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Chachi Ka Kamaal Desi Kahaniya

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नदी के पानी में रेनू दीदी ने मुझे जवानी की थोड़ी सी झलक दिखाई थी, पर अभी हमारी इन desi kahaniya की असली हीरोइन का आना बाकी है.
जानिए कि sex story के इस भाग में क्या होता है.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. हम काफ़ी देर चलते चलते बाते करते रहे और फिर घर पहुँच गये जाते समय रेणु ने कहा “राज तुम कल आओगे नदी पर” मे बोला “अगर आप मुझे तैरना सिखाओगि तो ज़रूर आउन्गा” फिर रेणु मेरे गाल पर. हाथ फेरते हुए अपने घर चली गई.
धीरे धीरे शाम होने लगी और सभी मेहमान और रिस्तेदार दालान मे जमा होने लगे कुछ देर बाद पता चला लड़कीवाले भी आ गये है, दादाजी, पिताजी, चाचा सब उनका स्वागत के लिए दालान के डोर पे खड़े थे, थोड़ी देर बाद सभी मेहमआनो की खातिरदारी सुरू हो गई.
थोड़ी देर बाद दादाजी ने सब का परिचय हमसे करवाया और तिलक की रसम सुरू हो गई.
 . तिलक की रसम सुरू होने वाली थी, ये सब हमारे घर के आँगन मे होनेवाला था, सारा गाओं जैसे हमारे घर मे आ गया था घर एक दम खचा खच भरा हुया था.
आँगन के बीच मे एक छोटसा मंडप बनाया गया था, मंडप के चारो तरफ हमारे रिस्तेदार और गाओं के लोग जमा थे.
घर की औरते ये सब ग्राउंड फ्लोर के कमरों से देख रही और गाओं की औरते ये सब सेकेंड फ्लोर से देख रही थी.
मे भी नीचे एक कोने मे खड़ा था और वही से या सब देख रहा था, कुछ देर मे लड़की वाले आने लगे और मंडप के एक तरफ बैठने लगे, मंडप के बीच मे पंडितजी बैठे ही थे, उन्होने चाचा को बुलाने को कहा.
चाचा फिर अपने कमरे से निकले और मंडप मे बैठ गये और पंडितजी ने रसम सुरू की.
तभी मेरी नज़र उपर रेणु पर पड़ी मैने उसे हाथ दिखाया और रेणु ने मुझे उपर आने का इशारा किया, मैने इशारे से कहा आता हूँ.
जैसे ही मे उपर जाने लगा, देखा फूफा दादाजी के कमरे के पास खड़े है और चाची से बाते कर रहे है, फूफा काफ़ी हंस हंस कर बाते कर रहे थे जैसे ही मे वहाँ से गुजरा चाचीने पूछा “कहाँ जा रहे हो?” मे बोला “चाची मे उपर जा रहा हूँ” चाची बोली “अर्रे उपर मत जाओ बहुत लोग है, तुम यही से देखो”.
फिर मे वहीं रुक गया, लेकिन मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था तो मे कमरे के अंदर जा कर एक टेबल पर खड़ा हो गया और खिड़की से देखने लगा अब सब साफ दिख रहा था.
 .  . आप लोगो को बता दू, फूफा का मेरी मा, चाची और पापा की कज़िन सिस्टर से मज़ाक वाला रिस्ता था, घर के इक्लोते दामाद थे, तो उनका मान (रेस्पेक्ट) भी बहुत करते थे.
मा और चाची फूफा से बहुत मज़ाक करती, लेकिन फूफा कभी बुरा नही मानते थे वो भी लगे हाथ मज़ाक कर लेते.
चाची फूफा के एक दम पास खड़ी थी, उनके आगे बहुत सारी गाओं की औरते और मर्द खड़े थे, जिसकी वजह से चाची को मंडप नही दिख रहा था वो बार बार लोगो के उपर से देखने की कोसिस कर रही थी पर कुछ भी ठीक से नही दिख रहा था, फूफा ने कहा “साक्षी जी आप मेरे पास खड़े हो जाइए, शायद यहाँ आप को दिखेगा” चाची उन्हे पास खड़ी हो गयी और फूफा ने एक दो लोगो को थोड़ा हटने को कहा अब वहाँ से चाची को कुछ साफ दिख रहा था पर चाची फूफा से काफ़ी चिपकी हुई थी उनकी चूतर फूफा के हाथ को छू रही थी, क्यूँ की वनहा पर काफ़ी भीड़ थी और सब लोग मंडप मे तिलक देखने के लिए बेताब थे और सबकी नज़र मंडप पर थी.
 .  . चाची: “सुक्रिया, प्रीतमजी”  .  . फूफा: “अर्रे इसमे सुक्रिया की क्या बात है, आप कहे तो आप को उठा लू”  .  . चाची: “एकता तो उठती नही, हमे क्या उठाएँगे”  . फूफा: “क्यूँ..आप क्या एकता से भी भारी है”  .  . चाचीने कुछ जवाब नही दिया और मुस्कुराने लगी, फिर फूफा की शरारत सुरू हुई वो धीरे धीरे चाची के पीछे आगाये, पर फूफा लंबे थे इसीलये वो उनका लंड चाची के चूतर के उपर था, चाची तो बेफिकर मॅडप की तरफ देखा रही थी, फूफा अब धीरे धीरे अपने राइट हॅंड से उनकी चूतर को छू रहे, पर उनकी नज़र तो चाची की चूंचियों पर थी, फूफा लंबे थे इसीलिए वो काफ़ी अच्छीे तरह से चाची की चुचियों का मज़ा ले रहे थे.
अचानक मेरे पिताजी वहाँ गुज़रे, चाची ने देखा और तुरंत वहाँ से हट गयी और अंदर आ गयी, कुछ देर बाद बाहर आई पर चाची जहाँ खड़ी थी वहाँ पर कोई और खड़ा होगया, फूफा ने देखा और कहा “साक्षी जी आप कोई टेबल लाकर, उसपर खड़ी हो जाओ, आप को साफ दिखेगा” पर वहाँ पर कोई भी टेबल या चेर नही था फिर फूफा ने कोने से एक लकड़ी का छोटा सा बॉक्स लाकर अपने पास रख दिया और बोले “इस पर खड़ी हो जाओ” चाची ने खड़े होने की कोसिस की पर वो हिलने लगा चाची उतर गयी.
 .  . फूफा: “क्या हुआ”.  .  . चाची” “नही मे इस पर से गिर जाउन्गि”.  .  . फूफा: “अर्रे नही गिरोगि”.  .  . चाची: “नही ये हिल रहा है”.  .  . फूफा : “तुम खड़ी हो जाओ मे तुम्हे पीछे से पकड़ लेता हूँ..”  .  . चाची: “अर्रे नही मुझे शरम आती है, और कोई देखेगा तो क्या कहेगा”  .  . फूफा: “ठीक है फिर वही खड़े रहो”.  .  . चाची के पास कोई दूसरा चारा नही था, वो उसे पर खड़ी हो गयी और फूफा ने पीछे से पकड़ लिया, अब चाची की चूतर फूफा के लंड के शीध मे थी.
फूफा ने पीछेसे चाची की कमर को पकड़ा हुआ था पर उनकी उंगलिया (फिंगर) चाची के नाभि (नेवेल) को छू रही थी.
चाची का ध्यान तो मंडप पर था, मे ये सब खिड़की के पास से देख रहा था, बाकी लोगो का भी ध्यान मॅडप पर ही था, हम काफ़ी पीछे थे इसीलिए कोई हमे देख नही सकता था.
 .  . फूफा का लंड काफ़ी तन गया था, पॅंट की उभार साफ दिख रही थी और फूफा बड़े मज़े से चाची की चूतर को अपने लंड से दबा रहे थे, अचानक चाची थोड़ी सहम गयी शायद चाची फूफा के लंड को महसूस कर रही थी उन्होने एक दो बार पीछे भी मूड कर देखा पर कुछ बोली नही, पर बोलती भी क्या.
 .  . चाची: “प्रीतमजी..लड़कीवाले तो बड़े कंजूष निकले, समान बहुत कम दिया है”  .  . फूफा: “अर्रे लड़की दे रहे है और क्या चाहिए..पर आपके से तो ज़्यादा दहेज दे रहे है”  .  . चाची: “अर्रे..वो तो बड़े भैया ने दहेज के लिए हां करदी थी नही तो वो भी नही मिलती, पिताजी तो दहेज के खिलाफ थे और इतनी खूबसूरत लड़की दे रहे थे और क्या चाहिए था”  .  . फूफा: “बात तो ठीक कह रही है आप…अगर हम संजीव की जगह होते तो, हम दहेज देते आपको..आख़िर आप हो ही इतनी खूबसूरत”  .  . चाची: “अब हमारी फिरकी मत लीजिए”.  .  . फूफा: “क्यूँ..तुम खूबसूरत नही हो”  .  . चाची: “हमे क्या पता”.  .
स्रोत:इंटरनेट