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Chachi Ki Ghanghor Chudai Hot Desi Kahani 3

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वोह थोड़ा सा लंड अपने मुँह से निकाल के बोली, “थोड़ा सा और ठहर डार्लिंग, अभी थोड़ा और चूस के लोहे की तरह बना दूँ, फिर जम के मेरी चूत बजाना!” ये बोलकर उन्होंने मेरा पूरा लंड मुँह के बाहर निकाला और सिर्फ़ मेरे लंड के सुपाड़े को और मूतने वाले छेद को अपनी जीभ में लपेट-लपेट कर जो मज़ा देना चालू किया वो अभी तक का सबसे गुदगुदाने वाला मज़ा था। मैं. मस्ती में आ के अपने चूत्तड़ों के नीचे दबी हुई उनकी मोटी-मोटी चूचियों को बड़ी बुरी तरह से मसलने लगा। करीब दो तीन मिनट ऐसे करने के बाद मेरा लंड वाकय में दोबारा फटने की कगार पे आ गया था। विनीता चाची इसे. भाँप चूकी थीं। इसी लिये उन्होंने जीभ फेरना बंद करा और बोली, “अब आजा डार्लिंग! अब मेरी चूत खोल दे इस लौड़े से!” मैं विनीता चाची के उपर से हट कर उनकी जाँघों के बीच आ गया और उन्होंने भी अपनी जाँघें पूरी खोल दीं थी और अपनी उंगली से अपनी चूत के लिप्स खोल दिये थे जिससे उनका रस में डूबा हुआ गुलाबी छेद दिख रहा था।. विनीता चाची बोलीं, “देख ले डार्लिंग! अपनी पूरी खोल के दे रही हूँ, बाद में मत कहना कि विनीता चाची ने खोल के चुदवाई नहीं!” मैंने आगे बढ़ कर अपने लंड का सुपाड़ा विनीता चाची की चूत के खुले हुए लिप्स के बीच में रख दिया और हाथ से पकड़ कर आराम से उनके गुलाबी छेद पर अपना सुपाड़ा रगड़ने लगा और विनीता चाची से पूछा कि “आज तुम्हारी चूत. हलाल करूँ कि झटका चोदूँ?”. विनीता चाची बोलीं, “हलाल तो बहुत हो चुकी डार्लिंग! आज तो झटका चुदाई कर दो और माँ चोद दो मेरी चूत की!” मैंने घुटने के बल हो कर विनीता चाची की दोनों टाँगें अपने कँधे पर रख कर उन्हें फैला दिया और अपनी गाँड का पूरा जोर लगा कर एक करारा सा झटका मारा जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लम्बा लौड़ा विनीता चाची की चूत. में समा गया। विनीता चाची क्षण भर के लिये तो चीखीं और फिर बड़बड़ाने लगीं, “मादरचोद! आखिर तूने मेरी चूत की माँ चोद ही डाली। अरे भोसड़ी वाले मैंने यह थोड़ी बोला था कि अपना पूरा गन्ना मेरी चूत में एक झटके से उतार देना। बहन के लौड़े! आज मुझे वाकय में लग रहा है के मेरी असली सुहाग रात तो आज है। इतना दर्द तो मुझे पहली सुहाग रात को भी नहीं हुआ था। डार्लिंग क्या लौड़ा दिया है! मेरी तो चूत आज वाकय में चूत बन गयी।. डार्लिंग तूने आज मुझे धन्य कर दिया। मैं तो तेरी गुलाम हो गयी। मादरचोद! तू मेरा हसबैंड बन जा आज से। ले मेरी चूत चोद ले… जितनी चोदनी है!”. मैं तो बस लगातार दनादन उनकी चूत में अपने लौड़े के धक्के दिये जा रहा था। जब भी मेरा धक्क लगता तो मेरी जाँघें विनीता चाची के चूत्तड़ों और जाँघों से लग कर थप-थप की आवाज़ पैदा कर रही थीं। करीब आठ-दस मिनट के. ज़ोरदार धक्कों के बाद विनीता चाची ने किलकारी मारते हुए मेरे लंड पर अपना पानी फेंक दिया। मैंने भी विनीता चाची की टाँगें अपने कँधों से उतार कर नीचे कर दीं और उन्हें चौड़ा कर के विनीता चाची के ऊपर लेट कर. कसके उनको अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ उन के रसीले होंठों पर एक बार फिर से जमा कर उनकी जीभ को चूसने लगा। बड़े आराम से मैं अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल के विनीता चाची की चूत में अपना लौड़ा पेल रहा था।. मेरी डार्लिंग चाची ने भी अपने दोनों हाथ कस कर मेरे चूत्तड़ों पर दबाय हुए थे और जब मैं अपना लंड बाहर खींचता तब वोह अपने दोनों हाथों से मेरे चूत्तड़ दबा देती जिससे कि जल्दी से फिर मेरा लंड उनकी चूत में. समा जाये।. करीब पँद्रह-बीस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करने के बाद विनीता चाची बोली, “तुझे एक नया आसन बताती हूँ। उसमे मर्द का लंड औरत की चूत में पूरा अंदर तक जाता है!” इतना कह कर विनीता चाची ने मुझे अपने ऊपर से उतरने के लिये कहा और मेरे समने घुटने के बल एक कुत्तिया की तरह हो कर अपने चूत्तड़ मेरी तरफ कर दिये और बोली, “ले बहन के लौड़े! अब तू कुत्ता बन। मैं अपनी चूत उभार के देती हूँ और तू उसमें अपना मस्त गन्ना उतार और फिर कस-कस कर मेरे चूत्तड़ों पर धक्के मारते हुए तबला बजा!”. इतना कह कर चाची ने अपनी गाँड उपर की और उठा दी और चूचियों को बिस्तर पर टिका दिया और अपना पेट नीचे करके अपनी जाँघों के बीच में से मुस्कुराती हुई चूत खोल दी। विनीता चाची के चूत्तड़ चौड़े होने के कारण उनका. मस्त भूरे रंग का गाँड का छेद दिख रहा था जिसको देख कर अन्दाज़ा हो रहा था कि विनीता चाची ने अभी तक गुदा-संभोग का लुत्फ नहीं उठाया है। दोस्तों इस समय वो नज़ारा दिख रहा था कि मैं अपने आप को रोकने में नाकाम. था। मैने विनीता चाची की रिस रही बूर में लंड थोड़ा सा घिसा और धक्का मार कर पूरा लंड उनकी चूत में झटके से उतार दिया। वाह क्या मज़ा आया! जैसे ही मैंने अपनी जाँघों से विनीता चाची के फूली हुई चूत्तड़ों पर जम. के धका दिया तो मक्खन की तरह मेरा लंड विनीता चाची की उभरी हुई चूत में घुसा और मेरे धक्के के दबाव से विनीता चाची के चूत्तड़ स्पंज की तरह दब कर फैल गये और फैल कर और चौड़े हो गये और बाद में स्पंज की ही तरह. फिर से फूल कर अपनी शेप में आ गये जिससे मुझे विनीता चाची के चूत्तड़ों का धक्का महसूस हुआ। मुझे इस आसन में विनीता चाची की चूत लेने में बहुत मज़ा आ रहा था और मैं और जोश के साथ चूत बजाने लगा। जोश में आकर. मैंने अपनी एक उँगली अपने थूक से गीली की और इससे पहले कि वोह कुछ समझ पातीं, मैंने अपनी उँगली विनीता चाची की गाँड में घुसा दी। वो एक दम चिहुँक उठी और बड़-बड़ाई, “क्या कर रहा है मादरचोद! मेरी चूत तो अपने लंड से भर दी अब क्या मेरी गाँड अपनी उँगली से भरेगा क्या? आज पहली बार किसी मर्द ने मेरी गाँड का छेद छेड़ा है। चल थोड़ा मेरी गाँड में अपनी उँगली चला दे!”. वाकय में बहुत ही टाइट गाँड का छेद था। उँगली गीली होने के बावजूद बड़ी कसी-कसी उनकी गाँड में घुस रही थी। करीब आठ-दस मिनट तक कुत्ता चुदाई में विनीता चाची दो बार अपनी चूत का पानी निकाल चूकी थी और मेरे हर. शॉट का जम कर जवाब अपने चूत्तड़ों के धक्के से दे रही थी और बड़-बड़ाते हुए कह रही थी की, “मेरे जानू आज तो ज़िंदगी का असली मज़ा आ गया। बहन के लौड़े जब तेरा मूसल जैसा लंड पूरा मेरे अंदर घुस कर मेरी बच्चेदानी पर लगता है तो मैं तो बस गनगना जाती हूँ। बहनचोद! तू मेरा हसबैंड क्यों नहीं बना? तुझसे तो इतना चुदवाती कि तू हमेशा मस्त रहता। मादरचोद तेरे से चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ जाता है। तेरी तो जिस से शादी होगी. उसकी तो सुहाग रात वाले दिन माँ चुद जायेगी। ज़िन्दगी भर चोदना भूल जायेगी। चोद मेरे लंड, चोद, बहनचोद!” विनीता चाची बड़बड़ाती रही और मैंने अपने धक्के चलू रखे। कुछ देर बाद मेरे लंड का पानी बहुत उबाल खा चुका था और विनीता चाची की मस्त चूत में अपनी मस्ती निकालने के लिये बेकरार था। मैंने विनीता चाची को कहा कि. “रानी अब तुम सीधी हो, मैं तुम्हारी चूचियों पर पसर कर तुम्हारा मुँह चूसते हुए झड़ना चाहता हूँ!”
स्रोत:इंटरनेट