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Chudasi Aurat Ki Gang Bang Chudai 4

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मैं थक भी गयी थी और मेरी टाँगें भी दुख रही थीं पर मैं फिर भी जितना हो सके तेज़ चलने लगी। इस बार मुझे रास्ते में चार आदमी और मिले और उन्होंने भी मेरी चुदाई स्टार्ट कर दी वहीं सड़क पर। तकरीबन डेढ़ घंटे तक. मैं उनसे बारी-बारी से चुदवाती रही। मैं हैरान थी कि इन मर्दों ने भी मुझसे मेरी चुदाई करने के पैसे माँगे। जब मैंने कहा कि उन्हें देने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है तो वो भी मुझे उल्टा-सीधा कहते हुए आगे. बढ़ गये।. उसके बाद मैं वहीं पहुँच गयी जहाँ से आयी थी। मैंने विक्रम से कहा, “अब तो मेरी सज़ा हो गयी है… प्लीज़ अब मेरे कपड़े दे दो!”इसपर उसने कहा, “अभी तो तेरी एक सज़ा पूरी हुई है… अभी दूसरी बाकी है और तेरी दूसरी सज़ा बहुत ही मुश्किल होगी।” उसके बाद उसने कहा कि“तुझे आज भी यहीं रहना पड़ेगा और कल सुबह तू यहाँ से जायेगी!” उसके बाद विक्रम ने मुझे खाना और पानी दिया और कुछ देर के लिये आराम करने को कहा।. मैंने तकरीबन दो घंटे आराम किया।. अभी मैं सो रही थी कि विक्रम ने आ कर मुझे उठा दिया और कहने लगा, “अगर अबकि बार कुछ भी बोली तो सज़ा और बढ़ा दी जायेगी इसलिये जो कहता हूँ चुपचाप करती जा।” मैं कुछ भी नहीं बोली और चुप रही। अब दोपहर के तकरीबन एक बज चुके थे और अभी भी मैं नंगी ही थी।. विक्रम ने मुझे कहा, “आज तुझे और बहुत जनों से चुदना है!” अब तो मैं बेशरम बन चूकी थी और मेरी चूत, गाँड और मुँह सभी छेद बहुत बुरी तरह चुद चुके थे और अच्छी तरह से खुल चुके थे क्योंकि मैंने सभी में बहुत मोटे-मोटे लन्ड लिये थे। विक्रम ने मुझे कहा कि “तेरी दूसरी सज़ा ये है कि तुझे आज शाम के सात बजे तक गाँव में से दो हज़ार रुपये कमा कर लाने हैं और वो भी नंगी रह कर ही और अगर सात बजे से लेट हुई या पैसे कमा. कर नहीं ला पायी तो तेरी चुदाई पूरे एक हफ़्ते तक होती रहेगी!”. मैं ये सुनकर कुछ नहीं बोली क्योंकि अगर कुछ बोलती तो मेरी सज़ा विक्रम और बढ़ा सकता था। ये सब बातें सुनकर मैं बहुत डर गयी और सोचने लगी कि अगर मैं पैसे ना ला पायी तो पता नहीं क्या होगा आज मेरे साथ। मैं ये. सोच ही रही थी और अपने ख्यालों में खोयी हुई थी कि तभी मुझे विक्रम ने एक जोर से थप्पड़ मारा और कहा “साली रंडी! यहीं खड़ी रहेगी अब क्या? चल हरामज़ादी जल्दी से नहा-धो कर बाहर जाने की तैयारी कर और चुदवा कर. पैसे कमा कर ला।”. मैं सैंडल उतार कर बाथरूम में जा कर जल्दी-जल्दी नहायी और जिस्म पोंछ कर फिर से पैरों में अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन लिये। मेरे पर्स में लिप्स्टिक पाऊडर वगौरह था तो मैंने हल्का मेक-अप भी कर लिया। तभी. मुझे मेज पर देसी ठर्रे की बोतल दिखायी दी जिसे उठा कर मैं मुँह लगा कर पीने लगी। पीते-पीते मैंने सोचा कि मैं पूरी कोशिश करुँगी दो हज़ार रुपये कमाने की और ना कमा सकी तोजो भी होगा देखा जायेगा। इतने दिनों. से मैं चुदने के लिये ही तड़प रही थी और जब अल्लाह के करम से मुझे इतनी चुदाई नसीब हो रही है तो क्यों ना खुल कर मज़े लूँ।. इतने में विक्रम फिर कमरे में आया और चिल्लाते हुए कहा कि “साली यहाँ खड़ी दारू पी रही है! चल वक्त बर्बाद न कर और सात बजे के पहले रुपये कमा कर ला!” अब मैं एक बार फिर से बस ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने. बिल्कुल नंगी ही बाहर चल पड़ी। मेरे एक हाथ में ठर्रे की बोतल थी और मैं अब एक पूरी रंडी बन चूकी थी और मैं फैसला कर चुकी थी कि मैं रंडी ही बन जाऊँगी और फ़्री में लोगों सेऐसे ही चुदवाया करूँगी। खैर अभी तो. मुझे ऐसे मर्द ढूँढने थे जो मुझे चोदें और पैसे भी दें पर गाँव में ये काम बहुत मुश्किल था क्योंकि वहाँ पर सभी फ़्री में चोदने वाले गरीब लोग थे। सुबह तो कुछ गाँव वालों ने मुझसे ही मुझे चोदने के पैसे माँगे. थे। अब मैं शराब पीती हुई नशे में झूमती हुई गाँव कि उस तरफ़ चल पड़ी जहाँ पर मज़दूरों की छोटी सी बस्ती थी और उस तरफ़ मर्द भी ज्यादा रहते थे। वो इलाका एक गंदी बस्ती जैसा थापर मेरे पास और कोई चारा नहीं था।. मैं वहाँ पर अंदर घुस गयी और तभी मेरी तरफ़ मर्दों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गयी। मैं ये देखकर हैरान रह गयी कि वहाँ करीब तीन-चार औरतें और भी थीं जो अलग-अलग जगह पर गाँव के कईं मर्दों से ग्रुप-चुदाई करवा रही. थीं। उन्हें देखकर साफ ज़ाहिर था कि ये गाँव की रहने वाली औरतें नहीं थीं बल्कि मेरी ही तरह शहर से आयी हुई अमीर औरतें थीं। मैंने तभी उन मर्दों से कहा कि “आप सब मेरी चुदाई कर लो पर इसके बदले में मुझे पैसे. चाहिये।” इस पर वो कहने लगे कि “पहले चुदाई होगी तेरी और बाद में पैसे दे देंगे तुझे थोड़े बहुत! ”फिर मेरी चुदाई वहीं पर स्टार्ट हो गयी।. अल्लाह जाने मेरे अंदर घंटों इतनी चुदाई करवाने ताकत कहाँ से आ गयी थी। पिछली शाम से मैं कितने ही मर्दों से बेतहाशा चुदी थी और अब फिर चुदने के लिये तैयार थी। सभी मर्द मेरे को चोदने के लिये आ गये। वहाँ पर. भीड़ इतनी बढ़ गयी कि कोई भी मुझे चोद नहीं पा रहा था। तभी उनमें से जो थोड़ा नेता किस्म का था उसने कहा, “बारी-बारी से चोद लेना सभी लोग और एक लाइन लगा लो सभी मर्द!” तकरीबन बीस-पच्चीस मर्द होंगे वहाँ पर। उन सभी ने लाइन लगा ली और बारी-बारी से मुझे चोदने लगे।. मुझे कुछ नहीं होश था कि मुझे कौन-कौन चोद रहा था। बस मैं तो अब ऐसे ही गंदीगली में ज़मीन पर पड़ी थी जो कोई आ रहा था बस मुझे चोदते जा रहा था। तकरीबन शाम के पाँच बजे मैंने उनसे कहा कि “बस अब मुझे जाने दो और. पैसे दे दो!” तो उन्होंने कहा “अभी कुछ देर और रुक जा। और थोड़ी देर में चली जाना।” तकरीबन सवा पाँच बजे उन्होंने मेरी चुदाई बंद कर दी और मुझे कहा“चल अब दफ़ा हो जा यहाँ से!”. मैंने उन्हें कहा कि “मुझे पैसे तो दे दो!” तो सभी हंसने लग पड़े और कहने लगे“तेरे जैसी अमीर और शहरी औरतें हमारे पास चुदवाने के लिये आती हैं और हमें ही पैसे भी देती हैं और तू हमसे पैसे माँग रही है?” अब. मैं समझी कि वो औरतें जो मुझसे पहले वहाँ चुद रही थीं वो पैसे दे कर इन गाँव वालों से चुदवाने के लिये आती हैं। और इसी ल्ये सुबह मुझे चोदने वाले मर्दों ने मुझसे पैसे माँगे थे।पर मेरे हालात उस वक्त दूसरे. थे। मुझे तो चुदवा कर पैसे कमाने थे।. मैंने उनसे मिन्नत की कि मुझे पैसे बहुत ज़रूरी चाहिये तो सबने कहा “लगता है ये छिनाल विक्रम साहब ने यहाँ भेजी है!चलो इस कुत्ती को थोड़े बहुत पैसे सभी दे दो! हमारा ही फायदा है क्योंकि ये भी अब हमारी नई. ग्राहक बनेगी।” तो सभी ने मुझे पचास-पचास रुपये दे दिये। कुल मिला कर तेरह सौ पचास रुपये ही इकट्ठे हुए।. अब भी मेरे पास साढ़े छः सौ रुपये कम थे। मैंने उनसे कहा कि “मुझे साढ़े छः सौ रुपये और चाहिये”तो उन्होंने कहा कि “साली इतने दे दिये ना बहुत है अब और पैसे नहीं मिलेंगे तुझे!” मैंने उनसे फ़िर से मिन्नत की और. कहा कि “मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ पर मुझे साढ़े छः सौ रुपये और दे दो।” इस पर उनमें से एक ने कहा कि “तुझे अभी के अभी एक कुत्ते और गधे का लन्ड लेना होगा।” मैं ये सुनकर हैरान गयी।.
स्रोत:इंटरनेट