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Boss Se Chudi Office Sexy Story

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मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और अपने वैवाहिक जीवन में खुश हूँ पर थोड़ी मस्ती का मुझे भी शौक है, जैसे लिफ्ट में अपने बॉस से मस्त वाली चुदाई करवाना.
मेरी मस्ती की office sexy story पढ़िए हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम तरुणा गुप्ता हैं और आज मैंने आप को मेरी असली वाली चुदाई की एक घटना बताने आई हूँ.
मैं मुंबई के विले पार्ले में एक ऑफिस में रिसेप्शन का काम करती हूँ.
मेरी उम्र 36 साल हैं और मेरी शादी हुए 10 साल हो चुके हैं.
10 साल के वैवाहिक जीवन में मुझे एक बेटा हुआ हैं जिसकी उम्र अभी 3 साल हैं.
यह बात आज से कुछ 6 महीने पहले की हैं जब मैंने अपनी ऑफिस की एक बंध लिफ्ट में स्कर्ट उठा के राजवीर साहब का लंड लिया था.
राजवीर साहब ऑफिस के मेनेजर हैं और वो अक्सर मुझे घूरते थे.
उस शाम को मैं ऑफिस से निकलने ही वाली थी.
तभी एक क्लायंट की कॉल आई जीसे मैंने राजवीर साहब के ऑफिस में ट्रान्सफर किया.
पांच मिनिट के बाद वो मेरे टेबल के पास आये और बोले, “तरुणा इस क्लाइंट की कॉल आगे से मुझे ट्रान्सफर नहीं करना, साला पक्का हरामी हैं.
” मैंने पूछा, “क्या हुआ साहब….
?” राजवीर: अरे साला कहता हैं की लड़की सप्लाय करो तो ऑर्डर दूंगा.
शायद दिल्ली ऑफिस वाले उसे यह सब देते थे इसलिए यहाँ भी मांग रहा हैं.
मैं हंस पड़ी.
राजवीर मेरे सामने ही देख रहे थे.
उन्होंने पूछा, “तरुणा आज तुम घर नहीं गई अभी तक? हसबंड लेने तो आ रहे हैं ना.
?” मैं: नहीं सर, आज हसबंड पुणे गए हुए हैं किसी काम से.
मेरा बेटा अपनी नानी के वहाँ हैं.
मैं घर जाते वक्त पार्सल ले लुंगी डिनर का.
और बस लेट की हैं इसलिए मैं यहीं रुक गई.
राजवीर की आँखों में यह सुन के जैसे की एक अजब सी चमक आ गई.
उन्होंने कहा, “अगर तुम फ्री हो तो हम लोग बाहर खाने के लिए जा सकते हैं.
” मुझे पहले तो लगा की वो मजाक कर रहे हैं इसलिए मैंने हां या ना कुछ नहीं कहा.
लेकिन मैंने देखा की वो आराम से खड़े मेरी आन्स्वर की राह देख रहे थे.
मैंने इधर उधर देखा और कहा, “सर कोई गलत मतलब निकाल लेंगा इसका…!”. राजवीर: अरे छोडो वो सब, कोई अच्छे रेस्टोरेंट में डिनर कर के मैं तुम्हे अपनी गाडी में घर ड्राप कर दूंगा.
अब मैं ना कही कर सकी.
राजवीर साहब की ऑडी गाडी में हम लोग करीब के ही एक चाइनीज़ रेस्टोरेंट में गए जहाँ उन्होंने दो तिन चींजें ऑर्डर की.
बातों बातों में मैं देखा की उनकी टांग मेरी टांग से टकरा रही थी.
वो जानबूझ के ऐसा कर रहे थे शायद.
मैंने देखा की अब मुझे निचे अपनी जांघ के ऊपर भी कुछ स्पर्श हो रहा था.
अरे बाप रे राजवीर साहब ने अपने हाथ को मेरी जांघ पे घिसा था.
मैं घबरा गई की ऐसे भरचक रेस्टोरेंट में भी यह आदमी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा.
मैं सच में घबरा रही थी की कही किसी ने एम्एम्एस बना लिया तो प्रॉब्लम हो जायेंगी.
मैं अपनी कुर्सी को पीछे खिंचा और राजवीर के चुदाई के सपने को जैसे तोड़ दिया.
राजवीर भी समझ गया की मैं अभी इंटरेस्टेड नहीं हूँ और उसने चाउमीन को खाना चालू कर दिया.
जब हम लोग बाहर आयें तो मैं देखा की मेरे घर की और की एक बस आ रही थी.
मैंने राजवीर को थेंक्स कहा और बस पकड ली.
पुरे रास्ते में इस गोल्डन चांस को छोड़ देने पे मनोमन ही पछता रही थी.
राजवीर कुछ 39 साल के होंगे लेकिन उनका फिजिक किसी जवान लड़के को भी शर्म में डाल सकता हैं.
और ऐसे बन्दे से चुदवाना तो फिर एक सुनहरा मौका ही था मेरे लिए.
रात को मुझे वही ख़याल आये सारे.
जैसे की राजवीर मेरी हार्ड चुदाई कर रहे हैं और मैं उनके लंड के ऊपर बैठ के उछल रही हूँ.
दो बार तो यह ख़याल से मेरी आँख भी खुल गई थी.
ज्यों त्यों से मेरी रात निकली और सुबह मैं ऑफिस के लिए निकल पड़ी, आज वक्त से पहले ही.
टेबल के ऊपर टेलीफोन वगेरह साफ़ कर के मैं अब जैसे राजवीर साहब की ही राह देख रही थी.
वो 10 बजे भी चले आते हैं कभी कभी.
लेकिन आज 12 बजने तक भी उनका कोई नामोनिशान नहीं था.
आज से पहले मैंने इतनी बेसब्री से किसी का भी इंतजार नहीं किया.
तभी कुछ 12:20 को राजवीर आये, उनके हाथ में एक छोटी सी ब्रीफकेस थी.
आज उन्होंने मुझे गुड आफ्टरनून भी नहीं कहा और वो सीधे ही अपने केबिन की और चल पड़े.
आखिर मुझे जिसका डर था वही हुआ ना.
मैंने उन्हें भड़का दिया था.
जब आदमी को लगता हैं की इस चूत से तेल नहीं निकलने वाला तो वो उसे निग्लेकट करते हैं.
ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था.
राजवीर साहब को लगा की मैं इंटरेस्टेड नहीं हूँ इसलिए वो अब दूर रह रहे थे.
या फिर उन्हें सच में गुस्सा आया था मुझ पर.
मैंने सोचा की चलो देख ही लूँ जा के उनके केबिन में.
मैंने अपनी स्कर्ट ऊँची की और सीधे उनकी ऑफिस में जा पहुंची.
केबिन पे नोक करते ही उनकी आवाज आई, “कम इन प्लीज़.
” लेकिन जैसे ही मुझे देखा वो जैसे निरुत्तर से हो गए.
मैंने उनके टेबल पे जानबूझ के झुक के अपनी बूब्स की गली का उन्हें नजारा करवाया.
लेकिन वो तो फ़ाइल में ही अपनी माँ चुदवा रहे थे.
मैं: क्या बात हैं सर, आप तो भडक ही गए.
राजवीर: तरुणा, ऐसी बात नहीं हैं.
अगर तुम को दिलचस्पी ना हो फिर मैं लट्टू नहीं बनना चाहता हूँ.
मैंने अपनी चुंचियां राजवीर के सामने और खोलते हुए कहा, “आप को किसने कहा की मुझे दिलचस्पी नहीं हैं?” राजवीर की आँखों में एक अजब सी चमक आ गई उसने मेरी और देखा और कहा, “फिर कल भाग क्यूँ गई थी?” मैं: उसी चीज के लिए मैं अभी भी पछता रही हूँ.
आज भी मैं शाम को फ्री हूँ; चलेंगे चायनिज़ खाने के लिए.
राजवीर अपना सर खुजाते हुए: अरे बाबा मेरी दिल्ली की फ्लाइट हैं 1 घंटे में.
और उसने बिना रुके आगे कहा, “अभी कुछ नहीं कर सकते हैं क्या हम.
?” मैंने चौंक के पूछा, “अभी, कहाँ, कैसे?” राजवीर ने कुछ सोचा और बोला, “आओ मेरे साथ.
” मैं उसके पीछे चलने लगी.
जाते वक्त उसने मेरी टेलीफोन की पिन को निकाल डाला ताकि घंटी बजती ना रहें.
हम लोग सीडियों से उपर होते हुए दूसरी मंजिल पे आये.
और मैं समझ गई की वो कहाँ ले के जा रहा था मुझे.
दुसरे मंजले पे एक स्टोर रूम था और एक लिफ्ट थी जो ख़राब थी.
वो एक पुरानी लिफ्ट थी जिसे बंध कर के नई लिफ्ट लगवाई गई थी.
दुसरे मजले पे शायद ही कोई आता था.
राजवीर मेरा हाथ पकड के लिफ्ट में घुसे और उसके दरवाजे को बंध किया.
उन्होंने दरवाजे को थोडा खुला रखा और हम दोनों अंदर बंध थे.
काफी गरम लग रहा था वहां पे.
एक भी पल को गवाएं बिना राजवीर साहब ने मेरे स्कर्ट को ऊपर कर दिया.
मेरी पेंटी पहले से गीली हो चुकी थी, जिसे निचे खींचने में उन्हें दूसरी मिनिट की वेईट नहीं करनी पड़ी.
उन्होंने पेंटी को उतार के मेरी एक टांग को ऊपर किया.
मैंने पेंटी को उतार के लिफ्ट की हुक में टांग दिया.
राजवीर साहब ने सीधे ही अपने मुहं को मेरी चूत पे लगा दिया.
मेरी गरम और चिकनी चूत को वो अपनी जबान से चाटने लगे.
मैंने उनके बालों को पकड के अपनी और खिंचा और उन्हें चूत में दबाने लगी.
राजवीर की जीभ अब मेरी चूत के छेद में घुस चुकी थी जिसे वो जोर जोर से कुत्ते की तरह चाटने में व्यस्त थे.
आह क्या मजा था ऐसे चूत को चटवाने में.

स्रोत:इंटरनेट