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Chachi Ka Kamaal Desi Sex Kahani

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फूफा के लंड से चाची की धुआंधार चुदाई देखकर मेरी तो हालत ख़राब हो गयी.
ये सब मैंने पहली बार देखा था.
अब ये देखना है चाची मेरा ये सेक्स ज्ञान और कितना बढाती है इस desi sex kahani के आखिरी भाग में.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. दूसरे दिन मे जब सुबह 7 बजे उठा तो देखा फूफा बिस्तर पर नही थे शशि अभी भी मेरे ही सोया था, मे उठा और अपने कमरे मे जा कर टूतपेस्ट और ब्रश लिया और छत की सीढ़ियों पर बैठ गया था भी देखा चाची चाइ (टी) लेकर फूफा के कमरे मे जा रही है, मे भी सीधे नीचे उतरा और खिड़की के पास जा कर खड़ा होगया अंदर से फूफा और चाची की आवाज़ आ रही थी.
 . चाची: “क्या बात आज तो बड़े फ्रेश लग रहे है”. फूफा: “हां…कल रात पहली बार इतनी अच्छी नींद आई”.  .  . चाची: “हमारी तो नींद ही उड़ा दी आपने”.  .  . फूफा: “क्यूँ क्या हुआ?”.  .  . चाची: “कल रात भर मे ठीक से नींद नही आई..पूरे बदन मे दर्द सा है”  .  . फूफा:” क्यूँ कल रात तुम्हे मज़ा नही आया क्या?”.  .  . क़हचही:” हाए राम…कितना मोटा है आपका अभी तक दर्द हो रहा है…लग रहा है अभी भी अंदर है”.  .  . फूफा: “रात को तो बड़े मज़े से ले रही थी…अब कह रही हो दर्द हो रहा है”.  .  . चाची: “मना कर देती तो अच्छा होता.. ये दर्द तो नही होता”  .  . फूफा: “बड़ी नाज़ुक हो..एक ही बार मे डर गयी…अब तो रोज करना है”  .  . चाची: “ना बाबा…अभी 2, 3 दिन नही”  .  . फूफा: “2, 3 दिन!!….
अर्रे मेरा तो अभी भी खड़ा है तुम्हारी चूंची और चूतर देख कर..क्यूँ ना हम अभी !!”  . चाची: “आआहह प्रीतम क्या कर रहे है आप, दरवाज़ा खुला है एकता आ जाएगी, आआअहह मत दबाओ दर्द हो रहा है”  .  . फूफा: “उपरवालेने बड़े फुरशत मे बनाया है आपको”.  .  . चाची: “छोड़िए ना कोई आ जाएगा”.  .  . फूफा: “अर्रे 2 मिनट.
मे हो जाएगा…सारी उपर करो ना!!”  .  . चाची: “प्रीतम अभी नही, दोपहर मे कर लेना उूउउइ ऊओ नही”  .  . फूफा: “अर्रे दोपहर मे भी कर लेंगे..अभी तो लंड खड़ा होगया है, तुम्हारी चूत लिए बिना मानेगा नही, तुम घूम के टेबल के सहारे झुक जाओ”  .  . च्कही: “ऊफ़्फूओ नही”.  .  . फूफा: “अर्रे घुमो ना…जल्दी से कर लूँगा”.  .  . क़हचही: “आप तो दीवाने हो गये हो..मुझे बदनाम कर के ही छोड़ेंगे”  .  . फूफा: “जल्दी उठाओ ना!!”.  .  . चाची: “नही छोड़िए मे जा रही हूँ..”  .  . फूफा: “अर्रे सुनो ना जल्दी कर लूँगा”.  .  . चाची: “नही दोपहर मे कर लेना”.  .  . फूफा: “अर्रे रूको !!”.  .  . चाची की आने की आहट सुन कर मैं छत (टेरेसए) की सीढ़ियों (स्टेर केस) के पीछे चुप गया, चाची कपड़े ठीक करते हुए नीचे चली गयी.
मैने उनकी पूरी बाते सुनली थी और सोच रहा था कि आज फिर दोपहर मे चाची की चुदाई होगी पर कहाँ होगी ये तो पता नही था, क्यूँ ना आज फिर चाची पर नज़र रखी जाए.
 .  . मैं फ्रेश हुआ और ब्रेकफ़स्ट के लिए किचन मे गया देखा मा और बुआ किचन मे खाना बना रहे थे मुझे देख कर बुआ ने पूछा “राज आज तो बड़ी जल्दी उठ गया नाश्ता किया?” मैने सर हिलाते हुए ना कहा बुआ बोली. “जा फूफा को भी बुला लेआ, दो साथ मे ही नाश्ता कर्लो” मैं उन्हे बुलाने उपर की तरफ जाने लगा तभी देखा गोपी चुप चाप बाथरूम के पास खड़ा है मैने सोचा वो भी नाश्ते के लिए आया होगा पर वो अजीब सी हरकत कर रहा था बार बार बाथरूम की तरफ देखता और फिर तुरंत पीछे देखने लगता.
मुझे देख कर वो थोड़ा घबराया और वही चुप चाप खड़ा हो गया पर मैं बिना रुके उपर चला गया और फूफा को नाश्ते के लिए नीचे आने के लिए कहा.
फिर मैं दबे पैर बिना आवाज़ किए नीचे आया और छुप कर गोपी को देखने लगा वो बाथरूम की दरार से अंदर की तरफ देख रहा था मैं सोच मे पड़ गया कि ये क्या देख रहा है वैसे भी सुबह का समय था शायद उस भी नहाना हो पर वो तो डेली दालान मे हॅंडपंप पर नहाता है मे वहाँ से निकला और किचन की तरफ जाने लगा गोपी ने मुझे देखा और फिर वहाँ से चला गया.
 .  . कुछ देर बाद मैने देखा चाची बाथरूम से बाहर निकल रही है, उन्होने सिर्फ़ वाइट कलौर की ब्लाउज और पेटिकोट ही पहने हुई थी और उनके हाथ मे टवल था, मुझे देखते ही पूछी “राज..विकी उठ गया?” मैने कहा “वो अभी तक सो रहा है” ये कहती हुई प्रेम चाच्चा के कमरे मे चली गयी और फिर सारी पहन कर निकली और उपर छत (टेरेसए) की तरफ चली गयी.
मैं किचन मे गया और कुछ देर बाद फूफा, संजीव और प्रेम चाच्चा भी आ गये थे हम सब बैठ कर नाश्ता करने लगे तभी चाची किचन मे आई और चाइ पीने लगी, फूफा तिरछी नज़र्से चाची को देख रहे थे चाची भी देख रही थी दोनो मुस्कुरा रहे थे.
मैं और संजीव चाच्चा हाथ ढोने के लिए बाहर आए तभी मैने देखा फूफा कुछ चाची को इशारा कर रहे है पर चाची कुछ समझ नही पा रही थी फिर फूफा भी बाहर आए, चाच्चा और फूफा कुछ बाते कर रहे थे.
तभी चाची वहाँ आई और चाच्चा से कहने लगी “आप शाम मे कब तक आज़ाओगे?”.  .  . संजीव चाच्चा: “कुछ ठीक नही है..रात हो जाएगी, क्यूँ कुछ काम था”  .  . चाची: “नही…कुछ बाज़ार से समान मंगाना था”.  .  . संजीव चाच्चा: “तो ठीक है देदो मे आते वक़्त ले आउन्गा”.  .  . चाची: “रहने दीजिए मे किसी और से मॅंगा लूँगी”.  .  . फूफा: “क्या लाना है मुझे बता दीजिए मे ले आता हूँ”.  .  . संजीव चाच्चा: “हाँ…प्रीतम जी भी बाज़ार जाने वाले है, इन्हे देदो ये ले आएँगे”  .  . फिर संजीव चाच्चा और फूफा दालान मे चले गये, मैं समझ गया आज दोपहर मे चाच्चा नही है, फिर तो फूफा आज ज़रूर मज़े करेंगे.
उनके जाते ही गोपी आया और चाची को नाश्ते के लिए बोला.
 .  . चाची:” गोपी नाश्ता करके ज़रा ये चावल की बोरी छत पर पहुँचा दे!”.  .  . गोपी:” जी मालकिन”.  .  . चाची: “और हां…अभी तू कहीं जाना मत थोड़ा छत पर काम है, कपड़े सुखाने है और थोड़ा कमरे की सफाई करनी है”  .  . गोपी: “ठीक है मालकिन मे कर दूँगा”.  .  . इतना बोलते हुए चाची नाश्ता लाने अंदर चली गयी, गोपी वही आँगन मे बैठ गया जब चाची नाश्ता देने के लिए झुकी उनकी चूंचिया नीचे लटक गयी ये देख कर गोपी की आँखे बड़ी हो गयी.
नाश्ता करने के बाद गोपी ने चाची को आवाज़ दी “छोटी मालकिन ये बोरी कहाँ रख ना है?” चाची: “कमाल के कमरे मे रखना”.
गोपी ने बोरी उठाई और उपर ले गया चाची भी कपड़े की बाल्टी लिए उपर आ गयी, ये देखते ही गोपी ने बाल्टी चाची के हाथ से ली और छत पर चला गया.
चाची कपड़े सुखाने लगी, गोपी वही खड़ा था और चाची के बदन को घूर रहा था, चाची ने सारी थोड़ी उपर चढ़ा रखा था जिनसे उनके गोरे गोरे पैर साफ दिख रहे थे चाची जब जब कपड़े लेने के लिए नीचे झुकती गोपी अपना लंड सहलाने लगता, पानी लगने की वजह से चाची की ब्लाउज थोड़ी गीली हो गयी और निपल दिख रहे थे.
गोपी बड़े मज़े से ये सब देख रहा था तभी चाची बोली “गोपी जाके नीचे के दोनो कमरे साफ कर्दे” गोपी बोला “और कुछ काम है मालकिन” चाची बोली ” नही तू जा मैं ये कपड़े सूखा लूँगी”.

स्रोत:इंटरनेट