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Biwi Ne Pati Se Apni Maa Chudwayi Saas Ki Chudai

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दोस्तों, मैं आपको मेरी saas ki chudai की मस्त कहानी सुनाने जा रहा हूँ.
सबसे अनोखी बात ये है की मेरी सास को मेरे बिस्तर पर पहुचने वाली मेरी बीवी ही थी.
उस रात हम दोनों पंजाब केसरी में पढ़ तहे थे.
उसमें एक समाचार था जिसमें हरियाणा के एक व्यक्ति के उसकी सास के साथ शारीरिक सम्बन्ध थे.
ये खबर का खुलासा तब हुआ जब उनके एक पडोसी ने उन दोनों को दिन में बाहर लंच खाते देख लिया जब दोनों थोडा रोमांटिक मुद्रा में थे.
उसने फिर उनका पीछा किया और उनके बेडरूम की खिड़की से अनादर के क्रिया कलाप कि रिकॉर्डिंग की.
उसी दिन अखबार में किसी ने सवाल भी पूछा था कि उन्हें अपनी सासू माँ से आकर्षण है और वो क्या करें.
जवाब में लेखक ने लिखा था कि बहुत सारे मर्द अपनी सास के बारे में ऐसा सोचते हैं.
बात तो सच थी.
कम से कम मेरे बारे में.
मेरी सास अगर आज तैयार हों तो मैं एक मिनट की देरी किये बिना उनको पूरा जवाब दूंगा.
इसी बीच मेरी पत्नी विनती का सवाल मुझे चौका ही गया, “संजय डार्लिंग! तुम भी मेरी माँ के बारे में ऐसा कुछ सोचते हो क्या?” “अरे नहीं तो”, मैंने जैसे घबराते हुए जवाब दिया मानों मेरी चोरी पकडी गयी हो.
विनती मंद मंद मुस्करा रही हो जैसे वो साफ़ पढ़ रही हो कि मैं मन मने क्या सोच रहा हूँ.
मेरी सास शीला बहुत खूबसूरत थीं.
वो उनीस साल की थीं जब उन्होंने विनती को जन्म दिया.
उन्होंने हमेशा अपना ख़याल ठीक से रखा.
जिसकी वज़ह से साठ साल की उम्र में भी बहुत ही दिखती हैं.
वो मेरी पत्नी से समझो बस एक साइज़ कि ज्यादा बड़ी होंगी.
पर उनकी चुन्चिया बड़ी एवं सुडौल हैं.
और उनकी गांड गोल और मुलायम है.
मुझे इस लिए पता है क्योंकि पिछले हफ्ते जब हम मेट्रो से घर लौट रहे थे तो मेट्रो में खचाखच भीड़ थी.
इसकी वज़ह से वो और मैं बहुत सट के खड़े थे.
और उनकी गांड को मैं बिलकुल महसूस कर सकता था.
मेरा लंड पेंट के अन्दर एकदम टाइट हो रखा था और उनकी गांड की दरार में मानो फंसा हुआ था.
मैं तो बस बहाना कर रहा था कि जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं है और अपने फ़ोन पर कुछ पढ़ रहा था.
पर मन ही मन मैंने उनकी गांड को अपने लंड वाले एरिया में बहुत फील किया और बड़ा मज़ा लिया.
मेरी सास बहुत खुश मिजाज़ औरत हैं.
और मुझे ऐसा लगता है उन्होंने भी इस अचानक बिना योजना के मजे को अच्छे से महसूस किया होगा.
शीला को आँखे बड़ी सुन्दर हैं.
पता नहीं जब भी मैं उनमें देखता हूँ ऐसा लगता है कि आँखों मुझसे कुछ सवाल कर रही हैं.
मानों ये बोल रही हैं कि, “मुझे मालूम है कि तुम मुझे देख कर क्या सोच रहे हो.
अरे आगे कब बढोगे?”. और संजय ने कई बात लगभग कोशिश कर ही डाली थी पर उसकी हिम्मत आखिरी समय पर जवाब दे जाती थी.
संजय को पता था उसकी पत्नी विनती और सासु माँ शीला माँ बेटी कम और सहेलियां ज्यादा है.
विनती ने अपनी माँ को संजय और उसके बीच में क्या क्या हो रहा है लगातार बता के रखा था.
उसके अफेयर कि शुरुआत से ले कर उनकी पहली पहली चुदाई कि बात और यहाँ तक कि संजय कि नंगी फोटो भी उन्हें दिखाई थी.
उसकी माँ को पता था मैं चूत चूसना बड़ा पसंद है.
मेरी पत्नी विनती बड़ी कि कामुक स्त्री थी.
पर एक बच्चा हो जाने के बाद उसकी सेक्स कि इच्छा काफी कम हो गयी थी.
मेरे लिए सेक्स के बिना रहना बहुत मुश्कील था.
पर मैं विनती के साथ कभी भी बेवफाई नहीं कर सकता था.
मैं देखने में हैण्डसम हूँ और कसरत कर के शरीर को फिट रखता हूँ.
दफतर में कुछ लड़कियों ने कई बात हिंट दिया पर मैं विनती से बेहद प्यार करता हूँ तो बात बिलकुल आगे नहीं बढाई.
एक दिन विनती ने मुझसे बोल ही दिया, “संजय, तुम्हें अगर सेक्स कि जरूरत हो तो तुम मेरी माँ कि मदद ले सकते हो”.
“जब तुम मुझे उपलब्ध हो तो मैं ऐसा क्यों करूंगा डार्लिंग!” मैंने जवाब दिया.
“यही तो समस्या है.
मैं तुम्हें उपलब्ध नहीं हूँ.
मुझे मालूम है जितना तुम्हारे शरीर कि जरूरतें हैं वो मैं पूरा नहीं कर पा रही हूँ.
इधर उधर मुंह मारने से बेहतर रहेगा तुम ऐसी जगह जाओ जो मुझे पता हो.
और वहां जाने से मुझे किसी प्रकार का स्ट्रेस भी न हो”.
विनती ने बड़े ही दुःख भरे स्वर में अपने विचार व्यक्त किये.
“पर मैंने तुमसे शादी कि थी तुम्हारी माँ से नहीं”. “हाँ, पर मुझे पता है महीने में दो बार तुम्हारे लिए काफी नहीं है.
सच पूछो तो ये नाइंसाफी है तुम्हारे साथ.
और साथ में मेरी मम्मी को भी थोडा प्यार मिलेगा जो वो पापा के जाने के बाद से मिस करती हैं”. मन ही मन मैं बड़ा खुश हो रहा था.
सासु माँ के संग ऐसा करने के ख़याल से ही मेरा लंड पन्ट में एकदम टाइट हो रखा था.
“तुम एकदम पागल हो”. ऐसा कहते हुए मैंने विनती के होठों पर होंठ रख कर उसे एन चुम्बन दिया.
और तेजी से बाथरूम में घुस कर जल्दी से सडका मारा जिससे खड़े हुए लंड को थोडा करार आया.
इस बात को एक सप्ताह गुजर गया.
मैं नहाते समय अपनी सास शीला देवी के गदरीले बदन कि कल्पना करता और हस्तमैथुन करता.
विनती कि बातों से जो आरजू दिल में जाग गयी थी अब वो थोडा थोडा निराशा में बदल रही थी.
शायद विनती उस समय थोडा दुखी हो और अपना दुःख कम करने के लिए ऐसा कह रही हो.
पर मैंने विनती से इस बारे में कुछ भी कहाँ नहीं.
वो शनिवार का दिन था, मैं दस बजे के आस पास उठा.
विनती चाय ले कर आई.
“सारा इंतज़ाम हो गया है आज का.
मैं बच्चे को ले कर माल जा रही हूँ शौपिंग करने” “क्या मतलब” मैंने पूछा.
“वो दिन आ गया है जब तुम मेरी माँ के साथ ……”. “क्या?… क्या मतलब.
?….
” मैंने नर्वस होने का ढोंग करते हुए बोला.
“अरे तुम कोई बच्चे नहीं हो.
बाकी कैसे करना है…क्या करना है…आप देखो समझो.
बस ये समझ लो कि अपनी माँ तुम्हें दे रही हूँ तोहफे में.
तो मुझे कोई बढियां सा तोहफा दिलाना” “ओह…जरूर जरूर” मैं बस इतना ही बोल पाया.
“थोडा आराम से संजय… मुझे पता है कि तुम झूठ बोल रहे थे.
जिस तरह से तुम उन्हें देखते हो ..उन्हें भी पता है और मुझे भी पता है कि तुम्हारे इरादे क्या हैं…पिछले हफ्ते जब वो टेबल से प्लेट्स उठा रहें थीं, तुम उनके ब्लाउज के अन्दर झाँक रहे थे.
उस दिन मेट्रो में तुम अपना हथियार उनकी पिछाडी पर रगड रगड कर मज़े ले रहे थे.
” मैं शर्मा गया.
मेरी कान लाल हो उठे.
“अरे शरमाओ मत मेरे राजा.
मेरी माँ को भी तुम्हारी ये करतूतें अच्छी लगती हैं.
मुझे मालूम है.
” विनती की ये बात सुन कर मन को आराम मिला.
“और सुनो.
उन्हें ढंग से करना.
दो तीन बार उनका हो जाए ठीक से इस बात का ख़याल रहे.
लास्ट टाइम उनकी डेट पर जो बंदा था वो दारु पी के बिना कुछ किये हो सो गया था.

स्रोत:इंटरनेट