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Chachi Ka Kamaal Desi Sex Kahani 2

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 .  . मैं ये सब दालान से देख रहा था फिर मैं भी उपर अपने कमरे मे चला गया और गोपी को देखने लगा, गोपी सब से पहले चाची के कमरे मे गया और सफाई करने लगा तभी उसकी नज़र टेबल पर रखे हुए कपड़े पर पड़ी वो उन्हे उठा कर एक तरफ रखने लगा तभी उसने देखा उन कपड़ो मे चाची की ब्रा और पॅंटी थी ये देख कर उसके चेहरे पर चमक आ गयी उसने यहाँ वहाँ देखा और ब्रा और पॅंटी को अपने नाक से लगा कर सूंघने (स्मेल) लगा.
मुझे ये सब बड़ा अजीब लग रहा था की ये गोपी क्या कर रहा है, फिर अच्छाणक उसने अपने हाथ अपने लंड पर रखा और उस दबाने लगा कुछ देर ऐसा करने के बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला और ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा मे उस का लंड देख कर डर गया, उसका लंड एक दम कला और तकरीबन 8इंच.
लंबा और 2इंच मोटा होगा, मुझे लगा ये इंसान का लंड है या जानवर का.
तभी मुझे सीढ़ियों से नीचे आने की आवाज़ आई मे अपने कमरे मे चला गया (आप लोगो को बता दूं कि मेरा कमरा चाची के कमरे के एक दम पास मे है और सीढ़ियों से उतरते ही राइट हॅंड साइड मे चाची के कमरे की खिड़की है जो सीढ़ियों से साफ दिखती).
नीचे उतरते वक़्त चाची की नज़र उनकी खिड़की की तरफ पड़ी और वो वही रुक गयी और छुप कर अंदर देखने लगी, मुझे पता था चाची अंदर गोपी का लंड देख रही है, उनके चेहरे से साफ दिख रहा था कि उन्होने भी इतना मोटा लंड पहली बार देखा है, चाची की आँखे बड़ी हो गयी थी और चेहर लाल पड़ रहा था, अपने एक हाथ से चूंचियों को दबा रही थी.
चाची वहाँ काफ़ी देर तक खड़ी रही शायद उन्हे भी ये नज़ारा अच्छा लग रहा था.
कुछ देर बाद गोपी मेरे कमरे मे आया मैं उसे बिना देखे कमरे से बाहर निकल गया, चाची भी नीचे जा चुकी थी.
 .  . मैने अब दोपहर का इंतज़ार करने लगा, उस दिन मे बाहर खेलने नही गया और और चाची पे नज़र रखने लगा की चाची कहाँ जा रही है, क्या कर रही है.
दोपहर के 1 बाज गये थे सब खाने के लिए बैठ थे, पर फूफा की नज़र तो चाची को ही ढूंड रही थी.
सबने खाना खा और दोपहर की नींद की तैयारी मे लग गये पर फूफा तो बड़ी बेचैन नज़रों से चाची को ढूँढ रहे थे पर चाची दिखी नही.
फूफा उपर अपने कमरे की तरफ जा रहे थे मे भी मौका देख कर उनके पीछे चल दिया पर वो तो सीधे चाची के कमरे मे घुस गये, मे भी दबे पैर अपने कमरे मे चला गया और वहाँ से सुनने की कोशिस करने लगा, चाची अपने कमरे मे थी.
फूफा: “अर्रे हमने तो सारा घर ढूँढ लिया और आप यहाँ बैठी हैं”.  .  . चाची: “क्यूँ ऐसा भी क्या ज़रूरी काम आ गया था कि हमे ढूंड रहे थे”.  .  . फूफा: “यही बताउ या फिर कहीं और चलें?”.  .  . चाची: “यहीं बता दीजिए”.  .  . फूफा: “ठीक है”.  .  . चाची: “उ माआ….. क्या कर रहे है आप, कोई ऐसे दबाता है, मेरी तो जान ही निकाल देते हो…जाइए मे आपसे बात नही करती”  .  . फूफा: “तुम तो बहुत जल्दी नाराज़ हो जाती हो, अच्छा बताओ दोपहर मे कहाँ मिलॉगी”  .  . चाची: “नही…मुझे आज बहुत काम है”.  .  . फूफा: “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी”.  .  . चाची: “आअहह…ये क्या कर रहे हो… कोई आ जाएगा दरवाज़ा खुला है….
आअहह अऔच दर्द हो रहा है छोड़ो ना!”  .  . फूफा: “पहले वादा करो दोपहर मे आओगी”.  .  . चाची: “नही..”  .  . फूफा: “ठीक है..”  .  . मैने सोचा क्यूँ ना थोड़ा देखा जाए क्या हो रहा है पर डर भी लग रहा था.
मे दीवार से चिपकते हुए दरवाज़े के अंदर देखने लगा.
चाची बिस्तर पर लेटी हुई थी और फूफा एक हाथ से चाची के चूंचियों को दबा रहे थे और दूसरे हाथ से सारी उपर कर रहे थे.
चाची तुरंत खड़ी हो गयी और कपड़े ठीक करने लगी, फूफा ने चाची को पीछे से पकड़ा और उनके गालो पर किस करने लगे, तभी चाची बोली “छोड़िए ना…ठीक है मे दोपहर मे आ जायूंगी, अब तो छोड़िए”.  .  . फूफा: “ये हुई ना बात..”  .  . चाची: “पर कहाँ?”.  .  . फूफा: “यही पर… तुम्हारे कमरे मे”.  .  . चाची: “नही नही दीदी (मेरी मा) दोपहर मे यही सोती है”.  .  . फूफा: “तो ठीक है मेरे कमरे मे आ जाना”.  .  . चाची: “नही नही वहाँ पर कोई ना कोई आता जाता रहता है”.  .  . फूफा: “फिर कहाँ?”.  .  . चाची: “एक काम करो मे जब मे जूटन (वेस्ट फुड) डालने दालान मे आउन्गि तो तुम मुझे वही मिलना”.  .  . फूफा: “दालान मे?”.  .  . चाची: “हां….
वहाँ जो आखरी वाला कमरा है जिसमे जानवरों के लिए घास रखी है वही पर”  .  . फूफा: “पर वहाँ तो गोपी होगा ना”.  .  . चाची: “नही होगा मे उस बाज़ार भेज रही हूँ, कुछ घर के लिए समान लाने के लिए”  .  . फूफा: “तो कितने बजे आओगी”.  .  . चाची: “कुछ बोल नही सकती, पर तुम 2.
30 बजे के करीब दालान मे ही रहना”  .  . फूफा: “ठीक है”.  .  . मैं सोच मे पड़ गया, कि मे उस कमरे मे ये सब देखूँगा कैसे क्यूँ कि उस कमरे मे कोई खिड़की नही थी.
काफ़ी देर सोचने के बाद मुझे याद आया कि उस कमरे मे उपर की तरफ एक जगह है जहा पर काफ़ी अंधेरा है और बहुत सारे वेस्ट समान पड़े है, मे वहाँ आराम से बैठ कर ये सब देख सकता हूँ वो जगह मैने छुपा छुपी (हाइड & सीक) खेलते वक़्त ढूंढी थी, पर उपर जाने की लिए मुझे सीढ़ी (स्टेर) की ज़रूरत थी मैं तुरंत गया और दालान मे रखी लकड़ी की सीढ़ी वहाँ लगा आया और पूरी तरह देख लिया कि मे वहाँ महफूज़ हूँ कि नही.
 .  . दोपहर का समय था इसीलिए घर मे काफ़ी सन्नाटा था, मे गेस्ट रूम मे जा कर बैठ गया, कुछ देर बात फूफा वहाँ आए और लेट गये ह्मने कुछ देर बाते की फिर फूफा सोने लगे मे वहाँ से उठा और दरवाज़े पर रखी चेर पर बैठ गया वहाँ से किचन और आँगन दिखता था.
तकरीबन 3 बज गये थे तभी मे चाची को आते देखा उनके हाथ मे एक बाल्टी थी जिसमे झूतान भरा हुआ था, मे तुरंत दबे पैर वहाँ से निकला और दालान के आखरी वाले कमरे मे उपर जा कर छुप गया.
5मिनट.
बाद चाची अंदर आई और बाल्टी नीचे रख कर यहाँ वहाँ देखने लगी तभी फूफा भी अंदर आ गये और दरवाज़ा बंद कर लिया और तुरंत एक दूसरे से लिपट गये और किस करने लगे ऐसा लग रहा था कि जैसे वो सालो के बाद मिल रहे है.
फूफा ने चाची की सारी को उपर कर दिया और चूतर को मसल्ने लगे, चाची भी जोश मे किस करने लगी, 2, 3 मिनट.
बाद फूफा बोले “साक्षी लंड चुसोगी?”  .  . चाची: “छीई… नही मैने कभी पहले नही लिया”.  .  . फूफा: “अर्रे एक बार लेके तो देखो बड़ा मज़ा आएगा”.  .  . चाची: “ना बाबा…मैं नही लेती मूह मे…कोई भला मूह मे भी लेता है”.
स्रोत:इंटरनेट