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Chalti Train Me Maa Beti Ki Thukai 2

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अपनी मम्मी के इस बर्ताव से शिखा का चेहरा शर्म से बेहद लाल हो गया पर वो कुछ ना कह सकी। शिखा अब चुप-चाप अपनी चूँची सर से दबवा रही थी। माला ने तब झुक कर शिखा के गाल पर एक चुम्मा दिया और बड़े प्यार से. बोली, “बेटी मल्टी नैशनल कंपनी में नौकरी ऐसे ही नहीं मिलती, उसके लिये कुछ देना पड़ता है। शर्माओ नहीं… मुझे मालूम है कि अपने बॉय फ़्रेंड करण के साथ भी तो तुम यही सब करती हो छुप-छुप के… सर भी अपने ही हैं ।” फिर उसने सर से कहा, “सर अब आप बेफ़िक्र हो कर मज़ा लो, लेकिन देखना शिखा को पक्की नौकरी मिले।” सर ने भी एक हाथ से शिखा की चूँची दबाते हुए माला की तरफ अपना मुँह बढ़ा कर उसकी चूँची को चूमते हुए कहा,“चिंता मत करो, शिखा की नौकरी तुम्हारी तरह पक्की नौकरी होगी और तुम्हारी प्रोमोशन भी पक्की है। लेकिन शिखा को भी मेरा कहना मानना पड़ेगा।” “अरे सरदेख नहीं रहे कि शिखा आपकी बात मानने के लिये तैयार है? अरे शिखा मेरी ही बेटी है और आप जो भी कुछ कहेंगे… मेरी तरह शिखा भी आपकी बात मानेगी।”. इतना कह कर माला फिर से सरके बगल में जा कर बैठ गयी और उन्हें अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया।. अब सर के दोनों हाथ माँ और बेटी की चूचियों से खेल रहे थे। माँ की चूचियों को वो हाऊज़ कोट के अंदर हाथ डाल कर मसल रहे थे और बेटी की चूचियों को उसकी मैक्सी के ऊपर से ही दबा रहे थे। यह सब देख कर मेरी नींद. आँखों से बिल्कुल साफ हो गयी और मैं अपने कंबल के कोने से नीचे की तरफ देखने लगा। मुझे सर की किस्मत पर ईर्ष्या हो रही थी और मेरा लंड खड़ा हो गया था जिसे मैं अपनी हाथ से कंबल के अंदर सहला रहा था। फिर मैंने. देखा कि सर ने अपना हाथ माला के हाऊज़ कोट से निकाल कर उसके घुटने के ऊपर रख दिया और धीरे-धीरे माला के घुटने और उसकी जाँघ को सहलाने लगे। अपनी जाँघ पर सर का हाथ पड़ते ही माला ने अपनी टाँगें, जो कि एक दूसरे के ऊपर थीं, खोल कर फैला दिया और अपने ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल युक्त पैर सामने वाली बर्थ पे रख दिये। उधर सर अपना हाथ अब शिखा के मैक्सी के अंदर डाल कर के उसकी चूँची को मसल रहे थे और झुक-झुक कर उन्हें मैक्सी के ऊपर से चूम रहे थे। फिर सर अपने हाथ से माला का हाऊज़ कोट ऊपर करने लगे और हाऊज़ कोट ऊपर करके माला की चूत पर हाथ फेरने लगे। माला की चूत उस हल्की रोशनी में भी मुझको साफ-साफ दिखायी दे रही थी और. मैंने देखा कि माला की चूत पर कोई बाल नहीं है और उसकी चूत अपने पानी से भीग कर चमक रही है।. थोड़ी देर के बाद सर ने अपना हाथ शिखा की मैक्सी के अंदर से निकाल लिया और उसकी चूत पर मैक्सी के ऊपर से ही हाथ फेरने लगे। शिखा बार-बार अपनी मम्मी की तरफ शर्मिंदगी से देख रही थी लेकिन कुछ कह नहीं पा रही. थी। फिर सर ने माला की चूत पर से हाथ निकाल कर शिखा की मैक्सी धीरे-धीरे टाँगों पर से उठाने लगे। शिखा अपने हाथों से अपनी मैक्सी पकड़े हुए थी। माला अपनी जगह से फिर उठ कर शिखा के पास गयी और उसको चूमते हुए. बोली, “बेटी आज मौका है मज़े कर लो, मैंने भी अपनी नौकरी इसी तरह से पायी थी। वैसे सर बहुत अच्छे इंसान हैं और बहुत ही आराम-आराम से करेंगे… तुझे बिल्कुल तकलीफ नहीं होगी। बस तू चुपचाप जैसा सर कहें… करती चल, तुझे बेहद मज़ा आयेगा और तुझे नौकरी भी मिल जायेगी!” इतना कह कर माला ने शिखा के गाल पर और उसकी चूँची पर हाथ फेरा और फिर अपनी जगह आ कर बैठ गयी। तब शिखा अपनी मम्मी से बोली, “मम्मी ये आप क्या कह रही हैं? आप मुझसे तो ऐसी बातें कभी नहीं करती थीं!” माला अपनी बेटी की चूँची पर हाथ फेरते हुए बोली, “अरे बेटी, यह तो वक़्त-वक़्त की बात है और जब हम दोनों ही सर से जिस्मानी ताल्लुकात बनाने वाली हैं, मतलब कि जब सर हम दोनों को ही चोदेंगे, तो फिर आपस में कैसा पर्दा। अब हम दोनों सहेलियों की तरह हैं और चुदाई के वक़्त खुल कर बात करनी चाहिये और अब तुम भी खुल कर बातें करो जैसे अपनी बाकी सहेलियों और बॉय-फ्रेंड्स के साथ करती हो!”. शिखा अपनी माँ की बात सुन कर मुस्कुरा दी और बोली, “ठीक है, जैसा आप कहती हैं, अब मैं भी लंड, चूत और चुदाई की ज़ुबान में बातें करूँगी!” अब सर ने शिखा के मैक्सी के अंदर से अपना हाथ निकल लिया और शिखा की चूत पर अपना हाथ मैक्सी के ऊपर से रगड़ रहे थे और झुक-झुक कर उसकी चूचियों पर चुम्माँ दे रहे थे। थोड़ी देर के बाद वो शिखा की मैक्सी फिर से. अपने हाथों से टाँगों के ऊपर करने लगे और अबकी बार शिखा अपनी मम्मी को मुस्कुराते हुए देखती रही और कुछ नहीं बोली। शिखा का चुप रहना सर को और भड़का दिया और वो एक ही झटके के साथ शिखा की मैक्सी पूरी तरह से. खींच कर उसकी कमर पर ले आये। इससे शिखा की चूत बिल्कुल खुल गयी। शिखा की चूत दिखने में बहुत ही सुंदर थी। उसकी चूत पर भी एक भी बाल नहीं था और माला की तरह ही चिकनी थी। बेटी की चूत देख कर माला बोली, “वाह! बेटी वाह! तूने बहुत ही अच्छी तरह से अपनी चूत साफ की है। तेरी चिकनी और गुलाबी चूत को देख कर मुझे इसे चूमने और चाटने का दिल कर रहा है। पता नहीं सर को कैसा लग रहा है!”. तब सर ने भी उसकी सुंदर सी चूत पर हाथ फेर कर कहा, “हाँ माला तुम्हारी बेटी की चूत बहुत ही सुंदर है और इसने बड़े करीने से अपनी चूत साफ की है। मुझे शिखा की चूत पसंद आयी और मैं भी तुम्हारी तरह इसकी चूत को चूमना और चाटना चाहता हूँ!”. उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और शिखा की कमर पकड़ कर उसकी मैक्सी अब उसके शरीर से अलग कर दी। अब शिखा सीट के ऊपर बिल्कुल नंगी बैठी थी। सर अब फिर शिखा के पास पहुँच कर उसकी चूँची से खेलने लगे। वो कभी उसकी. चूँची को दोनों हाथों से पकड़ कर दबाते और मसलते तो कभी उसकी चूँची को अपने मुँह में भर कर उसकी घुंडी चूसते और जीभ से चुभलाते। धीरे-धीरे शिखा के शरीर में भी अब काम-ज्वाला उठने लगी और वो अपने हाथों को. उठा-उठा कर अँगड़ायी ले रही थी। उसकी साँसें अब फूल रही थी और साँसों के साथ-साथ उसकी चूँची भी अब उठ-बैठ रही थी। अब शिखा से रहा नहीं गया और वो सीट पर लेट गयी। शिखा के सीट पर लेटते ही सर अपना मुँह उसकी चूत. के पास ले गये और शिखा की चूत को ऊपर से चाटने लगे। थोड़ी देर के बाद सर ने शिखा की टाँगों को अपने हाथों से पकड़ कर सीट पर फैला दिया और एक अँगुली उसकी चूत में डालने लगे। चूत पर अँगुली छूते ही शिखा अपनी कमर. नीचे से ऊपर करने लगी और मुँह से “आह! आह! ओह! ओह! नहीं! ऊँह! ऊँह!” की आवाज निकालने लगी।. माला अपनी बेटी की कराहें सुन कर हँसती हुई बोली, “देख शिखा! मज़ा आ रहा है ना!तेरे ऊपर जवानी का बुखार चड़ गया है और चूत की खुजली सर के शानदार लौड़े से ही जायेगी। अब तू सर का अज़ीम लौड़ा अपने हाथ में ले कर के देख… वो तुझे चोद कर बेइंतेहा मज़ा देने के लिये कितना बेकरार है!” यह कह कर माला सर की तरफ देखने लगी। सर अब तक माँ-बेटी की बातें सुन रहे थे और अब उन्होंने माला को अपनी बाहों में भर कर एक जोरदार. चुम्मा दिया और उसकी चूँची मसलने लगे। माला की चूँची मसलते-मसलते उन्होंने माला का हाऊज़ कोट उतार दिया। अब माँ और बेटी के तन पर कोई कपड़ा नहीं था… दोनों सिर्फ पैरों में ऊँची-ऊँची हील की सैंडल पहने. हुई थी। बस फ़र्क यह था कि बेटी सीट पर अपनी टाँगें फैलाये लेटी हुई थी और माँ सर के बाहों में खड़ी-खड़ी अपनी चूँची मसलवा रही थी। दोनों माँ और बेटी ने एक दूसरे की आँखों में झाँका और मुस्कुरा दीं। अब शिखा. अपने सीट पर बैठ गयी और अपने हाथ बढ़ा कर सर के साथ-साथ वो भी अपनी माँ की चूँची को मसलने लगी। थोड़ी देर के बाद शिखा अपनी माँ की चूँची मसलते हुए उसकी टाँगों के बीच में नीचे बैठ गयी और अपनी माँ की चूत पर. अपना मुँह रगड़ने लगी। माला भी अपने हाथों से शिखा का चेहरा अपनी चूत पर कस-कस कर दबाने लगी।.
स्रोत:इंटरनेट