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 . केशव भी ये समझ चुका था.
वो उठा और अवनी से बोला क्यूँ जानेमन मज़ा आ रहा है.
अकेले पापा से चुदने में मज़ा है या दोनो से.
वो चुप ही रही और लंबी लंबी साँसे लेती रही.
केशव फिर बोला एक बात बताओ तो सही अगर सही बता दोगि तो हम और प्रयास करके तुमको खूब मज़ा देंगे, मैं फिर बोला अच्छा लगा हां या ना कुछ तो बोलो.
अवनी धीरे से बोली हां.
वो फिर बोला अच्छा या बहुत अच्छा.
वो इस पर मुस्कुरा दी तो केशव बोला मैं समझ गया लेकिन तुम साथ दोगि तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा.
बोलो दोगि साथ.
चाहिए खूब मज़ा, अवनी ने हां में सिर हिला दिया.
 . अब मैने और केशव दोनो ने ही अवनी को एक आदमी बूब्स पर और एक आदमी चूत पर अदला बदली करके लगे रहे चूस्ते और चाटते रहे.
केशव बोला अंकल जी कोई क्रीम है तो ले आओ.
मैने बोला लाता हूँ.
मैं जैसे ही उठा तो अवनी ने पहली बार केशव से बात करते हुए पूछा, क्रीम किस लिए, इस पर केशव बोला लाने तो दो तब बताउन्गा.
मैं तो समझ गया था कि इसका प्लान पीछे से गान्ड मारने का है.
 . जैसे ही मैं वापिस आया मैने देखा उसने अवनी की दोनो टाँगें उपर की हुई हैं और अपना लंड डालने वाला है.
उसने जैसे ही अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा अवनी बोली प्लीज़ धीरे से करना तुम्हारा काफ़ी बड़ा है.
इस पर वो बोला तुम्हारे पापा से भी बड़ा.
तो वो फिर मुस्कुरा गयी.
  केशव बोला ओके जान धीरे ही करूँगा.
और उसने वास्तव में आराम से ही किया और अवनी से बीच बीच मे पूछता भी रहा कि कोई तकलीफ़ हो तो बता देना.
अवनी को सुरू में थोड़ा सा दर्द हुआ मगर वो उसका लंड भी झेल गयी, थोड़ी देर बाद जब वो झड़ने वाला था तो उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और खुद बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और अवनी से अपने उपर आने को बोला.
अवनी उसके उपर सवार हो गयी.
 . अवनी अब केशव के उपर घुड़ सवारी कर रही थी.
केशव ने अवनी को केशव ने मेरी तरफ इशारा किया कि अंकल जी थोड़ा क्रीम लगाओ पीछे आप तो आकर खड़े हो गये.
ये सुनकर अवनी रुक गयी और बोली नही पीछे से नही.
इस पर केशव बोला अच्छा ये बताओ मैने तुम्हें दर्द होने दिया, बोलो.
अवनी बोली नही, फिर विश्वास करो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा, तुम्हें तकलीफ़ ना हो इसलिए तो ये क्रीम मगाई है.
 . वो बोली प्लीज़ पीछे से रहने दो,  तुम्हारा बहुत मोटा है, मुझे दर्द होगा ये पीछे से अंदर नही जाएगा तुम्हारा तो सुरू सुरू में आगे से भी हल्का हल्का दर्द कर रहा.
केशव बोला, क्यूँ जब अंकल जी आगे से लेते हैं तो दर्द नही होता.
अवनी बोली पापा के उससे दर्द नही होता, उनका तुम्हारे से कम मोटा है.
केशव ने उसे मनाने; के लिए तरीका अपनाया ओर बोला अच्छा अगर ऐसा है तो अपने पापा से ही करा लो.
वो बोली ठीक है.
और केशव ने उसे अपने उपर बैठी हालत में ही लिटा लिया और अपने दोनो हाथों से उसके दोनो चुतड़ों को पकड़ कर उसकी गान्ड को खोल दिया.
केशव मुझसे बोला लो अंकल जी लगाओ कीम और छेद को नरम करो आपकी लड़की को तो आपका ही लंड पसंद है.
 . मैं धीरे धीरे उसकी गान्ड पर राउंड राउंड करके क्रीम लगाने लगा.
और करीब 15 मिनिट तक उसकी गान्ड में केशव के बताए अनुसार क्रीम लगाई(केशव से उस दिन मैने गान्ड के छेद को लंड के लिए तैयार करने का तरीका सीखा वो इस खेल का पुराना खिलाड़ी था) पहले एक उंगली और बाद में दो उंगलियों से भी क्रीम लगाई.
जब उसकी गान्ड के छेद में दो उंगली जाने लगी तो मुझे विस्वास हो गया कि अब अवनी थोड़ा बहुत दर्द झेलकर मेरा लंड ले ही लेगी.
 . केशव बोला अंकल जी अब सुरू भी करो और मैने जैसे ही अवनी की गान्ड पर लंड रखा वो बोली पापा आराम से करना.
मेरे बोलने से पहले ही केशव बोला क्यूँ जानेमन अपने पापा पर भी भरोसा नही.
तो वो बोली पापा ने पहले भी बहुत दर्द कराया था इसलिए बोल रही हूँ.
इस पर केशव बोला तो मैं करूँ.
अवनी बोली नही तुम तो बिल्कुल नही मरना है क्या मुझे तुम्हारा तो बहुत मोटा है.
और तभी मैं बोला ठीक है बेटी में आराम से करूँगा.
लेकिन मैने जैसे ही उसकी गान्ड के छेद पर लंड को रखकर जैसे ही थोड़ा अंदर किया वो चिल्लाई आआआआआआआअ और केशव की पकड़ से छुटकर उठने की कोशिस करने लगी.
केशव बोला अंकल जी आराम से करो आपकी ही बेटी है.
 . अवनी भी बोली पापा आप बहुत ज़ोर से लगाते हो धीरे से करो.
मैने सोचा कि इससे आराम से कैसे होगा.
मैं बोला ठीक है.
मैने दुबारा से उसके छेद पर लंड रखा.
इस बार केशव ने मेरी तरफ़ आँख मार्कर इशारा किया.
मैं समझ गया कि वो बोल रहा है कि झटके से डाल दो.
मैने वैसा ही किया निशाना लगाया और एक दम सारा लंड अंदर.
अवनी काँप गयी और चिल्लाने लगी आआआआआआआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.
मुझे छोड़ूऊऊऊऊऊऊ, केशव बोला अंकल थोड़ा धीरे करो इतनी ज़ोर से करोगे तो लगेगी ही.
अवनी बोली पापा आप बहुत बुरे हो, आप से तो ये अच्छा है कम से कम इतनी ज़ोर से तो नही करता पहले भी आपने ऐसा ही किया था.
इस पर मैं बोला बेटा पहली बार में थोड़ा दर्द होता ही है, अब आराम से करूँगा.
 . और धीरे धीरे शुरू हो गया.
इस तरह से मैने उसको पीछे से चोदा और केशव भी आगे से लगा रहा.
इसके बाद मैं और केशव दोनो ही झाड़ गये.
और अवनी से अलग होकर बेड पर पड़ गये.
अवनी बीच में और हम दोनो उसके लेफ्ट राइट मे.
केशव ने अवनी को फिर से अपनी तरफ घुमा लिया और अपने से चिपका लिया.
अवनी को भी उससे चिपकने मे अब कोई संकोच नही हो रहा था.
 . केशव ने उसके कान में कुछ कहा.
तो वो बोली नही तुम्हारा नही झेल पाउन्गि.
अब मुझमें ताक़त नही रही.
मैं समझ गया कि वो अवनी की गान्ड की बात कर रहा है.
केशव उससे बहुत रिक्वेस्ट कर रहा था, केशव बोला मुझ पर भरोसा करो कल आ जाना.
मैं दे दूँगी.
प्लीज़ आज रहने दो.
केशव पता नही कैसे उसकी बात मान गया और बोला,  ओके जान जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.
और वो बोला ठीक है 11बज गये हैं.
जब तुम दोगि ही नही तो फिर मैं चलता हूँ यहाँ रुकने का क्या फ़ायदा.
और फिर वो चला गया.
 . उसके जाने के बाद मैने गेट बंद किया और अवनी के पास आकर बोला.
बेटी कैसी है.
अवनी मुझसे गुस्सा थी बोली आपको मेरी चिंता कहाँ आप इतनी ज़ोर से करते हो, कितनी ज़ोर से लगाई है, अभी तक दर्द हो रहा है आपसे तो वो दूधवाला अच्छा है ना तो दर्द दिया और देखो मेरी बात मानकर चला भी गया.
मुझे मेरी बेटी ने चुप कर दिया था वो किसी हद तक ठीक ही कह रही थी.
अवनी फिर बोली देखना कल वो कितने प्यार से करेगा और दर्द भी नही देगा.
 . अगले दिन केशव फिर आया और पूरी रात रुका.
उसने मेरी बेटी को जमकर चोदा आगे और पीछे दोनो तरफ से.
वो सेक्स का माहिर खिलाड़ी था, उसने मज़ा भी लिया और अवनी को दर्द भी नही होने दिया.
अवनी ने मुझे उसके सामने ही बोला पापा इसे कहते हैं सेक्स और सेक्स का मज़ा.
आपकी तरह नही.
मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई क्यूंकी ये बात उसने उस दूधवाले केशव के सामने बोली थी और ये सुनकर केशव को शायद बहुत गर्व हुआ था.

स्रोत:इंटरनेट