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Computer Teacher Ne Feeta Kata Hot Sex Story 2

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आनेवाला व्यक्ति प्यून था.
सर, बड़े साहब ने कहा हैं की सेंटर पर आज छुट्टी रख देंगे.
अविनाश सर बोले, ठीक हैं बाबू, सर को बोलो बारिस रुक लेने दो जरा फिर हम निकलेंगे.
सर, बड़े साहब तो कह के निकल गए हैं.
और साथ में दुसरे टीचर लोग भी निकल गए हैं.
मुझे ही सेंटर को लोक करना हैं.
यह सुनते ही सर की आँखे चमक उठी.
वो बोले, एक काम करो बाबू, चाबी मुझे दे दो.
मैं लोक कर दूंगा.
वैसे भी मैं सुबह में सब से पहले आता हूँ.
बाबू हमारी और देखने लगा.
सर उसके कंधे पर हाथ रख के उसे बहार ले गए.
शायद उसे खर्चा पानी दे के सर ने भगा दिया वहां से.
1 मिनिट में सर अंदर आये और बोले, अब किसी के आने का कोई डर नहीं हैं.
अब सेंटर में हम दोनों ही हैं.
मेरा दील अपनी एक धडकन भूल गया.
मैं समझ नहीं पा रही थी की यह मेरे लिए सही था या गलत.
सर वापस मेरी और आयें और उन्होंने फिर से मेरे होंठो को अपने कब्जे में ले लिया.
मेरी निपल्स अकड़ने लगी थी अब तो.
सर का हाथ वापस मेरी जांघ पर आया, मुझे पुरे बदन में गर्मी चढने लगी थी.
सर ने जैसे ही जांघ के बिच में हाथ डाला मैं तो जैसे उछल ही पड़ी.
सर मेरी योनी यानी की चूत को सहला रहे थे मेरी जींस के ऊपर से ही.
मैं उत्तेजित हो गई थी और मेरे होंठ पर भी गर्मी होने लगी थी.
मेरे होंठ कांपने लगे थे अब.
सर ने मेरी और देखा और बोले, शीतल, क्या तुम अभी तक वर्जिन हों? मैंने हाँ में सर हलाया.
सर को तो जैसे बड़ी लोटरी लगी हो.
वो मुझे गले से लगा के मेरे गाल और होंठो को जोर जोर से चूमने लगे.
शीतल आज का दिन तुम अपनी जिन्दगी में हमेंशा याद रखोगी.
सर के स्पर्श से अब मैं भी हॉट हो चुकी थी.
सर ने अब धीरे से मेरी टी-शर्ट को ऊपर किया और मेरी मदद से उसे उतार फेंकी.
उन्होंने मुझे बेंच पर खड़ा किया और मेरी जींस की बटन भी खोल दी.
मेरी जींस उतारते ही मुझे बहुत शर्म महसूस होने लगी.
मैंने अपने दोनों हाथों से अपने मुहं को ढंक दिया.
सर ने हंस के कहा, शीतल शरमाओ मत कभी ना कभी तो इसे उतरना ही था…! और फिर उनके हाथ पेंटी के ऊपर घुमने लगे.
जहाँ पर योनी का छेद होता हैं वहां पर वो सहलाने लगे.
पता नहीं कैसे लेकिन मेरी चूत से पेशाब आने लगा था, मैं वो 8-10 बूंदों को अपनी पेंटी के ऊपर देख रही थी.
सर ने अब धीरे से पेंटी की पट्टी को पकड़ा और उसे निचे खिंचा.
मेरी चूत के बालों के बिच में मेरी चूत को देख के वो हंस पड़े.
शीतल तुम बहोत हॉट और सेक्सी हो.
आई लव यू…..इतना कह के उनके होंठ मेरी चूत पर आ गए.
वो मेरी चूत  को कुत्ते की तरह जीभ निकाल के चाटने लगे.
मुझे तो जैसे हाई फीवर हो गया था.
मेरे बदन के एक एक भाग में जैसे आग लगा दी गई थी.
सर ने अपनी जीभ जब चूत के छेद में डाली तब तो मैं उड़ने लगी थी जैसे.
सर के हाथ मेरी गांड को सहला रहे थे और वो जबान से मेरी चूत के एक एक हिस्से को चाट रहे थे.
वो चूत के छेद में कभी अपनी जबान डालते थे और कभी उपर के बालों को अपने मुहं में ले के उन्हें खींचते थे.
मुझे यह सब क्रियाओं से इतना मजा आ रहा था की जिसकी कोई हद ही नहीं हैं.
मैं उड़ने लगी थी बिना पंखो के ही.
सर मेरी चूत को 2-3 मिनिट और ऐसे ही चूसते रहे और फिर उन्होंने खड़े होक मुझे निचे बेंच पर बिठा दिया.
सर ने अब अपनी पेंट को खोला और शर्ट भी निकाल दिया.
वो मेरे सामने बनियान और चड्डी में थे.
फिर उन्होंने धीरे से अपनी चड्डी निकाली.
बाप रे सर का लंड कितना काला था! क्यूंकि वो सांवले थे इसलिए उनका लंड कोयले की माफिक काला था.
वो खड़ा था और उसका सुपाडा खुल चूका था.
मैंने देखा की लंड के ऊपर की चमड़ी निचे आ चुकी थी.
सर ने मुझे बेंच पर ही टाँगे खोलने के लिए कहा.
शीतल अपनी एक टांग को इधर की बेंच पर दूसरी को उधर की बेंच पर रख दो.
मेरे ऐसा करने की वेट किये बिना ही वो खुद मेरी टांगो को सेट करने लगे.
अब मेरी चूत खुली थी उनके सामने.
सर ने अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ा और उसे मेरी चूत के ऊपर घिसने लगे.
उनका लंड बहुत ही गर्म था.
मुझे बहुत ही मजा आ रहा था उनके लंड को घिसने से.
सर ने फिर मेरे होंठो को अपने होंठो से लगाया और निचे एक हल्का झटका दिया….
! उईईइ माँ मर गई रेईईईईईईस्सस्सस….
सररररररर….
बहुत दर्द हो रह्हाआआआअ हैं…मेरी चीख निकल पड़ी, होंठो को होंठो से हटाने के चक्कर में मुझे हलकी खरोंच भी आ गई.
सर ने मुझे कंधे से पकड़ा और बोले, शीतल एक मिनिट में ही दर्द मजे में बदल जायेंगा, आराम से करूँगा कोई दर्द नहीं होंगा डार्लिंग.
सर अब धीरे धीरे अपने लंड को चूत में आगे पीछे करने लगे.
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की चूत में लोहें की जलती सलाख को पेल दिया गया था.
सर अभी भी धीरे धीरे लंड को अंदर से बहार और फिर बहार से धीरे से अंदर कर रहे थे.
और जैसा उन्होंने कहा था मुझे कुछ देर में मजा भी आने लगा.
सर ने मेरी और देखा, मैंने अपनेदांतों के तले होंठो को दबाया हुआ था.
शीतल, अब कैसा हैं दर्द.
मैंने सर को थोडा हलाया और दर्द कम होने का जवाब दिया.
और दुसरे ही पल सर लंड को अब पूरा चूत में डाल के निकालने लगे.
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे लंड को मेरे पेट के साथ टकराया जा रहा हों.
सर अपने पेट को आगे पीछे कर रहे थे और मेरी चूत के अंदर लंड को धकेल रहे थे.
मुझे अब मजा आने लगा था.
मैं अपने हाथ को पीछे कर के बेंच पर रख दिया.
सर अब मेरी चूत को ठोक रहे थे जोर जोर से और मुझे बड़ा मजा आने लगा था.
मैं आह आह करते हुए अपनी चूत की चुदाई कर रहे मेरे सांवले सर को देख रही थी.
अविनाश सर के मुहं से भी आह आह निकल रही थी क्यूंकि शायद मेरी चूत बड़ी टाईट थी.
सर पांच मिनिट तक मुझे चोदते रहे और फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और बोले, शीतल बेंच के ऊपर उलटी बैठ जाओ ना.
मैं डर गई की सर कही गांड ना मारे मेरी.
लेकिन मैं उलटी हुई और अपनी गांड को ऊपर उठाया.
सर ने अपने हाथ में थोडा थूंक ले के मेरी चूत पर मला और फिर अपने लंड को सेट करने लगे.
लंड सेट होते ही मैंने मुंडी हिलाई.
और सर ने एक करारे प्रहार से चूत को भर दिया.
उस वक्त मुझे जो संतोष मिला वो दुनिया में किसी और चीज से नहीं मिल सकता था.
सर की गति फिर से बढ़ी और वो मुझे जोर जोर से चोदते रहे.
उनके हाथ मेरी कोमल गांड को सहला रहे थे और उनका लंड मेरी चूत खरोद रहा था.
इस अवस्था में तो उनका लंड चूत की गहराई तक घुस रहा था और मेरा मजा जैसे दुगुना हो गया था.
सर मेरी चूत को ऐसे ही रगड़ते रहे और फिर उनके मुहं से एक जोर की आह निकली.

स्रोत:इंटरनेट