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Bhade Ka Pati Hot Hindi Sex Story

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ये hot hindi sex story एक बहुत ही अजीब वाकये की है, जहाँ मैं एक औरत का भाड़े का पति बनता हूँ। हम गारंटी लेते है की आप को ये sex kahani पढके जन्नत नसीब हो जाएगी.. Sex story in hindi के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. “राज, संजना मैडम अपनी केबिन में तुमसे मिलना चाहेंगी,” मेरी सेक्रेटरी ने मुझसे कहा। ये एक ऐसा वाक्य था जो कोई भी सक्सेना इंटरनैशनल में सुनना पसंद नहीं करता था। इसका सीधा मतलब था कि आज से आपका वजूद एक इतिहास बनने वाला है। संजना सक्सेना का ये मानना था कि वो खुद अपने हर कर्मचारी को खराब. खबर सुनाना पसंद करती थी बजाय अपने किसी अधिकारी के ज़रिये। पिछ्ले कईं सालों से सक्सेना इंटरनैशनल का कारोबार धीमा पड़ता जा रहा था। खर्चों को कम करने के हिसाब से वो अपने कर्मचारियों में कटौती करते आ रहे. थे। मैं समझ गया कि आज मेरा नंबर है, मुझे फिर इंटरव्यू की लाईन में खड़ा होना पड़ेगा। मैंने संजना सक्सेना के प्राइवेट केबिन के दरवाज़े पर दस्तक दी।. “कम इन,” मुझे संजना की आवाज़ सुनायी दी। मैंने दरवाज़े को धकेला और उसके ऑफिस में कदम रखा। संजना अपनी मेज़ से उठ कर मेरे पास आयी और अपना हाथ मुझसे मिलाने के लिये आगे बढ़ा दिया। उसे देख कर हर बार की तरह फ़िर मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी फ़ैल गयी।. वही सुंदर चेहरा, गोरा बदन और फ़िगर के तो क्या कहने, ठीक किसी मॉडल की तरह। काले बिज़नेस स्कर्ट-सूट और उससे मेल खाते काले हाई-हील सैंडलों में उसका व्यक्तित्व बहुत ही प्रभावशाली लग रहा था। “हाय राज कैसे हो? अच्छा लगा तुमसे मिलकर, बैठो।” उसने अपने मधुर स्वर में कहा। हाथ मिलाने के बाद वो अपनी मेज़ के पीछे की कुर्सी पर बैठ गयी और मैं उसके सामने की कुर्सी पर। मेरे बैठते ही उसने अपने सामने फ़ोल्डर को खोला और कुछ पढ़ने लगी, फ़िर उसने मेरी तरफ़ देखा और फ़िर फ़ाइल को पढ़ने लगी। “राज तुम हमारी कंपनी में कितने सालों से काम कर रहे हो?” उसने पूछा।. “लगभग दस साल से, अपने हाइस्कूल के ठीक बाद ही मैंने आपके पिताजी के साथ काम करना शुरु कर दिया था,” मैंने जवाब दिया। “बड़ी मुश्किल हुई होगी तुम्हें, दिन भर ऑफ़िस में काम करना फिर रात को कॉलेज में पढ़ना?” संजना ने कहा। “इतना आसान तो नहीं था मिस सक्सेना, पर आपके पिताजी ने मेरी काफी मदद की इस विषय में,” मैंने कहा। “हाँ मुझे पता है। वो अपनी दिल की बात ज़ुबान पर नहीं ला पाये नहीं तो हमेशा उन्होंने तुम्हें अपने बेटे की तरह माना था। पिताजी ने तुम्हें तुम्हारी पढ़ाई के लिये उधार भी दिया था जिसे उन्होंने तुम्हारी. ग्रैज्युएशन का तोहफ़ा कहकर माफ़ कर दिया था। ऐसा उन्होंने क्यों किया राज?” संजना बोली।. “मुझे पता नहीं,” मैंने जवाब दिया। “तुम्हें पता है राज और मुझे भी पता है। तुमने ऐसा क्यों किया राज? तुमने उस झमेले में अपनी गर्दन क्यों फ़ंसायी?” संजना ने कहा।. “आपके पिताजी बहुत ही ही अच्छे इंसान थे मिस संजना, और मैं नहीं चाहता कि कोई रंडी उनकी ज़िंदगी बरबाद कर दे,” मैंने जवाब दिया। “क्या तुम्हारी पढ़ायी के लिये पैसे देना फ़िर इनाम में माफ़ कर देना उसकी कीमत थी?” संजना ने पूछा।. “नहीं मैडम ऐसा नहीं था। आपके पिताजी मुझे पहले ही उधार दे चुके थे और उसे मेरी डिग्री का तोहफ़ा कह कर माफ़ कर चुके थे। और ये वो एक कारण था जिसके लिये मैंने सब कुछ किया। उन्हें मेरी मदद करने की जरुरत नहीं. थी, उन्होंने जो कुछ किया अपने दिल से किया, और कोई भी इंसान ये सब सहन नहीं कर सकता कि कोई पैसे की भूखी रंडी किसी ऐसे अच्छे इंसान के साथ ये सब करे,” मैंने कहा। “तुम खुशनसीब हो कि उस समय डी-एन-ए टेस्ट का चलन नहीं था, अगर होता तो तुम्हारी कहानी हवा हो गयी होती,” संजना बोली। “ऐसी बात भी नहीं थी, पचास-पचास प्रतिशत संभावना थी कि मेरी कहानी हर हाल में सच साबित हो जाती।” मैंने जवाब दिया। “तुमने और पिताजी ने मिलकर ये सब किया?”. “मुझे नहीं पता कि आपके पिताजी ने क्या किया, पर मेल-रूम के आधे से ज्यादा कर्मचारी ये कर सकते थे। उनमे से कोई भी उसके बच्चे का बाप हो सकता था,” मैंने कहा। “फिर भी ऐसी क्या बात थी जो तुमने उसके खिलाफ़ गवाही दी। जब उसने कहा कि मेरे पिताजी ने उसे गर्भवती बनाया है, पर उसने तुम्हें बताया था कि वो बच्चा मेरे पिताजी का नहीं है, वो तो सिर्फ़ पैसो के लिये ऐसा कह रही है,” संजना ने कहा। “इमानदारी और नमक हलाली और कुछ नहीं,” मैंने जवाब दिया। “पर मैंने सुना है तुम पुराने ख्यालातों के हो?” संजना ने कहा।. “जहाँ तक मेरा सवाल है, इमानदारी और नमक-हलाली वक्त के साथ नहीं बदलती मैडम!” मैंने जवाब दिया। “क्या ऐसा हो सकता है कि जो इमानदारी और नमक-हलाली तुमने मेरे पिताजी के साथ दिखायी थी वो उनकी आगे की पिढ़ियों के साथ भी कायम रह सकती है?” संजना ने प्रश्न भरी नज़रों से मुझसे कहा।. “आपके कहने का मतलब क्या है, मैं कुछ समझा नहीं?” मैंने पूछा। “इतना ही राज!! क्या तुम वो ही इमानदारी और नमक-हलाली मेरे साथ निभा सकते हो?” संजना ने कहा।. “मिस सक्सेना, मैं अभी भी आपकी बातों का मतलब नहीं समझा,” मैंने कहा। “राज मैं काफी मुसीबत में हूँ और मुझे एक ऐसा इंसान चाहिये जो मुझे इस मुसीबत से बाहर निकाल सके,” संजना थोड़े दुखी स्वर में बोली। “मिस सक्सेना मुझसे जो हो सकेगा मैं करुँगा,” मैंने कहा। “हो भी सकता है और नहीं भी राज! सबसे पहले तो तुम ये समझ लो कि तुम्हें काफी जिल्लत से गुज़रना होगा, ऐसा भी वक्त आ सकता है कि तुम मुझसे नफ़रत करने लगो। आज रात का खाना मैं तुम्हारे साथ खाना चाहुँगी राज, जहाँ हमारी बातों को कोई सुन नहीं सके, वरना दीवारों के भी कान होते है ये मैंने सुना है। क्या मैं तुम्हें आज रात सात बजे पिक कर लूँ? संजना ने कहा। “हाँ क्यों नहीं, मैं आपको मेरे घर का पता दे देता हूँ,” मैंने कहा। “इसकी जरुरत नहीं है राज, मुझे पता है तुम कहाँ रहते हो।” शायद इन बातों के दौरान मेरे चेहरे पर अजीब भाव आ गये होंगे। “थोड़ा इंतज़ार करो राज, आज की रात तुम्हें तुम्हारे हर प्रश्न का जवाब मिल जायेगा।” थोड़ा सा इंतज़ार करो। उसके लिये कहना आसान था पर मेरे लिये नहीं। उसे कैसे पता कि मैं कहाँ रहता हूँ। दीवारों के भी कान होते हैं – इस बात का क्या मतलब है, वो मुझसे क्या चाहती है, इन ही सब ख्यालों में खोया मैं अपने केबिन में बैठा था। मैं इन ही ख्यालों में खोया था और अपने काम पर भी ध्यान नहीं दे पा रहा था। मेरे दिमाग में यही घूम रहा था कि आज की रात खाने पर वो मुझसे क्या कहेगी।. और वह घड़ी आयी। संजना मुझे लेने आयी। हमेशा की तरह मैं उसे देखता ही रह गया। कमर तक लंबे खुले हुए उसके काले घने बाल, मदहोश कर देने वाली आँखें, आकर्षक स्कर्ट-टॉप और उससे मेल खाते उँची हील के सैंडल। मैं एक आह भर कर गाड़ी में बैठ गया और हम गाड़ी में बात करने लगे।. “राज मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे शादी कर लो!” संजना ने कहा।.
स्रोत:इंटरनेट