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Bhade Ka Pati Lovely Sex Story

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संजना के साथ मेरा रिश्ता बहुत ही जटिल किस्म का बन चूका था। वो औरो से चुदती और मुझसे चूत चटवाती। मैं संजना का बहुत ख्याल रखता था। इस lovely sex story का एक मस्त भाग-. Sex story in hindi के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. संजना ने मुझे हल्का सा धक्का देते हुए कहा, “बस राज अब और नहीं।” मैं एक बार फिर से उससे दूर हट गया और अपनी किताब पढ़ने लगा। थोड़ी देर बाद वो दोनों मेरे कमरे से चले गये और मैं लाइट बुझा कर गहरी नींद में सो गया। वो पहली और आखिरी रात थी कि अमित ने संजना को मेरे सामने. चोदा हो। साथ ही उसके लिये वो पहली और आखिरी रात थी कि मैंने उसके सामने संजना की चूत को चूसा हो। शायद उसे इस बात से दुख पहुँचा था कि जो कमाल उसका लंड नहीं दिख पाया वो कमाल मेरी जीभ ने दिखा दिया, कि संजना इतनी जोर से सिसकते हुए उसके सामने झड़ी थी। पर मैं उसे ये बता भी तो नहीं सकता था कि उस रात पहली बार ऐसा हुआ था कि संजना इतनी जोरों से झड़ी थी। शायद मेरी तकदीर मेरा साथ दे रही थी।. और छः महीने इसी तरह गुज़र गये। किसी चीज़ में कोई परिवर्तन नहीं आया। सिर्फ़ इस बात के कि अब संजना पहले से ज्यादा रातों को मेरे कमरे में आने लगी। पहले तो संजना हफ़्ते में दो या तीन दिन आती थी किंतु अब तो. लगभग हर रात आने लगी। उसके स्वभाव में भी थोड़ा परिवर्तन आ गया। पहले वो मेरे लंड को झटके देकर मुझे उठाती थी और फिर मेरे चेहरे पर चढ़ कर अपनी चूत मेरे मुँह से लगा देती थी। पर अब मुझे उठाने के बजाय वो तब तक. मेरे लंड को मसलती जब तक मेरी नींद खुद-बखुद ना खुल जाती।. अब अक्सर ऐसा होने लगा। वो रात को शराब के नशे में मेरे कमरे में आती और मेरे लंड को तब तक मसलती रहती और जब मेरा लंड पानी छोड देता तो मेरे चेहरे पर चढ़ कर अपनी चूत मेरे मुँह से लगा देती।. समय इसी तरह गुज़रता रहा। सादिया हफ़्ते में तीन और कभी चार दिन के लिये आती। सादिया खुद इतनी कामुक थी कि जब भी आती, मुझे निचोड़ कर रख देती थी। मुझसे कई बार संजना ने पूछा कि मुझे दूसरी लडकी चाहिये तो हर बार मैंने मना कर दिया। पता नहीं सादिया में ऐसी क्या बात थी। कभी तो मुझे लगता कि संजना शायद सादिया से जलने लगी है और मुझे चिढ़ाने के लिये ऐसा पूछ रही है कि उसका पति एक दूसरी लडकी के साथ इतने मज़े कर रहा है।. गुज़रते वक्त के साथ सभी को हम ये एहसास दिलाने में कामयाब होते गये कि हमारी शादी-शुदा ज़िंदगी काफी अच्छी गुज़र रही है। मैंने कई बार राजदीप मिश्रा को हमारे आस पास घूमते देखा। पर मुझे उसे देख कर एक अंजान सा. भय दिमाग में आता। मैं जब भी उसे देखता तो मुझे ऐसा लगता कि वो कुछ और फ़िराक में है। उसका मकसद हम पर नज़र रखने का नहीं बल्कि वो कुछ और चाहता है।. फिर एक दिन मेरा शक यकिन में बदल गया…….
जैसा मैंने सोचा था ठीक वैसा ही हो रहा था। मेरा शक यकीन में बदलने लगा। इस यकीन के कई कारण थे। पहले तो मुझे लगा कि ये सब अलग-अलग घटनायें हैं पर बाद में मुझे एहसास हुआ कि ये सब एक ही ज़ंज़ीर कि कड़ियाँ हैं।. शुरुआत कुछ इस तरह हुई। जब भी मैं घर पर संजना और अमित के साथ होता तो मैं अमित को नज़र-अंदाज़ करने लगा था। पर एक ही छत के नीचे साथ-साथ रहते हुए ज्यादा दिन तक किसी को नज़र-अंदाज़ कर सकना मुमकिन नहीं होता।. ऐसे ही एक रात की बात है, मैं स्टडी रूम में कंप्युटर पर गेम खेल रहा था। स्टडी रूम किचन और डायनिंग रूम के साथ ही सटा हुआ है। संजना और अमित डायनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और ऐसा हो नहीं सकता कि उन दोनों को मेरे स्टडी रूम में होने कि खबर ना हो। दोनों किसी बात पर बहस कर रहे थे। बहस करते-करते उन दोनों की आवाज़ें इतनी बढ़ गयी कि मुझे स्टडी रूम में साफ़ सुनाई दे रहा था।. अमित चाहता था कि संजना के पैसे का मामला सलटाने के बाद वो मुझे तलाक देकर उससे शादी कर ले। पर संजना कह रही थी कि वो अमित से किसी हाल में भी शादी नहीं कर सकती चाहे वो मुझे तलाक दे या ना दे। संजना की बात. सुनकर जितना मैं चौंका था उतना ही झटका अमित को भी लगा होगा। वो इसी उम्मीद में बैठा था कि भविष्य में संजना उससे शादी करेगी। उसका कहना था कि इससे समाज और उसकी सोसाईटी में इज्जत पे धब्बा लगेगा। इसके बाद. क्या हुआ मुझे पता नहीं क्योंकि अमित गुस्से में पैर पटकता हुआ घर से बाहर चला गया।. दूसरी घटना करीब एक महीने बाद घटी। हमेशा की तरह एक दोपहर को मैं सादिया को चोद कर हटा था। आज मैंने उसके तीनो छेदों की जम कर चुदाई की थी।. “राज, तुम्हें पता है, मुझे तुमसे चुदवाकर बहुत मज़ा आता है। हालांकि मैं अपने शौहर से तकरीबन रोज़ ही चुदवाती हूँ पर पता नहीं तुम्हारे साथ मैं बेहद ज्यादा उत्तेजित हो जाती हूँ और मुझे मज़ा भी बहुत आता है जबकि मैं ये काम सिर्फ़ पैसों के लिये कर रही हूँ।” सादिया ने मुझसे कहा।. सादिया की बात सुनकर मेरे मन को दुख हुआ। “ये कह कर तुमने मेरा दिल दुखाया है सादिया, मैं तो यही समझ रहा था कि मेरे व्यक्तित्व को देख कर तुम मेरे साथ हो,” मैंने कहा। मेरी बात सुनकर सादिया हँसने लगी, “तुम बेवकूफ़ हो राज। क्या तुम मुझे पागल समझते हो। मैं यहाँ सिर्फ़ पैसे के लिये हूँ ना कि प्यार या किसी और वजह से। राज तुम्हारी बीवी की ये कहानी कि वो बिमारी की वजह से तुम्हारी ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकती किसी और को बेवकूफ बना सकती है मुझे नहीं। मैंने तुम्हारी बीवी संजना को उस बंदर अमित के साथ कई बार होटलों में जाते देखा है। तुम दोनो जो दुनिया को जताना चाहते हो मैं. सब समझती हूँ। राज हमें इस मुद्दे पर बात करनी होगी।”. अगली घटना एक हफ़्ते बाद हुई जब मुझे राजदीप मिश्रा का फोन आया कि वो मेरे साथ खाना, खाना चाहता है। जब मैं राजदीप को खाने पर मिला तो वो सीधा मुद्दे की बात पर आ गया। “राज मैं कई महीनों इस शक में था कि तुम्हारी और संजना की शादी एक दिखावा है जिससे वो ट्रस्ट से पैसा हासिल कर सके। हमेशा से मुझे यही लग रहा था कि संजना ने तुम्हें पैसे देकर खरीदा है और तुम उसके किराये के. पति हो। आज मेरा शक यकीन में बदल गया है। मेरे पास पक्के सबूत हैं कि संजना ने तुम्हें उसका पति बनने के लिये पचास लाख रुपये दिये हैं ।”. मैं कुछ कहने ही जा रहा था कि उसने मेरी बात बीच में ही काट दी। “राज अब इंकार करने की कोशिश मत करना क्योंकि मैं तुम्हारा यकीन नहीं करुँगा। मेरा पक्का सबूत और गवाह है जो कोर्ट में खड़ा होकर ये गवाही दे. सकता है कि तुम्हारी शादी संजना सक्सेना के साथ नकली है और वो सक्सेना फ़ाऊंडेशन के पैसे हासिल करना चाहती है। मैं तुमसे सिर्फ़ इसलिये मिल रहा हूँ कि तुम मेरे लिये गवाही दो,” राजदीप ने कहा।
स्रोत:इंटरनेट