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Chachi Ki Ghanghor Chudai Didi Ki Chudai 2

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नाइटी के सारे बटन खुलते ही उसके मस्त खिलौने नंगे हो गये और मैंने देखा कि ऋतू के निप्पल भूरे नहीं बल्कि पिंक से थे। ऋतू अब सिर्फ मेरे समने एक पैंटी में लेट कर बे-खबर सो रही थी। मैंने झुक के अपने होंठ. खोल के ऋतू के गुलाबी निप्पल अपने होंठों में दबा लिये और उसकी जवान, अभी तक अनछूई मस्त बत्तीस साईज़ की चूँची अपने हाथ में भर ली। विनीता चाची की बड़ी-बड़ी गदरायी हुई चूचियों को दबाने के बाद जब मैंने ऋतू की चूचियाँ दबाईं, तब मालूम पड़ा कि साली लौंडिया कि चूँची क्या चीज़ होती है। ऐसा लग रहा था जैसे किसी सख्त अनार को पकड़ लिया हो। दूसरा हाथ मैंने ऋतू की पैंटी में डाल दिया और उसकी बूर को अपने हाथों से फील करने लगा। ऋतू की चूत पर मेरा हाथ टच होते ही मैं तो ऐसा गनगनाया कि मैंने ऋतू के मस्त कच्चे अनार छोड़ कर दोनों हाथों से उसकी पैंटी उतारने लगा।. माँ कसम दोस्तों! क्या साली कुँवारी चूत थी मेरी आँखों के सामने। झूठ नहीं बोलूँगा, इच्छा तो यह करी कि उसकी टाँगें खोल के अपना लौड़ा सरका दूँ उसकी कसी चूत में, पर विनीता चाची की इन्सट्रक्शन याद आ गयी। ऋतू की चूत कुँवारी होने के कारण उसकी बूर के लिप्स अभी तक खुले नहीं थे, बल्कि बड़े कायदे से एक लाईन में थे और उसके उसने भी विनीता चाची की तरह अपनी चूत से झाँटें साफ कर रखी थीं। मेरा तो लौड़ा बुरी तरह से अकड़ गया था। मैं भी बिना समय गँवाये मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था और मैं पूरा नंगा ऋतू के ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड एकदम ऋतू की चिकनी मखमली चूत पर लग गया था। मैंने मारे मस्ती के ऋतू के पूरे नंगे बदन को अपनी. बाहों में कस कर भर लिया और उसके नरम रस भरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उन्हें चूसने लगा। ऋतू की चूचियाँ इतनी सख्त थीं कि मेरी छाती में उसके निप्पल चुभ रहे थे और वो कसे हुए अनार जो मेरे. सीने से लग कर थोड़े से दब गये थे, बहुत ही प्यारा सुख दे रहे थे। मेरा बदन तो मारे मस्ती के काँप रहा था, और मैंने अपने आप को थोड़ा सम्भालने के लिये एक सिगरेट जलाई और उसके ऊपर अपना लंड घिसने लगा। शुरू में तो मेरी यह हालत थी कि बस अभी रस निकला, पर बड़ा कँट्रोल करने के बाद मैं अब बड़े आराम से उसकी चिकनी मखमली चूत पर अपना लंड घिस रहा था। दोस्तों! इतना मज़ा आ रहा था कि कलपना करना भी मुशकिल है। सिगरेट खतम होने के बाद मैंने अपने मुँह में उसकी चूँची भर ली और जोर-जोर से चूसना चालू कर दिया। चूचियों का टेस्ट इतना नशीला था कि इतनी देर से रोका हुआ मेरे लंड का लावा पूरा ऋतू के पेट पर निकल गया और मैं भी. परवाह किये बिना ऋतू कि तन्नाई हुई चूचियाँ चुसने में लगा रहा। दोस्तों! मैंने किताबों में सिर्फ पढ़ा था कि जवान चूँची चूसने से लंड तन्ना जाता है पर मैंने तो उस समय खुद अनुभव किया कि मादरचोद मुश्किल से. तीन या चार मिनट में फिर से गन्ना बन गया। मैंने उठ कर कपड़े से ऋतू का पेट साफ करा और एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर ऋतू के होंठों पर घिसने लगा। क्या सनसनाहट हो रही थी कि मेरा लंड और कस गया।. करीब पाँच-दस मिनट बाद मैंने ऋतू कि टाँगें खोलीं और उसकी जाँघों को चूसता हुआ अपनी जीभ उसकी कुँवारी बूर पर ले गया। मैंने भी अपनी जीभ की धार ऋतू के बूर की दरार पर खूब घीसी। बाद में जब मस्ती बढ़ गयी तब. मैंने अपने होंठ पूरे चौड़े किये और ऋतू की मस्तानी चूत अपने मुँह में भर ली और चूसाई चालू कर दी। क्या मादक सुगँध आ रही थी। मैं तो जन्नत में था। करीब आधा घंटा बूर का मज़ा अपनी ज़ुबां से लूटने के बाद मैं. उसकी खुली टाँगों के बीच बैठ गया और अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से अपना सुपाड़ा ऋतू की चूत के लिप्स खोल कर घिसने लगा। थोड़ी ही देर में लौड़ा इतना उबाल खा गया कि इससे पहले मैं रोक पाता ऋतू के. खुले लिप्स के उपर ही मेरा लंड झड़ गया। मैंने करीब दो घँटे ऋतू के शरीर के साथ जी भर के खेला, और बाद में फिर से उसे पैंटी पहना कर और नाइटी ढँग से बंद कर के मैं बाहर आ गया और टी.
वी.
देखने लग गया। ऋतू करीब शाम को पाँच बजे उठी और उन ही कपड़ों में मेरे पास आ कर बैठ गयी और बोली “सुनील शरीर बहुत दुख रहा है!”. मैने कहा, “कोई नहीं दीदी थोड़ा सा सुस्ता लो अभी आप ट्रिप से आयी हो इसके लिये थकान ज्यादा हो गयी है!” ऋतू वहीं पर मेरी जाँघों का सहारा ले कर लेट गयी और सुस्ताने लगी। थोड़ी देर बाद वो उठी और फ़्रैश होने के लिये चली गयी। शाम के साढ़े सात बज चुके थे। मैं विनीता चाची के कमरे से व्हिस्की की बोत्तल ले आया और. अपने लिये एक पैग बनाया और टी.
वी.
देखने लगा। इतने में ऋतू बाहर आयी और मुझे व्हिस्की पीते देख बोली, “सुनील तुम कब से पीने लग गये, मैं पापा-मम्मी से तुम्हारी शिकायत कर दूँगी।” मैंने कहा, “ऋतू दीदी आपकी मम्मी को मालूम है। मैं कभी-कभी उनके साथ छुप कर पी लेता हूँ।” मैंने ऋतू को नहीं बताया कि उसकी मम्मी ने ही मुझे हफ़ते भर पहले पीना सिखाया है। और मेरी प्यारी दीदी आप क्या मेरी शिकायत करोगी!. “सच में? रियली…?” तब ऋतू बड़े ही शरारती मूड में मुझसे बोली, “एक शर्त है! तुम्हें मुझे भी टेस्ट करानी पड़ेगी।” मुझे तो जैसे मन माँगी मुराद मिल गयी। मैंने कहा “चलो आप बैठो। मैं आपके लिये एक पैग बना कर लाता हूँ।”. मैंने अंदर जा कर तीन पैग के बराबर एक पैग बनाया और बाहर आ कर ऋतू को दे दिया। ऋतू एक दम मेरे बगल में बैठी और पहला घूँट उसने ऐसे पीया जैसे कोई कोका कोला हो। पूरा आधा ग्लास एक झटके में पी गयी। फिर बोली, “क्या सुनील यह तो बहुत स्ट्राँग है!”. मैंने कहा, “कोई नहीं, आराम से एक-एक घूँट भर के पियो… तब आपको मज़ा आयेगा!” टी.
वी.
पर रोमाँटिक फिल्म चल रही थी। मैं विनीता चाची के रूम से जा कर सिगरेट ले कर आ गया। ऋतू पर अब खुमारी चढ़नी चालू हो गयी थी। मैंने जब अपने लिये एक सिगरेट जलाई तो वो बोली, “सुनील ये तुम्हें को क्या हो गया है, पहले शराब, फिर सिगरेट!” मैंने कहा, “ऋतू दीदी शराब का मज़ा दुगना हो जाता है स्मोक करने से!” उसने मेरे हाथों से सिगरेट छीन कर एक जोरदार कश लगाया। पहली बार पीने के कारण उसको खाँसी लग गयी। मैं एकदम घबरा उठा और उसकी पीठ सहलाने लगा और पेट के ऊपर हाथ ले जा कर उसे पीछे आराम से सोफे पर बैठाने की. कोशिश करने लगा। नाइटी का कपड़ा चिकना होने के कारण मेरे हाथ फिसल गये और उसकी पूरी लैफ्ट साइड की चूँची मेरे हाथ में आ गयी। ऋतू ने उसका कुछ बूरा नहीं माना और मैं भी उसकी चूँची दबाये हुए सोफे पर पीछे खींच. लाया और बोला, “ऋतू दीदी! ऐसे थोड़ी पी जाती है! देखो मैं बताता हूँ कि कश लिया जाता है!”
स्रोत:इंटरनेट