गांड को रख चूचियों को दब्वती चुदास से भर गई थी पर मुझे तू अभी मज़ा लेकर एक बार लंड की मस्ती झारकर प्यार से दमदार तरीके से चोदकर इसकी चूत को पहली चुदाई मैं इतना. मज़ा देना था की हरदम मुझसे मज़ा लेने के लिए बेकरार रहे.
प्य्जामा दोनों का फटा रहता था.
ससुर चूत चाटता था पर अभी तक मैंने उसकी चूत पर एक बार भी हाथ नही लगाया था.
जब तनी-तनी चूचियों के निप्प्ले पकरकर मसला तू प्य्जामा की चूत गनगना गई और वह खुलकर बोली, “हाय मेरी मस्त है, छोडिये.
” “अभी नही चोदेंगे.
पहले जवानी का मज़ा लो.
पानी नीकल जाने दो.
बताओ तुम्हारा आदमी कितनी देर चोद्ता है?” हाथ मैं आसानी से आने वाली मस्त चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाते कहा तू वह बोली, “जी बहुत जल्दी बस १ मिनट.
” “अरे तब तू वह साला न-मर्द है.
मज़ा क्या आएगा, कम से कम १० मिनट तक न छोडा तू मर्द ही क्या.
शर्मो नही अब तुम मेरा मज़ा लो.
आज से तुम अपने आदमी को भूल जाओ और मेरी बीवी बनकर मज़ा लो.
बरी बहु से ज़्यादा मज़ा तुमको देंगे.
अब बराबर दीन मैं आया करेंगे.
तुम लोग ससुर को चटाकर मस्त किए रहना.
लो हाथ से पकरकर अपनी चूत पर रखो देखो मेरा लंड तुम्हारी चूत मैं जाएगा या नही.
देखो कितना मोटा है.
” मैं जानता था की खुलकर चुदाई की बात करने से चूत कुलबुलाती है.
छोटी बहु अभी एकदम लौंडिया सी थी.
एकदम जवान मस्त चूचियां थी.
उसकी चूचियां इतना मज़ा दे रही थी की लंड झड़ने के करीब था.
मैंने उसकी चूचियों को मसलते हुवे कहा, “बताओ मेरा मोटा है न” पर..
स्रोत:इंटरनेट