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Chudne Ka Faisla Extra Marital Affair Story

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शादी के कुछ सालों बाद लोगो का सेक्स में इंटरेस्ट बहुत कम हो जाता है, मेरे पति उन लोगों में से है। लेकिन मैं नहीं। मुझे आज भी सेक्स चाहिए। पर मैं क्या कर सकती थी.. मेर पहली extra marital affair story पेश है.. अब मैं पे आती हूँ.. मेरा नाम समीरा है। मेरी उमर 44 साल है और 3 बच्चों की माँ हूँ। मेरी शादी के कुछ साल बाद बहुत बदलाव आने लगे और मेरे जीवन में रतिक्रिया जैसा शब्द कम होता चला गया। हालांकि मुझे तो इसकी जरूरत थी, पर पति कुछ बदल से गए, उनकी अब इसमें दिलचस्पी नहीं रही, पर मेरी अभी भी है। हम वैसे तो बिहार के हैं, पर पति उड़ीसा में काम करते हैं इसलिए हम यहाँ किराये के मकान में रहते थे। बात तब की है, जब मैं 35 की थी और मेरा दूसरा बच्चा 4 महीने का था। हमारे पड़ोस में 50-52 साल का एक आदमी रहने आया, उसका नाम हरीश था। वो हमारे ही तरफ़ का था तो जान-पहचान होते देर न हुई। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे से काफ़ी घुल-मिल गए।. मेरे पति जब नहीं होते, तो शाम को वो घर आते या हम छत पर बातें करते। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे की शादीशुदा जिन्दगी के बारे में बातें करने लगे। फिर एक दिन ऐसा आया, जब हम अपनी सम्भोग क्रिया के बारे में बातें करने लगे। हम एक-दूसरे से अपने पति-पत्नी की बातें करने लगे। उसने बताया कि वो अपनी पत्नी से खुश नहीं है और फ़िर मैंने भी अपने पति के बारे में बता दिया।. उस वक्त मेरा दूसरा बच्चा सिर्फ़ 3 महीने का था।. इसी तरह बातें करते हुए एक महीना हो चला।. एक रात जब मेरे पति रात की शिफ्ट में थे तो हरीश का फ़ोन आया। हम पहले तो इधर-उधर की बातें करते रहे। फिर हरीश ने वो बात कह दी, जिसका मुझे भय था। उसने मुझसे कहा- समीरा, हम दोनों को साथी की जरूरत है, क्यों न हम एक-दूसरे का साथ दें और अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा कर लें? मेरे दिलो-दिमाग में बिजली सी सनसनी आ गई। मैं उससे बातें तो करती थी, पर कभी सोचा नहीं था कि ऐसा हो सकता है क्योंकि वो मुझसे उमर में काफ़ी बड़े थे। मैंने फ़ोन बिना कुछ कहे रख दिया।. कुछ देर बाद उनका दोबारा फ़ोन आया, पर मैंने नहीं उठाया। करीब 4 बार के बाद मैंने फ़ोन सुना तो वो मुझसे माफ़ी मांगने लगे। फ़िर हम यूँ ही कुछ देर बातें करते रहे।. फ़िर बात फ़िर रति-क्रिया पर आ गई, फ़िर वो मुझे समझाने लगे कि इसमें कोई बुराई नहीं और उमर से इसका कोई लेना-देना नहीं। काफ़ी देर उनके समझाने-बुझाने के बाद अखिरकार मैंने भी ‘हाँ’ कह दिया।. फ़िर क्या था…. हरीश ने मुझसे कहा- मैं तुम्हारे घर आ रहा हूँ।. मुझे तो घबराहट हो रही थी, मैंने कह दिया- रात काफी हो गई है, किसी और दिन..! पर हरीश मानने को तैयार नहीं था तो उसने करीब 12 बजे मेरा दरवाजा खटखटाया।. मैंने घबराते हुए दरवाजा खोला, सामने हरीश मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगा। मैं शर्म से पानी हो रही थी।. मैं अन्दर आ गई, मेरे पीछे वो भी दरवाजा बन्द कर के चला आया। मेरे अन्दर आते ही उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे चूमने लगा।. मैं बस सहमी सी उसके छुअन को अपने बदन पर महसूस किए जा रही थी। उसने मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। मुझे अजीब सा लगने लगा।. एक पल तो ये ख्याल भी आया कि यह क्या कर रही हूँ पर वासना मेरे ऊपर भी हावी होने लगी थी शायद इसलिए मैं कोई विरोध नहीं कर रही थी।. उसने मुझे जहाँ-तहाँ छूना और सहलाना शुरू कर दिया, उसकी छुअन से मेरे अन्दर की वासना और दहकने लगी। मैं उस रात सलवार कमीज में थी और दुपट्टा अन्दर कमरे में ही भूल गई थी।. उसने मेरे स्तनों को अब सहलाना और दबाना शुरू कर दिया था, फ़िर उसका एक हाथ धीरे-धीरे नीचे आने लगा, पहले पेट, फ़िर नाभि, फ़िर अचानक मेरी योनि..! मैं कांप गई और मैं सहम कर उसकी तरफ़ मुँह करके उससे चिपक गई।. मैंने उसे कस लिया, उसका शरीर मुझे गजब की गर्माहट दे रही थी। मैं अब गरम होने लगी थी, मेरी योनि में अब मैं हल्की नमी महसूस कर रही थी। हरीश ने मुझसे कहा- समीरा.. अब शर्माओ नहीं.. खुल कर इस पल का आनन्द लो..! और फ़िर उसने मेरे चेहरे को ऊपर किया और अपना मुँह मेरे मुँह से लगा कर मुझे चूमने लगा। उसने मेरे होंठों को चूसना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद वो अपनी जुबान मेरे मुँह के अन्दर करने की कोशिश करने लगा।. पहले तो मैं विरोध करने जैसा करती रही, फ़िर अपना मुँह खोल दिया। उसने अपनी जुबान मेरे जुबान से छूने की कोशिश करने लगा। कुछ देर जब उसे कामयाबी नहीं मिली, तो उसने कहा- समीरा अपनी जुबान बाहर करो..! मैं कुछ देर सोचती रही, पर उसके दोबारा कहने पर मैंने अपनी जुबान बाहर निकाल दी। उसने तुरन्त मेरी जुबान को चूसना शुरु कर दिया। कुछ देर के बाद मैं भी उसका साथ देने लगी। कभी वो मेरी जुबान चूसता और मेरी लार पी जाता, तो कभी मैं..! उसने अब अपना हाथ मेरे नितम्बों पर रख दिया। मुझे अपनी और कसके खींच लिया और अपनी कमर को घुमाने लगा। मैंने महसूस किया कि सलवार के ऊपर से ही उसका लिंग मेरी योनि से लग रहा है।. हम काफी देर इस अवस्था में एक-दूसरे से चिपके आलिंगन करते रहे।. तभी हरीश ने कहा- अब अन्दर चलो, मुझसे रहा नहीं जा रहा है, मैं अपने लिंग को तुम्हारी योनि के अन्दर डालना चाहता हूँ..! हम तुरन्त अन्दर चले आए।. मैं बिस्तर पर आ गई, हरीश मेरे पास आया और मेरी सलवार का नाड़ा खोल कर सलवार निकाल दी। मैंने अन्दर कुछ नहीं पहना था, यह देख कर उसने कहा- तुम अन्दर पैन्टी नहीं पहनती क्या? मैंने जवाब दिया- मैं रात को नहीं पहनती!. तब उसने पूछा- क्या ब्रा भी नहीं पहनती?. मैंने कहा- नहीं !. अब हम खुलने लगे थे और बातें भी होने लगी थीं, क्योंकि अब हम इतने गर्म हो चुके थे कि शर्म-हया सब भूल चुके थे। अब हरीश मेरे ऊपर आ गया और मुझे चूमने-चूसने लगा। मेरे तो जैसे तन-बदन में आग सी लगने लगी।. मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मेरा बदन आग में जल रहा है। वो मुझे कभी कमर से पकड़ कर जोर से अपने जिस्म को मेरे ऊपर दबाता और मुझे चूमता, तो कभी मेरे स्तनों को और दबाता और कभी उन्हें मसल रहा था। मेरे मुँह से ‘सिस्की’ निकल जाती, जिसे वो सुन कर और जोश में आ जाता। उसने अब एक हाथ से मेरा एक पैर अलग किया, तो मैंने खुद अपने दोनों पैरो को फ़ैला कर उसको कमर से कस लिया। हम अब एक-दूसरे को उसी अवस्था में प्यार करते रहे। मैंने महसूस किया कि हरीश अपनी कमर से कुछ कर रहा है। उसके लिंग से मेरी योनि में स्पर्श हो रहा था, जिसका दबाव कभी ज्यादा तो कभी कम हो रहा था। मैं समझ गई कि हरीश अब पूरी तरह से यैयार हो चुका है मुझे यौनानन्द के सागर में गोते लगवाने के लिए, मैं भी अपनी कमर को उसके साथ हिला कर उसका साथ देने लगी। अब हरीश ने एक हाथ मेरी योनि में ले गया और सहलाने लगा। मुझे गुदगुदी सी होने लगी।. तभी हरीश ने कहा- तुम्हारी योनि कितनी गीली हो चुकी है और यह कितनी मुलायम है..! अपनी तारीफ़ किसे नहीं अच्छी नहीं लगती..! मैं भी खुश हुई।. कुछ देर सहलाने के बाद उसने कहा- मैं तुम्हारी योनि के रस को चखना चाहता हूँ !. और वो मेरी योनि के पास झुकता चला गया। मेरी कुछ समझ में आता, उससे पहले ही उसने मेरी योनि को चूसना शुरू कर दिया।
स्रोत:इंटरनेट