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Chudasi Aurat Ki Gang Bang Chudai 2

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विक्रम ने कहा कि अगर मुझे और चुदना है तो अपने दोस्तों से चुदवा देगा क्योंकि अब वो और नहीं चोद सकता क्योंकि वो पहले ही सुबह से पाँच औरतों को चोद चुका है और इसलिये थक गया है। मैं नशे में थी। मैंने कहा, “मुझे लन्ड चाहिये बस!” विक्रम ने कहा, “लेकिन एक शर्त है!” मैंने कहा कि मुझे उसकी सब शर्तें मंज़ूर हैं बस मेरी चूत की प्यास किसी तरह शाँत करवा दे। वो बोला, “सोच ले… मेरी और मेरे दोस्तों की हर बात माननी पड़ेगी… हम जैसे चाहें तुझे चोदेंगे और तू मना नहीं करेगी!”कहाँ तो मैं एक मर्द से चुदने के लिये इतनी तड़प रही थी और अब मुझे दो-तीन लण्ड मिलने वाले थे। मैंने बिना सोचे खुशी-खुशी हाँ कर दी। वो. बोला, “चल साली रंडी… कार में बैठ जा जल्दी… तुझे और लन्ड दिलवाता हूँ!” वो मुझे अपनी कार में अपने घर ले कर जाने लगा। तकरीबन एक घंटे के बाद हम उसके गाँव में पहुँच गये। उसका घर एक गाँव में था जहाँ बहुत कम घर थे और वहाँ पहुँचते हुए रात के आठ बज चुके थे और पूरी तरह से अंधेरा हो गया था। उसने मुझे बताया कि जहाँ पर उसका घर है वहाँ उस तरफ़ के इलाके में कोई औरत नहीं रहती, बस उनका अड्डा है जहाँ वोमस्ती करते हैं। उसने अपनी गाड़ी एक किनारे पर खड़ी कर दी और मुझे अपनी कार में ही नंगी होने को कहा।. मैंने उसे मना कर दिया तो उसे गुस्सा आ गया और उसने मुझे एक थप्पद मार दिया और मेरे सूट की कमीज़ पूरी तरह से फाड़ दी और निकाल कर बाहर फेंक दी। मैंने सोचा कि कार में ही तो नंगी होने को कह रहा है इसलिये उसकी. बात मान कर मैंने सलवार उतार दी और तुरंत पूरी नंगी हो गयी। तभी उसने मुझे नंगी ही कार से नीचे उतरने को कहाओर बोला, “दूर सामने जो घर है वो मेरा ही घर है और तुझे वहाँ तक ऐसे ही जाना है।”वहाँ से उसका घर तकरीबन एक किलोमीटर होगा।वहाँ ना के बराबर आबादी थी इसलिये खेतों के पार इतनी दूर से भी वो घर दिखायी दे रहा था।. मैंने विक्रम से कहा, “प्लीज़ ऐसा मत करो कोई देख लेगा… मैंने ड्रिंक भी कर रखी है….
वहाँ तक चल कर जाना मुश्किल होगा!” वो बोला, “चूतिया साली रंडी! ज्यादा नाटक मत कर… कोई नहीं देखेगा तुझे और अगर देख भी लिया तो क्या होगा साली… जितनी जल्दी करेगी उतना ही अच्छा होगा वरना रास्ते में जो मिलेगा तुझे चोद देगा।” मेरे पास लोई चारा नहीं था तो मैं धीरे से कार से नीचे उतरी। उसने तुरंत अपनी कार स्टार्ट की और वहाँ से भगा कर अपने घर ले गया। अब मैं सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने वहाँ पूरी नंगी खड़ी थी। मुझे बहुत शरम आ. रही थी कि कोई मुझे इस हालत में देख लेगा तो क्या होगा। मेरा सारा सामान विक्रम की कार में पड़ा हुआ था।. अब मैंने उसके घर की तरफ़ जाना शुरु कर दिया। उस सड़क पर एक दम अंधेरा था और जैसे जैसे मैं आगे जा रही थी तो रोश्*नी आनी चालू हो गयी थी। तकरीबन दस मिनट तक मैं ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल पहने नंगी उस कच्चे. रास्ते पर चलती रही और अभी आधा रास्ता भी तय नहीं हुआ था। नशे में थोड़ा सिर घूम रहा था और मैं बहुत ज्यादा डर रही थी। तभी एक दम से पीछे कोई गाड़ी आने की आवाज़ आयी और मैंने घबराहट में भागना चालू कर दिया।. ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल और नशे की हालत में भागना आसान नहीं था पर फिर भी जितना मुझसे हो सका, जैसे-तैसे मैं भागी। अभी मैं थोड़ा दूर तक ही भागी थी कि पीछे से एक सफारी कार आयी और उन्होंने मुझे देख लिया और कार एक दम मेरे पास ला कर रोक दी।. उसमें दस मर्द मौजूद थे। तभी एक बोला, “लगता है ये हीविक्रम का नया माल है तभी तो ऐसे सड़क पर नंगी घूम रही है!”तभी उन्होंने मुझे कहा कि “चल आजा अंदर आ जा! तुझे विक्रम के घर ले जाते हैं… हम भी वहीं जा रहे हैं।”मैंने उनसे कहा कि “विक्रम ने मुझे कहा है कि किसी से लिफ्ट लेकर मत आना वरना वो मुझे सज़ा देगा… इसलिये प्लीज़… खुदा के लिये मुझे ऐसे ही जाने दो!”तभी उनमें से एक ने कहा “वो हमारा ही. दोस्त है और उसने ही हमें बुलाया है… कुछ नहीं कहेगा… चल साली रंडी कुत्तिया… आजा अंदर… ज्यादा नखरे मत कर!”. मैंने उनकी बात मान ली पर उनकी गाड़ी पूरी तरह से भरी हुई थी और बैठने के लिये कोई जगह नहीं थी। तभी उन्होंने मुझे अंदर खींच लिया और पीछे जो चार मर्द बैठे थे उन्होंने अपने पास बिठा लिया। मैं अब एक कार में. दस मर्दों के बीच में नंगी पड़ी हुई थी। वो कह रहे थे “क्या माल फ़सा कर लाया है विक्रम! यार ये तो बड़ी मस्त है!”. कोई मेरे बोब्बे दबा रहा था तो कोई चूत में उँगली देने लगा तो कोई गाँड में। सभी ने शराब पी रखी थी और उनमें से कुछ के हाथ में शराब की खुली बोतलें भी थीं। उनमें से एक मर्द ने मेरे मुँह में भी वो देसी शराब. उड़ेल दी। मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था और बहुत ज्यादा शरम आ रही थी। मेरी आँखों में तो आँसू आ गये थे। वासना में अंधी हो कर विक्रम और उसके दोस्तों से चुदने के लिये मैंने ही तो ज़िद्द करी थी।. तभी उन्होंने गाड़ी विक्रम के घर के आगे रोक दी और मुझे नीचे उतार दिया। सभी दस मर्द भी नीचे उतर गये। तभी उनमें से एक बोला, “यार इस कुत्ती को अपनी गुलाम बना लेते हैं!”तभी उनमें से एक मर्द ने मेरी गर्दन में कुत्ते वाला पट्टा बाँध दिया और मुझे एक कुत्ती कि तरह अपने दोनों हाथ और पैरों के बल चलने का हुक्म दिया।. मैंने वैसा ही किया जैसा उन्होंने कहा था। फ़िर वो मुझे कुत्ती कि तरह विक्रम के घर के अंदर ले गये।वहाँ जो मैंने देखा वो देख कर मैं हैरान रह गयी। वहाँ पर आठ मर्द पहले से ही मौजूद थे। मैं इतने मर्द देख कर. डर गयी और विक्रम से मिन्नत करने लगी कि “प्लीज़ मुझे जाने दो! मैं इतने जनों से नहीं चुदवा पाऊँगी।” इस बात पर सभी हंसने लगे और विक्रम बोला कि “सभी लड़कियाँ पहले ऐसे ही कहती हैं! तेरी सहेली सविता भी पहले. ऐसे ही बोली थी पर अब देख वो किस तरह मस्त हो कर दर्जनों मर्दों से एक साथ चुदवाती है!” मुझे रूबिना पर बहुत गुस्सा आया कि उसने मुझे कहाँ फंसा दिया।. तभी विक्रम ने सफारी कार वाले मर्दों से पूछा के क्या मैं चल कर आयी हूँ या उनकी कार में तो उन्होंने कहा कि “कार में।”इस बात पर विक्रम को बहुत गुस्सा आया और उसने मुझे कहा, “साली भेनचोद रंडी! मैंने कहा था ना कि पूरा रास्ता चल कर आना है तो तू इनकी कार में क्यों आयी? अब तुझे इसकी सज़ा मिलेगी।” मैंने कहा, “इन सभी ने कहा था कि ये तुम्हारे दोस्त हैं तो इसलिये इनके साथ चलूँ… तुम मुझे कुछ नहीं कहोगे अगर मैं इनके साथ आ भी जाती हूँ!”. विक्रम ने कहा, “भेनचोद! कोई भी मेरा नाम लेगा तो उसके साथ चली जायेगी क्या ऐसे ही? सज़ा तो मिलेगी तुझे और अगर अब तू कुछ बोली तो सज़ा और बढ़ती जायेगी और वैसे भी यहाँ आस पास कोई नहीं रहता… जितना मरज़ी चींख लेना… यहाँ पर कोई नहीं सुनेगा तेरी… इसलिये भलायी इसमें ही है कि चुप चाप जो मैं कहता हूँ वो ही करती रह।”विक्रम ने मुझे कहा कि “तेरी सज़ा तुझे कल देंगे… अभी फ़िलहाल वक्त के लिये माफ़ कर. रहा हूँ पर कल को सज़ा जरूर मिलेगी!”.
स्रोत:इंटरनेट