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Chachi Ka Kamaal Desi Kahaniya 3

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 .  . फूफा दुबले मीनिंग मे बात कर रहे थे, जो चाची सब समझ रही थी.
 .  . चाची: “हमे परेशान करने के लिए पहले से कोई है”.  .  . फूफा: “कॉन है..जो आपको परेशान करता हमे बताओ उसकी खबर लेते है”  .  . चाची: “आए बड़े खबर लेने वाले, साल मे एक बार तो चेहरा दिखाते है, आप देल्ही अपने भाई के ससुराल आए थे, हफ्ते भर वान्हा रहे पर एक बार भी हमारे घर नही आए”  .  . फूफा: “अर्रे वो..मे घूमने नही आया था छोटे भाई के ससुर हॉस्पितल मे अड्मिट थे इस लिए उन्हे देखने गया था”  .  . चाची: “तो क्या एक दिन भी आपको समय नही मिला”.  .  . फूफा: “अर्रे नाराज़ क्यूँ होती हो, इस बार आउन्गा मे और हफ्ते भर रहूँगा देखता हू कितनी खातिरदारी होती है”  .  . चाची: “वो तो आने पर हो पता चलेगा”.  .  . तभी मा ने उपर से आवाज़ दी, चाची फिर उपर सीढ़ियों से जाने लगी फूफा वन्हि खड़े उनके मोटे चूतर और कमर को हिलता हुआ देख रहे थे, मे वन्हि खड़ा ये सब देख रहा था.
फिर फूफा दालान मे चले गये.
इस के बाद भी कई बार फूफा को चाची से मज़ाक करते देखा पर मुझे ये सब नॉर्मल लगा.
 .  . पर एक दिन मे उनका ये मज़ाक समझ नही पाया, मे बुआ के कमरे था फूफा भी टेबल पर बैठ कर कुछ लिख रहे थे, मे उनसे काफ़ी दूरी पर था और खिड़की से नीचे दालान की तरफ देख रहा था, तभी चाची वान्हा आई शायद उन्हे कुछ लेना था, अंदर आते ही उनकी नज़र फूफा पर पड़ी उन्होने एक शरारती मुस्कान देते हुए फूफा के पास से गुज़री फूफा भी मुस्कुराते हुए देख रहे थे, चाची नीचे झुक कर एक बोरे से चने की दाल निकाल रही थी, झुकने से उनके चूतर काफ़ी कामुक लग रहे थे और चूतर की दरार (आस क्रॅक) दिख रही थी.
फूफा की तो नज़र ही नही हट रही थी उनके चूतर से, चाचीने भी एक दो बार घूम कर फूफा को देखा, फूफा ने पूछा “क्या निकाल रही हो?”.  .  . चाची: “दाल..”  .  . फूफा:”क्या दाल?”.  .  . चाची” “अर्रे.. चने की दाल”  .  . फूफा: “अछा दाल..मे तो कुछ और ही समझ रहा था”  .  . चाची: “आप तो हमेशा, कुछ और ही समझ लेते है” इतना बोलते हुए वहाँ से गुज़री तब तक फूफा ने उनकी कमर पर चींटी ले लेली और उनका हाथ पकड़ लिया.
 .  . चाची: “हाए प्रीतमजी..आप तो बड़े बेशरम हो..”  .  . फूफा: “बेशरम बोलही दिया है तो बेशरम भी बन जाते है”.  .  . चाची: “प्रीतमजी.. मेरा हाथ छोड़िएना, कोई देख लेगा तो क्या कहेगा”  .  . फूफा: “किसीकि मज़ाल जो हमे कुछ कहदे”.  .  . चाची: “छोड़िएना….
”  .  . फूफा: “एक शर्त पर..मैने बहुत दिनो से मालिश नही करवाया है, तुम्हे मेरी मालिश करनी होगी…और वैसे भी हमारी बीवी के पास वक़्त नही है”  .  . चाची: “तो क्या आपने हमे बेकार समझ रखा है”.  .  . फूफा: “अर्रे नही आप तो बड़े काम की चीज़ है..पर प्लीज़ ज़रा मेरी मालिश करदो”  .  . चाची: “अभी?..यहाँ?…नही नही रात को कर दूँगी”  .  . फूफा: “अर्रे आपको को रात को कहाँ फ़ुर्सत मिलेगी…संजीव छोड़ेगा ही नही”.  .  . चाची: “अर्रे ऐसी कोई बात नही..वैसे भी आज कल वो शादी के काम मे बहुत बिज़ी है”  .  . फूफा: “अछा तो साले को टाइम नही है.. इतना बड़ा काम छोड़ कर बेकार के काम करता है”  .  . चाची: “प्रीतमजी छोड़ दीजिए ना..देर हो रही है दीदी इंतज़ार कर रही होगी..मैने आपकी रात को ज़रूर मालिश कर्दुन्गि”  .  . फूफा: “ठीक है छोड़ देता हूँ…पर रात को हम आपको इंतज़ार करेंगे”.  .  . चाची: “जी ज़रूर आउन्गि”.  .  . ये बोल कर चाची वान्हा से चली गयी पर मे सोच रहा था, चाचीने कभी चाचा की मालिश नही की और फूफा की मालिश के लिए हां बोल दिया, पता नही मेरे अंदर एक अजीब सी कुलबुलाहट हो रही मैने सोचा क्यूँ न आज फूफा पे नज़र रखी जाए.
फूफाजी तो चाची के पीछे हाथ धो के पड़ गए और लग रहा है चाची उनके हाथ आ गयी है.
आज मौका उनका ये कार्यक्रम देखने का.
उस कार्यक्रम का आँखों देखा हाल इन desi kahaniya के अगले भाग में.. और भी जबरदस्त पढ़िए My Hindi Sex Stories पर.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4.
स्रोत:इंटरनेट