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Chhoti Bahan Choot Virgin Sister Sex Stories

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छोटी बहन की चूत का गीलापन महसूस करके असीम नशा चढ़ गया। अब तो उसकी सील टूटना निश्चित है! पर आपको क्या लगता है मैं यहीं रुक जाऊंगा? इन virgin sister sex stories का अगला भाग-. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. मैंने अपने एक हाथ से अपने लण्ड को वैशाली की चुनमूनियाँ पर ठीक से टिकाया और उसको चुनमूनियाँ के अन्दर डालने की कोशिश की पर लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिसल गया। मैंने फिर कोशिश की पर फिर मेरा लण्ड फिसल गया।.  . अब मैंने इधर उधर देखा तो मुझे उसके कल ख़रीदे गई श्रृंगार का सामान दिख गया, उसमें एक वैसलीन की एक शीशी थी, मैं उसके ऊपर से हटा और वैसलीन की शीशी उठा कर तुरंत फ़िर से अपनी उसी अवस्था में आ गया।  . मैंने लेटे लेटे ही वैसलीन की शीशी खोली और उसकी उसकी चुनमूनियाँ के उपर खूब सारी वैसलीन लगा दी, फिर मैंने अपने लण्ड के सुपारे को खोला और उसमें भी वैसलीन लगाई।  . इस सबको मेरी वैशाली रानी बड़े गौर से देख रही थी, शायद उसको कुछ समझ में आ रहा था या फिर उसको अन्दर से कुछ मजा तो जरूर मिल रहा होगा क्योंकि अब उसने किसी तरह का विरोध या भागने की कोशिश नहीं की थी।  . अब मैंने अपने लण्ड को फिर से उसकी चुनमूनियाँ के फांकों के बीच में रखा और अन्दर धकेलने की कोशिश की किन्तु इस बार शायद चिकनाई ज्यादा होने के कारण लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिर फिसल गया।.  . वैशाली ने तो अपने होंठ कस कर भींच लिए थे क्योंकि उसको लगा कि अब तो भैया का मोटा और लम्बा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ में घुस ही जाएगा।.  . दोस्तो, तीन प्रयास हो चुके थे, मेरा लण्ड ऐंठन के मारे दर्द होने लगा था, अबकी मैंने अपने लण्ड को फिर से रखा और अपने दोनों हाथों को वैशाली की जांघों के नीचे से निकाल कर उसके कन्धों को पकड़ लिया, इस तरह पकड़ने के कारण अब वो बिल्कुल पैर भी नहीं बंद सकती थी और हिल भी नहीं सकती थी।.  . अब मैंने एक जोर से धक्का मारा, वैशाली के हलक से बड़ी तेज चीख निकल पड़ी, मेरे लण्ड का सुपारा उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग करता हुआ अन्दर घुस गया था।  . वो चिल्लाने लगी- हाय, मैं मर गई !  . और आँखों से गंगा-जमुना बहने लगी। वो बड़ी तेजी से अपना सर हिला रही थी, अब मैंने अपने होंठ फिर से उसके होंठों पर कस कर चिपका दिए और एक जोर का धक्का फिर मारा, अबकी मेरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ को और फाड़ता हुआ करीब दो इंच घुस गया, उसकी चुनमूनियाँ एकदम गरम भट्टी बनी हुई थी, मैं अपने लण्ड के द्वारा उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की गर्मी महसूस कर रहा था।  . 2-3 सेकेण्ड के बाद फिर से एक धक्का मारा तो अबकी आधे से ज्यादा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में घुस गया। अब मैं उसी अवस्था में रुक गया और उसके होंठों को कस कर चूसने लगा। उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मुझे. लगा कि मैं आसानी से अपने लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर नहीं कर पाऊँगा और उत्तेजना के कारण जल्दी ही झड़ जाऊँगा, इसलिए मैंने जोर से एक धक्का और मारा, अबकी मेरा पूरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में समां गया, मैंने अपनी जांघ पर कुछ गीला गीला महसूस किया, मुझे समझ आ गया कि इसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई है और खून निकल रहा है।  . दोस्तों मेरा ख्वाब था कि मैं किसी की सील तोडूं !.  . पर मुझे अपनी बीवी के साथ भी यह मौका नहीं मिला था, हालांकि मेरी बीवी ने तब मुझे यही बताया था साईकिल चलाते वक्त उसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई थी, तो आज जब मुझे अपनी बहन वैशाली की सील टूटने का अनुभव मिला तो मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और इसी उत्तेजना में मेरा वीर्य निकलने लगा। मेरा गर्म-गर्म वीर्य मेरी बहन वैशाली की चुनमूनियाँ के अन्दर निकल रहा था, वो भी मेरे लण्ड से निकलने वाले गर्म वीर्य को महसूस कर रही थी अपनी दोनों आँखों को बंद करके !.  . वैशाली की चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि वीर्य निकलने के दौरान लण्ड अपने आप झटके मरने लगता है, पर मेरे लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ के अन्दर झटके मारने की जगह भी नहीं मिल रही थी।  . खैर मेरा लण्ड वीर्य निकलने के बाद कुछ ढीला हुआ, मैं धीरे से उठा, देखा तो वैशाली की चुनमूनियाँ से खून का ज्वालामुखी फट गया था, उसकी जांघ, मेरी जांघ और चादर खून से सनी हुई थी, उसकी चुनमूनियाँ से अब गाढ़ा खून (मेरे वीर्य की वजह से) निकल रहा था।.  . मैंने देखा वैशाली बेहोश सी लग रही थी, मैं जल्दी से रसोई में गया और पानी की बोतल लाकर उसके चेहरे पर पानी के छीटें मारे, उसने धीरे से आँखें खोली, मुझे उसकी करराहट साफ़ सुनाई दे रही थी, आँखों से आंसू बंद ही नहीं हो रहे थे।.  . मैं वहीं पास में ही बैठ गया और उसके बालों को सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद वो कुछ सामान्य हुई, तो मैंने उसे कहा- जान, चलो मैं तुम्हारी चुनमूनियाँ को साफ़ कर दूँ, आज मैंने तुम्हारी चुनमूनियाँ का उद्घाटन कर दिया है।.  . उसने थोड़ा उचक कर अपनी चुनमूनियाँ को देखा और बोली- भैया यह क्या कर दिया आपने?. मैंने कहा- बेटा परेशान मत हो, पहली बार तो यह होता ही है और अच्छा हुआ कि मैंने कर दिया, अगर कहीं बाहर करवाती तो पता नहीं कितना दर्द होता ! चलो अब उठो भी ! मैंने उसको सहारा देकर उठाया और बाथरूम ले गया। वहाँ पर मैंने उसको शावर के नीचे खड़ा कर दिया और फिर उसकी सफाई में जुट गया। इस दौरान मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। चूँकि हम दोनों ही निर्वस्त्र थे तो वो. मेरे लण्ड को घूर रही थी।.  . मैंने उसकी चुनमूनियाँ को तो साफ़ कर दिया, अब खून निकलना भी बंद हो गया था, अब मैंने उसको अच्छे से नहलाना चालू कर दिया। मैं उसकी चूचियों को रगड़ रहा था, अचानक मैं अपने घुटनों पर बैठ गया और उसकी चुनमूनियाँ में अपना मुँह लगा दिया।.  . वो हिल कर रह गई।.  . मैंने कहा- वैशाली रानी, मुझे यह करने दो, इससे तुम्हारी चुनमूनियाँ का दर्द जल्दी ठीक हो जाएगा।  . और मैंने उसे चुनमूनियाँड़ों से पकड़ कर अपने मुँह को फिर से उसकी चुनमूनियाँ में लगा दिया। मेरी गर्म जीभ ने अपना कमाल दिखाना आरम्भ कर दिया था। उसको जरूर मजा आ रहा था क्योंकि अब उसने अपनी आँखें बंद कर ली. थी।.  . मेरे हाथ उसकी गाण्ड को सहलाते जा रहे थे, मैंने अपनी जीभ और अन्दर घुसेड़ दी, मेरे लण्ड ने कुछ जगह तो बना ही दी थी उसकी चुनमूनियाँ में, अचानक उसका बदन अकड़ने लगा और फिर मुझे अपनी जीभ में कुछ नमकीन सा स्वाद मिला, उसकी चुनमूनियाँ की खुशबू और इस स्वाद ने मुझे इतना उत्तेजित कर दिया कि मैं उसके रज की एक एक बूँद चाट गया।  . अब उसने मेरा मुँह हटाने की कोशिश की और बोली- भैया, मुझे पेशाब आ रही है।  . मैंने कहा- तू कर ! मैं तो आज तेरी पेशाब भी पियूँगा !.  . चूंकि उसकी चुनमूनियाँ घायल थी तो वो चाहकर भी पेशाब को रोक नहीं पाई और मेरा मुँह उसके पेशाब से भरने लगा।.
स्रोत:इंटरनेट