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Bijli Rajasthani Sex Story 2

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इस बार मैं एक कदम और आगे बढ़ गया और जैसे मेरी किस्मत का सवेरा हो गया। मैं उसके होंठ अपने होंठो में लकर पीने लगा। उसकी आंखों में गुलाबी डोरे खिंचने लगे। मेरा लण्ड कड़ा हो कर तन गया और उसकी चूत में. गड़ने लगा। वो जैसे मेरी बाहों में झूम गई। मैंने हिम्मत करके उसकी छोटी छोटी चूंचियाँ सहला दी। वो शरमा उठी। पर जवाब गजब का था। उसके हाथ मेरे लण्ड की ओर बढ़ गये और लजाते हुए उसने मेरा लण्ड थाम लिया।. मेरा सारा जिस्म जैसे लहरा उठा। मैंने उसकी मस्तानी चूंचियाँ और दबा डाली और मसलने लगा।. “भैया … मजा आवण लाग्यो है … (मज़ा आ रहा है)! हाय !”. मैंने उसे चूतड़ों के सहारे उठा लिया … फ़ूलो जैसी हल्की … मैंने उसे जैसे ही बिस्तर पर लेटाया तो वो जैसे होश में आ गई।. “भैया … यो कई (ये क्या )… आप तो म्हारे भैया हो … !”. “सुनो ऐसे ही कहना … वरना सबको शक हो जायेगा …!! ”. मैंने उसे फिर से दबोच लिया … वो फिर कराह उठी …. “म्हारी बात सुणो तो … अभी नाही जी … ” फिर वो खड़ी हो गई … मुझे उसने बडी नशीली निगाहों से देखा और मुँह छुपा कर भाग गई।. दो तीन दिन दिन तक वो मेरे पास नहीं आई। मुझे लगा कि सब गड़बड़ हो गया है। मुझे खाना खाना के लिये अपने वहीं बुला लेते थे। बिजली निगाहें झुका कर खाना खा लेती थी।. मैं बहुत ही निराश हो गया।. एक दिन अपने कमरे में मैं नंगा हो कर अपने बिस्तर पर अपने लण्ड से खेल रहा था। अचानक से मेरा दरवाजा खुला और बिजली धीरे धीरे मेरी ओर बढ़ी। मैं एकदम से विचलित हो उठा क्योंकि मैं नंगा था। मैंने जल्दी से पास. पड़ी चादर को खींचा पर बिजली ने उसे पकड़ कर नीचे फ़ेंक दिया। उसने अपना नाईट गाऊन आगे से खोल लिया और मेरे पास आकर बैठ गई।. ” अब सहन को नी होवै … !” और मेरे ऊपर झुक गई।. उसने मेरी छाती पर हाथ फ़ेरा और सामने से उसका नंगा बदन मेरे नंगे बदन से सट गया। उसका मुलायम शरीर मेरे अंगो में आग भर रहा था, लगा मेरे दिन अब फिर गये थे, मुझे इतनी जल्दी एक नाजुक सी, कोमल सी, प्यारी सी लड़की चोदने के लिये मिल रही थी। वो खुद ही इतनी आतुर हो चुकी थी कि अपनी सीमा लांघ कर मेरे द्वार पर खड़ी थी। उसने अपने शरीर का बोझ मेरे ऊपर डाल दिया और अपना गाऊन उतार दिया।. “बिजली, तुम क्या सच में मेरे साथ … ?” उसने मेरे मुख पर हाथ रख दिया। तड़पती सी बोली,”भाईजी … म्हारे तन में भी तो आग लागे … मने भी तो लागे कि मने जी भर के कोई चोद डाले !” उसकी तड़प उसके हाव-भाव से आरम्भ से ही नजर आ रही थी, पर आज तो स्वयं नँगी हो कर मेरा जिस्म भोगना चाहती थी। हमारे तन आपस में रगड़ खाने लगे। मेरे लण्ड ने फ़ुफ़कार भरी और तन्ना कर खड़ा हो गया। वो अपनी चूत मेरे लण्ड पर रगड़ने लगी और जोर जोर सिसकारी भरने लगी।. उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने होंठ मेरे होंठो से मिला कर अधर-पान करने लगी। उसकी जीभ मेरे मुख के अन्दर जैसे कुछ ढूंढ रही थी। जाने कब मेरा लण्ड उसकी चूत के द्वार पर आ गया। उसकी कमर ने दबाव डाला और. लण्ड का सुपाड़ा फ़च से चूत में समा गया। उसके मुख से एक सीत्कार निकाल गई।. “भाई जी … दैया रे … थारो लौडो तो भारी है रे (तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है)… !!” उसकी आह निकल गई।. अधरपान करते हुए मैंने अपनी कमर अब ऊपर की ओर दबाई और लण्ड को भीतर सरकाने लगा। सारा जिस्म वासना की मीठी मीठी आग में जलने लगा। कुछ ही धक्के देने के बाद वो मेरे लण्ड पर बैठ गई और उसने अपने हाथ से धीरे से. लण्ड को बाहर निकाला और अपनी गाण्ड के छेद पर रख दिया और थोड़ा सा जोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा अन्दर घुस गया। उसने कोशिश करके मेरा लण्ड अन्दर पूरा घुसेड़ लिया। उसकी मीठी आहें मुझे मदहोश कर रही थी।. “आह … यो जवानी री आग काई नजारे दिखावे … मारी गाण्ड तक मस्ताने लागी है … ।”. “बिजली, थारी तो चूत भोसड़े से कम नहीं लागे रे … इस छोटी सी उमर में थारी फ़ुद्दी तो खुली हुई है !” “साला मरद तो एक इन्च से ज्यादा चूत में नाहीं डाले … और मने तो प्यासी राखे … !” उसकी वासना से भरी भाषा ज्यादा साफ़ नहीं थी।. “तो बिजली चुद ले मन भर के आज … मैं तो अठै ही हूँ अब तो … ” वो लगभग मेरे ऊपर उछलती सी और धक्के पर धक्के लगाती हुई हांफ़ने लगी थी। शरीर पसीने से भर गया था। मुझे भी लण्ड पर अब. गाण्ड चुदाई से लगने लगी थी … हालांकि मजा बहुत आ रहा था।. मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा और अपने से चिपका कर पल्टी मारी। लण्ड गाण्ड से निकल गया। अब मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया। उसने तुरन्त ही मेरा लण्ड पकड़ा और अपनी चूत में घुसेड़ लिया। हम दोनों ने एक दूसरे को. कस कर दबा लिया और दोनों के मुख से खुशी की सिसकारियाँ निकलने लगी। उसकी दोनों टांगे ऊपर उठती गई और मेरी कमर से लिपट गई। मुझे लगा उसकी चूत और गाण्ड लण्ड खाने का अच्छा अनुभव रखती हैं। दोनों ही छेद खुले. हुए थे और लण्ड दोनों ही छेद में सटासट चल रहा था। पर हां यह मेरा भी पहला अनुभव था।. अब मैंने धक्के देना चालू कर दिये थे। उसकी चूत काफ़ी पानी छोड़ रही थी, लण्ड चूत पर मारने से भच भच की आवाजें आने लगी थी। जवान चूत थी … भरपूर पानी था उसकी चूत में । हम दोनों अब एक दूसरे को प्यार से निहारते हुए एक सी लय में चुदाई कर रहे थे। मेरा लंबा लंड चूत में पूरा अंदर तक आ जा रहा था, लण्ड और चूत एक साथ टकरा रहे थे। उसका कोमल अंग खिलता जा रहा था। चूत खुलती जा रही थी। उसकी आंखें बंद हो रही थी। अपने आप में वो आनन्द में तैर रही थी। सी सी करके अपने आनन्द का इजहार कर रही थी।. अचानक ही उसके मुख से खुशी की चीखें निकलने लगी,”चोद मारो भाई जी … लौडा मारो … बाई रे … मने मारी नाको रे … चोदो साऽऽऽऽऽ !” मुझे पता चल गया कि कोमल अब पानी छोड़ने वाली है … मैंने भी कस कर चोदा मारना आरम्भ कर दिया। मैं पसीने से भर गया था, पंखा भी असर नहीं कर रहा था। अचानक बिजली ने मुझे भींच लिया,”हाय रे … भोसड़ा निकल गयो रे … बाई जी … मारी नाकियो रे … आह्ह्ह् … ” उसकी चूत की लहर को मैं मह्सूस कर रहा था। वो झड़ रही थी। चूत में पानी भरा जा रहा था, वो और ढीली हो रही थी। मैं भी भरपूर कोशिश करके अपना विसर्जन रोक रहा था कि और ज्यादा मजा ले सकूँ पर रोकते रोकते भी लण्ड धराशाई हो गया और चूत से बाहर निकल कर पिचकारी छोड़ने लगा। इतना वीर्य मेरे लण्ड से निकलेगा मुझे तो आश्चर्य होने लगा … बार बार लण्ड सलामी देकर वीर्य उछाल रहा था।. बिजली मुझे प्यार से अपने ऊपर खींच कर मेरे बाल सहलाने लगी,”मेरे वीरां … आपरा लौडा ही खूब ही चोखा है … मारी तबियत हरी कर दी … म्हारा दिल जीत लिया … म्हारी चूत तो धान्या हो गयी सा !”.
स्रोत:इंटरनेट