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Biwi Ne Pati Se Apni Maa Chudwayi Saas Ki Chudai 2

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“जरूर” मैंने आश्वासन दिया.
विनती ने मुझे किस किया और माल के लिए निकल पडीं.
जाती हुई कार के जाने की आवाज मुझे कभी इतनी अच्छी नहीं लगी थी.
और अब इंतज़ार था आती हुई कार की आवाज़ का.
ठीक बारह बजे मेरी सासु माँ शीला देवी का आगमन हुआ.
वो थोडा सा नर्वस थीं.
मैं उन्हें नीचे के कमरे में ले गया.
हम दोनों कि साँसें थोडा तेज चल रहे थीं.
“सो, अब आगे का क्या ख़याल है?” शीला देवी ने पूछा.
“हाँ, थोडा अजीब सा तो लग रहा है.
इस घड़ी का मैं कब से इंतज़ार किया है.
और आज ये घड़ी मेरे सामने आ खडी है तो समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें” मैंने लगभग हकलाते हुए बोला.
“इंतज़ार तो मैंने भी बहुत किया है” वो बोलीं.
“पर मुझे पता है कि मैं क्या करूंगा.
पहले मैं आप को जी भर के देखूँगा.
फिर मैं आप को बांहों में भर लूँगा.
फिर धीरे धीरे आपके कपडे उतारूंगा.
और फिर उसके आगे जो होना है वो होगा.
” “हाँ मैंने तुम्हें आँखों से मेरे कपडे उतारते कई बार देखा है.
” शीला देवी शर्माते हुए बोलीं.
“ओह तो आपको पता चल जाता था?” मैंने पूछा.
“हम औरते हैं.
हमारा सिक्स्थ सेंस इतना अच्छा होता है कि हम सब भांप लेते हैं.
” शीला देवी बोलीं.
“चलो अच्छा है, अब मुझे कुछ छुपाने कि जरूरत नहीं है आपसे”.
मैंने बोला.
“हाँ और मुझे आप कहने कि भी जरूरत नहीं हैं.
इस एक्सरसाइज के बाद हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन्ने वाले हैं.
” हम दोनों एक दुसरे कि तरफ आँखों में ऑंखें डाले एक दुसरे की और बढे और बांहों में समां गए.
मैंने उनके अधरों को अपने अधरों के बीच में ले लिया.
और अपने हाथों से उनकी पीठ और गांड को सहलाने और दबाने लगा.
शीला देवी के भारी चुंचियां मेरी छाती से मानों पिस रहें थी.
वो अपने हाथों को मेरे जीन्स के ऊपर से सहला कर मेरे जवान हथियार का जायजा ले रहें थीं.
मैं उनके पीछे जा कर अपना खड़ा लंड उनकी चूतड़ों के दरार में फंसा कर अपने दोनों हाथों से उनकी चुन्चिया दबाने लगा.
मैंने उनका कुरता उतार दिया.
और उनकी गोरी गोरी मांसल चुंचियों को उनकी काले रंग कि ब्रा से आज़ाद कर दिया.
मैंने एक एक कर के उसकी चुंचियां मुंह लगा कर चूसना शुरू कर दीं.
मेरे दोनों हाथो उनकी गांड महसूस कर रहे थे.
फिर मैं अपना मुंह नीचे ले जा आकर उनकी नाभि में अपनी जीभ दाल कर जैसे उसे चोदने सा लगा.
ये करते हुए मैंने नाडा ढीला कर के उसका पजामा उतार दिया.
और उनकी पैंटी को नीचे खींच कर अपना मुंह उनकी चूत के ऊपर टिका दिया.
शीला देवी बेहद गर्म हो चुकी थीं.
वो पीछे पड़े दीवान पर बैठ गयीं और पैर हिला कर अपनी पैंटी को एक तरफ फर्श पर फेंक दिया.
मेरे मुंह उनकी चूत के भगनाशे को मुंह में ले कर चाट रहा था.
उन्होंने अपनी टाँगे फैला के चौडी कर दीं ताकि मैं मुंह से उनकी चूत की चुदाई कर सकूं.
मैंने अपनी जीभ उनके चूत में डाल कर मुख्चोदन प्रक्रिया शुरू कर दी.
उन्हें शायद जीवन में पहली बार मुंह से चूत कि चुदाई का अवसर मिला रहा था.
“आह्ह …आह….
म्म्म …..” आनंदातिरेक में बडबडा रहीं थीं.
उनकी चूत मेरी जीभ कि प्रक्रिया से मस्त गीली हो चुकी थी.
और मेरे लंड से भी थोडा थोडा पानी निकल रहा था.
मैं उठा और मेरे मोटा और खड़ा लंड उनकी चूत के मुहाने पर टिकाया.
हम दोनों एक दुसरे को नज़रों से नज़रें मिला कर मुस्करा रहे थे.
“तो हो जाए फिर” मैंने मानों उनकी इजाज़त मांगी.
उन्होंने मुस्कराते हुए सर से हामी भर दी.
मैं कमर से एक हलके से झटके से लंड का सुपाडा उनकी चूत में पेल दिया.
और होठों से होठों का रसपान करने लगा.
उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के ऊपर लगा के जैसे प्रेशर देने लगीं.
चूत में लंड पूरा कब घुसा और कब मैं पूरी रफ़्तार से उन्हें छोड़ने लगा पता ही नहीं चला.
चूत गीली थी.
जब लंड अन्दर बाहर होता था, फच फच कि आवाज आती थी.
उन्होंने अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाना चालू कर दिया.
मैं समझ गया कि अब वो झडने वाली है.
उनके हाथों की पकड़ मेरी गांड पर और तेज हो गयी.
मेरे लंड के सुपाडे पर गरम लावा सा बहता हुआ महसूस हुआ.
और वो झड़ गयी.
मैंने अपना लंड निकाल लिया.
शीला देवी ने धन्यवाद स्वरुप उठ कर मेरा लंड अपने मुंह में ले कर चूसने लगीं.
मैं धीरे धीरे इनकी गांड सहलाने लगा.
फिर अपनी दो उँगलियाँ उनकी चुदी हुई चूत में डाल कर हिलाने लगा.
थोड़े समय में ही शीला दूसरी चुदाई सेशन के लिए तैयार हो गयीं.
मैं इस बार नीचे लेट गया और और वो मेरे ऊपर लेट कर आनंद लेने लगीं.
मैंने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर भिड़ाया और शीला ने एक ही धक्के में पूरा का पूरा ले लिया.
थोड़ी ही देर में वो भकभक मुझे छोड़ने लगीं.
उनकी बड़ी बड़ी चुंचियां मेरे सीने पर छलक रहीं थीं.
मैं उनसे खेल लेता.
और मेरे लंड को उनकी चूत के अन्दर बाहर होता देख लेता.
बीच बीच में उनकी गांड दबा कर आनंद प्राप्त कर लेता.
वो बिलकुल गांड हिला हिला कर जैसे घोड़े कि सवारी कर रही थी.
मैंने अपनी एक उंगली को उनके चूत के रस से गीला कर के उनकी गांड में डाल दिया.
“ऊओह्हह्ह….
सीईईईई….. नटखट कही के” चूत में घुसा हुआ लंड और गांड में फंसी उंगली का आनंद शीला के सहनशक्ति के बाहर हो रहा था और वो फिर जोरों से झड कर बिस्तर पर जा गिरीं.
मैंने शीला को उल्टा कर के उनकी गांड सहलाने लगा.
थोड़ी देर में जब उनकी सांस में सांस आयी, तो मैंने उनकी गांड उठा कर उनको कुतिया बना दिया.
और थोडा थूंक अपने लंड पर लगा कर लंड को उनके गांड के छेद पर टिकाया.
“ऊओह….
आज तक किसी ने मेरी गांड नहीं मारी दामाद जी.
” शीला देवी बोलीं “पहली बार का मज़ा ले लो”, मैं बोला.
“इतना लंबा और मोटा लंड है तुम्हारा मेरी तो गांड ही न फट जाए कहीं” वो चिंता कर रहीं थीं.
मैंने सोचा बातचीत में समय न जाया किया जाए.
मैंने थोडा और थूंक लगा कर उनकी गांड के चीड को और चिकना बनाया और एक छोटे से धक्के से सुपाडा अन्दंर धकेल दिया.
“उईई … मैं मर गयी….
” मैंने उनकी एक न सुनते हुए दो उंगलियां उनकी चूत में पेल दी और धीरे धीरे उँगलियों से चूत में पेलने लगा.
जैसे ही उनको मज़ा आने लगा, मैंने आव देखा न ताव, पूरा का पूरा लौंडा उनकी मोटी गांड में घुसेड मारा.
“आह….
सीसीईईई…..” मैंने अब धीरे धीरे उनकी गांड चोदना शुरू कर दिया.
शीला को भी बड़ा मज़ा आ रहा था.
उँगलियों से उनकी चूत कि चुदाई बड़े जोरों से हो रही थी और मोटे लंड से उनकी गांड कि सेवा.
थोड़ी ही देर में मेरे लंड के अन्दर बड़ी जोर का तनाव महसूस हुआ और मैंने अपना खूब सारा माल उनकी गांड में छोड़ दिया.
शीला भी मेरी उँगलियों के ऊपर झड गयीं.
ये उनका तीसरी बार था.
“सारी जिन्दगी आज तक किसी ने मुझे इतना आनंद नहीं दिया, अब मैं समझी कि विनती ने क्यों मेरी मर्जी के खिलाफ तुमसे शादी की.
” शीला बोलीं.
“मुझे बड़ी ख़ुशी है कि आपको ख़ुशी मिली सासू माँ.
” मैंने बोला.

स्रोत:इंटरनेट