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Biwi Ne Apni Saheli Ko Thukwaya Sex Khani

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मेरी बीवी बहुत कूल औरत है। उसने अपनी एक सहेली को मेरे लंड के नीचे लाने में मदद की और threesome भी किया। इस मसालेदार sex khani को पढ़कर आप भी मदमस्त हो जाओगे ये मेरा दावा है।. वीणा मेरी पड़ोसन थी। मेरी पत्नी निधि से उसकी अच्छी दोस्ती थी। शाम को अक्सर वो दोनों खूब बतियाती थी। दोनों एक दूसरे के पतियों के बारे में कह सुनकर खिलखिला कर हंसती थी। मुझे भी वीणा बहुत अच्छी लगती थी।. मैं अक्सर अपनी खिड़की से उसे झांक कर देखा करता था। उसके कंटीले नयन, मेरे को चीर जाते थे। उसकी बड़ी बड़ी आंखें जैसे शराब के मस्त कटोरे हों। उसका मेरी तरफ़ देख कर पलक झपकाना मेरे दिल में कई तीर चला देता था। वो सामने आंगन में जब बैठ कर कपड़े धोती थी तो उसके सुन्दर वक्ष ऐसे झूलते थे … मेरा मन उसे मसलने के लिये उतावला हो उठता था। पेटिकोट में उसके लचकते चूतड़ बरबस ही मेरा लण्ड खड़ा कर देते थे। पर वो मुझे. बस मुस्करा कर ही देखती थी… अकेले में कभी भी घर नहीं आती थी।. निधि सुबह ही स्कूल चली जाती थी… मैं दस बजे खाना खाकर ही दफ़्तर जाता था।. एक बार वीणा ने निधि को सवेरे स्कूल जाते समय रोककर कुछ कहा और दोनों मेरी तरफ़ देख कर बाते करने लगी। फिर निधि चली गई। उसके जाने के कुछ ही देर बाद मैंने वीणा को अपने घर में देखा। मेरी आंखें उसे देख कर. चकाचौंध हो गई। जैसे कोई रूप की देवी आंगन में उतर आई हो… वो बहुत मेक अप करके आई थी। उसका अंग अंग जैसे रूप की वर्षा कर रहा था। उसके उठे हुये गोरे-गोरे चमकते हुये बाहर झांकते हुये उभरे हुये वक्ष जैसे. बिजलियां गिरा रहे थे।. उसका सुन्दर गोल गोरा चिकना चेहरा … निगाहें डालते ही जैसे फ़िसल पड़ी।. “र्…र्…वीणा जी ! आप … ?”. “मुझे अन्दर आने को नहीं कहेंगे?”. “ओ … हां … जी हां … आईये ना … स्वागत है इस घर में आपका !!!”. “जी, मुझे तो बस एक कटोरी शक्कर चाहिये … घर में खत्म हो गई है।” उसके सुन्दर चेहरे पर मुस्कराहट तैर गई। मेरी सांसें जैसे तेज हो गई थी। वो भी कुछ नर्वस सी हो गई थी। “बला की खूबसूरत हो…!”. “जी !… आपने कुछ कहा …?”. मैं हड़बड़ा गया … मैं जल्दी से अन्दर गया और अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा। यह पहली बार इस तरह आई है , क्या करूँ …!!!” मैंने कटोरी उठाई और हड़बड़ाहट में शक्कर की जगह नमक भर दिया। मैं बाहर आया…. मुझे देख कर उसे हंसी आ गई… और जोर से खिलखिला उठी।. “जीजू ! चाय में नमक नहीं… शक्कर डालते हैं … यह तो नमक है…!”. “अरे यह क्या ले आया … मैं फिर से अन्दर गया, वो भी मेरे पीछे पीछे आ गई … “वो रही शक्कर …” उसके नमक को नमक के बर्तन में डाल दिया और शक्कर भर ली।. “धन्यवाद जीजू … ब्याज समेत वापस कर दूंगी !”. और वो इठला कर चल दी…. “बाप रे … क्या चीज़ है …!”. उसने पीछे मुड़ कर कहा,”क्या कहा जीजू… मैंने सुना नहीं…!” “हां… मैं कह रहा था आप तो आती ही नहीं हो … आया करो … अच्छा लगता है!”. “तो लो… हम बैठ गये …!”. मैं बगलें झांकने लगा … पर उसने बात बना ली और बातें करने लगी। बातों बातों में मैंने उसका मोबाईल नम्बर ले लिया। जब मैंने बात आगे नहीं बढाई तो वो मुस्करा कर उठी और घर चली गई। मुझे लगा कि मैंने गलती कर. दी… वो तो कुछ करने के लिये ही तो शायद आई थी !. और फिर वो मेरे कहने पर बैठ भी तो गई थी …. “बहुत लाईन मार रहे थे जी…?”. “नहीं निधि, वो तो नमक लेने आई थी…” “नमक नहीं…शक्कर … मीठी थी ना?”. “क्या निधि … वो अच्छी तो है… पर यूँ ना कहो।”. “मन में लड्डू फ़ूट रहे हैं … मिलवाऊं उससे क्या ?”. “सच … मजा आ जायेगा …!”. निधि हंस पड़ी…. “ऐ वीणा… साहब बुला रहे हैं … जरा जल्दी आ…!” निधि ने बाहर झांक कर वीणा को आवाज दी।. वीणा ने खिड़की से झांक कर कहा,” आती हूँ !” वो जैसे थी वैसे ही भाग कर हमारे घर आ गई।. “अरे क्या हुआ साहब को …?”. “कुछ नहीं, तेरे जीजू तुझे चाय पिलाना चाह रहे हैं।” और हंस दी। वीणा भी शरमा गई और तिरछी नजरों से उसने मुझे देखा। फिर उसकी आंखें झुक गई। निधि चाय बनाने चली गई।. मैंने शिकायती लहजे में कहा,”सब बता दिया ना निधि को…!” “तो क्या हुआ … आप ने तो मुझे फोन ही नहीं किया?”. “करूंगा जरूर …बात जरूर करना !”. कुछ ही देर में चाय पी कर वीणा चली गई।. “बहुत अच्छी लगती है ना…?”. मैंने निधि को प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा और सर हां में हिला दिया।. “तो पटा लो उसे … पर ध्यान रखना तुम सिर्फ़ मेरे हो !”. कुछ ही दिनों में मेरी और वीणा की दोस्ती हो चुकी थी। वो और मैं निधि की अनुपस्थिति में खूब मोबाइल पर बातें करते थे। धीरे धीरे हम दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा। रात को तो उसका फोन मुझे रोज आता था। निधि. भी सुन कर बहुत मजा लेती थी। पर निधि को नहीं पता था कि हम दोनों प्यार में खो चुके हैं। वो कभी कभी मुझे अपने समय के हिसाब से झील के किनारे बुला लेती थी। वहां पर मौका पा कर हम दोनों एक दूसरे को. चुम्मा-चाटी कर लेते थे। कई बार तो मौका मिलने पर वीणा के उभार यानि चूतड़ों को और मम्मों को धीरे से दबा भी देता था। मेरी इस हरकत पर उसकी आंखों में लाल डोरे खिंच जाते थे। प्रति-उत्तर में वो मेरे कड़कते. लण्ड पर हाथ मार कर सहला देती थी … और एक मर्द मार मुस्कान से मुझे घायल कर देती थी।. अगले दिन वीणा के पति के ऑफ़िस जाते ही निधि ने वीणा को बुला लिया। मुझे लग रहा था कि वीणा आज रंग में थी। उसकी अंखियों के गुलाबी डोरे मुझे साफ़ नजर आ रहे थे। मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से निधि को देखा।. निधि ने तुरन्त आंख मार कर मुझे इशारा कर दिया। वीणा भी ये सब देख कर लजा गई। मेरा लण्ड फ़ूलने लगा… । निधि वीणा को एक दुल्हन की तरह बेडरूम में ले आई। वीणा अपना सर झुका कर लजाती हुई अन्दर आ गई।. निधि ने वीणा को बिस्तर पर लेटा दिया और कहा,”वीणा, अब अपनी आंखे बन्द कर ले” “हाय निधि, तू अब जा ना … अब मैं सब कर लूंगी !” “ऊं हु … पहले उसका मुन्ना तो घुसा ले … देख कैसा कड़क हो रहा है !”. “ऐसे तो मैं मर जाऊंगी … राम !”. मैं इशारा पाते ही वीणा के नजदीक आ गया। उसके नाजुक मम्मे को सहला दिया। ये देख कर निधि के उरोज भी कड़क उठे। उसने धीरे से अपने मम्मों पर हाथ रखा और दबा दिया। मैंने वीणा की जांघों पर कपड़ों को हटा कर. सहलाते हुये चूत को सहला दिया। उधर निधि के बदन में सिरहन होने लगी … उसने अपनी चूत को कस कर दबा ली। वीणा का शरीर वासना से थरथरा रहा था। वो मेरी कमीज पकड़ कर अपनी तरफ़ मुझे खींचने लगी। उसने अपने कपड़े. ऊंचे करके अपने पांव ऊपर उठा दिये। एक दम चिकनी चूत … गुलाबी सी… और डबलरोटी सी फ़ूली हुई। मैं तो उसकी चूत देखता ही रह गया, ऐसी सुन्दर और चिकनी चूत की तो मैंने कभी कल्पना ही नहीं की थी। “विपुल, चोद डाल मेरी प्यारी सहेली को …! है ना मलाईदार कुड़ी !” वीणा घबरा गई और मुझे धकेलने लगी। मैंने उसे और जकड़ लिया।.
स्रोत:इंटरनेट