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60 साल के गे अंकल की जबरदस्त चुदाई

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60 साल के गे अंकल की जबरदस्त चुदाई 1

. दोस्तो, मेरा नाम सूजल शर्मा (परिवर्तित नाम) है। मैं मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में रहता हूँ। मेरी उम्र 28 साल है.
मैं एक छोटी सी प्राइवेट नौकरी करता हूँ इसलिए अपना सही विवरण यहाँ पर नहीं बता सकता कि किस पोस्ट पर हूँ और कौन सी नौकरी में हूँ। अगर शारीरिक बनावट की बात करूं तो मेरी हाइट 5 फीट से 6 इंच ऊपर है और वजन 60 किलो है.
मेरा लंड 7 इंच के लगभग लम्बा है 2 इंच मोटा है.
मुझे 45 साल से ऊपर की उम्र के अंकल बहुत पसंद हैं.
चूंकि मेरी बॉडी काफी फिट है इसलिए चलते फिरते कई अंकल मुझसे चुदने के लिए मचल जाते हैं.
अन्तर्वासना पर यह मेरी तीसरी कहानी है.
आप मेरी इससे पहले की दो कहानियां भी पढ़ सकते हैं जिनका शीर्षक है पार्क में मिले गांडू अंकल की चुदाई ट्रेन में मिले एक गांडू अंकल अब मैं अपनी आज की कहानी शुरू करता हूं.
यह बात आज से तीन साल पहले की है जब मैं अपनी परीक्षा देने के लिए भोपाल गया था.
मैं ग्वालियर से रात 11 बजे ट्रेन में बैठा था और सुबह 5 बजे भोपाल पहुंच गया.
6 घंटे का सफर था इसलिए मैं काफी थका हुआ महसूस कर रहा था.
मैंने एक होटल में रूम बुक करवा लिया.
परीक्षा का समय 11 बजे का था.
मैंने सोचा कि फ्रेश होकर 2-3 घंटे आराम कर लेता हूं ताकि अच्छे से फ्रेश दिमाग से परीक्षा दे सकूं.
हाथ मुंह धोकर मैं सो गया और फिर 9 बजे उठा.
मैं उठने के बाद नहाया और फिर खाना ऑर्डर किया.
खाना खाकर तैयार हुआ तब तक 10 बजने को हो गये थे.
फिर मैं तैयार होकर परीक्षा केंद्र की ओर निकल गया.
मेरा एग्जाम सेंटर वहां से 3 किलोमीटर की दूरी पर था.
समय से आधे घंटे पहले ही मैं पहुंच गया.
फिर परीक्षा शुरू हुई और 3 बजे तक मैं फ्री हो गया.
अब मैं वापस अपने होटल पर आ गया.
परीक्षा देने के बाद दिमाग काफी थका हुआ महसूस कर रहा था इसलिए मैं आकर सीधा लेट गया और आराम करने लगा.
सांय के 5 बजे तक मैं सोया ही रहा.
उसके बाद उठकर पास के पार्क में घूमने के लिए निकल गया.
मैं घर से ही सोचकर आया था कि परीक्षा देने जा रहा हूं तो भोपाल की कुछ एक दो अच्छी जगह भी घूमकर आऊंगा.
इसलिए मुझे वापस जाने की कोई जल्दी नहीं थी.
मैं कम से कम दो दिन यहां पर रुकने के लिए सोचकर ही आया था.
चूंकि पार्क में अंकल टाइप के लोग सायं के समय घूमने के लिए अक्सर आते हैं इसलिए पार्क मेरी पसंदीदा जगहों में से एक होती थी.
जब भी सही मौका होता था मैं पार्क में ही चला जाया करता था.
पार्क में जाने की वजह यही थी कि वहां पर कोई न कोई अंकल ऐसा मिल ही जाता था जो जवान लड़कों में रूचि रखने वाला होता था.
मैं पास के पार्क में घूम रहा था और मुझे डेढ़-दो घंटा हो गया था घूमते हुए.
फिर मैं थककर एक चबूतरे पर बैठ गया और मोबाइल देखने लगा.
अंधेरा धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था.
जो लोग पहले से घूमने आये हुए थे उनमें से एक दो को छोड़कर लगभग सभी ही जा चुके थे.
फिर कुछ देर के बाद एक अंकल को मैंने नोटिस किया.
वो पहले मुझे नहीं दिखे थे.
शायद अभी आये थे.
वो पार्क में घूमकर चक्कर लगा रहे थे और जब भी मेरे सामने से गुजरते थे तो मुझे ताड़ते हुए निकलते थे.
मैंने दो-तीन बार उनको नोटिस किया.
मैं जान गया था कि ये अपनी लाइन का लग रहा है.
उस अंकल की उम्र 55 – 56 के करीब होगी.
देखने में अच्छे थे.
शरीर के भी भरे हुए थे और काफी मांसल शरीर था उनका.
रंग भी गोरा था और मोटी सी गांड थी.
उनके चेहरे पर भारी सी मूंछें थीं जो मुझे बहुत प्यारी लग रही थीं.
मैं उनको देखता ही रह गया, मुझे उनके ही जैसे अंकल पसंद थे। वह मेरे लिए एकदम परफेक्ट थे.
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे कि काश ये मुझे मिल जाए। मगर मेरी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उनसे कुछ बोल सकूं.
वह मुझे देखकर एक दो बार मुस्कराये भी, लेकिन मैंने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी। मैं चाहता था कि मैं भाव खाऊं जिससे वह मेरे लिए तड़पे। फिर कुछ समय बाद मैं उन्हें आजमाने के लिए कि वह मुझे पसंद कर रहे हैं या नहीं, वहां से उठकर थोड़ी दूर बने दूसरे चबूतरे पर जाकर बैठ गया। वो भी कुछ समय बाद मेरी बगल में आकर बैठ गए और बार-बार मेरी तरफ देखने लगे। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैंने ही उनसे कहा- अंकल जी, आप मुझसे कुछ कहना चाहते हो क्या? वह बोले- हाँ बेटा, कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ लेकिन शायद तुम मेरी बात नहीं सुनना चाहते। मैंने कहा- नहीं अंकल जी, ऐसी बात नहीं है। आप बड़े हैं, आपकी बातों का मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा.
आप जो भी कहना चाहते हैं कह सकते हैं.
अंकल बोले- तुम मेरे बेटे जैसे हो.
अगर मेरी बात का बुरा लगे तो माफ कर देना। मैंने कहा- नहीं अंकल, आप कहिए तो सही.
बुरा लगने वाली क्या बात है? खुलकर बोलिये.
वो बोले- तुम बहुत खूबसूरत हो बेटा और तुम मुझे बहुत पसंद आये। मैं साठ साल का हो गया हूं लेकिन अपनी पूरी जिंदगी में तुम जैसा सुंदर लड़का कभी नहीं देखा। मैंने कहा- नहीं अंकल जी, ऐसी तो कोई बात नहीं है.
मुझसे तो बहुत अच्छे लड़के और भी हैं.
वो बोले- मगर तुम मुझे कुछ ज्यादा ही पसंद आ गये.
मैंने कहा- अगर सच कहूं तो मुझे भी आप जैसे अंकल आज तक नहीं मिले.
इस उम्र में भी आपने खुद को कितना मेंटेन करके रखा हुआ है.
वो मुस्कराये और बोले- तुम कितनी प्यारी बातें करते हो.
फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों गाल प्यार से खींच दिये.
उनके हाथों के स्पर्श से मेरे शरीर के रोंगटे खड़े से हो गये.
बहुत ही मुलायम हाथ थे उनके.
मैं बोला- क्या मैं भी आपके गालों को छू सकता हूं? वो बोले- हां, बिल्कुल। इतना बोलकर वो मेरे और करीब सरक कर आ गये.
थोड़ा सा सरक कर मैं भी उनेक और करीब हो गया.
मैंने उनके दोनों गालों को सहला कर देखा तो उनके गाल बहुत ही नर्म थे.
मैंने उनको दोनों गालों पर हल्का सा चुम्बन कर दिया.
उन्होंने भी मेरे गाल चूम लिये.
फिर हम दोनों वहीं पर बैठे-बैठे बातें करते रहे.
उनसे बातें करके बहुत मजा आया.
अब हम दोनों काफी खुल गये थे.
वो बार-बार मेरी जांघ पर हाथ मार देते थे और मेरा लंड न जाने कितनी देर से खड़ा हुआ था.
कब दो घंटे बीत गये पता ही नहीं चला.
फिर वो पूछने लगे कि रहते कहां हो, तो मैंने बताया कि पास के ही होटल में रुका हुआ हूं और परीक्षा देने भोपाल आया था.
फिर उन्होंने बताया कि वो भी यहां भोपाल में अकेले रहते हैं और एक सरकारी बैंक में मैनेजर हैं.
वो बोले- अगर तुम बुरा न मानो तो तुम मेरे घर पर ही रुक सकते हो.
चाहे कितने दिन रुको, कोई दिक्कत नहीं है.
मैं बोला- इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है अंकल! मगर पहले मुझे होटल जाना होगा.
वहां से बैग लेना है और फिर चेक आउट करना है.
वो बोले- ठीक है, चलो.
मैं भी तुम्हारे साथ ही चलता हूं.
उसके बाद हम दोनों वहां से निकल गये.
हम होटल गये और मैंने बैग लेकर पेमेंट की और वहां से चेक आउट कर दिया.
अंकल का घर उस होटल से करीबन 500 मीटर की दूरी पर ही था.
रास्ते में चलते हुए अंकल ने दो थाली खाने के लिए ऑर्डर कर दिया.
हम दोनों घर पहुंचे.
हमने हाथ-मुंह धोकर भरपेट खाना खाया और फिर बातें करने लगे। अंकल अब बिल्कुल मुझसे चिपककर बैठे हुए थे और बार-बार मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर सहला रहे थे.
मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। करीब आधा घंटा बीत जाने के बाद अंकल बोले- अब हमें अपने कपड़े उतार लेने चाहिएं.
मैंने अंकल से कहा- मैं चाहता हूं कि आप मेरे पूरे कपड़े उतारें और फिर मैं आपके पूरे कपड़े उतारूं। अंकल बोले- ठीक है! ऐसा ही करते हैं.
पहले अंकल ने बारी-बारी से मेरे सारे कपड़े उतारे और फिर मैंने उनके सारे कपड़े उतारे। जैसे ही अंकल के पूरे कपड़े उतारे, मैं अंकल को देखता ही रह गया। ओह्ह्ह यार … क्या बॉडी थी उनकी! एकदम चिकनी, गोरी, मांसल बॉडी और बिल्कुल दूध जैसी गोरी त्वचा.
पूरे शरीर पर एक भी बाल नहीं था। औरतों जैसा चिकना बदन था और चूचियां भी काफी उभरी हुई थीं.
औरतों जैसी तो नहीं थी लेकिन हाथों में भरने लायक माल था.
अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे.
मैं देर न करते हुए अंकल के शरीर से लिपट गया और अंकल को कसकर पकड़ लिया। अंकल भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गए थे.
उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच दबा लिया और जोर-जोर से चूसने लगे.
कुछ देर तक हम मस्ती में एक दूसरे को किस करते रहे.
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था और मेरा 7 इंच लम्बा लंड अब तनकर पूरा खड़ा हो गया था। अंकल मुझे किस करते हुए मेरे लंड को पकड़कर आगे-पीछे कर रहे थे.
मुझे स्वर्ग सा मजा आ रहा था। मैंने अंकल के लंड को पकड़कर देखा तो वो भी एकदम सख्त हो गया था। उनका लंड 5 इंच के लगभग लम्बा और 2 इंच के लगभग मोटा रहा होगा.
उनका लंड देखने में मेरे लंड से ज्यादा गोरा और सुंदर था.
उनकी बॉडी के लिए मैं अब बहुत ही पागल हो गया था.
जल्दी से उनकी गांड को चोद देना चाहता था.
मैंने अंकल से कहा- अंकल अब और मत तड़पाओ, मेरा लंड अपनी गांड में ले लो। अंकल बोले- अभी तो मुझे तुम्हारे लंड का स्वाद लेना है.
इतना कहकर अंकल ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और बहुत प्यार से चूसने लगे। अब तो मैं जन्नत की सैर कर रहा था। इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि यहां पर शब्दों में बताना बहुत मुश्किल है। मैं भी मस्ती से अंकल की चूचियों को मसल-मसलकर दबाए जा रहा था.
उनकी चूची काफी नर्म थी.
दबाते हुए लग रहा था कि किसी औरत के दूधों को दबा रहा हूं.
वो लगातार मेरे लंड को चूसे जा रहे थे.
मेरे लंड की नसें फटने को हो रही थीं.
दस मिनट हो गये थे अंकल को मेरा लंड चूसते हुए.
मैं बोला- अंकल, मेरा अब होने वाला है.
वो बोले- ठीक है, मैं रुक जाता हूं.
फिर उन्होंने लंड चूसना बंद कर दिया.
फिर मैंने उनको नीचे लिटा लिया और उनकी चूचियों को जोर जोर से मसलने लगा.
उनकी छोटी छोटी निप्पलों को चुटकी में काटने लगा.
वो जोर से आह्ह … आह्ह … करने लगे.
अब मैंने उनकी चूचियों को पीना शुरू कर दिया.
उनकी निप्पल के चारों ओर जीभ फिराने लगा.
उन्होंने मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबा लिया और जोर से सिसकारते हुए मेरे बालों को सहलाते हुए बोलने लगे- आह्ह … बेटा … चूस ले इनको … ओह्ह … पी ले इनको आह्ह। मैं भी मजे से उनका एक दूध पी रहा था और दूसरा दूध दबाये जा रहा था। मेरा लंड अब भी खड़ा हुआ था.
वो बोले- अब चोद दे बेटा, मेरी गांड में डाल दे अपने लंड को। मेरी गांड को पेल पेलकर चोद। फिर वो उठे और दूसरे कमरे से एक क्रीम लेकर आये.
उन्होनें बहुत सारी क्रीम मेरे लंड पर लगायी और फिर अपनी गांड के छेद पर भी लगायी। अंकल बोले- बिल्कुल धीरे-धीरे अंदर करना, मैंने एक दो बार ही लिया है.
मुझे बहुत दर्द होता है.
मैंने कहा- जी, बिल्कुल प्यार से डालूंगा.
आप बेफिक्र रहें। फिर मैंने उनको पीठ के बल लेटा दिया.
उनकी टांगें ऊपर करवाईं और अपने लंड का सुपारा उनकी गांड के छेद पर रख दिया.
सुपाड़ा रखकर मैं बिल्कुल धीरे-धीरे से लंड पर दबाव देते हुए उनकी गांड में आगे पीछे करने लगा। अंकल ने मेरा लंड पकड़ा और अपने हाथ से थोड़ा एडजस्ट किया.
मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो सुपारा अंदर जा फंसा और अंकल की जोर से चीख निकल गयी- आईई … आआआह … मर गया … उफ्फ … बाहर निकालो यार! मैंने अंकल को कसकर पकड़ रखा था.
वो मुझे पीछे धकेलना चाहते थे लेकिन मैं डटा रहा.
उनके हाथों को मैंने नीचे बेड पर दबाये रखा.
अब मैंने एक धक्का और लगाया और पूरा लंड उनकी गांड में उतार दिया.
इस प्रहार से अंकल बुरी तरह से छटपटा गये.
उनका चेहरा लाल हो गया और सूरत रोनी सी हो गयी.
मेरा सात इंची लौड़ा अंकल की गांड में उतर चुका था.
फिर मैं उनके ऊपर लेट गया और उनको किस करने लगा.
उनकी चूचियों को पीने लगा.
थोड़ी देर तक उनको सहलाता रहा.
मेरा पूरा का पूरा लंड अंकल की गांड में घुस गया था और मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मन कर रहा था कि ऐसे ही अंकल की गांड में लंड को देकर लेटा रहूं.
अब शायद अंकल का दर्द कम हो गया था। अब मैं धीरे धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा.
अंकल को भी मजा आने लगा.
उनके चेहरे पर लंड से चुदने के आनंद के भाव साफ दिख रहे थे.
वो भी मस्ती में चुदते हुए कहने लगे- आह्ह … बेटा … चोदो … ओह्ह मजा दे रहो हो बहुत … आह्ह … पूरा फंसा दो मेरी गांड में … याह्ह … और तेज … आह्ह और तेज पेल बेटा.
मैं भी जोर-जोर से धक्के मार रहा था और अंकल की जबरदस्त चुदाई किये जा रहा था। 20 मिनट की चुदाई के बाद मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ। चोदते हुए ही मैंने अंकल से पूछा- वीर्य अंदर निकालूं या बाहर? वो बोले- अंदर ही निकाल दो। फिर चार-पांच धक्के देने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य अंकल की गांड में छोड़ दिया।. अंकल का लंड भी पूरा तना हुआ था.
वो अपने लंड की मुठ मारे जा रहे थे.
वो बोले- तुम भी मुझसे गांड मरवा लो.
मैंने कहा- नहीं, मैं गांड नहीं मरवाता हूँ। वो बोले- तो मेरा अपने हाथ से ही हिलाकर निकाल दो.
मुझे भी तो ठण्डा होना है यार। फिर मैंने उनके लंड को हाथ में भर लिया और जोर-जोर से आगे-पीछे करने लगा.
उनकी सिसकारी और तेज हो गयी.
मैं पूरी ताकत के साथ उनके लंड पर हाथ चला रहा था.
उनके लंड के टोपे की स्किन तेजी से आगे पीछे हो रही थी.
दो मिनट के अंदर ही अंकल के लंड ने अकड़ कर पिचकारी मार दी.
मेरा हाथ उनके वीर्य में सन गया और अंकल ठंडे पड़ गये.
अंकल की चड्डी से ही मैंने अपने हाथ को साफ किया और फिर हम दोनों आराम से लेट गये.
चूंकि मैं दो-तीन दिन वहां पर रुकने वाला था इसलिए मुझे चुदाई की भी कोई जल्दी नहीं थी.
फिर मैं दो दिन तक वहां रहा और मैंने कई बार अंकल की गांड चुदाई की.
उनके साथ भोपाल शहर में घूमा और हमने खाने पीने के साथ-साथ खूब मस्ती भी की.
उसके बाद फिर मैं वहां से लौट आया.
तो दोस्तो, ये थी गांडू अंकल की गांड चुदाई की गे सेक्स कहानी। आपको ये स्टोरी कैसी लगी मुझे अपने ईमेल के जरिये बतायें.
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स्रोत:इंटरनेट