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Bhateeje Ki Shart Porn Hindi Story 2

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 . “दो दिन बाद उसका जन्मदिन है। मैं उसे शाम को किसी तरह बाहर भेज दुँगा। उस दौरान तुम तैयार होकर उसके कमरे में चली जाना और बत्ती बंद कर लेना। मैं उससे कहुँगा कि वह कमरा बंद कर बत्ती जलाए, उसका तोहफा वहीं है। फिर देखते हैं वह क्या करता है। अगर वह मान जाता है तब आगे देखते हैं।”.  . “ठीक है। अगर कुछ गड़बड़ हुई तो आप ही संभालना।” यह कहकर मैं करवट लेकर सो गयी।.  . अगले दो दिनों तक मेरी अपने पति से कोई विशेष बात नहीं हुई।.  . तिसरे दिन सुबह उठने पर मैंने गौरव को जन्मदिन की बधाई दी और अपने काम में लग गयी। मेरे पति ने भी गौरव को जन्मदिन की बधाई दी और मुझे शाम के लिए इशारा किया। फिर तैयार होकर औफिस चले गये। अपना काम खत्म कर. मैं भी ब्युटि पार्लर चली गयी। दोपहर बाद मैं घर आई तो गौरव घर ही था। हमनें खाना खाया। खाने के बाद गौरव अपने क्लास चला गया। मैं भी थोडा़ आराम करने लगी।.  . शाम को सात बजे के आसपास मेरे पति भी आ गये। थोडी़ देर बाद गौरव भी आया। आते ही मेरे पति ने कुछ कुछ काम बताकर बाहर भेज दिया और मुझे तैयार होकर उसके कमरे में जाने को बोला। मैं भी तैयार होने लगी।.  . तैयार होने के बाद मैंने गौरव का कमरा भी थोडा़ ठीक किया। उसके आने से पहले मैं उसके कमरे में गयी और बिस्तर पर बैठ गयी। मेरे पति ने मुझे चादर से ढ़ककर बत्ती बंद कर दिया और बाहर चले गये।.  . गौरव के आने के बाद मेरे पति ने उससे कहा “गौरव आज तुम्हारे जन्मदिन पर मैंने तुम्हारा तोहफा तुम्हारे कमरे में रख दिया है। कमरे में जाओ और कमरा बंद कर अपना तोहफा ले लो। अगर पसंद आए तो ठीक नहीं तो. तोहफा वापस भी कर सकते हो। लेकिन किसी भी सूरत में तोहफे के बारे में किसी से कोई बात नहीं करनी है, यह याद रखना।  . गौरव अब कमरे में आया और कमरा बंद कर बत्ती जलायी। बत्ती जलाने के बाद उसने बिस्तर मुझे ढ़ँका हुआ पाया और उसने मेरे उपर से चादर हटाया। चादर हटाने के बाद मुझे देखने पर सोचने लगा।. मैंने उससे कहा “गौरव मैंने तुम्हारे फुफा से हमारे बारे में कोई बात नहीं की है। टुर से आने के बाद पता नहीं क्या सोचकर उन्होंने मुझे किसी और से चुदते समय देखने की बात की और उन्होंने ही तुम्हारा. नाम सुझाया। फिर तुमसे सीधे ना बोलकर इस तरह किया है। अब तुम जो चाहो कर सकते हो।”.  . गौरव को तो जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गयी, उसने मुझे बेतहाशा चूमना शुरु कर दिया। चूमने के बाद उसने मुझे जल्दी से नंगा कर दिया।  . मुझे नंगा देखकर वह बहुत खुश हुआ। मैंने ब्युटि पार्लर जाकर थ्रेडिंग वैक्सिंग कराया था और अपने काँख और चूत के बाल भी हटवाये थे। मैं पूरी तरह चिकनी होकर नंगे ही उसके सामने पडी़ थी।.  . उसने पूछा “क्या तुमने यह सब मेरे लिए कराया है।”.  . “हाँ, जानूं तुम ही अब मेरे नये मालिक हो और मैं अब तुम्हें जानूं ही कहुँगी और जो भी तुम कहोगे मैं करुँगी।” इतना कहने के बाद मैं उसे स्मूच करने लगी।  . थोडी़ देर बाद उसने मेरे टाँगों को उठाया और कहा कि बहुत दिन के बाद तुम्हारा चूत चाटने को मिला है। आज तो मैं तुम्हें खा ही जाऊँगा। उसके बाद मेरे चूत को उसने जमकर चाटा और मुझे झाड़कर पस्त कर दिया।.  . मैं थोडा़ लेटी ही थी कि दरवाजा खुलने की आवाज आई। मैंने देखा तो गौरव बाहर जा चुका था और मेरे सारे कपडे़ और चादर भी ले गया था। मैं भी नंगे ही दरवाजे तक आई तो देखा बाहर मेरे पति को गौरव मेरा सारा कपडा़. दे रहा है।.  . उसने मेरे पति से कहा “फुफाजी आपका तोहफा मुझे पसंद है और विश्वास कीजिए यह सब बात मैं हमेशा राज ही रखुंगा। यह कपडे़ आप रखिए। मैं आज अपने हिसाब से काम करुँगा।” यह कहकर वह कमरे में आयाऔर मुझे. अपने आप को नंगाकर लंड चूसने को कहा।.  . मैंने उसे नंगा कर उसका लंड चूसना शुरु कर दिया। तबतक लंब चूसा जब तक कि वह मेरे मुँह में ही झड़ नहीं गया। इसके उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रखा और अपने रस का भी स्वाद लेने लगा।.  . इसके बाद उसने मेरी चुँचियों को चूसना शुरु किया। मेरे निप्पल को जमकर मसला। मैं कराहने लगी। मेरी काँखों को चाटा। फिर मेरी नाभि चाटते हुए वह मेरी चूत तक पहुँचा और मेरे चूत को फिर चाटा। अब मैं पूरी तरह से. गरम हो चुकी थी।.  . मैंने कहा “जानूं अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। अब जल्दी से मुझे चोद दो और अपनी रानी बना लो।”.  . अब मैंने लंड चूसकर खडा़ किया और बिस्तर पर लेटकर उसे चोदने का इशारा किया। अब मैं उसकी बुआ से उसकी रखैल बनने जा रही थी। उसने अपने लंड को मेरे चूत पर सटाया और धक्का दिया। मेरी गिली चूत में उसका लंड झटके. से समा गया।.  . फिर वह युँ थोडी़ देर रुका और मुझे चुमने लगा। मैं अब पूरी तरह उसका साथ देने लगी। उसने धीरे धीरे धक्का मारना शुरु किया और मैं भी कमर उचका उचका कर उसका साथ देने लगी। इसीतरह लगभग आधा घंटा तक काम चला। अब. मैं दो बार झड़ने के कारण थकने लगी थी। तभी उसने अपनी स्पीड बढा़ई और मेरे अंदर ही झड़ कर निढा़ल पड़ गया। हम दोनों थक गये थे इसीलिए जल्द ही सो गये।.  . फिर रात में एक बार और गौरव ने मुझे जमकर चोदा। सुबह उठने पर मैंने देखा गौरव अभी सोया है और उसका लंड आधा खडा़ था।.  . मैंने उसका लंड चूसकर उसे उठाया। उठने पर उसने मुझे फिर चोदा और मेरे चूत में ही अपना रस निकाल दिया। चूँकि मेरे सारे कपडे़ गौरव पहले ही रुम से हटा दिया था इसीलिए मैं नंगे ही उसी अवस्था में अपने कमरे में. गयी। मेरे चूत से रस टपककर जाँघों तक आ गया था। मैंने उसे तौलिया से पोछा।.  . तबतक मेरे पति औफिस जाने के लिए तैयार हो चुके थे। उन्होंने मुझे कसकर किस किया और औफिस चले गये। फिर मैं फ्रेश होकर नहायी और घर का काम खत्म किया।.  . तबतक गौरव भी उठा और फ्रेश होकर नाश्ता करके क्लास करने चला गया। उसके बाद मैंने दिनभर आराम किया क्योंकि रात की चुदाई का थकान उतारना था। शाम को मेरे पति आ गये। उसके बाद मैं और पति लीभिंग रुम में बैठ कर. बातें कर थे।.  . “कैसा लगा गौरव के साथ रात बिताकर”.  . “ठीक ही था।”.  . “सुबह तुम्हें देखकर लग रहा था कि रातभर जमकर चोदा उसने तुम्हें”.  . मैं शर्मा गयी और कुछ बोलती इससे पहले गौरव आ गया। रमन और गौरव एक दुसरे को देखकर मुस्कुराए। रमन ने पूछा “कैसी है तुम्हारी बुआ चुदने में”.  . “अच्छी है। मैं आपका एहसानमंद हुँ कि आपने मुझे ये मौका दिया। इसे मैं किसी कीमत पर राज ही रखुँगा।”.  . तभी वह मेरे बगल में बैठ गया और मुझसे पूछा “आप ठीक तो हैं ना बुआ।”.  . मैं बोली “ठीक हुँ।”.  . उसके बाद उसने मेरे पति के सामने ही मुझे किस करने लगा। मैं थोडा़ हिचकिचायी फिर गौरव के सिर पकड़कर किस करते हुए उसका साथ देने लगी।.
स्रोत:इंटरनेट