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Bus Geeli Choot Bus Sex Story 2

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मै उसी हालत में ही सो गयी लेकिन बस में हुयी घटना मेरे दिमाग से नहीं उतार पा रही थी.
वास्तव में उस घटना ने मुझे हिला दिया था और मुझे वह सब अंदर से अच्छा लगा था.
हर औरत मर्दो कि आँखों में आकर्षित लगना चाहती है और खास तौर पर जब वो अधेड़ उम्र कि हो जाती है.
मै समझती हूँ उसके कई कारण होते है, एक तो ढलती उम्र उसको अपनी जवानी के ख़तम होने का एहसास देती है , दूसरा उस उम्र में पति अपने काम और करिएर में व्यस्त होता है कि वोह अपनी पत्नी पर ध्यान ही नहीं दे पाता है और इन सबका असर सेक्स पर पड़ता है.
मुझे उन दिनों कि अच्छी तरह याद है जब मेरी नयी शादी हुयी थी, मेरे पति मुझे हर रात चोदते थे, मुझे बिल्कुल अपनी रानी बनाकर रक्खा हुआ था.
हर बात का ख्याल रखते थे.
अब समय के साथ साथ हमारे अंदर कि काम इच्छा ख़तम होने लगी थी, और जो मेरे अंदर थी वो शायद उनकी नज़र से ओझल हो गयी थी और उन्होंने मेरे अंदर कि औरत को महसूस करना भी बंद कर दिया था.
हमारी चुदाई अब बहुत कम होगयी थी, कभी कभी वो मुझे बाँहों में लेते और एक काम कि तरह, मेरी टंगे फैलाकर मेरी चूत में लंड डाल कर चोदते और झड़ने के बाद चादर ओढ़ कर सो जाते थे.
कितनी ही बार मै बिना ओर्गास्म के ही रह जाती और तड़पती रहती थी लेकिन फिर मैं मेस्ट्रोबेशन का सहारा लेने लगी और मै अपनी उल्झन को उस से शांत करने लगी.
मुझे तो अब यह भी याद नहीं की कब हमलोगो ने आखरी बार मिशनरी के अलावा किसी और तरीके से चुदाई की थी.
अगले दिन मैंने अपनी बेटी को स्कूल में छोड़ा और लौटने के लिए ऑटो रिक्शॉ को जैसे रोकने के लिए बढ़ी तभी मुझे बस आती दिखी और मेरे कदम अपने आप बस स्टैंड कि तरफ बढ़ लिए.
मेरे हर बढ़ते कदम पर अपने से ही सवाल था कि सुनीता क्या कर रही है? जब मै स्टैंड पर पहुची तो वह मुझे कल वाला लड़का खड़ा दिखा, मेरा दिल मेरे मुँह को आ गया, दिल बेहद तेजी से धड़कने लगा और मैंने अपनी नज़र उससे हटा ली और आती हुई बस को देखने लगी.
बस में भीड़ थी मै कुछ रुक कर उसपर चढ़ गयी, मैंने यह देख लिया था कि वह लड़का तब तक नहीं चढ़ा जब तक मै बस में नहीं चढ़ गयी, मेरे चढ़ते ही वह भी बस में मेरे पीछे चढ़ गया.
एक अजीब सी संतुष्टि मिली जब लड़का मेरा इंतज़ार में बस में चढ़ने से रुका रहा.
मै बीच में ही खड़ी होगयी थी और लड़का भी ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा होगया.
उसको मै अपने पीछे खड़ा महसूस कर रही थी और तुरंत ही मैंने उसके हाथ को अपने चूतरो पर महसूस किया, वह मेरे चूतरो को अपनी हथेली से सहला रहा था.
आज वह लड़का बहुत आत्मविश्वास में लग रहा था उसके छूने का ढंग में पूरा अधिकार था.
उसके हाथ रास्ते भर मेरे चूतरो को सहलाते रहे, दबाते रहे और बीच बीच में उसकी उँगलियाँ मेरे चूतरो कि दरार को भी महसूस करते रहे.
मै सब कुछ सांस रोके होने देरही थी.
मै उसकी हर हरकत से अंदर ही अंदर उतेजित होती जाती थी.
बड़ी मुश्किल से मै अपनी साँसों पर काबू कर पा रही थी.
उसके स्टॉप पर वह लड़का मुझ से रगड़ता हुया आगे निकला और उतर गया.
उस दिन के बाद से यह रोजाना कि बात हो गयी, मै रोजाना अब बस ही पकड़ने लगी.
पहले मै ही चढ़ती थी और वह लड़का , चाहे कितनी ही भीड़ हो मेरे बाद ही चढ़ता और धक्का मुक्की करता हुआ मेरे पीछे आकर खड़ा होजाता और मेरे चूतरो को मसलता था.
मै हमेशा ही शलवार कमीज़ पहना करती थी लेकिन एक दिन मैंने साडी पहनने का फैसला किया जिसको देख कर मेरी बेटी भी बड़ी चौकी क्यों कि मै हमेशा उसको शलवार कमीज़ में ही छोड़ने जाती थी.
मैंने उसको समझाया कि मेरी साड़ियां रक्खे रक्खे ख़राब होरही थी इसलिए अब मैंने अब साडी ज्यादा पहनने का फैसला किया है.
मैंने जन भुझ कर साडी का फैसला लिया था, मै उस लड़के को अपनी नंगी कमर का एहसास देना चाहती थी, मै उसे वहा अपने को छुआना चाहती थी.
जैसा मैंने सोंचा था वैसे ही उस लड़के में किया, उस दिन उसके हाथ मेरे चूतरो को सहलाने के बजाये मेरे ब्लाउस और साडी के बीच में कमर पर रेंगने लगे.
उसके मेरे नंगे अंग पर हाथ रखते ही मुझ मे करंट सा दौड़ गया और मेरी चूत एक दम से गीली होगयी.
बस में सब अपनी अपनी दुनिया में इतना व्यस्त थे कि किसी को यह ख्याल भी नही था कि बस में वह लड़का क्या कर रहा था और मै उसे आज़ादी देरही थी.
बस ने एक जगह कस के ब्रेक लगाया तो लड़का मेरे ऊपर पीछे से झूल गया और बड़े आत्मविश्वास से पीछे से हाथ डाल कर साडी के पल्लू के नीचे से मेरी चूंची पर हाथ रख दिया.
मेरा दिल धक् कर गया और पकड़े जाने के डर से मै उससे आगे खिसक के आगयी.
वह बात को समझ गया और उसने अपने हाथ मेरे चूतरो पर रख दिए और जब तक उसका स्टॉप नहीं आया वह मेरे चूतरो को दबाता रहा और मेरी नंगी कमर को हथेली से सहलाता रहा.
उसके स्टॉप आने पर हमेशा कि तरह वह मुझसे रगड़ता हुआ आगे जाकर उतरने लगा लेकिन इसी दौरान उसने मेरे हाथ को नीचे थपथपाया और एक छोटी सी कागज़ कि चिट मेरी हथेली में डाल दी.
मैंने उस चिट को अपनी मुठ्ठी में कस के दबा लिया और यह जानते हुए भी उस चिट में क्या होगा मै उसे पढ़ने कि हिम्मत न कर सकी .
मै भौचक्की और एक अनजाने डर से डरी होयी थी.
बस में मै उसके छूने का मज़ा तो ले रही थी लेकिन मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसी कोई हरकत करेगा.
मैंने उस चिट को अपने पर्स में डाल दिया.
घर में, मै पुरे समय उस लड़के के बारे में ही सोचती रही, उसका छूना, उसका मुझे दबाना उसका मेरी चूची पर हाथ रखना, सब कुछ मुझे अंदर से जलाता रहा.
उस रात मेरे पति जब बिस्तर पर आये.
तो मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उनसे लिपट गयी.
उन्होंने चौक्ते हुए मुझे देखा और मुस्कराते हुए मुझे बाँहों में जकड लिया.
उनके हाथ मेरी नाईटी को खिसकते हुए मेरी चून्चियों पर पहुच गए और उसे दबाने लगे, उस वक्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह लड़का मेरी चून्चियों को दबा रहा है.
जब वह मेरी नाईटी ऊपर कर रहे थे तो मैंने अपने आप ही उसको पूरी तरह से अपने से अलग कर दिया और बहुत दिनों बाद मै नंगी उनसे चिपट गयी.
मै बहुत ही गर्म थी.
मैंने आँख बंद कर रक्खी थी और मुझे उनकी हर हरकत में उस लड़के का होने का एहसास होरहा था.
उन्होंने जैसे ही मेरी टंगे फैला कर मेरी चूत में अपना लंड डाला वो फचाक से मेरी चूत में घूस गया.
उनको मेरी चूत का गीलेपन का एहसास होगया था, वह मुझे चोद रहे थे और कह रहे थे “सुनीता, आज तो बिलकुल ही तुम गर्मायी हुई लग रही हो, इतनी जल्दी चूत ने पानी छोड़ रक्खा” है?”
स्रोत:इंटरनेट