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Bus Mili Ek Haseena Stranger Chudai Kahani

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नमस्कार दोस्तो, मैं आपका एक बार फिर से स्वागत करता हूँ एक नई कहानी में, मेरी stranger chudai kahani का नायक है विवेक और नायिका कोमल है.
एक बार ये दोनों एक ही बस से अपने अपने गंतव्य स्थान की ओर जा रहे थे, स्थिति कुछ ऐसी थी कि विवेक को तो सीट मिल गई थी लेकिन कोमल जी वहीं उसकी सीट से सट कर खड़ी थीं.
उनका एक खरबूजे के साइज का चूचा विवेक के सर के पास था या यूँ कहें कि उसके सर से सटा हुआ था.
पहले तो इसके बारे में उनका और विवेक का कोई ध्यान नहीं था लेकिन जैसे ही बस चलना शुरू हुई एक हल्के से धक्के से वो सब कहानी समझ गए.
अब चूँकि विवेक एक लड़का था तो उसके अन्दर एक शरारती कीड़ा उठने लगा.
अब वो हर झटके पर अपनी तरफ से अपने सिर से उनके नर्म गर्म और मुलायम चूचों को दबा देता.
उसे उस अहसास में मजा आने लगा और वो ये भी भूल गया कि ये चूचे किसी और के हैं, उसके नहीं.
खैर उसे महसूस हुआ कि जो चूचे पहले नर्म और मुलायम थे, अब थोड़े-थोड़े टाइट होते जा रहे है, जो कि विवेक की नज़र में उसके लिए एक अच्छा संकेत था.
उसने अपना सिर ऊपर उठा कर कोमल जी के चेहरे की ओर देखा तो वो भी उसे ही देख रही थीं.
दोनों एक दूसरे को देख कर थोड़े शर्माए और फिर विवेक ने वही मम्मों को दबाना जारी रखा.
लेकिन अब के दबाने में और पिछले में थोड़ा अंतर था.
अब वो ज्यादा देर तक दबाए रख रहा था और कोमल जी भी थोड़ा पास को आ गई थीं.
अब विवेक का कंधा कोमल की जांघों के बीच में घुस रहा था.
अब विवेक अपने सर के साथ अपनी उंगलियों का भी प्रयोग करने लगा, वो अपना एक हाथ कोमल की टांगों पर ले आया और आस पास के लोगों से आँख बचाकर चूत तक पहुंचने की कोशिश करने लगा.
थोड़ी देर में कोमल जी अपने स्टॉप पर उतर गईं और वो अपने कॉलेज चला गया, जहाँ पढ़ाई करने में उसका मन नहीं लगा.
अगले दिन छुट्टी थी तो दोनों अपने-अपने घर पर रहे.
उसके बाद अगले दिन उन्हें पास पास की सीट मिल गई.
वो एकदम शांत बैठे थे.
शायद ये इंतज़ार में थे कि कौन पहले बात करेगा.
थोड़ी देर बाद कोमल जी ने चुप्पी तोड़ी और विवेक से उसके कॉलेज के बारे में पूछा तो उसने जवाब में अपना कॉलेज के बारे में बताते हुए उनसे पूछा कि आप क्या करती हैं? तो उन्होंने भी अपनी जॉब के बारे में बता. दिया.
फिर कोमल जी ने विवेक से उसका एड्रेस पूछा तो विवेक ने अपना एड्रेस बताते हुए उनका पता पूछा.
इससे उन दोनों को पता लगा कि दोनों ज्यादा दूर नहीं रहते हैं.
फिर उन्होंने यह कह कर विवेक का मोबाइल नम्बर ले लिया कि अगर वो अपने घर से कभी लेट होती हैं तो विवेक को बता कर एक दो मिनट के लिए बस को रोका जा सके.
अगले दिन कोई और बस थी, जिसमें कुछ ज्यादा ही लोग भरे हुए थे तो वो दोनों भी जैसे तैसे अन्दर घुस गए.
कोमल जी आगे थीं और विवेक उनके पीछे खड़ा था.
तभी विवेक को एक शरारत सूझी और वो उनके पीछे से उनकी गांड पर अपने अगले हिस्से से ठोकर मारने लगा और जब उसका लंड थोड़ा खड़ा हुआ तो उसने पैंट के ऊपर से निशाना लगा कर गांड के पास दे मारा, जिससे वो पलट कर खड़ी हो गईं.
कोमल जी उसका लंड पकड़कर बोलीं- जरा सब्र करो, इतनी जल्दबाजी भी ठीक नहीं… तुम तो मौके का फायदा उठाना अच्छी तरह जानते हो.
तो विवेक हल्का सा मुस्कुरा दिया, तब कोमल जी लंड को हल्का सा दबाते हुए बोलीं- देखते हैं कि कितना दम है, कल हाफ डे है.. अगर फ्री हो तो घर आना.. फिर देखते हैं.
तभी बस रुकी और कोमल जी अपने स्टॉप पर उतर गईं.
अगले दिन विवेक की नींद उनके फ़ोन से टूटी तो वो पूछ रही थीं कि क्या हुआ आओगे या डर गए?. तो विवेक बोला- रुको जरा आपको बताता हूं कि कौन डरता है और कितना डरता है.
तब कोमल जी ने जवाब दिया कि इंतज़ार रहेगा.
लगभग 3 बजे के करीब विवेक उनके बताए घर पर पहुँच गया और दरवाजे की बेल बजाई तो थोड़ी देर में एक खूबसूरत सी लड़की ने दरवाजा खोला.
उसने बड़ी शालीनता से विवेक से पूछा- आप कौन?. तो विवेक ने अपना परिचय देते हुए पूछा- क्या ये कोमल जी का घर है?. तभी कोमल जी आईं और विवेक को ‘वेलकम विवेक..’ बोल कर अन्दर ले गईं.
कोमल जी ने उस खूबसूरत सी लड़की से परिचय करवाते हुए कहा- इसका नाम रिया है.. ये मेरे साथ काम करती है.
थोड़ी देर बाद रिया अपने घर चली गई, तब कोमल जी और विवेक को फ्री टाइम मिला.
कोमल के पति को दूसरे शहर में रहना पड़ रहा है, कुछ महीने पहले ही उनका तबादला हुआ था.
वे महीने में एक बार ही वीक एंड पर आते हैं.
कोमल की कोई सन्तान नहीं है.
कोमल जी बोलीं- हाँ बॉस, अब बताओ कि फ़ोन पर क्या बोल रहे थे? तो विवेक ने प्यार से उनके गाल पर हाथ घुमाते हुए उन्हें किस करना शुरू कर दिया.
विवेक को सेक्स का कुछ ख़ास अनुभव नहीं था, उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी, बस एक बार यार दोस्तों की मदद से एक काल गर्ल को होटल में बुला कर चोदा था.
बस उसी अनुभव के सहारे विवेक आगे बढ़ रहा था.
कुछ ही पलों में वो धीरे धीरे उनके होंठों को अपने होंठों से चूस रहा था.
वो भी अपनी जीभ और होंठों का एक परफेक्ट तरीके से उपयोग कर रही थीं.
उन्हें बाकी के काम की कोई जल्दबाज़ी नहीं थी.
 . विवेक धीरे धीरे उनके चूचों पर अपने हाथ को घुमाते हुए ले गया औऱ उनके ब्लाउज का एक हुक खोल कर अपने होंठों से उनके गले पर किस करने लगा.
बगल में ही लैपटॉप में उन्होंने एक सेक्सी ट्यून लगा रखी थी, जो माहौल को और भी मज़ेदार सेक्सी बना रही थी.
विवेक उनके कान से लेकर उनके गले से होते हुए अपने होंठों को उनके ब्लाउज के पास चूचों की शुरुआती गहराइयों तक ले जा रहा था.
कोमल जी ने अपने आपको ऐसे उसके हवाले कर दिया था कि जैसे उनके शरीर में जान ही ना हो.
वे एकदम निढाल हो गई थीं और उनके मुंह से एक हल्की सी मादक आवाज आ रही थी.
थोड़ी देर बाद विवेक ने उनका ब्लाउज उनके सेक्सी बदन से अलग कर दिया औऱ लगभग 38 इंच के टाइट हो चुके चूचों पर अपने हाथ और मुंह को ले गया.
वो उनके दाएं तरफ के चूचे को अपने हाथ से मसल रहा था और दूसरे चूचे पर गुलाबजामुन की तरह जड़े हुए चॉकलेटी कलर के निप्पल को अपने होंठों से चूसते हुए अपने दांतों से बीच बीच में काटता जा रहा था.

स्रोत:इंटरनेट