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Dadi Ki Kahani Anal Sex Story 2

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और में ऊपर मान्जिके पास चला गया..मुस्कुराते मांजी ने कहा तेरा काम कर दिया..केसा लगा। मजा आया न। हाँ मांजी मेरा सपना पूरा हो गया। इतनेमे पिंकू का फोन आया। में बाते करने लगा। पिंकू मुझे मिलने के किए बुला रहा था। कुछ बाते हुई..माँ चाय लेकर आई..सबसे पहले कप मांजी को दिया। मांजी ने कहा झह्र्र तो नहीं डाला हे..?? चाय में..माँ ने कहा लाइए मांजी वो कप में पीलेती हूँ..आप इन दोनों मेसे कोई भी ले ले..सच में दादी ने कप बदल लिया। चाय पीने लगे..चाय खतम कर के मांजी ने कहा बहु मेरे पेरो में दर्द हो रहा हे दबा दे। माँ दादी के पैर दबाने लगी..में पास में खड़ा था..तू क्या देख रहा हे। ?चल पैर दबा.
में भी पैर दबाने लगा..मांजी हाँ..तो बहु ये चुदाई वाली गलती पहली बार केसे हुई.. माँ- मांजी मे किचन में गिर गई थी। और मेरे पैर में दर्द हो रहा था..तो इसे मेने पैर दबाने को कहा..ये ऐसे ही पैर दबा रहा था। में सो गई..तो,ये ऐसे ही दबाते हुए मेरी जांगो तक आ गया..केसे..??.
माँ ने मुझे आँख मारी कहा बेटे केसे किया था मांजी को बता..में ने मांजी की साडी को उपर उठाया..और जांगो को दबाते बोला..ऐसे..ठीक हे आगे फिर इसने..साडी को थोडा और उपर उठाया..और दोनों पेरों के बीच बेठ गया.. मैं -ऐसे..और पेरों के बीच बेठ गया। .
फिर। ?फिर इसने और साडी उपरकी मेरी चूत को देखने लगा। तो मेने सोचा बच्चा हे जी थोड़ी मस्ती कर लेने दू..तो इसने अपना लंड निकाला और मेरी चूत पर रगड़ ने लगा..में भी रगड़ने लगा..अब मांजी गरम हो रही थी..मांजी ऐसे ही ये मेरी चूत पर रगड़ रहा था..और मेरी चूत से भी ऐसे पानी निकलने लगा था। सस्स..मांजी के मुह से सिसकी निकल गई। हाँ मांजी में भी ऐसे ही गरम हो गई। तो इसने लंड को आधा अंदर डाल दिया। आह..मांजी आहें भरने लगी..बिलकुल ऐसे ही वो लंड को अंदर बाहर कर रहा था। मांजी आह्ह..आ। ये मादरचोद मुझे भी चोद देगा। रुक जा साले भड़वे। माँ ने मुझे आँखे दिखाई नहीं, रुकना मत ..मेने कहा मांजी अभी तो आधा ही गया हे पूरा डालूँगा तो बहुत मजा आयेगा। ओर में चोदने लगा। मांजी रुक जा,साले मादरचोद तेरी दादी लगती हूँ..में ..ये तेरी माका भोसड़ा नहीं हे। दर्द हो रहाहे..निकाल साले.. मैं -आराम से मांजी मजा लेती रहो। माँ मांजी के बुब्ब्स को थोडा दबा दे ..माँ लाइए मांजी में आपके दूध को सह्लादेती हूँ..और माँ मांजी के बुब्ब्स को दबा ने लगी..मांजी की साँसे तेज हो गई थी.. मांजी -अरे छोड़ माँ की लोड़ी.. माँ-नहीं मांजी आज को आपको चुदाना ही पडेगा..चोद मेरे लाल माकी चूत समज कर बजादे..मान्जिको भी मजा आरहा हे..में जोर जोर से चोद ने लग। मांजी आ..आह्ह.
आह्ह..ओ.
ओ..ऊ.
ऊ..ऊ.. करने लगी..माँ ने भी मांजी का ब्लाउज खोल दिया और बुब्ब्स को चूसने और दबाने लगी..मांजी। आह्ह..चूस ले बहु। आह्ह। ओ..मजा आ रहा हे..ऊ। ऊ..चोद साले माके लोडे ..आह..ओ..कितना बड़ा हे। गधे का हे क्या। ओ..ओ..आह्ह..आह। और मांजी का खेल ख़त्म होगया..मेरा भी गिर गया..पच-पच की आवाज आने लगी। मांजी बस। बसकर..बस..में रुक गया। मांजी -अरे ये क्या किया तुम दोनों ने। में किसीको मुंह दिखाने लायक नहीं रही..माँ ने मान्जिको पानी दिया कह मांजी आप को मजा तो आया न। मांजी हाँ,बहु लेकिन मन-लेकिन-वेकिन.. कुछ नहीं बस मजा आया..तो मजा लेती.. रहना में और मयंक किसीको नहीं बताएँगे.. मांजी हंस कर बोली। साली एकदम रांड लगती हे..बाते भी रंडी जेसी करती हे। माँ- जब चमड़े की भठ्ठी में आग लगती हे तो उसके जुगाड़ के लिए कुछ नकुछ करना ही पड्ताहे..क्या आप को ऐसे बड़े लंड जरुरत नहीं थी..मांजी ने विस्फोट किया..– हाँ मेरी बच्ची लकिन तुजे मालुम नहीं हे। में इस लोडे से तुजसे ज्यादा चुद चुकी हूँ। माँ, बस हम दोनों को देखती रही..में और मांजी हंस रहे थे। माँ ने मेरा कान पकड़ा, तो फिर मुझे इतना टेंशन क्यों दिया..मेने कहा..माँ,आपकी गांड जो मारनी थी.. मांजी -हाँ बेटे अगर हमने ऐसा नहीं किया होता तो क्या तू गांड देती इसे.. माँ-कभी नहीं देती.. मैं -तो आपको केसा लगा..मतलब गांड मरवाने में मजा आया की नहीं.. माँ-बहुत मजा आया बेटे.. मैं – तो हो जाये.
एकबार फिर से.. मांजी -हाँ बहु अभी एकबार मरवा ले.
तो दुबारा कभी दर्द नहीं होगा.. माँ-खुजली तो हो रही हे..पर आप के गुस्से की वजह से बोल नहीं पाई थी। मांजी -तो आजा। चल मुन्ना माररदे माकी गांड। में –लोडा तैयार करने लगा..मांजी ने खा बहु थोडा चूस दे खड़ा हो जाएगा..माँ चूसने लगी..तो जल्दी खड़ा होगया। और दुबारा प्यार से माँ की मारने लगा। मांजी..गाइड कर रही थी। माँ मजा कर रहीथी।. तीन दिनों बाद गाँव से मामा का फोन आया।  में कल आ रहा हु..मामा??? नाम- बिरेनकुमार..उमर..26 बोड़ी फ़िगर सलमान खान जैसा,आँखें बड़ी-बड़ी..पतले होठ..लम्बा चहेरा। घठिला बदन,मजबूत हाथ.. बड़े-बड़े डोले..कंधो पर बिच्छु का टेटू । ..चौड़ा सीना,बिलकुल क्लीन एक भी बाल नहीं। इतने सुंदर होने बावजूद शादी नहीं हुईथी।  चोंक गये?? क्यों..क्योकि मामा जी पैर से बिलकूल अपाहिज थे..जी बिलकुल ठीक समजें..आपने ऐसे लोगों को अकसर बस स्टॉप,रेलवे या मंदिर के पास देखें होगे..जो अपने पैरों प् नहीं चल सकते..हाथमें चप्पल पहनकर बोड़ी को घसीटते हुए चलते हे..इन्ही वजह से मामा को बचपन में लोग बिच्छु कहकर चिढाते थे..लेकिन अब उन्हें बुरा नहीं लगता हम ख़ुशी से उन्हें बिच्छुमामा कहकर बुलाते हे..मेरे बिच्छुमामा बेचारे,लाचार या भिखमंगे नहीं हे..मेरे नानाजी के दो बेटे हे उनमें बिच्छुमामा सबसे छोटे हे बड़े मामा नोकरी करते हे..तो नानाजी ने अपनी सारी केश,करीब २०, लाख रुपया बिच्छुमामा को दे दिया था.. बिच्छुमामा उसी पेसो को घह्नों की अवेज में रेट पर घुमाते थे..और अब तक तो करीब ३५ लाख रूपये बना लिए थे..गाँव की छोटी सी दुकान पर बैठते थे..थोडा बहुत घह्नों का धंधा हो जाता..तो वो हमारी दूकान से खरीदते और दो-तिन महीनो बाद हिसाब देने आ जाते। जब वो आते तो दो-तीन दिन ठहरते माँ उनकी बहुत देखभाल करती..खाने में हंमेशा स्वीट बनाती..रिक्शा करके बिच्छुमामा को शहरमें घुमाँ ने ले जाती..माँ हंमेशा बिच्छुमामा के प्रति इमोशनल रहती..नए कपडे जो ख़ास कर टी-शर्ट और हाफ पेंट खरीद कर ला देती। माँ बिच्छुमामा को हंमेशा छोटे बच्चे कीतरह प्यार करती। दुसरे दिन बिच्छुमामा आ गये थे..माँ ने उनको बड़े प्यार से बुलाया..वो हर वक्त की तरह मेरे कमरे में ही ठहरे..दूकान गये दादाजी के साथ हिसाब पूरा किया..घर आये..शाम को खाना खाया सो गये। सुबह दादा-दादी को रिश्तेदार के यहाँ जाना था तो निकल गये पापा दूकान चले गये। माँ ने मुझे कहा देख तो तेरा मामा क्या करता हे? मेंरुममे गया तो मामा बाथरूम गये थे। में वापस आया।  मेने माँ को बताया। माँ का गाउन उठा के. चुत्तड़ो को सहला रहा था। तभी पापा का फोन आया चाबी भूल गये थे तो मुझे बुलाया था..में निकल गया ..दूकान पर पापा से चाबियाँ दी..मेने रुकने केलिए कहा तो पापा ने कहा तू घर जा तेरा मामा अकेला-अकेला बोर हो जाएगा।  जब में घर पर आया,तो दरवाजा खुला हा में सीधा अंदर चला गया..माँ किचन में नहीं थी..उनकी आवाज आई..तू कब से, क्या कर रहा हे। ? अभी तैयार नहीं हुआ। ? माँ- मामा से बोल रही थी, मेने कमरे में झाँक करदेखा.
मामा ने बनियान और हाफपेंट पहना हुआ था..त-शर्ट बेड पर पड़ा था मामा बेड पर बेठे थे.
मामा ने कहा दीदी ये जिप बंध नहीं हो रही.. माँ- ला,में बंध कर देती हूँ। मामा -नहीं दीदी में कर लूँगा..माँ ने झट से जिप को पकड़ा और बंद करने की कोशिश करने लगी.
मामा का बिच्छु डंख मारने को तैयार हो रहा था..मामा चड्डी नहीं पहनते थे.
तो माँ का हाथ सीधा लंड को टच कर गया..लंड शायद सोया हुआ था,माँ ने उसे छेड़ दिया था.
तो अपनी सिलवटे खोल ने लगा..जिप ठीक करते –करते दो-तीन बार माँ का हाथ लंड को लग गया..वो पूरा तन गया। माँ ने जिप छोड़ लंड पर ध्यान दिया..मामा शरमा रहे थे..माँ ने मुस्कुराते लंड पकड़ते हुए, कहा इसे जरा बाहर निकाल दे.. मामा ने हँसते हुए कहा दीदी आप ही निकाल दीजिए न। यहाँ तक सब नोर्मल था..लेकिन जेसे माँ ने लंड को पकड़कर बाहर निकाला माँ की आँखों में वासना चमकने लगी..मेने देखा बिच्छुमामा का लंड बहुत बड़ा था..मेरा लंड ८ इंच का हे। उनका शायद ११ इंच का था..माँ की आँखे चौड़ी हो गई।
स्रोत:इंटरनेट