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Chachi Ki Ghanghor Chudai Hot Desi Kahani 2

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मैंने उनकी फूली हुई चूचियों की घाटी में अपना मुँह लगा दिया और पसीने और सैंट की महक सूँघते हुए उनके चूचियों कि घाटी चूसने लगा। विनीता चाची ने भी मेरा सर पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबा लिया। थोड़ी देर विनीता. चाची की चूचियों कि घाटी चूसने के बाद मैंने विनीता चाची को कहा कि अब वो मुझे ड्रिंक पिलायें। उन्होंने टेबल पर से ग्लास उठा कर मेरे होंठों से लगा दिया और बोली, “डार्लिंग एक घूँट में खतम करना…!” मैंने भी दूसरा ग्लास उठा कर विनीता चाची के होंठों से लगा दिया। विनीता चाची बड़ी ही मादरचोद थी। उन्होंने ड्रिंक पूरी नीट बनाई थी, बिना सोडे और पानी के। विनीता चाची तो रोज़ जम कर पीती थी पर मैं तो अभी नौसिखिया ही था। पर हिम्मत कर के मैंने भी एक घूँट में खाली कर दी और विनीता चाची ने भी पूरी ड्रिंक एक घूँट में खाली कर दी। मैंने कस कर उनकी कमर में बाहें डाल कर अपनी और खींच लिया और उनकी उठी हुई मदमस्त. चूचियों को दबाने लगा और विनीता चाची को बोला, “मेरी जान एक सिगरेट पिला दो!” विनीता चाची बोली, “डार्लिंग! सिगरेट मैं अपने स्टाइल से पिलाऊँगी।” इतना कह कर उन्होंने सिगरेट जलायी और एक कश ले कर अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये और सारा धुआँ मेरे मुँह में छोड़ दिया। मेरे दोस्तों जो सिगरेट के शौकीन हैं, मेरे कहने से एक बार ऐसे सिगरेट पी कर जरूर देखें, वादा करता हूँ की आपका लंड एकदम उबाल खा जायेगा। मैंने कस कर विनीता चाची की एक चूँची जो मेरी हाथेली में थी बहुत ही बे-दर्दी से मसल दिया। विनीता चाची भी चिहुँक उठी, और बोली, “तुम बड़े वोह हो जी… मेरी मस्त जवानी इतनी बुरी तरह से मसल कर रख दी।”. मैंने भी कहा, “विनीता रानी आज तुम्हारी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही उभार लिये हुए हैं, तुमने क्या जादू करा है कि सुबह से लेकर शाम तक तुम्हारी चूँची एक दम इतनी बड़ी हो गयी।” विनीता चाची शर्माते हुए बोली कि “मैं आज तुमको उन चूचियों का मज़ा देना चाहती हूँ जो मेरी शादी के समय थी। इसी लिये मैंने आज इस टाइट माइक्रो ब्रा में अपनी चूचियाँ कसी है ताकि मेरी चूचियाँ उसमें समायें. नहीं और फूट-फूट के बाहर निकल आने को तरसें।” विनीता चाची बोली, “मेरी चूचियाँ कब से तड़प रही हैं तुम्हारे होंठों से चुसाने के लिये।” मैंने भी बिना देर करे हुए अपने हाथ पीछे ले जा कर विनीता चाची की माइक्रो ब्रा के हुक खोल दिये। ब्रा के हुक खुलते ही विनीता चाची कि चूचियाँ एक दम स्प्रिंग की तरह उछली और मचल कर ब्रा की कैद से बाहर आ. गयी। विनीता चाची ने अपने भूरे रंग के निप्पलों को आज रूज़ लगा कर एक दम गुलाबी बनाया हुआ था और मैंने बेसब्री से उन पिंक निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया और लम्बे-लम्बे चुस्से मारने लगा। रूज़ लगे होने के. कारण विनीता चाची के निप्पल एक दम चैरी की तरह मीठे थे। विनीता चाची की तो सितकारी ही निकली जा रही थी और मेरी तो ऐसी इच्छा हो रही थी कि विनीता चाची की चूत का जूस इन निप्पलों से निकले और मैं पी जाऊँ।. विनीता चाची मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाती हुई सितकारियाँ भर रही थी और बोल रही थी कि “डार्लिंग! पी ले मेरे जिस्म का नशा। आज तो जी खोल के अपनी जवानी का नशा पिलाऊँगी तुझे। अरे मादरचोद चूस ले मेरे. निप्पलों को…!” और चाची ने अपने हाथों से मेरी पैंटी उतार दी जिससे मेरा लौड़ा विनीता चाची के पेट पर टक्कर मारने लगा।. विनीता चाची लंड को कस कर अपने हाथों से दबा रही थी और बोली, “वाह मेरे बहन के लौड़े! अपनी दुल्हन से मिलने के लिये चिकना बन कर आया है। आज देखती हूँ कि किसकी माँ चुदती है, मेरी चूत की या तेरी।” विनीता चाची ने मेरे बाल पकड़ कर अपनी चूचियों पर से मेरा सर उठाया और बोलीं, ”डार्लिंग पहले एक मीठा सा चोदा लगा दे, मेरी चूत इस समय धड़क रही है, नहीं तो जल कर खाक हो जायगी। बाद में आराम से चूसाते हुए और चाटते हुए एक दूसरे को चोदेंगे।”. मेरा भी बुरा हाल था। सुबह की चुदाई के बाद तो मैं भी तड़प रहा था विनीता चाची को चोदने के लिये। मैंने उनको अपनी गोदी में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और विनीता चाची की टाँगें फैला कर जी-स्ट्रिंग उतारी। वाह. क्या नज़ारा था! विनीता चाची ने अपनी चूत के लिप्स भी रूज़ लगा कर गुलाबी करे हुए थे। मैंने कहा, “विनीता थोड़ा सा और तड़प ले मेरी जान… अभी तो तेरी बूर के लिप्स मुझे इनवाइट कर रहे हैं चूसने के लिये…” और बोलते हुए मैंने अपने होंठ विनीता चाची की बूर के होंठों से चिपका कर जीभ चूत में घूसेड़ दी।. विनीता चाची बोलती रहीं कि, “डार्लिंग मैं अपनी चूत का पहला पानी तेरे लंड पर झाड़ना चाहती हूँ। मादरचोद बाद में चाट लियो मेरी बूर। अभी तो अपने गन्ने से मेरी चूत को चोद दे। जालिम कितना और तड़पायेगा अपनी विनीता को।”. मैंने देखा की विनीता चाची की चूत से उनका थोड़ा-थोड़ा मदन रस रिसना चालू हो गया था और अगर मैं ज्यादा उनकी चूत चूसता तो वो वहीं पर अपना सारा माल निकाल देतीं। मैंने उनकी चूत पर से मुँह हटा लिया और विनीता. चाची के ऊपर चढ़ कर उनकी मोटी-मोटी चूचियों पर अपने चूतड़ रखे और अपना लंड विनीता चाची के सामने लहराते हुए बोला, “मेरी जान! जरा अपनी चूँची के निप्पल से मेरी गाँड मारो और मेरे लंड को अपने होंठों का प्यार दो। फिर देखो आज तुम्हारी चूत की क्या भजिया बनाता हूँ!”. विनीता चाची ने झट से मेरा लौड़ा अपने होंठों में ले लिया और दोनो हाथों से अपनी चूँची पकड़ कर कभी एक निप्पल तो कभी दूसरा निप्पल मेरी गाँड के छेद पर रगड़ने लगी और मैं धीरे-धीरे विनीता चाची का मुँह चोद रहा. था और बोला, “मेरी जान! आज तो लंड की पहली धार तुम्हारे मुँह में ही उतारूँगा। ज़रा तबियत से चूस। मेरी प्यारी जान… झड़ने के बाद तू लंड के खड़े होने की चिंता मत कर… आज तो जम के तेरे साथ सुहाग रात मनानी है। मैं तो आज पूरी रात चोदूँगा।”. फिर धीरे से मैंने अपने शॉट की स्पीड बढ़ा दी और हुमच-हुमच के विनीता चाची के मुँह में लंड पेलने लगा। एक शॉट में पूरा जड़ तक उनके गले तक उतार देता और उसी क्षण खींच के बाहर निकाल लेता और इस से पहले कि चाची. सम्भलें, दोबारा लंड उनके गले तक उतार देता। विनीता चाची भी पीछे नहीं थी। वाकय में ऐसे चूस रही थी जैसे सदियों से लंड चूसने के लिये तरस रही हों। मैं पाँच मिनट तक उनके मुँह को ऐसे ही चोदता रहा और आखिर में अपना पूरा लंड उनके गले में फंसा कर बलबला कर झड़ गया। विनीता चाची के गले में पूर लंड फंसा होने के कारण मेरी पूरी धार सीधी उनके गले में उतर रही थी और वोह हरामजादी चाची भी बिना नुकुर-पुकुर किये मेरा रस पी. रही थीं।. पूरा रस निकलने के बाद जब मैंने अपना लंड उनके मुँह से निकालना चाहा तो उन्होंने मेरे चूत्तड़ पकड़ कर अपने मुँह पर दबा लिये और मेरे झड़े हुए लंड की दोबारा से चूसाई चालू कर दी। मैं तो इस नशीली चूसाई से पागल. हो गया। झड़ कर दोबारा चुसवाने में जो मज़ा आ रहा था उसका वर्णन करना बड़ा मुश्किल है। मेरा साला लंड भी मादरचोद हो गया था। पाँच मिनट की चूसाई में ही साला फिर से तैयार हो गया था। मैंने कहा, “विनीता आ जाओ… अब तुम्हारी चूत रानी बजाता हूँ!”.
स्रोत:इंटरनेट