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Bus Geeli Choot Cheating Sexy Story

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बस में मिले एक लड़के से मेरी बात चीत शुरू हुई और बरसो से ठंडी पड़ी चूत में आग सी लगने लगी.
अब तो मुझे चाहिए था उसका जवान लंड.
पति जाये भाड़ में.
इस cheating sexy story का लास्ट पार्ट- HIndi Sex Story के अन्य पार्ट-. पार्ट 1. पार्ट 2. मैंने बात टालते हुये उससे पुछा, ‘आज तुम क्यों नहीं आये’? उसने सवाल मुझ पर ही दाग दिया ‘आपने मुझे मिस किया’?. मैंने तेजी से जवाब दिया,’नहीं! पागल हो क्या?’ उधर से उसने तंज लेते हुये कहा, ‘ अच्छा? फिर मुझे काल क्यों किया’? मैंने भी कह दिया, ‘तुमने नंबर दिया था इसलिए काल मैंने किया था’.
मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं.
मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.
’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.
मैं बात कर रही थी और बात किस तरफ जा रही है मुझे कोई भी ख्याल नहीं था, मैं बस उससे बात कर के मस्ती लेने लगी थी.
हमारी आगे को बात चीत कुछ इस तरह से हुयी.
मैं: ‘तुम क्या करना चाहते हो’?. वोह: ‘मैं मिलना चाहता हूँ और आपको बाँहों में लेना चाहता हूँ’.
मैं: ‘ तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुमको तो मुझे ज्यादा सेक्सी और जवान लड़की मिल जायेगी’.
वोह: ‘मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती मुझे मैच्योर औरते पसंद है’.
मैं: ‘कितनी मैच्योर औरतो को अब तक जानते हो’?. वोह: ‘ किसी भी को नहीं , केवल फंतासी में महसूस किया है.
आज तक मैं इतने करीब से किसी को भी नहीं जाना है , जितना मैंने आपको जाना है और किया है’ मैं: ‘सुनो, मैं तुमसे नहीं मिलूंगी, समझे? मेरी खुशहाल शादीशुदा ज़िन्दगी है और उसको मैं तुम्हारे लिए ख़राब नहीं करूंगी’.
वोह: ‘ठीक है.
मैं आपके हाँ का इंतज़ार करूंगा’.
मैं: ‘कोई बात नहीं, तुम काल आ रहे हो’? वोह: ‘कहाँ? तुम्हारे घर’?. मैं: ‘ नहीं बेवकूफ! बस पर’.
वोह: ‘ बिलकुल! चूतरो की मालिश के लिए तैयार रहना’.
हम दोनों ही इस बात पर हॅसने लगे.
वोह: ‘ सुनो कल पैंटी मत पहनना’.
मैं: ‘क्या’!!!. वोह: ‘ ओह हो! कल साडी के अंदर पैंटी मत पहनना’!. मैं: ‘पागल हो क्या’!. यह कह कर मैंने मोबाइल काट दिया.
जब मैंने मोबाइल बिस्तर पर फेका तब तक मैं इतनी गीली हो चुकी थी की अनायास मेरा हाथ चूत पर चला गया और उसी हालत में मेरी उसकी हुयी बात को याद करते हुये मैं मास्टरबेट करने लगी.
मेरी उंगलियां मेरी गीली चूत के अंदर बहार हो रही थी और मैं अपनी क्लिट को भी बेरहमी से रगड़ रही थी.
मैं लड़के की हिम्मत के बारे में सोंच रही थी, जो मुझसे २० साल छोटा था लेकिन बड़े अधिकार से मुझ से बिना पैंटी के साडी पहनने के लिए कह रहा था ताकि वोह भरी बस में खुले आम मेरे चूतरो से और मस्ती ले सके.
सेक्स की इस असीम चाहत से मैं रोमांचित हो उठी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
मैं बिस्तर पर पड़े पड़े उसी के बारे में और उससे हुयी बातो के बारे में सोचती रही.
मैंने उसका नंबर अपने मोबाइल में, एक लड़की के नाम सेव कर लिया.
तब मुझे ध्यान आया की अभी तक न मैंने अपना नाम उसे बताया था न उसने ही अपना नाम मुझे बताया था.
अगले दिन जब मैं अपनी बेटी को छोड़ने के लिए तैयार हुयी तब मुझे कल वाली उसकी बात ध्यान में आयी.
मैंने शीशे में अपने आपको घूरा और मैंने अपनी साडी पेटीकोट उठा कर एक झटके में पैंटी उतार दी.
मैं जब बाहर निकली तो बिना पैंटी के मुझे बड़ा अजीब लग रहा था.
लग रहा था मेरी चूत भरे बाज़ार नंगी होगयी है और मेरी झांघो के बीच वोह रगड़ी जा रही है.
मैं अंदर ही अंदर बहुत उतेजित भी थी और सोंच भी रही थी, हे भगवान! मैं यह क्या कर रही हूँ! वह भी एक २० साल के प्रेमी के लिए! मैं जब बस स्टॉप पर पहुँची वह लड़का वहाँ पहले से ही खड़ा था.
उसने जीन्स और टी शर्ट पहने हुयी थी, हमारी आँखे मिली और हमने नज़र घुमा ली, जैसे हम दोनों एक दुसरे को नहीं जानते .
हमेशा की तरह मैं हैंडल पकड़ कर खड़ी होगयी और वोह लड़का धक्का देता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा होगया.
उसने फ़ौरन मेरी कमर के नीचे हाथ रख कर मेरी पैंटी को महसूस करने की कोशिश की.
जब उसको इसका एहसास हो गया की आज मैंने उसके कहने पर पैंटी नहीं पहनी है तब उसने मेरे चूतरो को थप थपा दिया, जैसे वोह मुझे धन्यवाद दे रहा हो.
बिना पैंटी के जब उसके हाथ मेरे चूतरो के ऊपर पड़े मैं बिना दांत भीचे नहीं रह पायी.
आज पहली बार उसके उद्वेलित हाथो की गर्मी मेरे चूतरो पर सिर्फ साडी के ऊपर से महसूस कर रही थी.
मैंने थोड़े पैर और फैला दिया और जैस मुझे उम्मीद थी उसका कड़ा लंड मेरे चूतरो की दरार से रगड़ खाने लगा.
आज वह अपना लंड वही रगड़ रहा था और मेरे चूतरो को मसल भी रहा था,मैं बिलकुल अलग दुनिया में पहुँच गयी थी, उस भीड़ भरी बस में मैं वासना के उस सागर का सुख ले रही थी जो मेरी शादी के १८ साल बाद भी अभी तक मुझसे महरूम था.
पुरे रास्ते उसका लंड मेरे चूतरो पर रगड़ता रहा और मेरी चूत भी आज कुछ ज्यादा गीली हो गयी थी.
आज मैं पैंटी नहीं पहने थी , मेरी चूत का पानी बहकर मेरी जांघो पर आगया था.
जब उसका स्टॉप आया वोह उतरने के लिए आगे आया और जाते जाते धीरे से मुझे ‘थैंक्स , कॉल मी’ कहते हुये आगे बढ़ गया.
मैं मूर्ति की तरह वैसे ही वैसे खड़ी रही.
मैं जैसे तैसे घर पहुँची और घुसते ही रुमाल से मैंने अपनी बहती हुयी चूत को पोंछा और उसको मोबाइल लगा दिया.
वोह: ‘हाय दिलरुबा!’. मैं: ‘हम्म्म’.
वोह: ‘थैंक्स, मेरी इच्छा पूरी करने के लिए’.
मैं: ‘ हाँ, मैं बच्चो को निराश नहीं करती’.
यह कह कर हॅसने लगी और वह भी हॅसने लगा.
वोह: ‘हम कब मिल सकते है?’. मैं चुप हो गयी.
मिलने की इच्छा मुझे भी होने लगी थी और मन मानने लगा था की उससे मिलने में कोई बुराई और खतरा नहीं है.
लेकिन परेशानी थी की मैं उससे कहाँ मिल सकती हूँ? मैं: ‘मुझको नहीं पता.
कोई ऐसी जगह नहीं समझ में आती जहाँ मैं तुमसे मिल सकू’.
वोह: ‘मैं आपको अपने घर नहीं ले जा सकता, मेरी माँ हमेशा घर रहती है.
आपका घर कैसा रहेगा?’ मैं: ‘मेरा घर?’. उसने जब मेरे घर की बात की तब मैं सोचने लगी की बात सो सही है, मेरी नौकरानी १२ बजे चली जाती थी और ४ बजे मैं अपनी बेटी को लेने स्कूल के लिए निकलती थी.
१२ से ४ के बीच मैं घर पर बिलकुल ही अकेली रहती थी.
मैंने बिना हिचके उसको १२:३० बजे का समय दे दिया और अपने मकान का पता बता दिया.
अगले दिन वह बस स्टॉप पर नहीं दिखा , मैं घर ऑटो रिक्शॉ पकड़ कर जल्दी आगयी.
नौकरानी को भी मैंने जल्दी कम ख़तम करने को कहा और १२ से पहले ही उसे भी घर के बाहर कर के दरवाज़ा बंद कर दिया.
उसके जेन के बाद मैं बिलकुल एक कामातुर प्रेमिका की तरह कपडे निकलने लगी.
मैंने अब स्लीवलेस काले रंग का ब्लाउज पहन लिया जिसकी बैक खुली थी और उसके साथ सफ़ेद रंग की साडी जिस पर काले पोल्का डॉट पड़े थे पहन ली.
बड़ी अजीब बात थी, यह साडी मेरे पति की पसंदीदा साडी थी , जो उन्होंने मुझे शादी की १५ वीं वर्ष गांठ पर दी थी.
जब मैंने पहली बार इस साडी को पहना तो उन्होंने मुझसे कहा था, की मैं बहुत सेक्सी लग रही हूँ और उन्होने वही साडी उठा कर मुझे जल्दी से चोदा और उसके बाद ही हम लोग बाहर खाने पर गए थे.
मैंने साडी पहन कर अपने आप को शीशे में निहारा और अपने पर रश्क कर बैठी, मैं आज भी इस साडी में बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी.
मैं अपने को निहार ही रही थी कि तभी बाहर दरवाज़े पर घंटी बजी.
मैं एक बार ठिठकी , एक बार और अपने को देखा और फिर दरवाजा खोलने चली गई.

स्रोत:इंटरनेट