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Chhoti Bahan Choot Virgin Sister Sex Stories 3

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 . दोस्तों मैंने नोट किया कि आज वैशाली कुछ ज्यादा ही जोश में आकर मेरी चुदाई कर रही थी, मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था।  . करीब 5 मिनट तक मेरे लण्ड को अपनी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर करने के बाद वैशाली का बदन एक दम ऐंठने लगा, मैं समझ गया कि यह स्खलित होने वाली है।  . मैंने भी नीचे से अपनी गाण्ड को और ऊपर उठा लिया जिससे मेरा लण्ड बिल्कुल उसकी चुनमूनियाँ समा गया, तभी वैशाली मेरे सीने पर गिर कर हाँफने लगी और हम दोनों एक साथ ही स्खलित हो गए थे।  . थोड़ी देर शांत रहने के बाद वैशाली ने मेरी ओर देखते हुए पूछा- मजा आया जान?.  . मैंने उसको चूमते हुए कहा- हाँ.. बहुत !  . तो वो अचानक बोली- तुमको ऐसी क्या कमी लगी मुझमें, जो तुम त्रिशा से पूरी करनी चाहते हो?  . तब मुझे उसकी जोश भरी चुदाई का मतलब समझ में आ गया।.  . मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा- नहीं तुममें कोई कमी नहीं है, मैं तो बस ऐसे ही… पर अगर तुमको अच्छा नहीं लगा, तो कोई बात नहीं !  . तभी मुझे बाहर कुछ आहट लगी, मैं समझ गया कि मेरी माता जी मंदिर सी आ गई हैं। हम दोनों तुरंत अलग हुए और अपने-अपने कपड़े पहन कर सामान्य हो गए।  . दूसरे दिन मैं अपनी बालकनी में अपनी वैशाली रानी के इंतजार में टहल रहा था क्योंकि टीवी देखते-देखते बोर हो गया था।.  . वैशाली अपने स्कूल गई थी और अभी करीब सुबह के 10 बजे थे, घर में मेरे अलावा और कोई नहीं था, मेरी नजर घर की तरफ आती हुई वैशाली पर पड़ी, उसके साथ त्रिशा भी थी।  . मैंने देखा की वैशाली मुझे बहुत ध्यान से देख रही थी।.  . मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि यह वैशाली के स्कूल से आने का समय नहीं था, लेकिन मुझे कल की बात याद आ गई और मुझे लगा कहीं वैशाली नाराज न हो जाए सो मैंने उनके सामने से हटना ही उचित समझा।  . किन्तु मैं जैसे ही मुड़ा, मुझे लगा कि त्रिशा कुछ लंगड़ा कर चल रही है। उसके चेहरा भी कुछ उदास लग रहा था, मैंने सोचा पता नहीं क्या बात है? तो मैं जीने से उतर कर सीधे गेट पर ही पहुँच गया।  . मुझे देख कर वैशाली ने हल्की सी मुस्कान दी और त्रिशा ने कहा- नमस्ते भैया !.  . मैंने भी उसको मुस्करा कर जवाब दिया, फिर पूछा- क्या हुआ? तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही हो?  . तो वैशाली बोली- इसके पैर में चोट लग गई है स्कूल में, खून निकल आया था, तो मैंने ही इससे कहा कि घर चलो, दवा लगा देंगे.. थोड़ा आराम कर लेना और फूफा जी को भी फ़ोन कर देंगे, तो शाम को ऑफिस से लौटते समय तुम उनके साथ चली जाना।.  . वैशाली के स्कूल से हमारा घर पास है और बुआ का थोड़ा दूर है।.  . मैंने त्रिशा की ओर देखते हुए कहा- हाँ.. यह अच्छा किया, कहाँ चोट लगी है देखूं !  . त्रिशा ने कुछ असहज भाव से वैशाली की ओर देखा, तभी मेरी नजर त्रिशा की स्कर्ट में लगे खून की तरफ चली गई।  . मैंने कहा- अरे खून तो अभी भी निकल रहा है, चलो जल्दी अन्दर… मैं फर्स्ट एड बॉक्स लाता हूँ !  . मैं तुरन्त अपने कमरे में गया और फर्स्ट एड बॉक्स लेकर वैशाली के कमरे में पहुँच गया। तब तक वह दोनों सोफे में बैठ गई थीं।.  . मैंने वैशाली से कहा- जाओ पानी की बोतल ले आओ.. पहले त्रिशा को पानी पिलाओ।  . मैंने कूलर ऑन कर दिया, पानी पीने के बाद मैंने त्रिशा से कहा- लाओ चोट दिखाओ.. मैं दवा लगा देता हूँ ! देखूं.. कहाँ चोट लगी है?  . त्रिशा अपनी स्कर्ट को अपनी दोनों टांगों से दबाते हुए बोली- नहीं भैया, सब ठीक हो जाएगा, आप परेशान मत होईये !  . मैंने कहा- अरे इसमें परेशान होने वाली क्या बात है, तुम मुझे चोट तो दिखाओ !  . मेरे कई बार कहने के बाद भी उसने चोट नहीं दिखाई, तब मैं घूम कर वैशाली जो कि शायद अपने कपड़े बदल कर अन्दर कमरे से आ रही थी, की ओर देखा तो उसके चेहरे पर हल्की से शरारती मुस्कान देखी। मेरे दिमाग में घंटी बजी !.  . तभी त्रिशा जल्दी से उठ कर बाथरूम के अन्दर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया, तो मैंने वैशाली से मौका देख कर पूछा तो उसने मुस्कराते हुए बताया कि त्रिशा को पीरियड आ गया, चूँकि उसको डेट याद नहीं रही, तो पैड वगैरह नहीं थे, इसी लिए हम लोग अपनी क्लास टीचर से जल्दी छुट्टी लेकर घर आ गए।  . अब बात मेरे समझ में आई।.  . मुझे यह बताने के बाद वैशाली अन्दर कमरे में गई और अपनी एक ड्रेस और चुनमूनियाँ में पीरियड के समय लगाने वाला पैड (मुझे दिखाते हुए) लेकर बाथरूम के बाहर लेकर दरवाजे पर दस्तक दी। जिसको कि त्रिशा ने हाथ. निकाल कर ले लिया। मैंने तुरंत अपना दिमाग लगाया और वैशाली को वापस आते ही अपनी बाँहों में भर लिया और उसके प्यारे चेहरे पर अनगिनत चुम्मी कर डालीं। वैशाली ने भी उसी तरह से उत्तर दिया। फिर मैंने उसकी आँखों. में देखा और मुस्कराने लगा, शायद उसको मेरी आँखों की भाषा समझ आ गई थी।  . वो प्यार से मेरी आँखों में देखती हुई बोली- क्या बहुत मन है.. त्रिशा की सील तोड़ने का प्रियम !  . मैंने उसको बहुत जोर से अपने से चिपका लिया और कहा- हाँ जान.. बहुत ज्यादा !  . उसने कहा तो कुछ नहीं, बस वैसे ही चिपके हुए मेरे बाल सहलाती रही, फिर बोली- अभी तुम जाओ, देखती हूँ.. क्या हो सकता है !  . शाम को फूफा जी त्रिशा को लेने आए, लेकिन फिर जो भी बात हुई हो उनकी वैशाली और त्रिशा से, वो अकेले ही वापस लौट गए थे।  . दूसरे दिन सुबह वैशाली के स्कूल जाने के टाइम मैं बालकनी में गया तो देखा कि वैशाली अकेले ही स्कूल जा रही थी, त्रिशा उसको गेट तक छोड़ने गई।  . उसने ऊपर मेरी तरफ देखा और मुस्कराकर मुझे नमस्ते किया। मैंने भी उसको नमस्ते का जवाब दिया, मुझे लगा शायद वैशाली ने जानबूझ कर मुझे मौका देने के लिए ऐसा किया है और मुझे इसका फायदा उठाना चाहिए।  . लेकिन अभी तो चाचा जी भी घर में थे और मेरी तरफ मेरी माता जी भी घर में ही थीं।.  . मैं थोड़ी देर बाद अपने चाचा की तरफ गया तो देखा कि चाचा आफिस जाने के लिए तैयार हो रहे थे और त्रिशा सोफे पर बैठ कर टीवी देख रही थी।.  . मुझे देख चाचा जी बोले- राज, आज त्रिशा की तबियत ठीक नहीं है, यह घर पर ही रहेगी, तुम इसका ध्यान रखना !  . मैंने कहा- जरूर !.  . थोड़ी देर बाद चाचा जी चले गए, मैं भी वहीं त्रिशा के साथ सोफे पर बैठ कर टीवी देखने लगा।  . फिर मैंने पूछा- त्रिशा, अब तबियत कैसी है, डाक्टर के यहाँ तो नहीं चलना?  . उसने कहा- नहीं भैया, मैं ठीक हूँ.. बस थोड़ा आराम कर लूँ, सब ठीक हो जाएगा।  . खैर… हम लोग टीवी देखते रहे, फिर थोड़ी देर बाद मैं खड़ा हुआ और कहा- त्रिशा मुझे कुछ काम है, मैं अभी आता हूँ !  . मैं वहाँ से निकल आया, लेकिन दोस्तों मैंने अपना मोबाइल फ़ोन जानबूझ कर वहीं छोड़ दिया।
स्रोत:इंटरनेट