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 . मेरी आँखें त्रिशा के चेहरे को देख रही थीं, वो शायद शर्म की वजह से अपनी आँखें बंद किए थी। पर मुझे उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं दिखा तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।  . अब मैंने त्रिशा के होंठों पर अपने होंठ लगा दिए, त्रिशा ने अपने होंठों को कस कर बंद कर लिए। फिर भी मैं अपनी जीभ उसके होंठों पर घुमाने लगा, इधर मेरी उँगलियाँ उसकी कुंवारी चुनमूनियाँ में हलचल मचा रही थीं शायद इस वजह से वो थोड़ी ढीली पड़ गई थी।.  . अब मैंने अपने दूसरे हाथ को धीरे से उसके टॉप के अन्दर खिसका दिया। त्रिशा की चूचियाँ एक मध्यम आकार के अमरुद के बराबर की थीं। मेरी उँगलियों ने जैसे ही त्रिशा की चूचियों को छुआ, वो फ़िर एकदम से चिहुंक गई, पर मेरी पकड़ बहुत मजबूत थी।.  . अब मैंने त्रिशा की चूची को सहलाना शुरू किया।.  . मैंने देखा कि त्रिशा के चेहरे के भाव बड़ी जल्दी से बदल रहे थे, शायद उसके बदन को पहली बार किसी मर्द ने इस तरह छुआ था। अब मैंने अपना हाथ दूसरी चूची को सहलाने में लगाया।  . उधर एक हाथ अभी भी उसकी चुनमूनियाँ को सहला रहा था।.  . अचानक त्रिशा का बदन ऐंठने लगा, उसकी साँसें जोर-जोर से चलने लगीं। तभी मेरा हाथ जो कि त्रिशा की चुनमूनियाँ में था, कुछ गीला-गीला सा लगा, मैं समझ गया कि त्रिशा झड़ गई है।  . अब उसका बदन बिल्कुल ढीला हो गया था, उसने जरा सा होंठ खोला शायद गहरी सांस लेने के लिए।  . मैंने तुरंत अपनी जीभ उसके होंठों के अन्दर घुसेड़ दी, अब उसने आँखें खोल कर मेरी तरफ देखा। वो शायद कुछ कहना चाह रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह से निकाल ली।  . वो बोली- भैया.. अब मुझे छोड़ दीजिए, मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।  . मैंने कहा- त्रिशा, अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं, ऐसे-कैसे छोड़ दूँ?  . वो फिर बोली- मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रही हूँ !.  . तो मैंने अपने दोनों पैर उसके पैरों के बीच में कर लिए और अपने घुटनों के बल बैठ गया और दोनों हाथों से उसके टॉप को ऊपर करने के साथ ही मेरा मुँह उसकी चूची पर पहुँच गया।.  . जैसा कि मैंने बताया, त्रिशा की चूचियाँ छोटी हैं, तो पूरी चूची मेरे मुँह में समा गई और दूसरी चूची को हाथ से सहलाने लगा।  . त्रिशा को अब शायद मजा आ रहा था क्योंकि उसकी आँखें फिर से बंद हो गईं थीं।.  . मौका देख कर मैंने एक हाथ से अपनी चड्डी खिसका कर निकाल दी और फिर उसी पोजीशन में अपने लंड को त्रिशा की चुनमूनियाँ से छुआ दिया।.  . अब मैंने अपना मुँह त्रिशा की दूसरी चूची में लगा दिया और पहले वाली को हाथ से सहलाने लगा। मेरा लंड बीच-बीच में त्रिशा की चुनमूनियाँ को छू लेता था।.  . तभी त्रिशा ने अपनी आँखें खोलीं और मुझे देख कर बोली- भैया, प्लीज़ अब मुझे छोड़ दीजिए, आपने बहुत कुछ कर लिया है !  . मैंने कहा- देखो त्रिशा मुझे तुम्हारे साथ वो सब करना है, जो तुमने अभी मेरे मोबाइल की चुदाई वाली पिक्चर में देखा है !  . तो वो बोली- नहीं वो सब मैं नहीं कर सकती !.  . मैंने कहा- क्यों?.  . तो वो चुप रही, फिर मैंने कहा- देखो त्रिशा, करना तो मुझे है ही, अब तुम अगर मर्जी से करवा लोगी तो तुमको भी अच्छा लगेगा.. नहीं, तो मैं तो कर ही लूँगा !  . वो चुपचाप मेरी आँखों में देखने लगी।.  . फिर बोली- तो आप मेरे साथ भी वही सब करना चाहते हैं जो आपने वैशाली के साथ किया है..?  . मैं समझ गया कि वैशाली ने इसको हमारी चुदाई के बारे में सब बता दिया होगा।.  . मैंने कहा- हाँ, मैं तुम्हारी भी सील तोड़ना चाहता हूँ… वैशाली की तरह!  . यह कह कर मैंने उसके चेहरे पर बहुत सारे चुम्बनों की बौछार कर दी।.  . अचानक त्रिशा ने अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर रख दिए और बोली- भैया मुझे छोड़ दीजिए, मुझे बहुत दर्द होगा.. मैं वो सब नहीं कर पाऊँगी, जो आपने वैशाली के साथ किया था !  . मैंने कहा- क्यों?.  . तो वो फिर चुप हो गई, अब जब मैंने देखा कि उसका विरोध करीब ख़त्म हो गया है तो मैंने अपने दोनों हाथो से उसके टॉप को उसके दोनों हाथ ऊपर करके हटा दिया।  . अब उसके बदन में सिर्फ स्कर्ट आर मेरे बदन में सर्फ बनियान थी।.  . अब मैं जल्दी से उठा और अपनी बनियान भी निकाल दी। अब मैं अपनी पीठ के बल लेट गया और त्रिशा को अपने ऊपर खींच लिया। मैं अपने दोनों हाथों से त्रिशा की स्कर्ट उतारना शुरू किया, उसने रोकने की कोशिश की परन्तु कामयाब नहीं हो सकी।.  . अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे, मैंने त्रिशा को अपने बदन से चिपका लिया। उसके खुले हुए बालों से मेरा चेहरा ढक गया। मुझे बहत अच्छा लग रहा था। तभी मैंने अपने हाथों से त्रिशा की गाण्ड को सहलाना शुरू किया, उसके चुनमूनियाँड़ बिल्कुल गोल थे। काफी मस्त माल था !.  . मेरी उंगली उसकी गाण्ड के छेद का मुआयना करने लगी, तो त्रिशा ने तुरंत अपनी गाण्ड हिला कर मुझे ऐसा करने से मना किया।  . खैर… अब मेरी उंगली उसकी गाण्ड से होते हुए उसकी चुनमूनियाँ पर पहुँच गई थी।.  . इधर मेरा लंड उसकी चुनमूनियाँ को छूकर और उत्तेजित हो रहा था। मुझे अहसास हो रहा था कि उसकी चुनमूनियाँ गीली थी।.  . मैं अचानक बैठ गया और त्रिशा को अपने हाथों के सहारे धीरे से लिटा दिया। मैंने झुक कर अपना मुँह उसकी चुनमूनियाँ की ओर किया, मैंने पहली बार उसकी कुंवारी चुनमूनियाँ को देखा।  . दोस्तों त्रिशा की चुनमूनियाँ में बहुत ही हल्के से रोंयें थे और उसकी चुनमूनियाँ की दोनों फांकें एकदम जुड़ी हुई थीं। अब मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग किया तो अन्दर का रंग. बिल्कुल गुलाबी था।.  . दोस्तों मैंने अपने होंठों को तुरंत त्रिशा की चुनमूनियाँ में लगा दिया। अचानक त्रिशा ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से ऊपर की ओर खींचना चाहा और बोली- नहीं भैया… यह मत करो, अभी वहाँ खून हो सकता है !  . तब मुझे याद आया कि त्रिशा का तो पीरियड था और आज तीसरा दिन था।. दोस्तों सब कुछ जानते हुए भी अब मेरा रुक पाना मुश्किल था। मेरे दिमाग में सिर्फ त्रिशा को चोदने की ही बात थी। मैंने अपने आस-पास नजर दौड़ाई। बेड के बगल में ही वैशाली की ड्रेसिंग मेज रखी थी, उसके ऊपर मुझे नारियल तेल की शीशी दिख गई।.  . मैंने हाथ बढ़ा कर उसको उठा लिया और त्रिशा की दोनों टांगों को और फैला दिया। अब मैंने अपने एक हाथ में खूब सारा तेल लिया और त्रिशा की चुनमूनियाँ में लगा दिया। कुछ तेल त्रिशा की चुनमूनियाँ की दरार के. अन्दर भी चला गया।.  . अब मैंने अपने लंड को तेल से बिल्कुल भिगो लिया। शीशी को वहीं पर रख कर मैं फिर अपनी पीठ के बल लेट गया और त्रिशा को अपने ऊपर बैठाया। मैंने एक हाथ से अपने लंड को त्रिशा की कुंवारी चुनमूनियाँ के मुँह में. अन्दर करना चाहा, पर मेरा लंड फिसल गया। मैंने यह कई बार प्रयास किया, किन्तु लंड हर बार फिसल रहा था।  . इधर उत्तेजना से मेरा हाल बुरा हो रहा था, लग रहा था कि मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगा और उधर त्रिशा का भी बुरा हाल था, उसकी भी साँसें बहुत तेज चल रही थीं।
स्रोत:इंटरनेट