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Bahan Jawan Banaya Family Chudai Kahani

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दोस्तों family chudai kahani के पिछले भाग में आपने पढ़ा की कैसे मेने अपनी छोटी बहन को चुदाई के लिए उत्तेजित किया, मस्त चुदाई की कहानी का अंतिम भाग आपके लिए – indian sexy kahani के अन्य भाग –. भाग – 1. भाग – 2.  . मैं उसके मम्मों को मसलने लगा और वो आँखें बंद करके उसके मज़े ले रही थी। मैंने बिना समय गंवाए उसका टॉप ऊपर कर के उतार दिया और अपनी टीशर्ट भी अलग करके उसके पीछे से चिपक गया। मैं उसकी नंगी पीठ पर किस करने. लगा और हाथों से उसके पेट, नाभि, मम्मों को सहलाने और दबाने लगा। मैंने उसकी ब्रा का स्ट्रेप उसके कंधों से नीचे कर दिया और उस जगह किस किया। अब उसके सीधे होने का समय था। मैंने जब उसको सीधा किया तो उसने अपने हाथों से अपने मम्मों को छिपाने क़ी कोशिश क़ी। उसके ब्रा के स्ट्रेप उसकी कोहनी तक गिर चुके थे और मम्मे आधे चाँद क़ी तरह ब्रा के बाहर. झांक रहे थे।. दोस्तो, आप लोगों ने महसूस किया हो तो लडको को लड़की के वो अंग जो पूरे खुले हों, उतने उत्तेजित नहीं करते जितने कि वो अंग करते हैं जो दिख कर भी नहीं दिख पा रहे हों। वही हालत मेरी थी। उसके आधे मम्मे मेरे सामने थे, पूरे दिख नहीं रहे थे। मैंने उसके आधे मम्मों को चूमना शुरु किया और उसकी ब्रा को उसके शरीर से अलग करना शुरु किया। थोड़ी देर में ही उसका ब्रा उसके जिस्म से अलग होकर मेरे हाथ में झूल रही थी।. ब्रा अलग होते ही उसके आधे कच्चे आम जैसे मम्मे मेरे सामने थे जिन पर छोटी छोटी भूरे से रंग क़ी निप्पल थे। मैंने अपनी जीभ निकाली और उसके निप्पल पर लगा कर उनको चाटने लगा।. थोड़ी देर में ही उसके मम्मे मेरे मुँह में थे, मैं उनको पूरा अपने मुँह में लेना चाहता था पर हो नहीं पा रहा था। मेरे हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर घुस चुके थे और उसके चूतड़ सहला रहे थे। मैंने काफी देर तक उसके मम्मों का रस पिया फिर अपनी जीभ से उसके पूरे नंगे जिस्म को चाट चाट कर गीला कर दिया। बाकी काम मेरे हाथ ने उसकी स्कर्ट में कर दिया था। वो सिर्फ आँखें बंद करके सबका मज़ा ले रही थी।. हालांकि मुझको यह सब अच्छा लग रहा था क्योंकि जिस लड़की को मैं अपने बिस्तर में लाने क़ी सोच रहा था वो आज मेरे बिस्तर क़ी रानी बन के पूरी नंगी होने को तैयार थी।. मैंने अपनी पैंट उतार दी और उसकी नंगी टांगों चाटने लगा। चाटते चाटते मैं उसकी स्कर्ट पूरी ऊपर कर चुका था और मेरा मुँह उसकी चूत के बिल्कुल पास था जहाँ से मैं उसकी चूत क़ी खुशबू ले रहा था। काला रंग वैसे. भी मुझको उत्तेजित करता है और उसने काले रंग क़ी पेंटी पहन रखी थी।. मैंने उसकी स्कर्ट एक झटके में उतार कर फेंक दी। एक जवान खूबसूरत लड़की मेरे बिस्तर पर सिर्फ पेंटी में थी। एकदम गोरा रंग, बिना बालों का नमकीन सा जिस्म। सहा नहीं गया मुझसे और मैंने अपना मुँह उसकी चूत पे रख दिया। पाव जैसे उसकी चूत पेंटी के अन्दर थी जो मैं खाने क़ी पूरी कोशिश कर रहा था। अब मेरा लंड यह सब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, मैं अपनी उंगली उसकी पेंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत को महसूस करने लगा। उसकी चूत क़ी फाकों पर मेरी उंगली चल रही थी।. अंकिता क़ी आवाजें अब सेक्सी सिसकारियों में बदल गई थी।. मैंने अब बिना इंतजार किये उसकी पेंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे जो साफ़ बता रहे थे कि उसने हम लोगों के पहले वाले मिलन के बाद ही इनको साफ़ किया था।. मैंने अब उसकी नंगी चूत को अपने मुँह में ले लिया और उसके पाव के मज़े लेने लगा। मेरा बस चलता तो उसकी पूरी चूत खा जाता पर उसकी चूत बहुत फूली हुई थी। मैं उसकी एक एक फाकों को मुँह में लेकर चूसने लगा।. अब मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया, वो लेटी हुई थी सो मैंने उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और उसकी चूत पर अपना मुँह लगा दिया। मेरा जीभ उसकी चूत क़ी फाकों को अलग कर के उसके अन्दर घुसी जा रही थी। वो सिसकियाँ ले रही थी और उसके हाथ मेरे सर पर आ गये थे और मेरे सर को अपनी चूत क़ी ओर धकेल रहे थे।. मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर थे और उनको उठा उठा के अपने मुँह और उसकी चूत के बीच क़ी दूरी को कम करने क़ी कोशिश कर रहे थे। मेरी जीभ उसकी चूत में काफी अन्दर जा चुकी थी, पर कहते हैं ना जहाँ सुई क़ी जरुरत होती है वहाँ तलवार काम नहीं करती। यहाँ जरुरत मेरे लंड क़ी थी तो जीभ कहाँ वो काम कर पाती।. फिर भी मेरी जीभ के असर से उसका पानी निकलना शुरु हो गया था। अब मैं खड़ा हुआ और अपनी चड्डी निकल दी। मेरा खड़ा हुआ लंड हवा में झूल रहा था। मैंने अपना लंड अंकिता के पूरे नंगे जिस्म पर फेरना शुरु किया।. मेरा मन अपना लंड उसके मुँह में डालने का था सो मैंने अपना लंड उसके मुँह और होंठों पे लगाना शुरु किया। अब बारी उसके काम करने क़ी थी।. मैं पलग पर टेक लेकर बैठ गया और वो अब मेरी टांगों के बीच आ गई। मेरा लंड मोबाइल टावर क़ी तरह खड़ा था। उसने बिना देर किये मेरे लंड पर जीभ फेरना शुरु किया। वो मेरे लंड को जड़ से लेकर टोपे तक चाट रही थी।. उसने अपने हाथो से लंड को पकड़ कर उसकी खाल ऊपर नीचे करके मेरा मुठ मारने लगी। उसको यह सब कैसे आता था, जब मैंने उसको पूछा तो उसने बताया कि किया नहीं तो क्या हुआ नेट पर देखा बहुत है। मैंने उससे लंड मुँह में लेने को बोला तो वो मना करने लगी। मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया पर मैं थोड़ा उदास हो गया। यह देख कर वो मुस्कुराई और अपना मुँह खोल कर मेरे टोपे को अपने मुँह के अन्दर लेना शुरु कर. दिया। उसके मुँह क़ी गर्मी और गीलापन मेरी हालत खराब कर रहा था। उसको उल्टी सी आ रही थी पर अगर उस वक़्त मैं उसको रोक देता तो वो कभी लंड चूसना नहीं सीख पाती। वो धीरे धीरे मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले. गई। मेरा लंड उसके गले तक पहुँच गया। अब वो आराम से मेरे लंड को मुँह के अन्दर-बाहर करने लगी थी जैसे बच्चे लोलीपॉप खाते हैं उसी तरह वो मेरा लंड चूस रही थी।. पहली बार में ही उसने मुझको मस्त कर दिया था। सोचा नहीं था मैंने ककि मेरे लंड क़ी ऐसे तरह भी चुसाई होगी। मन तो किया कि अपना सारा पानी उसके मुँह में ही निकाल दूँ पर मैं नहीं चाहता था कि वो आगे कभी लंड. चूसने की सोचना तक छोड़ दे। जितना उसने किया था उतना ही बहुत था मेरे लिए।. अब अपने पे और काबू रख मेरे बस में नहीं रह गया था। मैंने उसको बिस्तर पर लेटा दिया। मेरे सपनों की रानी मेरे सामने मेरे बिस्तर पर नंगी लेटी थी। एकदम मस्त फिगर, गोरा रंग, पूरे जिस्म पे एक भी बाल नहीं था उसके, एकदम चिकना बदन, चमचमाते जिस्म की मालकिन थी मेरी बहन।
स्रोत:इंटरनेट