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Bhade Ka Pati Sexi Kahani

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डील बस हो ही चुकी थी। मैं अपनी बॉस का भाड़े का पति भले ही बनने वाला था पर सुहागरात तो मैं ज़रूर मानूँगा। पढ़िए इस मस्त sexi kahani का अगला भाग-. Sex story in hindi के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. दो दिन के बाद संजना ने मुझे अपने ऑफ़िस में बुलाया और बैठने को कहा। जैसे ही मैं कुर्सी पर बैठा उसने कुछ कागज़ात मेरे सामने रख दिये।. “राज ये एग्रीमेंट जैसे तुमने कहा था वैसे ही बनाया गया है। जहाँ तक हमारी सुहागरात का सवाल है तुम हर वो काम कर सकते हो जो तुम चाहो उसके लिये मैं तैयार हूँ। अब रहा सवाल तुम्हारे लिये किसी पर्मानेंट चूत. के इंतज़ाम का तो मैं चाहुँगी कि घर में एक दिखावे की नौकरानी रख ली जाये जिसका असल काम घर की सफ़ाई नहीं बल्कि तुम्हारे लंड की सफ़ाई करना होगा। बाहर वालों को कुछ पता ना चले इसलिये मैं चाहुँगी कि ये सब हमारे. घर की चार दिवारी में ही हो। अगर तुम्हें ये मंज़ूर हो तो बोलो।”. संजना ने फिर अपना ब्रीफ़केस खोला और उसमें से तीन फोटो एलबम निकाल कर मुझे पकड़ा दिये। “इनमें देखो शायद तुम्हें कोई पसंद आ जाये। जिनके चेहरे पर निशान लगा है वो उपलब्ध नहीं हैं” संजना ने कहा।. मैं एलबम में लगी सुंदर औरतों की तसवीरों को देखने लगा। फोटो के साथ-साथ उनके बारे में भी लिखा था। मैं पढ़ने लगा और संजना की ओर देख कर मुस्कुरा दिया।. “मेरी एक दोस्त है जो मॉडलिंग एजेंसी के साथ एसकोर्ट एजेंसी भी चलाती है। उसने मुझे आश्वासन दिया है कि जिस काम के लिये मैं पैसे खर्च कर रही हूँ उससे कहीं अच्छा काम इनमें से हर कोई करेगी। इनमें से एक को. चुन लो राज, मैं सब इंतज़ाम कर लूँगी। अगर कुछ महीनों बाद तुम्हारा उससे दिल भर जाये तो फिर इनमें से किसी और को चुन सकते हो। तो अब हमारा सौदा पक्का?” संजना ने कहा। जब संजना मुझसे ये कह रही थी तब मैं एलबम में लगी फोटो देख रहा था। अचानक मैं एक फोटो को देख कर रुक सा गया और उस फोटो को ध्यान देखने लगा। सादिया मेरे एक दोस्त की पत्नी थी जिसके साथ मैं फ़ुटबॉल खेला करता. था, और हमेशा उसे चोदने के सपने देखा करता था। “इस एलबम की हर औरत पैसे के लिये चुदवाने को तैयार है?” मैंने पूछा।. संजना ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी। मैंने उसे एलबम वापस लौटाया, “ये वाली।” “तो मैं ये समझ लूँ की हमारा सौदा अब पक्का है?”. “हाँ संजना मुझे ये सौदा मंजूर है!”. उस दिन के बाद तो मेरी ज़िंदगी काफी व्यस्त हो गयी। अगले तीन महीने तक हम प्रेम का नाटक करते रहे। फिर उसके बाद हमारी सगाई की तारीख घोषित कर दी गयी। उसके बाद तो जैसे पार्टियों की लाईन लग गयी। कभी कोई दोस्त. पार्टी दे रहा है तो कभी कोई बिजनेस से जुड़ा व्यक्ति। उसके बाद शादी की तैयारियाँ और साथ ही हमारे हनीमून की प्लानिंग। एक शाम या रात ऐसी नहीं थी कि मैं और संजना किसी पार्टी या होटल में साथ में ना हो। शादी. के वक्त तक हमारे प्यार की सच्चाई पर सभी को विश्वास हो चुका था। प्रेस, मेडिया वाले और दोस्त यार सब हमारे प्यार की मिसाल देने लगे। अभी तक एक शर्त पूरी नहीं हुई थी, वो थी पचास लाख रुपये की। मैंने संजना को कई बार याद भी दिलाया और हर बार उसने यही कहा कि तुम चिंता मत करो, हो जायेगा। मैं भी जानता था कि शादी से पहले तो होगा ही वर्ना मैं थोड़े शादी करने वाला था। दो दिन बाद उसने मुझे एक कन्फर्मेशन लेटर थमाया कि मेरे नाम से बैंक में रुपया जमा हो चुका है। अभी तक मेरी मुलाकात संजना के प्रेमी अमित कपूर से नहीं हुई थी। शायद शादी तक संजना. ने उसे अपने आपसे दूर ही रखा हुआ था। शादी वाले दिन मैं भीड़ में उसे ढूँढने लगा। जितना मैंने उसके बारे में सुना था मैं जानता था कि वो इतना कमीना इंसान है कि आये बगैर मानेगा नहीं।. मेरा सोचना कितना सही था। जैसे ही मैं और संजना मंडप की ओर बढ़े वो ठीक ऐन सामने आकर बैठ गया। मेरी उसे नज़रें मिली और मैं मुस्कुरा दिया। मैं उसे देख कर अपने आप से कहने लगा, “साले, गधे के बच्चे, तेरी प्रेमिका आज की रात मेरी रंडी बनेगी। तू चाहे जितना खुश हो ले, पर जब भी तू इसे चोदेगा… ये दौड़ कर मेरे पास ही आयेगी कुत्ते के बच्चे।” शादी की सारी विधी बिना व्यवधान के पूरी हो गयी। पर आखिरी रसम के लिये शायद संजना ने अपने आपको तैयार नहीं किया हुआ था जब पंडितजी ने कहा, “अब आप दुल्हन को मंगलसुत्र पहना दीजिये।” एक बार तो मैंने सोचा कि शायद संजना इंकार कर देगी या कुछ बहाना बना देगी पर मुझे क्या पता था कि वो इसकी भी तैयारी करके आयी है। पैसों के लिये रिश्तों और रिवाजों की कहाँ अहमियत होती है। और आने वाले पाँच. साल मुझे यही सब भुगतना और सहन करना है।. शादी का रिसैप्शन कोई खास नहीं था। हर रिसैप्शन की तरह लोगों ने हमें बधाई दी और तोहफ़े दिये। फिर वही पीना-पिलाना और खाना-खिलाना। संजना ने काफी ड्रिंक कर रखी थी पर ठीक पहले से तय वक्त पर मैं संजना को लेकर. वहाँ से निकल गया।. रिसैप्शन से ठीक दो किलोमिटर दूर एक गाड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी।. “राज, ये सब क्या हो रहा है प्लीज़ मुझे बताओ,” संजना ने पूछा। “तुम्हारे लिये एक सरप्राईज है जान, थोड़ा इंतज़ार करो,” मैंने कहा। मैं अपना सामान कार की डिक्की में रखने लगा। कार का ड्राइवर मेरी मदद करता रहा। सामान रखे जाने के बाद मैंने ड्राइवर को ५०० रुपये दिये और वो कार की चाबी मुझे देकर चल गया।. “राज, ये क्या हो रहा है, किसकी गाड़ी है ये?” संजना ने फिर पूछा। “थोड़ा और सब्र करो, थोड़ी देर में तुम्हें सब पता चल जायेगा,” मैंने कहा। जैसे ही वो ड्राइवर गया मैंने संजना को गाड़ी में बैठने को कहा।. “जब तक तुम मुझे सब कुछ नहीं बताओगे, मैं तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाऊँगी,” संजना ने कहा। “संजना गाड़ी में बैठो, जिद्द मत करो। अगर तुम नहीं चली तो तुम्हें यहाँ अकेला सड़क पर छोड़कर मैं चला जाऊँगा। फिर तुम उस हनीमून होटल जाकर सफ़ाई दे देना कि तुम अपने पति के बिना वहाँ क्यों आयी हो,” मैंने थोड़ा गुस्से में कहा।. संजना ने इतने गुस्से से मेरी ओर देखा जैसे कि वो मेरा खून ही कर देगी। फिर वो गाड़ी में बैठ गयी।. “पर मुझे बताओ ये सब क्या हो रहा है, और तुम क्या चाहते हो?” “आराम से संजना, ये भी कोई तरीका है अपने पति से बात करने का,” मैंने कहा। “बकवास बंद करो राज, मैं सब कुछ जानना चाहती हो कि तुम क्या चाहते हो?” “आसान सी बात है मेरी जान, मैं तुम पर विश्वास नहीं करता। तुमने बड़ी आसानी से मेरी सुहागरात वाली बात मान ली। तुम्हारे दिमाग ने तुमसे कहा कि जो माँग रहा है इस वक्त हाँ कर दो, एक बार शादी हो जायेगी तो तुम अपनी जुबान से मुकर सकती हो। तब तक शादी हो चुकी होगी और राज पैसे के लालच में कुछ नहीं बोलेगा। क्यों मैं सच कह रहा हूँ ना?” मैंने उसकी ओर देखते हुए कहा।.
स्रोत:इंटरनेट