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Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. रोज की तरह दीपक शाम को कम से लौटा.
महिमा अपनी दिन की हरकत से इतनी शर्मिंदा थी कि जैसे ही उसने दीपक की मोटर साइकिल की बात सुनी, वो घबरा कर बाथरूम में घुस गयी.
बाथरूम में बैठ कर अपने मन को शांत किया और जब वो पूरा संयत हो गयी बाहर निकली.
दीपक सासु माँ के कमरे में था.
वो जैसे ही उनके कमरे में घुसी, दोनों अचानक चुप हो गए.
दीपक महिमा की तरफ देख रहा था.
महिमा को तो जैसे काटो तो खून नहीं था.
उसे लगा कि उसके सास ससुर कोई गेम खेल रहे हैं उसके साथ.
दीपक उसकी तरफ देख कर मुस्कराया.
“मैं चाय बनाती हूँ आप के लिए”, महिमा ने जैसे तसे कहाँ और कमरे से जल्दी से बाहर निकल गयी.
उसे जाने क्यों लगा कि उसके पति और उसकी सासु माँ उसकी घबराहट को देख कर हंस रहे हैं.
पर उसने जैसे खुद को बताया कि ये उसका वहम है.
वो शाम महिमा के लिए बड़ी भारी थी.
रात जब वो बिस्तर पर गयी, दीपक उसके बगल में लेट कर मंद मंद मुस्करा रहा था.
महिमा ने आखिर पूछ ही लिया.
“क्या बात है जी, आज जब से आयें हैं घर बड़ा मुस्करा रहे हैं” “अरे ऐसी कोई बात नहीं है”, दीपक बोला.
दीपक ने उसकी चुंचियां मसलना शुरू कर दिया.
और दुसरे हाथ से उसकी चूत को उसके गाउन के ऊपर से ही रगड़ने लगा.
महिमा आज की तारीख में दो दो मर्दों से चुद चुकी थी.
पर उसके पति कि पुकार थी इस लिए चुदना उसका धर्म था.
उसने झट से अपना गाउन उतार फेंका.
दीपक ने देखा कि उस की प्यारी पत्नी महिमा ने आज गाउन के अन्दर न ब्रा पहनी हुई है न पैंटी.
वो एक बार फिर मुस्कराया.
दीपक महिमा के गोर और नंगे बदन के ऊपर चढ़ गया.
लंड तो खड़ा था ही और महिमा की चूत भी गीली थी.
तो लंडा गपाक से घुस गया.
“आह …उई माँ …मई मर गयी …” महिमा अचानक अपनी चूत पर ही इस हमले पर हलके से चीख उठी.
“क्यों क्या हुआ …” दीपक ने पूछा, वो अभी भी मुस्करा रहा था.
“क्या पापा और चाचा जी का लंड खाने के बाद मेरा लंड अच्छा नहीं लगा आज रात?” दीपक ने पूछा.
महिमा को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था.
तो क्या दीपक को शाम से ये सब पता था.
और अगर उसे ये सब पता है फिर भी वो शाम से हंस रहा मुस्करा रहा है.
और तो और वो उसे प्यार भी कर रहा है.
“क्या मतलब…” दीपक के लंड के धक्के खाते खाते वो इतना ही बोल पायी.
“अरे महिमा रानी मुझे आज तुम्हारी दिन कि सारी करतूत पता है…” दीपक हंस रहा था और दनादन चोद रहा था उसे.
महिमा को ये सब सुन कर एक अजीब तरह की अनुभूति हुई.
उसे अपनी चूत में जैसे कोई गरम लावा सा छूटता हुआ महसूस हुआ.
दीपक का लंड भी अब पानी छोड़ने वाला था.
दोनों थोड़ी देर में ही झड गए.
दीपक उसके बगल में ढेर हो गया.
महिमा अभी भी बड़ी कन्फ्यूज्ड थी.
“क्या तुम्हें मम्मी जी और पापा जी ने कुछ बताया है” महिमा ने पूछा.
दीपक ने उसे बताया कि उसे सब पता हुई.
दीपक के परिवार में सब लोग आपस में काम क्रिया का आनंद लेते थे.
पहले ये सब खुले में होता था.
जब से दीपक महिमा का विवाह हुआ, ये सब छुप के हो रहा था.
पर आज जब महिमा ने ये सब देख लिया, जैसा कि पहले से प्लान था, उसे इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया.
“चलो अच्छा हुआ जो हुआ, देर सबेर तुम्हें ये सब पता चलना ही था.
उससे अच्छा ये हुआ कि तुम अब इस परिवार के इन आनंद भरें खेलों में शामिल हो गयी हो मेरी रानी.
” दीपक ने शरारत भरी अदा से बोला.
“मुझे तो अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि एक ही परिवार के लोग आपस में ऐसा कर सकते है”, महिमा अभी भी हैरान थी.
“तुम्हारा सोचना भी जायज़ है.
पर सेक्स इतना आनंद भरा काम है.
जरा सोचो ये सब बाहर के लोगों से करना थोडा खतरे वाला काम हो सकता है.
इस लिए हमारे परिवार में हम इतनी आनंददायक चीज को आपस में करते हैं.
” दीपक ने बोला.
“पर फिर भी सोच के अजीब सा लगता है”, महिमा बोली.
“अरे जरा याद करो, आज दोपहर में जब चाचा जी पीछे से अपना लंड तुम्हारी चूत में पेल रहे थे, तब तुम्हें जरा भी बुरा लगा क्या.
तब तो तुम मजे से पापा जी का लंड अपने मुंह में चुभला चुभला के चूस रहीं थीं.
एक ही जिन्दगी मिली है.
इसे एन्जॉय करें.
इसे क्यों बेकार में ऐसे ही जाने दे जमाने के बेकार के नियम मान कर?” दीपक बोला.
“ह्म्म्म….
तो तुम कब से चुदाई के खेल खेल रहे हो?” “बस मेरी रानी, जब से अठारह का हुआ, तबसे पेलाई कि प्रैक्टिस कर रहा हूँ.
ताकि जब भी तुम जैसी कोई मिले उसे जीवन का पूरा मज़ा दे सकूं.
” “और कितने रिश्तेदार शामिल होते हैं इस समारोह में?”. “अब चाचा का तुम्हें पता ही ही है.
चाची भी एक नम्बर की चुदाक्कड हैं.
मैं जब उनके यहाँ जाता हूँ, मुझे चाचा चाची के रूम में सोना पड़ता है.
बाकी के रिश्तेदारों के बारे में धीरे धीरे पता चल जाएगा”. “और गौरव और विजय?”. “जब भी घर में कोई जन्मदिन वगैरह मनाते हैं.
हम सब मिल के मम्मी कि चुदाई करते हैं.
जिसका जन्मदिन होता है उसे सब से पहले लेने को मिलती है.
” “हे भगवान्…” महिमा अभी भी हैरानी में थी. “कल छुट्टी है, गौरव और विजय को भी तुमसे मिलवा देंगे” दीपक बोला “नहीं दीपक.
इस परिवार ने मुझे इतना चुदाक्कड बना दिया है.
गौरव और विजय से तो मैं अब अपने अंदाज़ से मिलूंगी.
थोडा मुझे भी नए जवान लड़कों को रिझाने का मज़ा लेने को तो मिले” “अरे बिलकुल महिमा रानी.
उन सालों कि किस्मत खुल जायेगी.
” “हाँ दीपक.
बड़ा मज़ा आएगा मुझे मेरे दोनों देवरों को एक साथ चोद के”.
महिमा पूरे उत्तेंजना में थी.
“दो दो मर्दों को एक बार चोद लिया आज तो अब दो से कम में काम नहीं चलेगा तुम्हारा लगता.
स्रोत:इंटरनेट