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Chhoti Bahan Ki Jigyasa Bhai Bahan Sex Story 3

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करण जब नाश्ते पर मिला तो हंसते हुए आहिस्ता से मुझसे पूछा: कैसी रही रात की एन्टरटेनमेन्ट?  मै:ठीक थी.
सिर्फ़ एक काहानी पढी और फिर सो गयी.
कोई खास मज़ेदार नही थी.
मैने जान बूझ कर करण से झूट बोला.
पता नही क्यों मै उससे सच नही बोल पाई.
वो मेरी बात सुन कर मुसकुराता हुआ चला गया.
मुझे लग राहा था के मै अब करण को किसी और नज़र से देख रही हूं पर किस नज़र से? इस का जवाब नही था मेरे पास.
उस दिन जब करण नही था मैने मौक देख कर फिर कम्प्यूटर ऒन किया और फिर से उसी साईट पर चली गयी और मज़े से कहानियां पढने लगी.
एक अजीब मज़ा आ राहा था.
हां उस काहानी को ज़रूर पढती थी जिस मै भाई और बहन का सेक्स होता था.
मुझे वो अच्छी लगती थी.
मै फिर से नीचे गीली हो चुकी थी.
दो घन्टे तक काहानियां पढती रही.
ऐसा कुछ दिनों तक चलता राहा और अब मै अक्सर भाई बहन के सेक्स के बारे में सोचती थी और मेरी पैन्टी गीली हो जाती थी.
एक रात को जब मैने करण से फिर से कम्प्यूटर पर बैठने की इजाज़त मंगी तो वो मुसकुराया और कहने लगा अभी नही.
जब सारे सो जायेंगे तब.
और आज मै भी तुम्हारे साथ बैठूंगा कम्प्यूटर पर.
मै चुप हो गयी और टीवी देखने लगी.
रात १०:०० बजे के करीब करण ने काहा जाओ देख कर आओ सब सो गये हैं क्या? मै उठी और देखा के सब सो चुके थे.
लेकिन सूरज भैया के रूम की लाईट ऒन थी.
  मैने करण को ये बताया तो बोला: चलो आज मै तुम को कहानीयां नहीं बल्के असली चीज़ दिखाता हूं.
मै बोली: वो कैसे करण: जैसे मै कहूं वैसे करती जाओ.
फिर देखो क्या होता है.
ये कह कर वो मेरा हाथ पकड कर मुझे छत पर ले गया.
छत पर सिर्फ़ एक ही कमरा है जिसमे सूरज भैया और रीना भाभी रेहते हैं.
उसने जा कर उनके कमरे के दर्वाज़े को खटखटाया.
रीना भाभी नाईटगाउन मे बाहर आयी और हमसे पूछा: क्या बात है? करण ने ऊंची आवाज़ मे काहा: वो आज का अखबार चाहिये.
हमे कुछ देखना था उसमे.
  अन्दर से सूरज भैया की अवाज़ आयी: रीना, यहां पर पडा है अखबार, आके ले जाओ और दे दो इसे.
  रीना भाभी अन्दर से अखबार लेकर आयीं तो करण उन्हें खींच कर साईड पर ले गया और दबी ज़ुबान मे बोला: रीना, आज रात को सूरज के साथ सेक्स का प्रोग्रैम है क्या तुम्हारा? रीना बोली: हां, क्यों? करण: तुम खिडकी पर से परदाआ थोडा हटा देना और थोडी सी लाईट भी आने देना रीन मुसकुराते हुए बोली: “क्यों, क्या करोगे तुम लोग देख कर” करण: अरे कुछ नही, प्रीटी की बहुत इच्छा है सच मे सेक्स देखने की, इसकी उत्सुकता शान्त हो जायेगी रीना: करण, तू इसको भी बिगाड रहा है करण: अरे नही, इसको ग्यान दे रहा हूं.
अच्छा शो दिखाना रीना: अच्छा मै देखती हूं क्या कर सकती हूं फिर भाभी अन्दर गयी और दर्वाज़ा बन्द करके चिटकनी लगा दी.
उसने बडी लाईट बुझा कर एक छोटी लाईट ऒन कर दी और परदा खोल कर, खिडकी भी खोल दी.
फिर उसने परदा किया, लेकिन पूरी तरह नही.
फिर रीना अपने बेड पर बैठ गयी.
सूरज भी बेड पर आकर लेट गया और रीना उसके साथ चिपक गयी.
उसके दोनो मम्मे करण के सीने से दबे थे.
सूरज उसकी गान्ड को अपने हाथ से सहला राहा था और एक दूसरे को देख दोनो मुसकुरा रहे थे.
तभी रीना ने झुक कर सूरज के होंठों पर किस किय.
फिर सूरज ने उसके चेहरे को पकडा और उसके होंठों को अपने होंठों से कसकर चूसने लगा.
अब वो दोनो एक दूसरे को किस कर रहे थे.
३-४ मिनट बाद रीना हांफ़ती हुई सूरज के ऊपर ढेर हो गयी और करण ने भी उसे अपने बांहों में कस लिया.
हमे कमरे की हल्की रोशनी मे ये सब कुछ साफ़ नज़र आ राहा था.
हम चुपचाप खिडकी के पास खडे हो कर परदे की दरार मे से देख रहे थे.
मुझे अजीब सा लग राहा था अपने भाई और भाभी को छुप छुप के देखना पर अन्दर ही अन्दर मज़ा भी आ राहा था.
मुझे अजीब सा तो लग रहा था पर अपने भाई और भाभी को छुप छुप के देखना पर अन्दर ही अन्दर मज़ा भी आ राहा था.
इस bhai bahan sex story का आखिरी भाग जल्द ही.. और भी मस्त पढ़िए my hindi sex stories पर.. Hindi sex story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2.
स्रोत:इंटरनेट