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Windows 7 & 8
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Windows XP
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Windows 2000 & ME
स्टार्ट > सेटिंग्स > कंट्रोल पैनल > स्पीच
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है.
” “नहीं दीपक.
एक बात मैं एकदम साफ़ कर दूं.
अब मैं किसी से भी चुदूं या कुछ भी करू.
पर सच्चा प्यार मैं हमेशा तुमसे ही करूंगी.
” महिमा ने बोला.
“महिमा रानी तुम मेरी हो और सदा मेरी रहोगी.
ये मेरा वादा है”.
दीपक ने उसका हाथ अपने हाथ में ले कर वादा दिया.
“तो क्या तुम लोगों कि बहनें भी?”. “मैंने पहले ही बताया कि मेरा पूरा परिवार एक दुसरे से एकदम खुला हुआ है.
जब भी हम में से कोई भी अठारह वर्ष का हुआ, उसे पारिवारिक चुदाई समरोह का टिकट तुरंत दे दिया गया”, दीपक ने बोला.
“धीरे धीरे सब पता चलेगा.
अभी इन चीजों का मजा एक एक कर के लो.
सब इकट्ठे ले नहीं पाओगी” दीपक ने बोला.
“आप ठीक कहते हो” महिमा ने बोला.
इस परिवार की इस सारी चर्चा पर महिमा कि चूत में एक अजीब सी सरसराहट होने लगी .
उसकी चुंचियां टाइट हो कर उठ गयीं.
दीपक के लंड में भी जैसे जान आ गयी थी.
दीपक बिस्तर छोड़ कर जमीन पर खड़ा हो गया.
महिमा ने देखा उसका लंड एकदम टाइट हो चुका था.
“आ जाओ जानेमन ….
इस खड़े लंड का कुछ इंतज़ाम कर दूं….
दोपहर की बात याद दिला कर मेरी चूत में भी पानी आ रहा है….
” महिमा पुकार उठी.
“ये हुई न बात.
पर आज के दिन को थोडा और स्पेशल बनाएंगे महिमा रानी.
” कहते हुए दीपक दरवाजे तक गया.
महिमा हैरान थी कि नंगा बदन दीपक कहाँ बाहर की तरफ जा रहा है.
दरवाजा खोल कर अपना चेहरा बाहर निकाल कर बोला, “आ जाइए”. बस कहने की देर थी कि दो मिनट के अन्दर ही उसकी सासु माँ, उसके ससुर और ससुर के भाई साहब कमरे के अन्दर आ गए.
महिमा को समझ आ गया कि उसकी जिन्दगी में अब चुदाई की तादाद अब जोरों से बढ़ने वाली है.
और उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी.
जब उसके पति दीपक की रजामंदी इसमें शामिल है तो उसे क्या ऐतराज़ होगा.
परिवार की इस सारी चर्चा पर महिमा कि चूत में एक अजीब सी सरसराहट होने लगी .
उसकी चुंचियां टाइट हो कर उठ गयीं.
दीपक के लंड में भी जैसे जान आ गयी थी.
दीपक बिस्तर छोड़ कर जमीन पर खड़ा हो गया.
महिमा ने देखा उसका लंड एकदम टाइट हो चुका था.
“आ जाओ जानेमन ….
इस खड़े लंड का कुछ इंतज़ाम कर दूं….
दोपहर की बात याद दिला कर मेरी चूत में भी पानी आ रहा है….
” महिमा पुकार उठी.
“ये हुई न बात.
पर आज के दिन को थोडा और स्पेशल बनाएंगे महिमा रानी.
” कहते हुए दीपक दरवाजे तक गया.
महिमा हैरान थी कि नंगा बदन दीपक कहाँ बाहर की तरफ जा रहा है.
दरवाजा खोल कर अपना चेहरा बाहर निकाल कर बोला, “आ जाइए”. बस कहने की देर थी कि दो मिनट के अन्दर ही उसकी सासु माँ, उसके ससुर और ससुर के भाई साहब कमरे के अन्दर आ गए.
महिमा को समझ आ गया कि उसकी जिन्दगी में अब चुदाई की तादाद अब जोरों से बढ़ने वाली है.
और उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी.
जब उसके पति दीपक की रजामंदी इसमें शामिल है तो उसे क्या ऐतराज़ होगा.
दो मिनट के अन्दर ही उसकी सासु माँ, उसके ससुर और ससुर के भाई साहब कमरे के अन्दर आ गए.
महिमा ने घबरा कर चादर खींच कर अपने नंगे बदन को धक् लिया.
पर उन तीन लोगों ने अपने कपडे उतार फेंकने में एक पल भी नहीं लगाया.
“अरे महिमा बेटी हम सब तो दोपहर में तुम्हें पूरा नंगा देख चुके हैं.
अब हमसे कैसा पर्दा.
” ससुर जी कहा.
“हमारे इस खुले परिवार में तुम्हारा स्वागत है बेटी” सासु माँ ने कहते हुए उसकी चादर खींच कर फ़ेंक दी.
महिमा की खुली दूध के जैसी गोरी चुंचियां छलक रही थीं.
उसने अपनी टाँगे कास के बंद कर रखीं थी पर उसकी चूत का ऊपर का हिस्सा साफ़ नज़र आ रहा था.
वो अभी भी शर्म से पानी पानी थी.
चाचा जी उसके बगल में बैठ कर उसकी चुंचियां सहलाने लगे.
और पापा जी ने अपने हाँथ उसकी टांगों के बीच घुसा कर उसकी चूत खोल थी और और गीली चूत के ऊपर से अपनी उंगलिया फिराने लगे.
महिमा को ये सब अच्छा भी लग रहा था और अजीब भी.
इसी बीच महिमा ने देखा कि उसका पति दीपक बिस्तर पर खड़ा है.
दीपक कि माँ सुजाता देवी अपने बेटे का खड़ा लंड अपने मुंह में लेकर चुभला रहीं हैं.
दीपक के लंड पांच मिनट पहले ही महिमा की चूत का बाजा बजा रहा था.
इसका मतलब ये था कि महिमा कि सास अपनी बहु की चूत का रस अपने बेटे के लंड से चाट रहीं थीं.
महिमा इस सबसे बड़ा गरम हो चुकी थी.
उसने अपनी टाँगे अब पूरी खोल दीं.
और चाचा जी को उनके होठों पर चूमने लगी.
दीपक ने अपनी “मासूम” बीवी का ये रूप आज तक देखा नहीं था.
वो अपनी माँ के बड़े बड़े मम्मे जोरों से दबाने लगा.
महिमा को बिस्तर पर लिटा दिया गया.
पापा जी उसके ऊपर चढ़ गए और आना मोटा लंड उसकी गीली चूत में पेल दिया.
चाचा जी ने अपना लंड उसके चेहरे पर लहराया तो महिमा को इशारा समझने में एक पल भी लगा.
उसने गपाक से चाचा जी का लंड अपने मुंह में ले लिया और उसके लेमन चूस कि भाँति चूसने लगी.
महिमा ने दीपक के तरफ देखा.
दीपक ने अपनी माँ को कुतिया के पोस में लिटाया हुआ था.
दीपक एक एक्सपर्ट खिलाड़ी कि तरह धीरे और लम्बे धक्कों से सुजाता देवी कि चूत में लंड पेल रहा था.
महिमा और दीपक कि नज़रें मिलीं और दीपक ने उसको आँख मारी और बोला, “महिमा पापा जी और चाचा जी का आशीर्वाद ठीक से लो”. “बहु कि चूत इतनी टाइट है कि मज़ा आ रहा है कसम से” ससुर जी बोला.
“भैया अगर आपको ऐतराज़ न हो तो मैं थोडा इस टाइट चूत का आनंद ले लूं” चाचा जी ने महिमा के ससुर से पूछा.
“अरे बिलकुल जरूर.
महिमा को हमारे घर में सब का प्यार मिलना चाहिए.
” कहते ही ससुर जी ने अपना लंड उसकी चूत ने निकाल लिया.
चाचा जी ने महिमा को उठा कर कुतिया के पोस में बिठाया और अपना लम्बा और मोटा लंड उसकी चूत में एक ही झटके में पेल दिया.
महिमा सिहर उठी.
महिमा ने देखा कि ससुर जी बिस्तर पर बैठे है और उनका लंड तना हुआ है.
इसी बीच सासु माँ ने दीपक को दीपक को हटा लिया और कुतिया बने बने ससुर के पास आईं और अपने पति का लंड चूसने लगीं.
दीपक चल कर महिमा के पास आया और अपनी माँ के रस से सना हुआ लंड उसके मुंह में दाल दिया.
उधर सासु माँ अपने पति के लंड के ऊपर बैठ कर अपनी गांड ऊपर नीचे हिलाने लगीं.
चाचा जी महिमा की चूत में बहुत जोर से पेलने लगे.
महिमा अभी तक एक बार झड चुकी थी और उसे लगा कि वो एक बार और झड़ने वाली है.
उधर सासु माँ चीख चीख कर चुद रहीं थीं.
महिमा को दीपक का लंड अपने मुंह में फूलता हुआ महसूस हुआ.
थोड़ी ही देर में पाँचों लोग एक एक कर के झड गए.
आज के दिन में महिमा ने तीन लोगों का लंड अपनी चूत में लिया और दो दो लोगों के लंड का रस अपने मुंह में.

स्रोत:इंटरनेट